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रायपुर में जिला शिक्षा अधिकारी का औचक निरीक्षण, स्कूलों में मिलीं खामियां; समय पर सिलेबस पूरा कराने के दिए निर्देश
रायपुर,(छ.ग.)
धरसींवा विकासखंड के सरकारी स्कूलों का किया निरीक्षण, शिक्षकों की उपस्थिति, साफ-सफाई और शैक्षणिक व्यवस्था की समीक्षा; छात्राओं को साइकिल भी वितरित की
रायपुर जिले में सरकारी स्कूलों की शैक्षणिक व्यवस्था को बेहतर बनाने के उद्देश्य से जिला प्रशासन ने निरीक्षण अभियान तेज कर दिया है। कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह के निर्देश पर जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) ने शनिवार को धरसींवा विकासखंड के विभिन्न शासकीय विद्यालयों का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान स्कूलों की साफ-सफाई, शिक्षकों की उपस्थिति, विद्यार्थियों की पढ़ाई, वीएसके ऐप में दर्ज जानकारी तथा अन्य शैक्षणिक व्यवस्थाओं की विस्तार से समीक्षा की गई। इस दौरान कई कमियां सामने आने पर संबंधित प्राचार्यों और अधिकारियों को आवश्यक सुधार के निर्देश दिए गए।
निरीक्षण की शुरुआत भनपुरी स्थित काशीराम शर्मा शासकीय उत्कृष्ट हिंदी माध्यम विद्यालय (सेजेस) से हुई। यहां पहुंचकर जिला शिक्षा अधिकारी ने विद्यालय की प्रशासनिक और शैक्षणिक व्यवस्थाओं का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान उन्हें तीन शिक्षकों के अवकाश आवेदन मैनुअल रूप में प्रस्तुत किए गए, जिस पर उन्होंने नाराजगी जताई। उन्होंने अधिकारियों से पूछा कि जब अवकाश आवेदन की ऑनलाइन व्यवस्था उपलब्ध है, तब मैनुअल आवेदन क्यों स्वीकार किए गए।
डीईओ ने विद्यालय प्रशासन को निर्देश दिए कि भविष्य में सभी अवकाश आवेदन निर्धारित ऑनलाइन प्रक्रिया के माध्यम से ही किए जाएं। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई शिक्षक बिना अनुमति के अनुपस्थित रहता है तो उसकी जानकारी तत्काल जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय को भेजी जाए, ताकि आवश्यक प्रशासनिक कार्रवाई की जा सके।
निरीक्षण के दौरान एक व्याख्याता के लंबे समय से अनुपस्थित रहने का मामला भी सामने आया। इस पर जिला शिक्षा अधिकारी ने संबंधित अधिकारियों से विस्तृत जांच रिपोर्ट तैयार कर शीघ्र कार्यालय भेजने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि शैक्षणिक कार्य किसी भी स्थिति में प्रभावित नहीं होना चाहिए और नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करना सभी शिक्षकों की जिम्मेदारी है।
विद्यालय में साफ-सफाई की व्यवस्था का भी निरीक्षण किया गया। डीईओ ने परिसर, कक्षाओं, शौचालयों और पेयजल व्यवस्था का जायजा लिया। जहां-जहां कमियां मिलीं, वहां तत्काल सुधार करने के निर्देश दिए गए। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना स्कूल प्रबंधन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। बेहतर शैक्षणिक माहौल के लिए साफ-सफाई और अनुशासन दोनों आवश्यक हैं।
निरीक्षण के दौरान जिला शिक्षा अधिकारी ने कक्षा 10वीं और 12वीं के विद्यार्थियों से भी संवाद किया। उन्होंने विद्यार्थियों से बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी, पढ़ाई की स्थिति और विषयवार कठिनाइयों के बारे में जानकारी ली। विद्यार्थियों को नियमित अध्ययन करने, समय प्रबंधन अपनाने और प्रत्येक विषय पर बराबर ध्यान देने की सलाह दी गई। विशेष रूप से गणित और जीवविज्ञान जैसे विषयों की तैयारी मजबूत करने पर जोर दिया गया, ताकि बोर्ड परीक्षाओं में बेहतर परिणाम प्राप्त किए जा सकें।
उन्होंने शिक्षकों से कहा कि बोर्ड परीक्षाओं को ध्यान में रखते हुए अतिरिक्त कक्षाएं, नियमित टेस्ट और विषयवार पुनरावृत्ति की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। कमजोर विद्यार्थियों की अलग से पहचान कर उन्हें अतिरिक्त मार्गदर्शन देने के भी निर्देश दिए गए। डीईओ ने कहा कि बेहतर परीक्षा परिणाम केवल विद्यार्थियों की मेहनत से नहीं बल्कि शिक्षकों की नियमित निगरानी और मार्गदर्शन से भी संभव होते हैं।
इसके बाद जिला शिक्षा अधिकारी मांढर कॉलोनी स्थित शहीद योगेंद्र शर्मा शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय पहुंचे। यहां उन्होंने शाला प्रवेशोत्सव कार्यक्रम में भाग लिया और नए विद्यार्थियों का स्वागत किया। इस अवसर पर छात्राओं को साइकिल वितरित की गई, जिससे उन्हें विद्यालय आने-जाने में सुविधा मिल सके। सरकार की इस योजना का उद्देश्य बालिकाओं की शिक्षा को प्रोत्साहित करना और स्कूल छोड़ने की दर को कम करना है।
कार्यक्रम के दौरान जिला शिक्षा अधिकारी ने विद्यालय परिसर में पौधरोपण भी किया और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। उन्होंने विद्यार्थियों से पौधों की नियमित देखभाल करने का आग्रह करते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है। स्कूलों में हरियाली बढ़ाने से विद्यार्थियों को स्वच्छ वातावरण मिलेगा और पर्यावरण के प्रति जागरूकता भी बढ़ेगी।
निरीक्षण के दौरान डीईओ ने शिक्षकों के साथ बैठक कर शैक्षणिक गतिविधियों की समीक्षा की। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि निर्धारित समय सीमा के भीतर सभी विषयों का सिलेबस पूरा कराया जाए। साथ ही नियमित रूप से कक्षाओं की मॉनिटरिंग की जाए, ताकि किसी भी विद्यार्थी की पढ़ाई प्रभावित न हो। उन्होंने कहा कि सिलेबस पूरा होने के बाद पुनरावृत्ति और मॉडल टेस्ट पर विशेष ध्यान दिया जाए।
उन्होंने वीएसके ऐप में दर्ज जानकारी की भी जांच की और रिकॉर्ड समय पर अपडेट करने के निर्देश दिए। जिला शिक्षा अधिकारी ने कहा कि डिजिटल रिकॉर्ड की शुद्धता और समय पर जानकारी दर्ज करना भी शिक्षकों की जिम्मेदारी है। किसी भी प्रकार की लापरवाही मिलने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
जिला प्रशासन का कहना है कि भविष्य में भी सरकारी स्कूलों का इसी तरह नियमित निरीक्षण किया जाएगा। इसका उद्देश्य केवल कमियों को उजागर करना नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार लाना और विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराना है। निरीक्षण के माध्यम से शिक्षकों की जवाबदेही बढ़ाने और विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है।
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रायपुर में जिला शिक्षा अधिकारी का औचक निरीक्षण, स्कूलों में मिलीं खामियां; समय पर सिलेबस पूरा कराने के दिए निर्देश
रायपुर,(छ.ग.)
रायपुर जिले में सरकारी स्कूलों की शैक्षणिक व्यवस्था को बेहतर बनाने के उद्देश्य से जिला प्रशासन ने निरीक्षण अभियान तेज कर दिया है। कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह के निर्देश पर जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) ने शनिवार को धरसींवा विकासखंड के विभिन्न शासकीय विद्यालयों का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान स्कूलों की साफ-सफाई, शिक्षकों की उपस्थिति, विद्यार्थियों की पढ़ाई, वीएसके ऐप में दर्ज जानकारी तथा अन्य शैक्षणिक व्यवस्थाओं की विस्तार से समीक्षा की गई। इस दौरान कई कमियां सामने आने पर संबंधित प्राचार्यों और अधिकारियों को आवश्यक सुधार के निर्देश दिए गए।
निरीक्षण की शुरुआत भनपुरी स्थित काशीराम शर्मा शासकीय उत्कृष्ट हिंदी माध्यम विद्यालय (सेजेस) से हुई। यहां पहुंचकर जिला शिक्षा अधिकारी ने विद्यालय की प्रशासनिक और शैक्षणिक व्यवस्थाओं का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान उन्हें तीन शिक्षकों के अवकाश आवेदन मैनुअल रूप में प्रस्तुत किए गए, जिस पर उन्होंने नाराजगी जताई। उन्होंने अधिकारियों से पूछा कि जब अवकाश आवेदन की ऑनलाइन व्यवस्था उपलब्ध है, तब मैनुअल आवेदन क्यों स्वीकार किए गए।
डीईओ ने विद्यालय प्रशासन को निर्देश दिए कि भविष्य में सभी अवकाश आवेदन निर्धारित ऑनलाइन प्रक्रिया के माध्यम से ही किए जाएं। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई शिक्षक बिना अनुमति के अनुपस्थित रहता है तो उसकी जानकारी तत्काल जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय को भेजी जाए, ताकि आवश्यक प्रशासनिक कार्रवाई की जा सके।
निरीक्षण के दौरान एक व्याख्याता के लंबे समय से अनुपस्थित रहने का मामला भी सामने आया। इस पर जिला शिक्षा अधिकारी ने संबंधित अधिकारियों से विस्तृत जांच रिपोर्ट तैयार कर शीघ्र कार्यालय भेजने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि शैक्षणिक कार्य किसी भी स्थिति में प्रभावित नहीं होना चाहिए और नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करना सभी शिक्षकों की जिम्मेदारी है।
विद्यालय में साफ-सफाई की व्यवस्था का भी निरीक्षण किया गया। डीईओ ने परिसर, कक्षाओं, शौचालयों और पेयजल व्यवस्था का जायजा लिया। जहां-जहां कमियां मिलीं, वहां तत्काल सुधार करने के निर्देश दिए गए। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना स्कूल प्रबंधन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। बेहतर शैक्षणिक माहौल के लिए साफ-सफाई और अनुशासन दोनों आवश्यक हैं।
निरीक्षण के दौरान जिला शिक्षा अधिकारी ने कक्षा 10वीं और 12वीं के विद्यार्थियों से भी संवाद किया। उन्होंने विद्यार्थियों से बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी, पढ़ाई की स्थिति और विषयवार कठिनाइयों के बारे में जानकारी ली। विद्यार्थियों को नियमित अध्ययन करने, समय प्रबंधन अपनाने और प्रत्येक विषय पर बराबर ध्यान देने की सलाह दी गई। विशेष रूप से गणित और जीवविज्ञान जैसे विषयों की तैयारी मजबूत करने पर जोर दिया गया, ताकि बोर्ड परीक्षाओं में बेहतर परिणाम प्राप्त किए जा सकें।
उन्होंने शिक्षकों से कहा कि बोर्ड परीक्षाओं को ध्यान में रखते हुए अतिरिक्त कक्षाएं, नियमित टेस्ट और विषयवार पुनरावृत्ति की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। कमजोर विद्यार्थियों की अलग से पहचान कर उन्हें अतिरिक्त मार्गदर्शन देने के भी निर्देश दिए गए। डीईओ ने कहा कि बेहतर परीक्षा परिणाम केवल विद्यार्थियों की मेहनत से नहीं बल्कि शिक्षकों की नियमित निगरानी और मार्गदर्शन से भी संभव होते हैं।
इसके बाद जिला शिक्षा अधिकारी मांढर कॉलोनी स्थित शहीद योगेंद्र शर्मा शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय पहुंचे। यहां उन्होंने शाला प्रवेशोत्सव कार्यक्रम में भाग लिया और नए विद्यार्थियों का स्वागत किया। इस अवसर पर छात्राओं को साइकिल वितरित की गई, जिससे उन्हें विद्यालय आने-जाने में सुविधा मिल सके। सरकार की इस योजना का उद्देश्य बालिकाओं की शिक्षा को प्रोत्साहित करना और स्कूल छोड़ने की दर को कम करना है।
कार्यक्रम के दौरान जिला शिक्षा अधिकारी ने विद्यालय परिसर में पौधरोपण भी किया और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। उन्होंने विद्यार्थियों से पौधों की नियमित देखभाल करने का आग्रह करते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है। स्कूलों में हरियाली बढ़ाने से विद्यार्थियों को स्वच्छ वातावरण मिलेगा और पर्यावरण के प्रति जागरूकता भी बढ़ेगी।
निरीक्षण के दौरान डीईओ ने शिक्षकों के साथ बैठक कर शैक्षणिक गतिविधियों की समीक्षा की। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि निर्धारित समय सीमा के भीतर सभी विषयों का सिलेबस पूरा कराया जाए। साथ ही नियमित रूप से कक्षाओं की मॉनिटरिंग की जाए, ताकि किसी भी विद्यार्थी की पढ़ाई प्रभावित न हो। उन्होंने कहा कि सिलेबस पूरा होने के बाद पुनरावृत्ति और मॉडल टेस्ट पर विशेष ध्यान दिया जाए।
उन्होंने वीएसके ऐप में दर्ज जानकारी की भी जांच की और रिकॉर्ड समय पर अपडेट करने के निर्देश दिए। जिला शिक्षा अधिकारी ने कहा कि डिजिटल रिकॉर्ड की शुद्धता और समय पर जानकारी दर्ज करना भी शिक्षकों की जिम्मेदारी है। किसी भी प्रकार की लापरवाही मिलने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
जिला प्रशासन का कहना है कि भविष्य में भी सरकारी स्कूलों का इसी तरह नियमित निरीक्षण किया जाएगा। इसका उद्देश्य केवल कमियों को उजागर करना नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार लाना और विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराना है। निरीक्षण के माध्यम से शिक्षकों की जवाबदेही बढ़ाने और विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है।
