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शुरुआती तेजी के बाद बाजार फिसला, सेंसेक्स-निफ्टी लाल निशान में, निवेशकों की बढ़ी चिंता
बिजनेस डेस्क
शेयर बाजार में गिरावट, सेंसेक्स-निफ्टी लाल निशान में। वैश्विक संकेतों और तेल कीमतों के असर से बाजार में उतार-चढ़ाव जारी।
वैश्विक संकेतों के बीच घरेलू शेयर बाजार में सोमवार को शुरुआती मजबूती ज्यादा देर टिक नहीं पाई और बाजार गिरावट के साथ लाल निशान में आ गया। सुबह करीब 9:44 बजे बीएसई सेंसेक्स 33 अंक टूटकर 78,460 के स्तर पर कारोबार करता दिखा, जबकि एनएसई निफ्टी 37 अंकों की गिरावट के साथ 24,315 के आसपास आ गया। इससे पहले शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 236 अंकों की तेजी के साथ 78,730 तक पहुंच गया था और निफ्टी भी 24,420 के स्तर तक गया था। बाजार में इस उतार-चढ़ाव ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है, खासकर तब जब वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता बनी हुई है।
दिन की शुरुआत में बैंकिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर शेयरों में खरीदारी देखने को मिली, जिससे बाजार में तेजी आई। आईसीआईसीआई बैंक, ट्रेंट, अदानी एंटरप्राइजेज और एलएंडटी जैसे शेयरों ने शुरुआती बढ़त में योगदान दिया।
हालांकि, जल्द ही मुनाफावसूली और कमजोर वैश्विक संकेतों के कारण बाजार में गिरावट आ गई। जियो फाइनेंशियल, बजाज फाइनेंस, बजाज फिनसर्व, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स और बजाज ऑटो जैसे शेयरों में दबाव देखने को मिला।
मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में अपेक्षाकृत मजबूती बनी रही। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स करीब 0.5% ऊपर रहा, जबकि स्मॉलकैप इंडेक्स में 0.2% की बढ़त दर्ज की गई। सेक्टोरल स्तर पर पूंजीगत वस्तुएं, मीडिया, PSU बैंक और बिजली सेक्टर में हल्की तेजी देखने को मिली।
वैश्विक संकेतों का असर
बाजार पर दबाव का प्रमुख कारण पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव रहा। रिपोर्ट्स के अनुसार, होर्मुज़ जलडमरूमध्य को लेकर अनिश्चितता ने वैश्विक सप्लाई चेन पर असर डाला है। विशेषज्ञों का मानना है कि तेल की कीमतों में उछाल से महंगाई बढ़ने का जोखिम बढ़ता है, जिसका सीधा असर इक्विटी बाजारों पर पड़ता है।
रुपया और फॉरेक्स बाजार
सोमवार को भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले मजबूत हुआ। शुरुआती कारोबार में यह 13 पैसे की बढ़त के साथ 92.78 पर पहुंच गया। इंटरबैंक फॉरेन एक्सचेंज में रुपया 92.73 पर खुला और 92.70 तक मजबूत हुआ।
विश्लेषकों के मुताबिक, कच्चे तेल की कीमतों में हालिया नरमी और रिजर्व बैंक के कदमों से रुपये को समर्थन मिला है। हालांकि, विदेशी निवेशकों की सतर्कता और वैश्विक अनिश्चितता के चलते बड़ी तेजी की संभावना सीमित मानी जा रही है।
विशेषज्ञों की राय
बाजार विश्लेषकों के अनुसार, पश्चिम एशिया में जारी तनाव और संभावित भू-राजनीतिक घटनाक्रम बाजार की दिशा तय करेंगे। एक निवेश रणनीतिकार ने कहा कि संघर्ष-विराम की समयसीमा नजदीक आने के साथ बाजार में अस्थिरता बढ़ सकती है। सूत्रों के मुताबिक, निवेशक फिलहाल जोखिम से बचने की रणनीति अपना रहे हैं और बड़े फैसले लेने से पहले वैश्विक संकेतों का इंतजार कर रहे हैं।
आने वाले दिनों में बाजार की दिशा मुख्य रूप से वैश्विक घटनाओं, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर निर्भर करेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि अल्पावधि में बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। निवेशकों को सतर्क रहने और सेक्टर-आधारित रणनीति अपनाने की सलाह दी जा रही है।
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शुरुआती तेजी के बाद बाजार फिसला, सेंसेक्स-निफ्टी लाल निशान में, निवेशकों की बढ़ी चिंता
बिजनेस डेस्क
वैश्विक संकेतों के बीच घरेलू शेयर बाजार में सोमवार को शुरुआती मजबूती ज्यादा देर टिक नहीं पाई और बाजार गिरावट के साथ लाल निशान में आ गया। सुबह करीब 9:44 बजे बीएसई सेंसेक्स 33 अंक टूटकर 78,460 के स्तर पर कारोबार करता दिखा, जबकि एनएसई निफ्टी 37 अंकों की गिरावट के साथ 24,315 के आसपास आ गया। इससे पहले शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 236 अंकों की तेजी के साथ 78,730 तक पहुंच गया था और निफ्टी भी 24,420 के स्तर तक गया था। बाजार में इस उतार-चढ़ाव ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है, खासकर तब जब वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता बनी हुई है।
दिन की शुरुआत में बैंकिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर शेयरों में खरीदारी देखने को मिली, जिससे बाजार में तेजी आई। आईसीआईसीआई बैंक, ट्रेंट, अदानी एंटरप्राइजेज और एलएंडटी जैसे शेयरों ने शुरुआती बढ़त में योगदान दिया।
हालांकि, जल्द ही मुनाफावसूली और कमजोर वैश्विक संकेतों के कारण बाजार में गिरावट आ गई। जियो फाइनेंशियल, बजाज फाइनेंस, बजाज फिनसर्व, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स और बजाज ऑटो जैसे शेयरों में दबाव देखने को मिला।
मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में अपेक्षाकृत मजबूती बनी रही। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स करीब 0.5% ऊपर रहा, जबकि स्मॉलकैप इंडेक्स में 0.2% की बढ़त दर्ज की गई। सेक्टोरल स्तर पर पूंजीगत वस्तुएं, मीडिया, PSU बैंक और बिजली सेक्टर में हल्की तेजी देखने को मिली।
वैश्विक संकेतों का असर
बाजार पर दबाव का प्रमुख कारण पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव रहा। रिपोर्ट्स के अनुसार, होर्मुज़ जलडमरूमध्य को लेकर अनिश्चितता ने वैश्विक सप्लाई चेन पर असर डाला है। विशेषज्ञों का मानना है कि तेल की कीमतों में उछाल से महंगाई बढ़ने का जोखिम बढ़ता है, जिसका सीधा असर इक्विटी बाजारों पर पड़ता है।
रुपया और फॉरेक्स बाजार
सोमवार को भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले मजबूत हुआ। शुरुआती कारोबार में यह 13 पैसे की बढ़त के साथ 92.78 पर पहुंच गया। इंटरबैंक फॉरेन एक्सचेंज में रुपया 92.73 पर खुला और 92.70 तक मजबूत हुआ।
विश्लेषकों के मुताबिक, कच्चे तेल की कीमतों में हालिया नरमी और रिजर्व बैंक के कदमों से रुपये को समर्थन मिला है। हालांकि, विदेशी निवेशकों की सतर्कता और वैश्विक अनिश्चितता के चलते बड़ी तेजी की संभावना सीमित मानी जा रही है।
विशेषज्ञों की राय
बाजार विश्लेषकों के अनुसार, पश्चिम एशिया में जारी तनाव और संभावित भू-राजनीतिक घटनाक्रम बाजार की दिशा तय करेंगे। एक निवेश रणनीतिकार ने कहा कि संघर्ष-विराम की समयसीमा नजदीक आने के साथ बाजार में अस्थिरता बढ़ सकती है। सूत्रों के मुताबिक, निवेशक फिलहाल जोखिम से बचने की रणनीति अपना रहे हैं और बड़े फैसले लेने से पहले वैश्विक संकेतों का इंतजार कर रहे हैं।
आने वाले दिनों में बाजार की दिशा मुख्य रूप से वैश्विक घटनाओं, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर निर्भर करेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि अल्पावधि में बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। निवेशकों को सतर्क रहने और सेक्टर-आधारित रणनीति अपनाने की सलाह दी जा रही है।
