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मोक्षदा एकादशी 2025:क्या है मोक्षदा एकादशी की सहीं तारीख 30 नवंबर या 1 दिसंबर? जानें ,महत्व और पूजा विधि
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मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष की एकादशी को माना जाता है मोक्ष प्रदान करने वाली तिथि; उदय तिथि के आधार पर 1 दिसंबर को रखा जाएगा व्रत
हिंदू धर्म के प्रमुख व्रतों में गिनी जाने वाली मोक्षदा एकादशी इस वर्ष कब रखी जाए—30 नवंबर या 1 दिसंबर—इसको लेकर कई भक्तों में भ्रम बना हुआ है। पंचांग के मुताबिक मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 30 नवंबर 2025 की रात 9:30 बजे शुरू होगी और 1 दिसंबर की शाम 7:02 बजे समाप्त होगी। धार्मिक नियमों के अनुसार व्रत उदय तिथि पर किया जाता है, इसलिए मोक्षदा एकादशी का व्रत 1 दिसंबर 2025, सोमवार को रखा जाएगा। इसी रात 11:18 बजे पंचक भी समाप्त हो जाएगा।
क्यों खास है मोक्षदा एकादशी?
मोक्ष प्रदान करने वाली इस तिथि का उल्लेख अनेक पुराणों में मिलता है। मान्यता है कि इस व्रत से—
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साधक और उसके पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है,
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जीवन में आई बाधाएं समाप्त होती हैं,
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ग्रहदोषों से राहत मिलती है,
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घर-परिवार में सुख, शांति और समृद्धि बढ़ती है।
भगवान विष्णु की उपासना का यह विशेष दिन साल की उन कुछ तिथियों में से एक माना जाता है, जिन पर व्रत का फल कई गुना प्राप्त होता है।
कैसे करें मोक्षदा एकादशी की पूजा?
व्रत से जुड़े विधि-विधान इस प्रकार हैं—
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सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और हल्के, स्वच्छ वस्त्र पहनें।
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सूर्य देव को अर्घ्य देकर भगवान विष्णु की आराधना का संकल्प लें।
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पूजा स्थान पर विष्णु और लक्ष्मी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
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विष्णु भगवान को पीले फूल, तुलसी दल, पंचामृत, फल और पीली मिठाई अर्पित करें।
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“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः” मंत्र का जप करें।
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परिवार सहित मोक्षदा एकादशी की कथा का पाठ करें।
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आरती के बाद प्रसाद वितरित करें और द्वादशी तिथि में शाम को व्रत का पारण करें।
आध्यात्मिक मान्यता
मोक्षदा एकादशी पितृ-शांति का दिन भी मानी जाती है। धर्म ग्रंथों में वर्णित है कि इस व्रत की शक्ति पितरों के लिए मोक्षद्वार खोलती है। इसलिए इसे पूर्वजों की मुक्ति का विशेष साधन कहा गया है।
सालभर आने वाली 24 एकादशियों में मोक्षदा एकादशी का स्थान बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है और भक्त पूरे श्रद्धा भाव से इस व्रत को करते हैं।
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