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विदेशी ऑटो पेमेंट पर RBI सख्त, 24 घंटे पहले मिलेगा अलर्ट
बिजनेस न्यूज
ई-मेंडेट नियम बदले, यूजर को मिलेगा ज्यादा कंट्रोल अब विदेशी ऐप्स के ऑटोमैटिक पेमेंट पर यूजर्स की पकड़ मजबूत होगी। पेमेंट से पहले नोटिफिकेशन और रोकने का विकल्प, डिजिटल सुरक्षा की दिशा में बड़ा कदम है।
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने विदेशी कंपनियों को किए जाने वाले ऑटोमैटिक पेमेंट (ई-मेंडेट) से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव किया है। नए नियमों के तहत अब यूजर्स को किसी भी विदेशी सर्विस—जैसे ओटीटी प्लेटफॉर्म या ऐप सब्सक्रिप्शन—के लिए होने वाले ऑटो-डेबिट से 24 घंटे पहले अनिवार्य रूप से नोटिफिकेशन मिलेगा। यह कदम डिजिटल ट्रांजैक्शन में पारदर्शिता बढ़ाने और यूजर्स को धोखाधड़ी से बचाने के उद्देश्य से उठाया गया है।
RBI के इस सरकारी अपडेट के अनुसार, अब हर ऑटो-पेमेंट से पहले एडिशनल फैक्टर ऑथेंटिकेशन (AFA) यानी OTP आधारित वेरिफिकेशन अनिवार्य होगा। इससे यूजर्स को यह सुविधा मिलेगी कि वे चाहें तो भुगतान को समय रहते रोक सकें। यह नियम खासतौर पर विदेशी मर्चेंट्स पर लागू होगा, जहां पहले ऐसी पारदर्शिता नहीं थी।
नए नियम और लिमिट
RBI ने ई-मेंडेट ट्रांजैक्शन के लिए स्पष्ट सीमा तय की है।
₹15,000 तक के ट्रांजैक्शन बिना अतिरिक्त ऑथेंटिकेशन के हो सकेंगे, जबकि विशेष श्रेणियों के लिए लिमिट बढ़ाई गई है।
क्रेडिट कार्ड बिल, बीमा प्रीमियम और म्यूचुअल फंड भुगतान के लिए यह सीमा ₹1 लाख तक रखी गई है। इससे अधिक राशि के लिए हर बार अतिरिक्त सत्यापन जरूरी होगा। साथ ही, ग्राहक अपनी अधिकतम भुगतान सीमा भी तय कर सकेंगे, जिससे अनियंत्रित कटौती की संभावना कम होगी।
फ्रॉड सुरक्षा और रिफंड
RBI ने गलत ट्रांजैक्शन की स्थिति में ग्राहकों के अधिकार भी स्पष्ट किए हैं।
अगर ग्राहक 3 कार्य दिवस के भीतर शिकायत दर्ज कराता है, तो उसे पूरी राशि वापस मिल सकती है।
अधिकारियों के अनुसार, बैंक की गलती होने पर यूजर की कोई जिम्मेदारी नहीं होगी (जीरो लायबिलिटी)। वहीं 4 से 7 दिन के भीतर रिपोर्ट करने पर सीमित जिम्मेदारी लागू होगी। 7 दिन के बाद मामला बैंक की नीति के अनुसार तय किया जाएगा।
पिछले कुछ वर्षों में विदेशी डिजिटल सेवाओं—जैसे वीडियो स्ट्रीमिंग और ऑनलाइन सब्सक्रिप्शन—का उपयोग तेजी से बढ़ा है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, कई मामलों में बिना जानकारी के ऑटो-डेबिट होने या फ्रॉड की शिकायतें सामने आई थीं, जिसके बाद RBI ने नियमों को सख्त करने का फैसला लिया।
इन नए नियमों से यूजर्स को अपने डिजिटल खर्च पर बेहतर नियंत्रण मिलेगा।विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम ऑनलाइन पेमेंट सिस्टम को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाएगा, जिससे उपभोक्ता विश्वास भी बढ़ेगा।साथ ही, बैंक अब ई-मेंडेट सुविधा के लिए कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं ले सकेंगे, जिससे ग्राहकों को सीधा लाभ मिलेगा।RBI के निर्देशों के बाद सभी बैंकों और पेमेंट प्लेटफॉर्म्स को इन नियमों को लागू करना होगा।आने वाले समय में डिजिटल पेमेंट सिस्टम में और सख्ती देखने को मिल सकती है।
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विदेशी ऑटो पेमेंट पर RBI सख्त, 24 घंटे पहले मिलेगा अलर्ट
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भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने विदेशी कंपनियों को किए जाने वाले ऑटोमैटिक पेमेंट (ई-मेंडेट) से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव किया है। नए नियमों के तहत अब यूजर्स को किसी भी विदेशी सर्विस—जैसे ओटीटी प्लेटफॉर्म या ऐप सब्सक्रिप्शन—के लिए होने वाले ऑटो-डेबिट से 24 घंटे पहले अनिवार्य रूप से नोटिफिकेशन मिलेगा। यह कदम डिजिटल ट्रांजैक्शन में पारदर्शिता बढ़ाने और यूजर्स को धोखाधड़ी से बचाने के उद्देश्य से उठाया गया है।
RBI के इस सरकारी अपडेट के अनुसार, अब हर ऑटो-पेमेंट से पहले एडिशनल फैक्टर ऑथेंटिकेशन (AFA) यानी OTP आधारित वेरिफिकेशन अनिवार्य होगा। इससे यूजर्स को यह सुविधा मिलेगी कि वे चाहें तो भुगतान को समय रहते रोक सकें। यह नियम खासतौर पर विदेशी मर्चेंट्स पर लागू होगा, जहां पहले ऐसी पारदर्शिता नहीं थी।
नए नियम और लिमिट
RBI ने ई-मेंडेट ट्रांजैक्शन के लिए स्पष्ट सीमा तय की है।
₹15,000 तक के ट्रांजैक्शन बिना अतिरिक्त ऑथेंटिकेशन के हो सकेंगे, जबकि विशेष श्रेणियों के लिए लिमिट बढ़ाई गई है।
क्रेडिट कार्ड बिल, बीमा प्रीमियम और म्यूचुअल फंड भुगतान के लिए यह सीमा ₹1 लाख तक रखी गई है। इससे अधिक राशि के लिए हर बार अतिरिक्त सत्यापन जरूरी होगा। साथ ही, ग्राहक अपनी अधिकतम भुगतान सीमा भी तय कर सकेंगे, जिससे अनियंत्रित कटौती की संभावना कम होगी।
फ्रॉड सुरक्षा और रिफंड
RBI ने गलत ट्रांजैक्शन की स्थिति में ग्राहकों के अधिकार भी स्पष्ट किए हैं।
अगर ग्राहक 3 कार्य दिवस के भीतर शिकायत दर्ज कराता है, तो उसे पूरी राशि वापस मिल सकती है।
अधिकारियों के अनुसार, बैंक की गलती होने पर यूजर की कोई जिम्मेदारी नहीं होगी (जीरो लायबिलिटी)। वहीं 4 से 7 दिन के भीतर रिपोर्ट करने पर सीमित जिम्मेदारी लागू होगी। 7 दिन के बाद मामला बैंक की नीति के अनुसार तय किया जाएगा।
पिछले कुछ वर्षों में विदेशी डिजिटल सेवाओं—जैसे वीडियो स्ट्रीमिंग और ऑनलाइन सब्सक्रिप्शन—का उपयोग तेजी से बढ़ा है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, कई मामलों में बिना जानकारी के ऑटो-डेबिट होने या फ्रॉड की शिकायतें सामने आई थीं, जिसके बाद RBI ने नियमों को सख्त करने का फैसला लिया।
इन नए नियमों से यूजर्स को अपने डिजिटल खर्च पर बेहतर नियंत्रण मिलेगा।विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम ऑनलाइन पेमेंट सिस्टम को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाएगा, जिससे उपभोक्ता विश्वास भी बढ़ेगा।साथ ही, बैंक अब ई-मेंडेट सुविधा के लिए कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं ले सकेंगे, जिससे ग्राहकों को सीधा लाभ मिलेगा।RBI के निर्देशों के बाद सभी बैंकों और पेमेंट प्लेटफॉर्म्स को इन नियमों को लागू करना होगा।आने वाले समय में डिजिटल पेमेंट सिस्टम में और सख्ती देखने को मिल सकती है।
