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आज चंद्रग्रहण: सूतक में करें मंत्र-जप और दान-पुण्य, होली मनाने की तारीख बदली
धर्म डेस्क
दोपहर 3.21 बजे से शुरू, शाम 6.47 बजे तक रहेगा चंद्रग्रहण
भारत में आज (3 मार्च) फाल्गुन पूर्णिमा के दिन चंद्रग्रहण दिखाई देगा। यह ग्रहण दोपहर 3.21 बजे शुरू होकर शाम 6.47 बजे समाप्त होगा। ग्रहण और उसके 9 घंटे पहले से लगने वाले सूतक के समय में रंग-गुलाल खेलना, पूजा-पाठ करना, विवाह, गृह प्रवेश या जनेऊ संस्कार जैसी मांगलिक गतिविधियां वर्जित मानी जाती हैं।
ग्रहण के दौरान धार्मिक मान्यताओं के अनुसार दान-पुण्य और मंत्र जप करना शुभ होता है। इस अवसर पर जरूरतमंदों को अनाज, कपड़े, जूते-चप्पल, खाना या धन दान करने की सलाह दी जाती है। भक्त गायों को हरी घास खिलाने, गोशालाओं में धन दान करने और नदी-तालाब में मछलियों को आटे की गोलियां खिलाने का कार्य कर सकते हैं। सूतक सुबह 6.21 बजे से शुरू हुआ और शाम 6.47 बजे ग्रहण समाप्त होते ही खत्म होगा।
इस बार चंद्रग्रहण होने की वजह से कई क्षेत्रों में होली उत्सव स्थगित कर दिया गया है। ज्यादातर पंडितों ने 4 मार्च को ही धुलंडी मनाने की सलाह दी है। विशेषज्ञ बताते हैं कि ग्रहण खत्म होने के बाद घरों और मंदिरों में शुद्धिकरण किया जाता है। इसमें पहले स्वयं स्नान कर देवी-देवताओं को स्नान कराते हैं और फिर विधिवत पूजा की जाती है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार राहु-केतु की कथा ग्रहण के पीछे का आध्यात्मिक आधार है। पुराणों में बताया गया है कि समुद्र मंथन के समय राहु नामक असुर देवताओं के बीच बैठकर अमृत पान कर गया। चंद्र और सूर्य ने इसका भेद भगवान विष्णु को बताया, जिससे विष्णु ने राहु का सिर धड़ से अलग कर दिया। इस कारण राहु चंद्र और सूर्य को अपना शत्रु मानता है और समय-समय पर इन्हें ग्रसता है। यही घटना सूर्य और चंद्र ग्रहण के रूप में सामने आती है।
वैज्ञानिक दृष्टि से चंद्रग्रहण तब होता है जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा लगभग एक सीधी रेखा में आ जाते हैं। पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है और इसे खगोलीय चंद्रग्रहण कहा जाता है। यह घटना प्राकृतिक और नियमित रूप से होती रहती है और इसके दौरान आकाश में चंद्रमा का भागकालिक अंधकार देखा जा सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ग्रहण का सूतक समय धार्मिक और सामाजिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। इस समय में धार्मिक कार्यों के बजाय दान-पुण्य करना और मंत्र-जप करना लाभकारी है। जनता से अपील की गई है कि ग्रहण के समय सावधानी बरतें और धार्मिक मान्यताओं का पालन करें।
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