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आज का पंचांग : प्रदोष व्रत पर शुभ योग, जानें पूजा का सही समय
धर्म डेस्क
वैशाख शुक्ल त्रयोदशी, हस्त नक्षत्र और हर्षण योग का संयोग; राहुकाल में शुभ कार्यों से बचने की सलाह
आज बुधवार को वैशाख शुक्ल त्रयोदशी तिथि के साथ प्रदोष व्रत का विशेष संयोग बन रहा है। पंचांग के अनुसार, यह तिथि शाम 7:51 बजे तक प्रभावी रहेगी, जिसके बाद चतुर्दशी तिथि आरंभ होगी। आज हस्त नक्षत्र और हर्षण योग का मेल धार्मिक दृष्टि से अत्यंत शुभ माना गया है। देशभर में श्रद्धालु भगवान शिव की आराधना के लिए प्रदोष व्रत का पालन कर रहे हैं।
ज्योतिषीय गणना के अनुसार, चंद्रमा पूरे दिन कन्या राशि में स्थित रहेगा, जबकि सूर्य मेष राशि में उच्च अवस्था में है। यह स्थिति कार्यों में अनुशासन और जीवन में संतुलन बनाए रखने का संकेत देती है। धर्माचार्यों के अनुसार, प्रदोष काल में शिव पूजा करने से विशेष पुण्य फल प्राप्त होता है और कष्टों का निवारण होता है।
ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:14 से 4:58 बजे तक रहेगा, जिसे ध्यान और जप के लिए श्रेष्ठ माना गया है। अमृत काल शाम 5:51 से 7:34 बजे तक रहेगा, जो पूजा-अर्चना के लिए सबसे अनुकूल समय है। हालांकि आज अभिजीत मुहूर्त उपलब्ध नहीं है।
अशुभ समय
राहुकाल दोपहर 12:00 से 1:30 बजे तक रहेगा। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार इस दौरान कोई भी शुभ कार्य शुरू करना उचित नहीं माना जाता। इसके अलावा सुबह 7:30 से 9:00 बजे तक यमगंड और 10:30 से 12:00 बजे तक गुलिक काल का प्रभाव रहेगा।
देशभर के प्रमुख शिवालयों और मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना की तैयारियां की गई हैं। श्रद्धालु शाम के समय जल, दूध और बेलपत्र अर्पित कर भगवान शिव का अभिषेक करेंगे। घरों में भी व्रत रखकर पूजा करने की परंपरा निभाई जा रही है।
वैशाख माह को हिंदू धर्म में पुण्य का महीना माना जाता है। इस दौरान किए गए व्रत और दान का विशेष महत्व होता है। त्रयोदशी तिथि पर आने वाला प्रदोष व्रत शिव उपासना के लिए सबसे महत्वपूर्ण दिनों में से एक है।
धार्मिक विशेषज्ञों का कहना है कि आज का दिन संयम और सकारात्मक सोच के साथ बिताना चाहिए। बुधवार होने के कारण भगवान गणेश की पूजा भी लाभकारी मानी गई है। ‘ॐ गं गणपतये नमः’ मंत्र का जाप और हरी मूंग का दान शुभ फल दे सकता है।
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आज का पंचांग : प्रदोष व्रत पर शुभ योग, जानें पूजा का सही समय
धर्म डेस्क
आज बुधवार को वैशाख शुक्ल त्रयोदशी तिथि के साथ प्रदोष व्रत का विशेष संयोग बन रहा है। पंचांग के अनुसार, यह तिथि शाम 7:51 बजे तक प्रभावी रहेगी, जिसके बाद चतुर्दशी तिथि आरंभ होगी। आज हस्त नक्षत्र और हर्षण योग का मेल धार्मिक दृष्टि से अत्यंत शुभ माना गया है। देशभर में श्रद्धालु भगवान शिव की आराधना के लिए प्रदोष व्रत का पालन कर रहे हैं।
ज्योतिषीय गणना के अनुसार, चंद्रमा पूरे दिन कन्या राशि में स्थित रहेगा, जबकि सूर्य मेष राशि में उच्च अवस्था में है। यह स्थिति कार्यों में अनुशासन और जीवन में संतुलन बनाए रखने का संकेत देती है। धर्माचार्यों के अनुसार, प्रदोष काल में शिव पूजा करने से विशेष पुण्य फल प्राप्त होता है और कष्टों का निवारण होता है।
ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:14 से 4:58 बजे तक रहेगा, जिसे ध्यान और जप के लिए श्रेष्ठ माना गया है। अमृत काल शाम 5:51 से 7:34 बजे तक रहेगा, जो पूजा-अर्चना के लिए सबसे अनुकूल समय है। हालांकि आज अभिजीत मुहूर्त उपलब्ध नहीं है।
अशुभ समय
राहुकाल दोपहर 12:00 से 1:30 बजे तक रहेगा। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार इस दौरान कोई भी शुभ कार्य शुरू करना उचित नहीं माना जाता। इसके अलावा सुबह 7:30 से 9:00 बजे तक यमगंड और 10:30 से 12:00 बजे तक गुलिक काल का प्रभाव रहेगा।
देशभर के प्रमुख शिवालयों और मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना की तैयारियां की गई हैं। श्रद्धालु शाम के समय जल, दूध और बेलपत्र अर्पित कर भगवान शिव का अभिषेक करेंगे। घरों में भी व्रत रखकर पूजा करने की परंपरा निभाई जा रही है।
वैशाख माह को हिंदू धर्म में पुण्य का महीना माना जाता है। इस दौरान किए गए व्रत और दान का विशेष महत्व होता है। त्रयोदशी तिथि पर आने वाला प्रदोष व्रत शिव उपासना के लिए सबसे महत्वपूर्ण दिनों में से एक है।
धार्मिक विशेषज्ञों का कहना है कि आज का दिन संयम और सकारात्मक सोच के साथ बिताना चाहिए। बुधवार होने के कारण भगवान गणेश की पूजा भी लाभकारी मानी गई है। ‘ॐ गं गणपतये नमः’ मंत्र का जाप और हरी मूंग का दान शुभ फल दे सकता है।
