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महाकाल मंदिर में मासूम की आस्था देख पिघला दिल, 8 साल के बच्चे को मिली स्पेशल एंट्री
उज्जैन (म.प्र.)
दर्शन न होने पर रो पड़ा बच्चा, मंदिर समिति ने चांदी द्वार से कराए विशेष दर्शन
उज्जैन स्थित महाकालेश्वर मंदिर में एक भावुक कर देने वाली घटना सामने आई, जहां एक 8 वर्षीय बच्चे की सच्ची भक्ति ने मंदिर प्रशासन का दिल पिघला दिया। दर्शन न हो पाने पर रो पड़े इस मासूम को बाद में विशेष व्यवस्था के तहत चांदी द्वार से भगवान महाकाल के दर्शन कराए गए।
मंगलवार दोपहर सीहोर से आई शिल्पी अपने छोटे भाई अगस्त गुप्ता के साथ मंदिर पहुंची थीं। बैरिकेड से दर्शन के दौरान बच्चे की इच्छा पूरी नहीं हो सकी। बाबा महाकाल को जल अर्पित करने की उसकी तीव्र इच्छा अधूरी रह गई, जिससे वह भावुक होकर रोने लगा।
मंदिर परिसर में मौजूद प्रबंधन समिति के अधिकारियों ने जब बच्चे की आस्था देखी, तो तत्काल विशेष व्यवस्था की गई। उसे चांदी द्वार तक ले जाया गया, जहां उसने विधिवत भगवान को जल अर्पित किया और करीब से दर्शन किए।
दर्शन के बाद बच्चा नंदी हॉल में बैठकर भक्ति में लीन नजर आया। वह कभी मंत्र जप करता दिखा तो कभी हाथ जोड़कर भगवान को निहारता रहा। उसकी भावनाओं को देखते हुए मंदिर प्रशासन ने उसे महाकाल का दुपट्टा पहनाकर सम्मानित भी किया।
मंदिर प्रशासन का कहना है कि श्रद्धालुओं की आस्था का सम्मान करना उनकी प्राथमिकता है। विशेष परिस्थितियों में ऐसे निर्णय लिए जाते हैं, जिससे भक्तों को संतोष मिल सके।
महाकालेश्वर मंदिर में रोजाना हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। भीड़ के चलते कई बार सभी को संतोषजनक दर्शन नहीं मिल पाते, लेकिन इस तरह की घटनाएं व्यवस्था में मानवीय पहलू को भी सामने लाती हैं।
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महाकाल मंदिर में मासूम की आस्था देख पिघला दिल, 8 साल के बच्चे को मिली स्पेशल एंट्री
उज्जैन (म.प्र.)
उज्जैन स्थित महाकालेश्वर मंदिर में एक भावुक कर देने वाली घटना सामने आई, जहां एक 8 वर्षीय बच्चे की सच्ची भक्ति ने मंदिर प्रशासन का दिल पिघला दिया। दर्शन न हो पाने पर रो पड़े इस मासूम को बाद में विशेष व्यवस्था के तहत चांदी द्वार से भगवान महाकाल के दर्शन कराए गए।
मंगलवार दोपहर सीहोर से आई शिल्पी अपने छोटे भाई अगस्त गुप्ता के साथ मंदिर पहुंची थीं। बैरिकेड से दर्शन के दौरान बच्चे की इच्छा पूरी नहीं हो सकी। बाबा महाकाल को जल अर्पित करने की उसकी तीव्र इच्छा अधूरी रह गई, जिससे वह भावुक होकर रोने लगा।
मंदिर परिसर में मौजूद प्रबंधन समिति के अधिकारियों ने जब बच्चे की आस्था देखी, तो तत्काल विशेष व्यवस्था की गई। उसे चांदी द्वार तक ले जाया गया, जहां उसने विधिवत भगवान को जल अर्पित किया और करीब से दर्शन किए।
दर्शन के बाद बच्चा नंदी हॉल में बैठकर भक्ति में लीन नजर आया। वह कभी मंत्र जप करता दिखा तो कभी हाथ जोड़कर भगवान को निहारता रहा। उसकी भावनाओं को देखते हुए मंदिर प्रशासन ने उसे महाकाल का दुपट्टा पहनाकर सम्मानित भी किया।
मंदिर प्रशासन का कहना है कि श्रद्धालुओं की आस्था का सम्मान करना उनकी प्राथमिकता है। विशेष परिस्थितियों में ऐसे निर्णय लिए जाते हैं, जिससे भक्तों को संतोष मिल सके।
महाकालेश्वर मंदिर में रोजाना हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। भीड़ के चलते कई बार सभी को संतोषजनक दर्शन नहीं मिल पाते, लेकिन इस तरह की घटनाएं व्यवस्था में मानवीय पहलू को भी सामने लाती हैं।
