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Parashuram Jayanti 2026: 19 अप्रैल को मनाई जाएगी परशुराम जयंती, जानें तिथि, पूजा विधि और महत्व
धर्म डेस्क
अक्षय तृतीया के साथ विशेष संयोग, भगवान परशुराम की पूजा से सुख-समृद्धि और शक्ति की कामना
इस वर्ष Parashuram Jayanti 19 अप्रैल को मनाई जाएगी। पंचांग के अनुसार वैशाख शुक्ल तृतीया तिथि 19 अप्रैल की सुबह 10:50 बजे शुरू होकर 20 अप्रैल सुबह 7:28 बजे तक रहेगी। चूंकि 19 अप्रैल को यह तिथि पूरे दिन व्याप्त रहेगी, इसलिए इसी दिन Akshaya Tritiya के साथ परशुराम जयंती का पर्व भी मनाया जाएगा।
क्या है परशुराम जयंती?
यह पर्व भगवान Parashurama की जयंती के रूप में मनाया जाता है, जिन्हें भगवान Vishnu का छठा अवतार माना जाता है। इस दिन भक्त व्रत रखकर और पूजा-अर्चना कर जीवन में सुख, शांति और शक्ति की कामना करते हैं।
कब और क्यों मनाई जाती है?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान परशुराम का जन्म वैशाख शुक्ल तृतीया के प्रदोष काल में हुआ था। इसलिए जिस दिन प्रदोष काल में यह तिथि आती है, उसी दिन जयंती मनाना शुभ माना जाता है। इस बार यह संयोग 19 अप्रैल को बन रहा है।
महत्व क्या है?
भगवान परशुराम को धर्म और न्याय के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। उनका जीवन यह संदेश देता है कि अन्याय और अधर्म के खिलाफ खड़ा होना ही सच्चा धर्म है। मान्यता है कि इस दिन पूजा करने से व्यक्ति को साहस, ऊर्जा और सकारात्मकता प्राप्त होती है।
पूजा विधि कैसे करें?
सुबह स्नान के बाद व्रत और पूजा का संकल्प लें। घर या मंदिर में भगवान परशुराम की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। तिलक लगाकर अक्षत, पुष्प और तुलसी अर्पित करें।
इसके बाद मंत्र जाप या भगवान विष्णु की स्तुति करें और अंत में आरती करें। इस दिन दान-पुण्य का भी विशेष महत्व होता है।
पौराणिक संदर्भ
भगवान परशुराम, ऋषि जमदग्नि के पुत्र थे और भगवान शिव के परम भक्त माने जाते हैं। कथा के अनुसार Shiva ने प्रसन्न होकर उन्हें ‘परशु’ नामक दिव्य अस्त्र प्रदान किया था, जिसके कारण उनका नाम परशुराम पड़ा।
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Parashuram Jayanti 2026: 19 अप्रैल को मनाई जाएगी परशुराम जयंती, जानें तिथि, पूजा विधि और महत्व
धर्म डेस्क
इस वर्ष Parashuram Jayanti 19 अप्रैल को मनाई जाएगी। पंचांग के अनुसार वैशाख शुक्ल तृतीया तिथि 19 अप्रैल की सुबह 10:50 बजे शुरू होकर 20 अप्रैल सुबह 7:28 बजे तक रहेगी। चूंकि 19 अप्रैल को यह तिथि पूरे दिन व्याप्त रहेगी, इसलिए इसी दिन Akshaya Tritiya के साथ परशुराम जयंती का पर्व भी मनाया जाएगा।
क्या है परशुराम जयंती?
यह पर्व भगवान Parashurama की जयंती के रूप में मनाया जाता है, जिन्हें भगवान Vishnu का छठा अवतार माना जाता है। इस दिन भक्त व्रत रखकर और पूजा-अर्चना कर जीवन में सुख, शांति और शक्ति की कामना करते हैं।
कब और क्यों मनाई जाती है?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान परशुराम का जन्म वैशाख शुक्ल तृतीया के प्रदोष काल में हुआ था। इसलिए जिस दिन प्रदोष काल में यह तिथि आती है, उसी दिन जयंती मनाना शुभ माना जाता है। इस बार यह संयोग 19 अप्रैल को बन रहा है।
महत्व क्या है?
भगवान परशुराम को धर्म और न्याय के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। उनका जीवन यह संदेश देता है कि अन्याय और अधर्म के खिलाफ खड़ा होना ही सच्चा धर्म है। मान्यता है कि इस दिन पूजा करने से व्यक्ति को साहस, ऊर्जा और सकारात्मकता प्राप्त होती है।
पूजा विधि कैसे करें?
सुबह स्नान के बाद व्रत और पूजा का संकल्प लें। घर या मंदिर में भगवान परशुराम की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। तिलक लगाकर अक्षत, पुष्प और तुलसी अर्पित करें।
इसके बाद मंत्र जाप या भगवान विष्णु की स्तुति करें और अंत में आरती करें। इस दिन दान-पुण्य का भी विशेष महत्व होता है।
पौराणिक संदर्भ
भगवान परशुराम, ऋषि जमदग्नि के पुत्र थे और भगवान शिव के परम भक्त माने जाते हैं। कथा के अनुसार Shiva ने प्रसन्न होकर उन्हें ‘परशु’ नामक दिव्य अस्त्र प्रदान किया था, जिसके कारण उनका नाम परशुराम पड़ा।
