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सिद्धार्थ एस कुमार को मिला ‘Best Mobile Numerologist’ सम्मान
Digital Desk
Mobile Numerology में शोध और काम को मिली पहचान, 1 करोड़ से ज्यादा मोबाइल नंबरों के अध्ययन का दावा
एस्ट्रो-न्यूमरोलॉजिस्ट, शोधकर्ता और NumroVani के संस्थापक सिद्धार्थ एस कुमार को ‘Best Mobile Numerologist’ सम्मान से नवाजा गया है। यह सम्मान उन्हें Mobile Numerology के क्षेत्र में किए गए उनके काम और भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक शोध, डेटा तथा व्यक्तिगत जीवन से जोड़ने के प्रयासों के लिए दिया गया है। सिद्धार्थ एस कुमार पिछले कुछ वर्षों से मोबाइल नंबरों और न्यूमरोलॉजी के संबंध पर काम कर रहे हैं। उनके अनुसार, इस दौरान 1 करोड़ से अधिक मोबाइल नंबरों का अध्ययन और विश्लेषण किया गया है। इसी लंबे अध्ययन के आधार पर उनकी पद्धति को लगातार विकसित और व्यवस्थित किया गया।
Mobile Numerology में उनका दृष्टिकोण सिर्फ मोबाइल नंबर के अंकों को जोड़कर एक अंतिम संख्या निकालने तक सीमित नहीं बताया गया है। इसमें नंबर में अंकों की जगह, उनका क्रम, दो या तीन अंकों के पैटर्न, किसी अंक की बार-बार मौजूदगी और अंतिम चार अंकों जैसी चीजों को भी विश्लेषण में शामिल किया जाता है। इसके साथ व्यक्ति की व्यक्तिगत न्यूमरोलॉजिकल प्रोफाइल के साथ मोबाइल नंबर की अनुकूलता को भी देखा जाता है। सिद्धार्थ का कहना है कि मोबाइल नंबर आज केवल किसी व्यक्ति से संपर्क करने का माध्यम नहीं रह गया है, बल्कि डिजिटल पहचान का हिस्सा भी बन चुका है। ऐसे में मोबाइल नंबर से जुड़े उनके शोध का उद्देश्य लोगों को अपने फैसलों को लेकर अधिक जागरूक और व्यक्तिगत विकल्प चुनने में मदद करना है।
सिद्धार्थ एस कुमार के मुताबिक Mobile Numerology उनके व्यापक विजन का केवल एक हिस्सा है। उनका काम भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक डेटा और शोध के साथ जोड़ने पर केंद्रित है। उनका मानना है कि पारंपरिक ज्ञान को आज के समय के संदर्भ में समझने के लिए उसे व्यवस्थित तरीके से अध्ययन करना जरूरी है। इसी सोच के तहत उनके काम में व्यक्तिगत प्रोफाइल, संख्यात्मक पैटर्न और अलग-अलग संयोजनों को शामिल किया गया है। उनके अनुसार किसी मोबाइल नंबर का अध्ययन केवल उसमें मौजूद अंकों की कुल संख्या के आधार पर नहीं किया जाना चाहिए।
नंबर में किसी अंक की स्थिति, उसकी पुनरावृत्ति और दूसरे अंकों के साथ उसका संयोजन भी विश्लेषण का हिस्सा हो सकता है। इसी तरह अंतिम चार अंकों को भी उनके फ्रेमवर्क में विशेष महत्व दिया जाता है। उनका कहना है कि हर व्यक्ति की संख्यात्मक प्रोफाइल अलग होती है और इसी वजह से किसी नंबर को सभी लोगों के लिए एक जैसा नहीं देखा जा सकता। सम्मान मिलने के बाद सिद्धार्थ ने कहा कि उनके लिए Mobile Numerology किसी एक अलग व्यवस्था का नाम नहीं है, बल्कि बड़े फ्रेमवर्क का एक अनुप्रयोग है। उनका उद्देश्य प्राचीन ज्ञान, व्यक्तिगत विशिष्टता, आधुनिक डेटा और शोध को एक साथ लाकर लोगों को अपने जीवन से जुड़े विकल्पों को लेकर ज्यादा जागरूक बनाने की दिशा में काम करना है। उन्होंने मोबाइल नंबर को डिजिटल पहचान का अहम हिस्सा बताते हुए कहा कि आने वाले समय में व्यक्तिगत निर्णयों को समझने के लिए ऐसे डेटा आधारित फ्रेमवर्क की भूमिका और बढ़ सकती है।
सिद्धार्थ एस कुमार के काम से जुड़ी जानकारी के मुताबिक, उनके शोध के साथ बौद्धिक संपदा का एक पोर्टफोलियो भी विकसित किया गया है। इसमें पेटेंट, डिजाइन पेटेंट, ट्रेडमार्क, ट्रेड सीक्रेट्स और शोध-पत्र शामिल होने की बात कही गई है। उनका कहना है कि इन माध्यमों के जरिए विकसित पद्धतियों को व्यवस्थित करने, उन पर आगे अध्ययन करने और बौद्धिक संपदा के रूप में संरक्षित करने का प्रयास किया जा रहा है। सम्मान समिति की ओर से भी उनके काम की सराहना की गई। समिति के मुताबिक सिद्धार्थ एस कुमार ने Mobile Numerology को अध्ययन और अनुप्रयोग के एक अलग क्षेत्र के तौर पर विकसित करने की दिशा में काम किया है। समिति ने भारतीय पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक जीवन से जोड़ने और उसमें डेटा तथा शोध का इस्तेमाल करने के उनके प्रयासों को उल्लेखनीय बताया।
उनके काम का दायरा केवल मोबाइल नंबर तक सीमित नहीं बताया गया है। इससे जुड़े व्यापक फ्रेमवर्क में जीवनशैली, वेलनेस, रिश्ते, करियर, व्यक्तिगत पहचान, उपभोक्ता उत्पाद और रोजमर्रा के फैसलों जैसे विषयों को भी शामिल करने की बात कही गई है। सिद्धार्थ का कहना है कि उनका लक्ष्य लोगों को व्यक्तिगत स्तर पर अधिक जागरूक विकल्प चुनने के लिए सक्षम बनाने वाला ऐसा फ्रेमवर्क तैयार करना है, जिसमें पारंपरिक ज्ञान के साथ आधुनिक शोध और डेटा का इस्तेमाल हो। 1 करोड़ से अधिक मोबाइल नंबरों के अध्ययन, अकादमिक शोध और बौद्धिक संपदा से जुड़े काम को इसी दिशा में आगे बढ़ता प्रयास बताया गया है। ‘Best Mobile Numerologist’ सम्मान को उनके इसी काम की पहचान के तौर पर पेश किया गया है।
सिद्धार्थ एस कुमार को मिला ‘Best Mobile Numerologist’ सम्मान
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एस्ट्रो-न्यूमरोलॉजिस्ट, शोधकर्ता और NumroVani के संस्थापक सिद्धार्थ एस कुमार को ‘Best Mobile Numerologist’ सम्मान से नवाजा गया है। यह सम्मान उन्हें Mobile Numerology के क्षेत्र में किए गए उनके काम और भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक शोध, डेटा तथा व्यक्तिगत जीवन से जोड़ने के प्रयासों के लिए दिया गया है। सिद्धार्थ एस कुमार पिछले कुछ वर्षों से मोबाइल नंबरों और न्यूमरोलॉजी के संबंध पर काम कर रहे हैं। उनके अनुसार, इस दौरान 1 करोड़ से अधिक मोबाइल नंबरों का अध्ययन और विश्लेषण किया गया है। इसी लंबे अध्ययन के आधार पर उनकी पद्धति को लगातार विकसित और व्यवस्थित किया गया।
Mobile Numerology में उनका दृष्टिकोण सिर्फ मोबाइल नंबर के अंकों को जोड़कर एक अंतिम संख्या निकालने तक सीमित नहीं बताया गया है। इसमें नंबर में अंकों की जगह, उनका क्रम, दो या तीन अंकों के पैटर्न, किसी अंक की बार-बार मौजूदगी और अंतिम चार अंकों जैसी चीजों को भी विश्लेषण में शामिल किया जाता है। इसके साथ व्यक्ति की व्यक्तिगत न्यूमरोलॉजिकल प्रोफाइल के साथ मोबाइल नंबर की अनुकूलता को भी देखा जाता है। सिद्धार्थ का कहना है कि मोबाइल नंबर आज केवल किसी व्यक्ति से संपर्क करने का माध्यम नहीं रह गया है, बल्कि डिजिटल पहचान का हिस्सा भी बन चुका है। ऐसे में मोबाइल नंबर से जुड़े उनके शोध का उद्देश्य लोगों को अपने फैसलों को लेकर अधिक जागरूक और व्यक्तिगत विकल्प चुनने में मदद करना है।
सिद्धार्थ एस कुमार के मुताबिक Mobile Numerology उनके व्यापक विजन का केवल एक हिस्सा है। उनका काम भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक डेटा और शोध के साथ जोड़ने पर केंद्रित है। उनका मानना है कि पारंपरिक ज्ञान को आज के समय के संदर्भ में समझने के लिए उसे व्यवस्थित तरीके से अध्ययन करना जरूरी है। इसी सोच के तहत उनके काम में व्यक्तिगत प्रोफाइल, संख्यात्मक पैटर्न और अलग-अलग संयोजनों को शामिल किया गया है। उनके अनुसार किसी मोबाइल नंबर का अध्ययन केवल उसमें मौजूद अंकों की कुल संख्या के आधार पर नहीं किया जाना चाहिए।
नंबर में किसी अंक की स्थिति, उसकी पुनरावृत्ति और दूसरे अंकों के साथ उसका संयोजन भी विश्लेषण का हिस्सा हो सकता है। इसी तरह अंतिम चार अंकों को भी उनके फ्रेमवर्क में विशेष महत्व दिया जाता है। उनका कहना है कि हर व्यक्ति की संख्यात्मक प्रोफाइल अलग होती है और इसी वजह से किसी नंबर को सभी लोगों के लिए एक जैसा नहीं देखा जा सकता। सम्मान मिलने के बाद सिद्धार्थ ने कहा कि उनके लिए Mobile Numerology किसी एक अलग व्यवस्था का नाम नहीं है, बल्कि बड़े फ्रेमवर्क का एक अनुप्रयोग है। उनका उद्देश्य प्राचीन ज्ञान, व्यक्तिगत विशिष्टता, आधुनिक डेटा और शोध को एक साथ लाकर लोगों को अपने जीवन से जुड़े विकल्पों को लेकर ज्यादा जागरूक बनाने की दिशा में काम करना है। उन्होंने मोबाइल नंबर को डिजिटल पहचान का अहम हिस्सा बताते हुए कहा कि आने वाले समय में व्यक्तिगत निर्णयों को समझने के लिए ऐसे डेटा आधारित फ्रेमवर्क की भूमिका और बढ़ सकती है।
सिद्धार्थ एस कुमार के काम से जुड़ी जानकारी के मुताबिक, उनके शोध के साथ बौद्धिक संपदा का एक पोर्टफोलियो भी विकसित किया गया है। इसमें पेटेंट, डिजाइन पेटेंट, ट्रेडमार्क, ट्रेड सीक्रेट्स और शोध-पत्र शामिल होने की बात कही गई है। उनका कहना है कि इन माध्यमों के जरिए विकसित पद्धतियों को व्यवस्थित करने, उन पर आगे अध्ययन करने और बौद्धिक संपदा के रूप में संरक्षित करने का प्रयास किया जा रहा है। सम्मान समिति की ओर से भी उनके काम की सराहना की गई। समिति के मुताबिक सिद्धार्थ एस कुमार ने Mobile Numerology को अध्ययन और अनुप्रयोग के एक अलग क्षेत्र के तौर पर विकसित करने की दिशा में काम किया है। समिति ने भारतीय पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक जीवन से जोड़ने और उसमें डेटा तथा शोध का इस्तेमाल करने के उनके प्रयासों को उल्लेखनीय बताया।
उनके काम का दायरा केवल मोबाइल नंबर तक सीमित नहीं बताया गया है। इससे जुड़े व्यापक फ्रेमवर्क में जीवनशैली, वेलनेस, रिश्ते, करियर, व्यक्तिगत पहचान, उपभोक्ता उत्पाद और रोजमर्रा के फैसलों जैसे विषयों को भी शामिल करने की बात कही गई है। सिद्धार्थ का कहना है कि उनका लक्ष्य लोगों को व्यक्तिगत स्तर पर अधिक जागरूक विकल्प चुनने के लिए सक्षम बनाने वाला ऐसा फ्रेमवर्क तैयार करना है, जिसमें पारंपरिक ज्ञान के साथ आधुनिक शोध और डेटा का इस्तेमाल हो। 1 करोड़ से अधिक मोबाइल नंबरों के अध्ययन, अकादमिक शोध और बौद्धिक संपदा से जुड़े काम को इसी दिशा में आगे बढ़ता प्रयास बताया गया है। ‘Best Mobile Numerologist’ सम्मान को उनके इसी काम की पहचान के तौर पर पेश किया गया है।
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