शादी के लिए कुंडली मिलान — हर भारतीय जोड़े को जाननी चाहिए ये जरूरी बातें

Dharm, Desk

भारत में शादी सिर्फ दो लोगों का मिलन नहीं है। यह दो परिवारों, दो जीवनों और दो भाग्यों का संगम है। इसीलिए हमारे पुरखों ने एक खास पद्धति बनाई — कुंडली मिलान। आज के जमाने में कुछ लोग इसे पुरानी बात मानते हैं। लेकिन जो लोग इसे गहराई से समझते हैं, वे जानते हैं कि यह विज्ञान कितना सटीक और जरूरी है। इस लेख में हम आपको बताएंगे — कुंडली मिलान क्या होता है, यह क्यों जरूरी है, इसमें क्या देखा जाता है, और किन बातों को नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है।

कुंडली मिलान क्या होता है?

कुंडली मिलान वैदिक ज्योतिष की एक प्राचीन पद्धति है।

इसमें वर और वधू की जन्म कुंडली का तुलनात्मक अध्ययन किया जाता है। इसे गुण मिलान या अष्टकूट मिलान भी कहते हैं।

इस पद्धति में कुल 36 गुण होते हैं। इन्हें 8 कूटों में बांटा गया है। हर कूट जीवन के एक अलग पहलू को दर्शाता है — जैसे स्वभाव, स्वास्थ्य, संतान, यौन अनुकूलता और आयु।

जितने ज्यादा गुण मिलते हैं, उतना बेहतर माना जाता है।

18 से कम गुण — विवाह की सलाह नहीं दी जाती

18 से 24 गुण — सामान्य मिलान, विचार किया जा सकता है

24 से 32 गुण — अच्छा मिलान, शुभ माना जाता है

32 से 36 गुण — उत्तम मिलान, बेहद शुभ

लेकिन सिर्फ गुण गिनना काफी नहीं है।

असली जानकार ज्योतिषी कुंडली के अन्य पहलुओं को भी देखते हैं — जिनकी चर्चा हम आगे करेंगे।

 

अष्टकूट के 8 कूट — क्या देखा जाता है?

कूट

विषय

अधिकतम गुण

वर्ण

स्वभाव और आत्मिक अनुकूलता

1

वश्य

आकर्षण और नियंत्रण

2

तारा

भाग्य और दीर्घायु

3

योनि

यौन अनुकूलता

4

ग्रह मैत्री

मानसिक अनुकूलता और मित्रता

5

गण

स्वभाव और व्यवहार

6

भकूट

प्रेम, समृद्धि और स्वास्थ्य

7

नाड़ी

संतान और स्वास्थ्य

8

इनमें से नाड़ी और भकूट सबसे महत्वपूर्ण माने जाते हैं। यदि नाड़ी दोष हो, तो संतान में समस्या या वैवाहिक जीवन में गंभीर कठिनाइयां आ सकती हैं।

नाड़ी दोष — सबसे गंभीर दोष

नाड़ी दोष तब होता है जब वर और वधू दोनों की नाड़ी एक ही हो। तीन नाड़ियां होती हैं — आदि, मध्य और अंत्य। यदि दोनों की नाड़ी एक ही है, तो यह दोष माना जाता है। इससे स्वास्थ्य समस्याएं, संतान में कठिनाई और वैवाहिक जीवन में अशांति हो सकती है। हालांकि, कुछ विशेष स्थितियों में नाड़ी दोष का परिहार भी होता है। इसीलिए किसी अनुभवी ज्योतिषी से जांच जरूरी है। शादी से पहले यदि कोई दोष दिखे, तो घबराएं नहीं। अनुभवी ज्योतिषी उचित उपाय भी सुझाते हैं। अधिक जानकारी के लिए आप दोष समाधान परामर्श ले सकते हैं।

 

मंगल दोष — विवाह में बाधा का प्रमुख कारण

मंगल दोष, जिसे मांगलिक दोष भी कहते हैं, वैवाहिक जीवन को प्रभावित करने वाला एक और महत्वपूर्ण दोष है।

जब किसी की कुंडली में मंगल 1, 4, 7, 8 या 12वें भाव में हो, तो मंगल दोष माना जाता है।

इसके प्रभाव से विवाह में देरी, वैवाहिक कलह या जीवनसाथी को कष्ट हो सकता है।

लेकिन यह भी जरूरी है — यदि दोनों पक्षों की कुंडली में मंगल दोष हो, तो वे एक-दूसरे के लिए उपयुक्त होते हैं। इसे दोष निवारण कहते हैं।

इसीलिए सिर्फ एक पक्ष की कुंडली देखना पर्याप्त नहीं है। दोनों की कुंडलियां एक साथ देखनी जरूरी हैं।

 

सिर्फ गुण मिलाना काफी नहीं — यह भी देखें

एक अनुभवी ज्योतिषी सिर्फ 36 गुण नहीं देखता। वह इन बातों पर भी ध्यान देता है:

1. सप्तम भाव और उसका स्वामी यह भाव विवाह और जीवनसाथी का भाव होता है। यदि यह पीड़ित हो, तो वैवाहिक जीवन में कठिनाई आ सकती है।

2. शुक्र और मंगल की स्थिति पुरुष की कुंडली में शुक्र और स्त्री की कुंडली में मंगल जीवनसाथी का प्रतिनिधित्व करते हैं।

3. दशा और अंतर्दशा जब आप शादी करें, उस समय कौन सी दशा चल रही है — यह बहुत महत्वपूर्ण है। अनुकूल दशा हो, तभी विवाह शुभ रहता है।

4. लग्न की बलवत्ता लग्न कमजोर हो, तो जीवन में स्थिरता की कमी रहती है।

5. संतान भाव (पंचम भाव) यदि परिवार में बच्चे की इच्छा हो, तो पंचम भाव की जांच जरूर करनी चाहिए।

 

प्रेम विवाह में भी कुंडली मिलान जरूरी है?

बिल्कुल। बहुत से लोग सोचते हैं कि प्रेम विवाह में कुंडली की जरूरत नहीं। यह गलत सोच है। प्यार में दो लोग भावनात्मक रूप से जुड़ते हैं। लेकिन विवाह एक दीर्घकालिक संबंध है। इसमें स्वभाव की अनुकूलता, आर्थिक स्थिरता, स्वास्थ्य और संतान — सभी का महत्व है। कुंडली मिलान इन सभी पहलुओं पर प्रकाश डालता है। यदि आपका प्रेम विवाह है और परिवार का विरोध हो रहा है, तो भी एक बार लव मैरिज प्रॉब्लम सॉल्यूशन की सलाह लें। इससे रास्ता निकालने में मदद मिलती है।

कुंडली मिलान कैसे करवाएं?

कुंडली मिलान के लिए दोनों पक्षों की जन्म तिथि, जन्म समय और जन्म स्थान जरूरी होता है।

इसके बाद एक अनुभवी ज्योतिषी:

· अष्टकूट मिलान करता है· 

· सभी दोषों की जांच करता है

· दशा और ग्रह स्थिति देखता है

· उचित उपाय सुझाता है

· शादी का शुभ मुहूर्त निकालता है

आज के डिजिटल युग में आप घर बैठे भी यह करवा सकते हैं। ज्योतिषाचार्य अनिल भार्गव के साथ फ्री कुंडली मिलान की शुरुआत करें। यह बिल्कुल निःशुल्क है और कुछ ही मिनटों में आपको अपने रिश्ते की पहली झलक मिल जाएगी।

कुंडली मिलान में क्या नजरअंदाज न करें?

कुछ बातें हैं जो अक्सर लोग नजरअंदाज कर देते हैं — और बाद में पछताते हैं। जल्दबाजी न करें। सगाई की तारीख तय होने के बाद कुंडली मिलवाना सही नहीं है। पहले मिलान करें, फिर आगे बढ़ें। सिर्फ ऑनलाइन टूल पर न रुकें। ऑनलाइन कुंडली मिलान टूल केवल गुण गिनते हैं। वे दोष, दशा और लग्न नहीं देखते। इसीलिए किसी जानकार ज्योतिषी से विस्तृत परामर्श जरूरी है। दोनों कुंडलियां एक साथ दिखाएं। सिर्फ एक पक्ष की कुंडली से पूरा चित्र नहीं मिलता। झूठे आश्वासन से बचें। कोई भी ज्योतिषी जो बिना कुंडली देखे 100% गारंटी दे — उससे सावधान रहें।

 

सही शुरुआत, सुखी जीवन

विवाह जीवन का सबसे बड़ा निर्णय है। कुंडली मिलान इस निर्णय को सही दिशा देता है। यह भय के लिए नहीं, बल्कि स्पष्टता और सुरक्षा के लिए किया जाता है। एक अनुभवी ज्योतिषी आपको सिर्फ दोष नहीं बताता। वह आपको दोष के उपाय भी देता है। वह आपको यह समझाता है कि दोनों कुंडलियां मिलकर एक सुखी जीवन बना सकती हैं या नहीं। सही जानकारी से सही निर्णय होता है। और सही निर्णय से सुखी जीवन।

लेखक परिचय

ज्योतिषाचार्य अनिल भार्गव — अहमदाबाद, गुजरात स्थित एक विश्वसनीय वैदिक ज्योतिषी हैं। उनके पास 15+ वर्षों का अनुभव और 8,788+ से अधिक परामर्श का ट्रैक रिकॉर्ड है। वे कुंडली विश्लेषण, विवाह ज्योतिष, करियर मार्गदर्शन, दोष निवारण और आध्यात्मिक परामर्श में विशेषज्ञ हैं।

 वेबसाइट: astrologeranil.com 

 संपर्क: +91 9979122201

 ईमेल: [email protected]

 

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21 Apr 2026 By दैनिक जागरण

शादी के लिए कुंडली मिलान — हर भारतीय जोड़े को जाननी चाहिए ये जरूरी बातें

Dharm, Desk

भारत में शादी सिर्फ दो लोगों का मिलन नहीं है। यह दो परिवारों, दो जीवनों और दो भाग्यों का संगम है। इसीलिए हमारे पुरखों ने एक खास पद्धति बनाई — कुंडली मिलान। आज के जमाने में कुछ लोग इसे पुरानी बात मानते हैं। लेकिन जो लोग इसे गहराई से समझते हैं, वे जानते हैं कि यह विज्ञान कितना सटीक और जरूरी है। इस लेख में हम आपको बताएंगे — कुंडली मिलान क्या होता है, यह क्यों जरूरी है, इसमें क्या देखा जाता है, और किन बातों को नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है।

कुंडली मिलान क्या होता है?

कुंडली मिलान वैदिक ज्योतिष की एक प्राचीन पद्धति है।

इसमें वर और वधू की जन्म कुंडली का तुलनात्मक अध्ययन किया जाता है। इसे गुण मिलान या अष्टकूट मिलान भी कहते हैं।

इस पद्धति में कुल 36 गुण होते हैं। इन्हें 8 कूटों में बांटा गया है। हर कूट जीवन के एक अलग पहलू को दर्शाता है — जैसे स्वभाव, स्वास्थ्य, संतान, यौन अनुकूलता और आयु।

जितने ज्यादा गुण मिलते हैं, उतना बेहतर माना जाता है।

18 से कम गुण — विवाह की सलाह नहीं दी जाती

18 से 24 गुण — सामान्य मिलान, विचार किया जा सकता है

24 से 32 गुण — अच्छा मिलान, शुभ माना जाता है

32 से 36 गुण — उत्तम मिलान, बेहद शुभ

लेकिन सिर्फ गुण गिनना काफी नहीं है।

असली जानकार ज्योतिषी कुंडली के अन्य पहलुओं को भी देखते हैं — जिनकी चर्चा हम आगे करेंगे।

 

अष्टकूट के 8 कूट — क्या देखा जाता है?

कूट

विषय

अधिकतम गुण

वर्ण

स्वभाव और आत्मिक अनुकूलता

1

वश्य

आकर्षण और नियंत्रण

2

तारा

भाग्य और दीर्घायु

3

योनि

यौन अनुकूलता

4

ग्रह मैत्री

मानसिक अनुकूलता और मित्रता

5

गण

स्वभाव और व्यवहार

6

भकूट

प्रेम, समृद्धि और स्वास्थ्य

7

नाड़ी

संतान और स्वास्थ्य

8

इनमें से नाड़ी और भकूट सबसे महत्वपूर्ण माने जाते हैं। यदि नाड़ी दोष हो, तो संतान में समस्या या वैवाहिक जीवन में गंभीर कठिनाइयां आ सकती हैं।

नाड़ी दोष — सबसे गंभीर दोष

नाड़ी दोष तब होता है जब वर और वधू दोनों की नाड़ी एक ही हो। तीन नाड़ियां होती हैं — आदि, मध्य और अंत्य। यदि दोनों की नाड़ी एक ही है, तो यह दोष माना जाता है। इससे स्वास्थ्य समस्याएं, संतान में कठिनाई और वैवाहिक जीवन में अशांति हो सकती है। हालांकि, कुछ विशेष स्थितियों में नाड़ी दोष का परिहार भी होता है। इसीलिए किसी अनुभवी ज्योतिषी से जांच जरूरी है। शादी से पहले यदि कोई दोष दिखे, तो घबराएं नहीं। अनुभवी ज्योतिषी उचित उपाय भी सुझाते हैं। अधिक जानकारी के लिए आप दोष समाधान परामर्श ले सकते हैं।

 

मंगल दोष — विवाह में बाधा का प्रमुख कारण

मंगल दोष, जिसे मांगलिक दोष भी कहते हैं, वैवाहिक जीवन को प्रभावित करने वाला एक और महत्वपूर्ण दोष है।

जब किसी की कुंडली में मंगल 1, 4, 7, 8 या 12वें भाव में हो, तो मंगल दोष माना जाता है।

इसके प्रभाव से विवाह में देरी, वैवाहिक कलह या जीवनसाथी को कष्ट हो सकता है।

लेकिन यह भी जरूरी है — यदि दोनों पक्षों की कुंडली में मंगल दोष हो, तो वे एक-दूसरे के लिए उपयुक्त होते हैं। इसे दोष निवारण कहते हैं।

इसीलिए सिर्फ एक पक्ष की कुंडली देखना पर्याप्त नहीं है। दोनों की कुंडलियां एक साथ देखनी जरूरी हैं।

 

सिर्फ गुण मिलाना काफी नहीं — यह भी देखें

एक अनुभवी ज्योतिषी सिर्फ 36 गुण नहीं देखता। वह इन बातों पर भी ध्यान देता है:

1. सप्तम भाव और उसका स्वामी यह भाव विवाह और जीवनसाथी का भाव होता है। यदि यह पीड़ित हो, तो वैवाहिक जीवन में कठिनाई आ सकती है।

2. शुक्र और मंगल की स्थिति पुरुष की कुंडली में शुक्र और स्त्री की कुंडली में मंगल जीवनसाथी का प्रतिनिधित्व करते हैं।

3. दशा और अंतर्दशा जब आप शादी करें, उस समय कौन सी दशा चल रही है — यह बहुत महत्वपूर्ण है। अनुकूल दशा हो, तभी विवाह शुभ रहता है।

4. लग्न की बलवत्ता लग्न कमजोर हो, तो जीवन में स्थिरता की कमी रहती है।

5. संतान भाव (पंचम भाव) यदि परिवार में बच्चे की इच्छा हो, तो पंचम भाव की जांच जरूर करनी चाहिए।

 

प्रेम विवाह में भी कुंडली मिलान जरूरी है?

बिल्कुल। बहुत से लोग सोचते हैं कि प्रेम विवाह में कुंडली की जरूरत नहीं। यह गलत सोच है। प्यार में दो लोग भावनात्मक रूप से जुड़ते हैं। लेकिन विवाह एक दीर्घकालिक संबंध है। इसमें स्वभाव की अनुकूलता, आर्थिक स्थिरता, स्वास्थ्य और संतान — सभी का महत्व है। कुंडली मिलान इन सभी पहलुओं पर प्रकाश डालता है। यदि आपका प्रेम विवाह है और परिवार का विरोध हो रहा है, तो भी एक बार लव मैरिज प्रॉब्लम सॉल्यूशन की सलाह लें। इससे रास्ता निकालने में मदद मिलती है।

कुंडली मिलान कैसे करवाएं?

कुंडली मिलान के लिए दोनों पक्षों की जन्म तिथि, जन्म समय और जन्म स्थान जरूरी होता है।

इसके बाद एक अनुभवी ज्योतिषी:

· अष्टकूट मिलान करता है· 

· सभी दोषों की जांच करता है

· दशा और ग्रह स्थिति देखता है

· उचित उपाय सुझाता है

· शादी का शुभ मुहूर्त निकालता है

आज के डिजिटल युग में आप घर बैठे भी यह करवा सकते हैं। ज्योतिषाचार्य अनिल भार्गव के साथ फ्री कुंडली मिलान की शुरुआत करें। यह बिल्कुल निःशुल्क है और कुछ ही मिनटों में आपको अपने रिश्ते की पहली झलक मिल जाएगी।

कुंडली मिलान में क्या नजरअंदाज न करें?

कुछ बातें हैं जो अक्सर लोग नजरअंदाज कर देते हैं — और बाद में पछताते हैं। जल्दबाजी न करें। सगाई की तारीख तय होने के बाद कुंडली मिलवाना सही नहीं है। पहले मिलान करें, फिर आगे बढ़ें। सिर्फ ऑनलाइन टूल पर न रुकें। ऑनलाइन कुंडली मिलान टूल केवल गुण गिनते हैं। वे दोष, दशा और लग्न नहीं देखते। इसीलिए किसी जानकार ज्योतिषी से विस्तृत परामर्श जरूरी है। दोनों कुंडलियां एक साथ दिखाएं। सिर्फ एक पक्ष की कुंडली से पूरा चित्र नहीं मिलता। झूठे आश्वासन से बचें। कोई भी ज्योतिषी जो बिना कुंडली देखे 100% गारंटी दे — उससे सावधान रहें।

 

सही शुरुआत, सुखी जीवन

विवाह जीवन का सबसे बड़ा निर्णय है। कुंडली मिलान इस निर्णय को सही दिशा देता है। यह भय के लिए नहीं, बल्कि स्पष्टता और सुरक्षा के लिए किया जाता है। एक अनुभवी ज्योतिषी आपको सिर्फ दोष नहीं बताता। वह आपको दोष के उपाय भी देता है। वह आपको यह समझाता है कि दोनों कुंडलियां मिलकर एक सुखी जीवन बना सकती हैं या नहीं। सही जानकारी से सही निर्णय होता है। और सही निर्णय से सुखी जीवन।

लेखक परिचय

ज्योतिषाचार्य अनिल भार्गव — अहमदाबाद, गुजरात स्थित एक विश्वसनीय वैदिक ज्योतिषी हैं। उनके पास 15+ वर्षों का अनुभव और 8,788+ से अधिक परामर्श का ट्रैक रिकॉर्ड है। वे कुंडली विश्लेषण, विवाह ज्योतिष, करियर मार्गदर्शन, दोष निवारण और आध्यात्मिक परामर्श में विशेषज्ञ हैं।

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