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21 साल की लिंडा नोस्कोवा ने रचा इतिहास, पहली बार जीता विंबलडन महिला सिंगल्स खिताब
स्पोर्ट्स डेस्क
तीन सेट तक चले रोमांचक मुकाबले में 6-2, 5-7, 6-3 से दर्ज की जीत, पहली बार दो चेक खिलाड़ियों के बीच हुआ विंबलडन महिला सिंगल्स फाइनल
21 वर्षीय चेक टेनिस स्टार लिंडा नोस्कोवा ने विंबलडन 2026 महिला सिंगल्स का खिताब जीतकर अपने करियर की सबसे बड़ी उपलब्धि हासिल कर ली है। ऑल इंग्लैंड क्लब के प्रतिष्ठित सेंटर कोर्ट पर खेले गए फाइनल मुकाबले में उन्होंने अपनी ही हमवतन और पेरिस ओलंपिक डबल्स पार्टनर कैरोलीना मुहोवा को 6-2, 5-7, 6-3 से हराकर पहली बार ग्रैंड स्लैम चैंपियन बनने का सपना पूरा किया। इस जीत के साथ नोस्कोवा ने न केवल विंबलडन का प्रतिष्ठित खिताब अपने नाम किया, बल्कि इतिहास के पन्नों में भी अपनी जगह दर्ज करा ली।
यह मुकाबला कई मायनों में ऐतिहासिक रहा। विंबलडन के लंबे इतिहास में पहली बार महिला सिंगल्स का फाइनल दो चेक खिलाड़ियों के बीच खेला गया। दोनों खिलाड़ियों ने शानदार टेनिस का प्रदर्शन किया, लेकिन निर्णायक सेट में लिंडा नोस्कोवा ने बेहतर संयम और आक्रामक खेल का परिचय देते हुए मुकाबला अपने नाम कर लिया।
फाइनल की शुरुआत से ही नोस्कोवा आत्मविश्वास से भरी नजर आईं। उन्होंने पहले सेट में दमदार सर्विस और सटीक ग्राउंडस्ट्रोक्स के दम पर कैरोलीना मुहोवा को ज्यादा मौके नहीं दिए। केवल कुछ ही समय में उन्होंने पहला सेट 6-2 से अपने नाम कर लिया और मुकाबले पर मजबूत पकड़ बना ली।
दूसरे सेट में भी ऐसा लग रहा था कि मुकाबला जल्द समाप्त हो जाएगा। नोस्कोवा 5-2 की बढ़त के साथ जीत से केवल एक गेम दूर थीं। लेकिन यहीं से कैरोलीना मुहोवा ने शानदार वापसी की। उन्होंने लगातार पांच गेम जीतते हुए दूसरा सेट 7-5 से अपने नाम कर लिया। इस दौरान नोस्कोवा दबाव में दिखाई दीं। कैमरों में वह दर्शकों के शोर से बचने के लिए कानों में उंगलियां डालती और चेंजओवर के समय तौलिये से अपना चेहरा ढंकती हुई नजर आईं।
निर्णायक तीसरे सेट में दोनों खिलाड़ियों के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिली। हालांकि इस बार नोस्कोवा ने मानसिक मजबूती का परिचय दिया और महत्वपूर्ण मौकों पर बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए 6-3 से सेट जीत लिया। जैसे ही उन्होंने चैंपियनशिप प्वाइंट अपने नाम किया, वह कोर्ट पर ही बैठ गईं और भावुक होकर अपनी खुशी के आंसू नहीं रोक सकीं। सेंटर कोर्ट तालियों की गूंज से भर उठा और दर्शकों ने नई चैंपियन का जोरदार स्वागत किया।
इस जीत के साथ लिंडा नोस्कोवा को 36 लाख पाउंड (करीब 38.5 करोड़ रुपये) की पुरस्कार राशि मिली। इसके अलावा वह पहली बार महिला एकल विश्व रैंकिंग में करियर की सर्वश्रेष्ठ सातवीं रैंकिंग पर पहुंच जाएंगी। यह उपलब्धि उनके लगातार बेहतर प्रदर्शन और मेहनत का परिणाम मानी जा रही है।
लिंडा नोस्कोवा पिछले चार वर्षों में विंबलडन महिला सिंगल्स का खिताब जीतने वाली तीसरी चेक खिलाड़ी बन गई हैं। इससे पहले 2023 में मार्केटा वोंद्रोसोवा और 2024 में बारबोरा क्रेजिकोवा ने यह उपलब्धि हासिल की थी। इससे एक बार फिर साबित हुआ कि हाल के वर्षों में महिला टेनिस में चेक गणराज्य की खिलाड़ियों का दबदबा लगातार मजबूत हुआ है।
ट्रॉफी जीतने के बाद पुरस्कार समारोह के दौरान नोस्कोवा भावुक हो गईं। उन्होंने अपनी स्पीच के दौरान अपनी दिवंगत मां इवाना को याद किया। उन्होंने आसमान की ओर फ्लाइंग किस भेजते हुए कहा कि दो वर्ष पहले विंबलडन की शुरुआत से ठीक पहले उनकी मां का निधन हो गया था। उन्होंने कहा कि अगर उनकी मां का साथ और प्रेरणा नहीं होती तो वह आज यहां तक नहीं पहुंच पातीं। उन्होंने अपने पिता का भी विशेष रूप से धन्यवाद किया, जो उड़ान से डरने के बावजूद उन्हें खेलते देखने लंदन पहुंचे।
दूसरी ओर, फाइनल में हारने वाली कैरोलीना मुहोवा ने भी अपने संबोधन से सभी का दिल जीत लिया। उपविजेता ट्रॉफी लेते हुए उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि अब लिंडा उनकी "पूर्व दोस्त" बन गई हैं। यह कहते हुए उन्होंने मजाकिया अंदाज में माहौल हल्का कर दिया। इसके बाद उन्होंने गंभीर होकर कहा कि लिंडा ने पूरे दबाव में जिस तरह का खेल दिखाया, वह इस जीत की पूरी तरह हकदार हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में वह फिर किसी ग्रैंड स्लैम फाइनल में पहुंचकर खिताब जीतने का सपना जरूर पूरा करेंगी।
मुहोवा का यह प्रदर्शन भी काफी सराहनीय रहा, क्योंकि पिछले कुछ समय से वह कलाई की गंभीर चोट से जूझ रही थीं। चोट के कारण उन्हें कई टूर्नामेंट से बाहर रहना पड़ा था और एक समय उन्हें सिंगल-हैंडेड बैकहैंड के साथ खेलना पड़ा था। इसके बावजूद विंबलडन फाइनल तक पहुंचना उनके संघर्ष और जज्बे को दर्शाता है।
लिंडा नोस्कोवा की इस खिताबी जीत की सबसे खास बात यह भी रही कि उन्होंने पूरे टूर्नामेंट में कई मुश्किल परिस्थितियों से उबरकर सफलता हासिल की। तीसरे दौर में रोमानिया की सोराना सिर्स्टिया के खिलाफ वह मैच पॉइंट बचाकर मुकाबला जीतने में सफल रही थीं। इसके बाद उन्होंने लगातार शानदार प्रदर्शन जारी रखा और आखिरकार ट्रॉफी अपने नाम कर ली।
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21 साल की लिंडा नोस्कोवा ने रचा इतिहास, पहली बार जीता विंबलडन महिला सिंगल्स खिताब
स्पोर्ट्स डेस्क
21 वर्षीय चेक टेनिस स्टार लिंडा नोस्कोवा ने विंबलडन 2026 महिला सिंगल्स का खिताब जीतकर अपने करियर की सबसे बड़ी उपलब्धि हासिल कर ली है। ऑल इंग्लैंड क्लब के प्रतिष्ठित सेंटर कोर्ट पर खेले गए फाइनल मुकाबले में उन्होंने अपनी ही हमवतन और पेरिस ओलंपिक डबल्स पार्टनर कैरोलीना मुहोवा को 6-2, 5-7, 6-3 से हराकर पहली बार ग्रैंड स्लैम चैंपियन बनने का सपना पूरा किया। इस जीत के साथ नोस्कोवा ने न केवल विंबलडन का प्रतिष्ठित खिताब अपने नाम किया, बल्कि इतिहास के पन्नों में भी अपनी जगह दर्ज करा ली।
यह मुकाबला कई मायनों में ऐतिहासिक रहा। विंबलडन के लंबे इतिहास में पहली बार महिला सिंगल्स का फाइनल दो चेक खिलाड़ियों के बीच खेला गया। दोनों खिलाड़ियों ने शानदार टेनिस का प्रदर्शन किया, लेकिन निर्णायक सेट में लिंडा नोस्कोवा ने बेहतर संयम और आक्रामक खेल का परिचय देते हुए मुकाबला अपने नाम कर लिया।
फाइनल की शुरुआत से ही नोस्कोवा आत्मविश्वास से भरी नजर आईं। उन्होंने पहले सेट में दमदार सर्विस और सटीक ग्राउंडस्ट्रोक्स के दम पर कैरोलीना मुहोवा को ज्यादा मौके नहीं दिए। केवल कुछ ही समय में उन्होंने पहला सेट 6-2 से अपने नाम कर लिया और मुकाबले पर मजबूत पकड़ बना ली।
दूसरे सेट में भी ऐसा लग रहा था कि मुकाबला जल्द समाप्त हो जाएगा। नोस्कोवा 5-2 की बढ़त के साथ जीत से केवल एक गेम दूर थीं। लेकिन यहीं से कैरोलीना मुहोवा ने शानदार वापसी की। उन्होंने लगातार पांच गेम जीतते हुए दूसरा सेट 7-5 से अपने नाम कर लिया। इस दौरान नोस्कोवा दबाव में दिखाई दीं। कैमरों में वह दर्शकों के शोर से बचने के लिए कानों में उंगलियां डालती और चेंजओवर के समय तौलिये से अपना चेहरा ढंकती हुई नजर आईं।
निर्णायक तीसरे सेट में दोनों खिलाड़ियों के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिली। हालांकि इस बार नोस्कोवा ने मानसिक मजबूती का परिचय दिया और महत्वपूर्ण मौकों पर बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए 6-3 से सेट जीत लिया। जैसे ही उन्होंने चैंपियनशिप प्वाइंट अपने नाम किया, वह कोर्ट पर ही बैठ गईं और भावुक होकर अपनी खुशी के आंसू नहीं रोक सकीं। सेंटर कोर्ट तालियों की गूंज से भर उठा और दर्शकों ने नई चैंपियन का जोरदार स्वागत किया।
इस जीत के साथ लिंडा नोस्कोवा को 36 लाख पाउंड (करीब 38.5 करोड़ रुपये) की पुरस्कार राशि मिली। इसके अलावा वह पहली बार महिला एकल विश्व रैंकिंग में करियर की सर्वश्रेष्ठ सातवीं रैंकिंग पर पहुंच जाएंगी। यह उपलब्धि उनके लगातार बेहतर प्रदर्शन और मेहनत का परिणाम मानी जा रही है।
लिंडा नोस्कोवा पिछले चार वर्षों में विंबलडन महिला सिंगल्स का खिताब जीतने वाली तीसरी चेक खिलाड़ी बन गई हैं। इससे पहले 2023 में मार्केटा वोंद्रोसोवा और 2024 में बारबोरा क्रेजिकोवा ने यह उपलब्धि हासिल की थी। इससे एक बार फिर साबित हुआ कि हाल के वर्षों में महिला टेनिस में चेक गणराज्य की खिलाड़ियों का दबदबा लगातार मजबूत हुआ है।
ट्रॉफी जीतने के बाद पुरस्कार समारोह के दौरान नोस्कोवा भावुक हो गईं। उन्होंने अपनी स्पीच के दौरान अपनी दिवंगत मां इवाना को याद किया। उन्होंने आसमान की ओर फ्लाइंग किस भेजते हुए कहा कि दो वर्ष पहले विंबलडन की शुरुआत से ठीक पहले उनकी मां का निधन हो गया था। उन्होंने कहा कि अगर उनकी मां का साथ और प्रेरणा नहीं होती तो वह आज यहां तक नहीं पहुंच पातीं। उन्होंने अपने पिता का भी विशेष रूप से धन्यवाद किया, जो उड़ान से डरने के बावजूद उन्हें खेलते देखने लंदन पहुंचे।
दूसरी ओर, फाइनल में हारने वाली कैरोलीना मुहोवा ने भी अपने संबोधन से सभी का दिल जीत लिया। उपविजेता ट्रॉफी लेते हुए उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि अब लिंडा उनकी "पूर्व दोस्त" बन गई हैं। यह कहते हुए उन्होंने मजाकिया अंदाज में माहौल हल्का कर दिया। इसके बाद उन्होंने गंभीर होकर कहा कि लिंडा ने पूरे दबाव में जिस तरह का खेल दिखाया, वह इस जीत की पूरी तरह हकदार हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में वह फिर किसी ग्रैंड स्लैम फाइनल में पहुंचकर खिताब जीतने का सपना जरूर पूरा करेंगी।
मुहोवा का यह प्रदर्शन भी काफी सराहनीय रहा, क्योंकि पिछले कुछ समय से वह कलाई की गंभीर चोट से जूझ रही थीं। चोट के कारण उन्हें कई टूर्नामेंट से बाहर रहना पड़ा था और एक समय उन्हें सिंगल-हैंडेड बैकहैंड के साथ खेलना पड़ा था। इसके बावजूद विंबलडन फाइनल तक पहुंचना उनके संघर्ष और जज्बे को दर्शाता है।
लिंडा नोस्कोवा की इस खिताबी जीत की सबसे खास बात यह भी रही कि उन्होंने पूरे टूर्नामेंट में कई मुश्किल परिस्थितियों से उबरकर सफलता हासिल की। तीसरे दौर में रोमानिया की सोराना सिर्स्टिया के खिलाफ वह मैच पॉइंट बचाकर मुकाबला जीतने में सफल रही थीं। इसके बाद उन्होंने लगातार शानदार प्रदर्शन जारी रखा और आखिरकार ट्रॉफी अपने नाम कर ली।
