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अक्षय तृतीया 2026: तारीख को लेकर भ्रम खत्म, जानिए सही तिथि और शुभ संयोग
धर्म डेस्क
इस बार विशेष नक्षत्र और योग बना रहे हैं पर्व को और भी शुभ, बिना मुहूर्त देखे किए जा सकेंगे सभी मांगलिक कार्य
अप्रैल महीने के साथ ही धार्मिक और आध्यात्मिक उत्साह का माहौल शुरू हो जाता है। इसी क्रम में अक्षय तृतीया का पर्व विशेष महत्व रखता है, जिसे सनातन परंपरा में अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन किए गए कार्यों का फल अक्षय यानी कभी समाप्त न होने वाला माना जाता है।
इस वर्ष अक्षय तृतीया की तिथि को लेकर लोगों में कुछ भ्रम की स्थिति बनी हुई थी, लेकिन पंचांग गणना के अनुसार यह स्पष्ट हो गया है कि यह पर्व 20 अप्रैल 2026 को मनाया जाएगा। हालांकि तृतीया तिथि 19 अप्रैल को प्रारंभ हो जाती है, लेकिन उदया तिथि 20 अप्रैल को होने के कारण पर्व उसी दिन मनाना अधिक मान्य माना गया है।
इस दिन को ‘अबूझ मुहूर्त’ कहा जाता है, यानी ऐसा शुभ दिन जब किसी भी मांगलिक कार्य के लिए अलग से मुहूर्त देखने की आवश्यकता नहीं होती। विवाह, गृह प्रवेश, नए व्यवसाय की शुरुआत, खरीदारी और दान-पुण्य जैसे कार्य इस दिन विशेष फलदायी माने जाते हैं।
पूजा-पाठ के लिए सुबह 5 बजे से लेकर दोपहर 12:20 बजे तक का समय अत्यंत शुभ माना गया है। इस दौरान विधिपूर्वक पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
इस बार अक्षय तृतीया का महत्व इसलिए भी बढ़ गया है क्योंकि इस दिन कई शुभ योग बन रहे हैं। रोहिणी नक्षत्र के साथ-साथ सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग का संयोग इस दिन को और अधिक फलदायी बना रहा है। ऐसे में इस दिन किए गए कार्यों में सफलता और स्थिरता की संभावना अधिक मानी जाती है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन सोना-चांदी या अन्य मूल्यवान वस्तुओं की खरीदारी भी शुभ मानी जाती है, जो भविष्य में समृद्धि और स्थायित्व का प्रतीक होती है।
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अक्षय तृतीया 2026: तारीख को लेकर भ्रम खत्म, जानिए सही तिथि और शुभ संयोग
धर्म डेस्क
अप्रैल महीने के साथ ही धार्मिक और आध्यात्मिक उत्साह का माहौल शुरू हो जाता है। इसी क्रम में अक्षय तृतीया का पर्व विशेष महत्व रखता है, जिसे सनातन परंपरा में अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन किए गए कार्यों का फल अक्षय यानी कभी समाप्त न होने वाला माना जाता है।
इस वर्ष अक्षय तृतीया की तिथि को लेकर लोगों में कुछ भ्रम की स्थिति बनी हुई थी, लेकिन पंचांग गणना के अनुसार यह स्पष्ट हो गया है कि यह पर्व 20 अप्रैल 2026 को मनाया जाएगा। हालांकि तृतीया तिथि 19 अप्रैल को प्रारंभ हो जाती है, लेकिन उदया तिथि 20 अप्रैल को होने के कारण पर्व उसी दिन मनाना अधिक मान्य माना गया है।
इस दिन को ‘अबूझ मुहूर्त’ कहा जाता है, यानी ऐसा शुभ दिन जब किसी भी मांगलिक कार्य के लिए अलग से मुहूर्त देखने की आवश्यकता नहीं होती। विवाह, गृह प्रवेश, नए व्यवसाय की शुरुआत, खरीदारी और दान-पुण्य जैसे कार्य इस दिन विशेष फलदायी माने जाते हैं।
पूजा-पाठ के लिए सुबह 5 बजे से लेकर दोपहर 12:20 बजे तक का समय अत्यंत शुभ माना गया है। इस दौरान विधिपूर्वक पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
इस बार अक्षय तृतीया का महत्व इसलिए भी बढ़ गया है क्योंकि इस दिन कई शुभ योग बन रहे हैं। रोहिणी नक्षत्र के साथ-साथ सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग का संयोग इस दिन को और अधिक फलदायी बना रहा है। ऐसे में इस दिन किए गए कार्यों में सफलता और स्थिरता की संभावना अधिक मानी जाती है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन सोना-चांदी या अन्य मूल्यवान वस्तुओं की खरीदारी भी शुभ मानी जाती है, जो भविष्य में समृद्धि और स्थायित्व का प्रतीक होती है।
