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आज का पंचांग: गंगा सप्तमी पर शुभ मुहूर्त
धर्म डेस्क
आज का पंचांग में जानें गंगा सप्तमी, शुभ मुहूर्त और राहुकाल का समय आज का दिन धार्मिक दृष्टि से विशेष है। गंगा सप्तमी के अवसर पर शुभ कार्यों के लिए सही समय जानना जरूरी है।
आज का पंचांग 23 अप्रैल 2026 के अनुसार वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि का विशेष संयोग बन रहा है। गुरुवार के दिन पड़ने वाली गंगा सप्तमी का धार्मिक महत्व अत्यंत माना जाता है। पंचांग के अनुसार, आज पुनर्वसु नक्षत्र और सुकर्मा योग का प्रभाव रहेगा, जो शुभ कार्यों के लिए अनुकूल स्थिति बनाता है। चंद्रमा दिन के पहले भाग में मिथुन राशि में रहकर मन को चंचल बनाएगा, वहीं दोपहर बाद कर्क राशि में प्रवेश करते ही भावनाओं में गहराई आएगी। सूर्य मेष राशि में उच्च के होकर तेज और ऊर्जा प्रदान कर रहे हैं। ऐसे में यह दिन स्नान, दान, जप और पूजा-पाठ के लिए अत्यंत फलदायी माना गया है।
पंचांग का संक्षिप्त विवरण
आज सप्तमी तिथि रात्रि 08 बजकर 49 मिनट तक रहेगी, इसके बाद अष्टमी का आरंभ होगा। पुनर्वसु नक्षत्र रात्रि 08 बजकर 57 मिनट तक प्रभावी रहेगा।सुबह सुकर्मा योग का प्रभाव रहेगा, जो प्रातः 06 बजकर 08 मिनट तक रहेगा, उसके बाद धृति योग प्रारंभ होगा। गरज करण सुबह 09 बजकर 45 मिनट तक रहेगा और इसके बाद वणिज करण का आरंभ हो जाएगा।
शुभ समय और सावधानी
आज का अभिजीत मुहूर्त दोपहर 11 बजकर 54 मिनट से 12 बजकर 46 मिनट तक है। इस समय में कोई भी शुभ कार्य प्रारंभ करना मंगलकारी माना जाता है।ब्रह्म मुहूर्त प्रातः 04 बजकर 20 मिनट से 05 बजकर 04 मिनट तक रहेगा, जो साधना और ध्यान के लिए सर्वोत्तम समय है। शाम 06 बजकर 41 मिनट से रात्रि 08 बजकर 11 मिनट तक अमृत काल रहेगा।राहुकाल दोपहर 01:30 बजे से 03:00 बजे तक रहेगा, इस दौरान नए कार्यों की शुरुआत से बचना चाहिए।
गंगा सप्तमी का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, वैशाख शुक्ल सप्तमी के दिन मां गंगा का पुनः अवतरण हुआ था। इस कारण इसे गंगा सप्तमी के रूप में मनाया जाता है।इस दिन गंगा स्नान, दान और विधि-विधान से पूजन करने का विशेष महत्व है। माना जाता है कि गंगा जल का स्पर्श भी मन और आत्मा को शुद्ध करता है और व्यक्ति को पापों से मुक्ति दिलाता है।
पूजा-विधि और उपाय
आज के दिन प्रातः काल गंगा जल मिलाकर स्नान करना शुभ माना जाता है। इसके बाद सूर्यदेव को अर्घ्य दें और भगवान विष्णु का स्मरण करें।“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जप करने से मन को शांति मिलती है। गुरुवार के दिन पीले फल, वस्त्र या अन्न का दान करना भी शुभ फल देता है। ज्योतिषीय दृष्टि से यह समय आध्यात्मिक साधना और आत्मचिंतन के लिए अनुकूल माना जा रहा है। आने वाले दिनों में भी इसी प्रकार के धार्मिक संयोग बनते रहेंगे।
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आज का पंचांग: गंगा सप्तमी पर शुभ मुहूर्त
धर्म डेस्क
आज का पंचांग 23 अप्रैल 2026 के अनुसार वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि का विशेष संयोग बन रहा है। गुरुवार के दिन पड़ने वाली गंगा सप्तमी का धार्मिक महत्व अत्यंत माना जाता है। पंचांग के अनुसार, आज पुनर्वसु नक्षत्र और सुकर्मा योग का प्रभाव रहेगा, जो शुभ कार्यों के लिए अनुकूल स्थिति बनाता है। चंद्रमा दिन के पहले भाग में मिथुन राशि में रहकर मन को चंचल बनाएगा, वहीं दोपहर बाद कर्क राशि में प्रवेश करते ही भावनाओं में गहराई आएगी। सूर्य मेष राशि में उच्च के होकर तेज और ऊर्जा प्रदान कर रहे हैं। ऐसे में यह दिन स्नान, दान, जप और पूजा-पाठ के लिए अत्यंत फलदायी माना गया है।
पंचांग का संक्षिप्त विवरण
आज सप्तमी तिथि रात्रि 08 बजकर 49 मिनट तक रहेगी, इसके बाद अष्टमी का आरंभ होगा। पुनर्वसु नक्षत्र रात्रि 08 बजकर 57 मिनट तक प्रभावी रहेगा।सुबह सुकर्मा योग का प्रभाव रहेगा, जो प्रातः 06 बजकर 08 मिनट तक रहेगा, उसके बाद धृति योग प्रारंभ होगा। गरज करण सुबह 09 बजकर 45 मिनट तक रहेगा और इसके बाद वणिज करण का आरंभ हो जाएगा।
शुभ समय और सावधानी
आज का अभिजीत मुहूर्त दोपहर 11 बजकर 54 मिनट से 12 बजकर 46 मिनट तक है। इस समय में कोई भी शुभ कार्य प्रारंभ करना मंगलकारी माना जाता है।ब्रह्म मुहूर्त प्रातः 04 बजकर 20 मिनट से 05 बजकर 04 मिनट तक रहेगा, जो साधना और ध्यान के लिए सर्वोत्तम समय है। शाम 06 बजकर 41 मिनट से रात्रि 08 बजकर 11 मिनट तक अमृत काल रहेगा।राहुकाल दोपहर 01:30 बजे से 03:00 बजे तक रहेगा, इस दौरान नए कार्यों की शुरुआत से बचना चाहिए।
गंगा सप्तमी का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, वैशाख शुक्ल सप्तमी के दिन मां गंगा का पुनः अवतरण हुआ था। इस कारण इसे गंगा सप्तमी के रूप में मनाया जाता है।इस दिन गंगा स्नान, दान और विधि-विधान से पूजन करने का विशेष महत्व है। माना जाता है कि गंगा जल का स्पर्श भी मन और आत्मा को शुद्ध करता है और व्यक्ति को पापों से मुक्ति दिलाता है।
पूजा-विधि और उपाय
आज के दिन प्रातः काल गंगा जल मिलाकर स्नान करना शुभ माना जाता है। इसके बाद सूर्यदेव को अर्घ्य दें और भगवान विष्णु का स्मरण करें।“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जप करने से मन को शांति मिलती है। गुरुवार के दिन पीले फल, वस्त्र या अन्न का दान करना भी शुभ फल देता है। ज्योतिषीय दृष्टि से यह समय आध्यात्मिक साधना और आत्मचिंतन के लिए अनुकूल माना जा रहा है। आने वाले दिनों में भी इसी प्रकार के धार्मिक संयोग बनते रहेंगे।
