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अजिंक्य रहाणे ने इंटरनेशनल क्रिकेट को कहा अलविदा, भावुक VIDEO में बोले- अब आगे बढ़ने का वक्त
स्पोर्ट्स डेस्क
15 साल के अंतरराष्ट्रीय सफर पर लगाया विराम; ऑस्ट्रेलिया में ऐतिहासिक टेस्ट सीरीज जीत के नायक रहे, मेलबर्न में कप्तानी पारी खेलकर जड़ा था शतक
भारतीय क्रिकेट के अनुभवी बल्लेबाज और पूर्व कप्तान अजिंक्य रहाणे ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास की घोषणा कर दी है। गुरुवार को उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर अपने फैसले की जानकारी दी। वीडियो में रहाणे भावुक नजर आए और उन्होंने अपने लंबे क्रिकेट सफर को याद किया। रहाणे ने कहा कि जिंदगी में हर सफर की शुरुआत के साथ उसका अंत भी तय होता है और अब उन्हें लगता है कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से आगे बढ़ने का सही समय आ गया है। उन्होंने अपने फैसले को बल्लेबाजी की टाइमिंग से जोड़ते हुए कहा कि मैदान पर जिस तरह सही समय का महत्व होता है, उसी तरह जीवन के बड़े फैसलों में भी सही वक्त को पहचानना जरूरी है। हालांकि, रहाणे ने यह भी स्पष्ट किया कि भारतीय क्रिकेटर के रूप में उनका अध्याय खत्म हो रहा है, लेकिन क्रिकेट से उनका रिश्ता आगे भी बना रहेगा। वह भविष्य में युवा खिलाड़ियों के साथ अपने अनुभव साझा करना चाहते हैं और नई पीढ़ी के क्रिकेटरों की मदद करने की इच्छा रखते हैं।
अजिंक्य रहाणे का अंतरराष्ट्रीय करियर करीब 15 साल तक चला। उन्होंने भारत के लिए 85 टेस्ट, 90 वनडे और 20 टी-20 इंटरनेशनल मुकाबले खेले। रहाणे ने अगस्त 2011 में इंग्लैंड के खिलाफ टी-20 इंटरनेशनल से भारतीय टीम में कदम रखा था। इसके कुछ दिन बाद सितंबर 2011 में इंग्लैंड के खिलाफ ही उन्होंने अपना पहला वनडे मुकाबला खेला। टेस्ट क्रिकेट में उन्हें मार्च 2013 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ दिल्ली में डेब्यू करने का मौका मिला। इसके बाद वह लंबे समय तक भारतीय टेस्ट टीम के मध्यक्रम की महत्वपूर्ण कड़ी बने रहे। खासकर विदेशी परिस्थितियों में उनकी तकनीक और धैर्य ने उन्हें अलग पहचान दिलाई। ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड और दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों में तेज गेंदबाजों के खिलाफ खेली गई उनकी कई पारियां भारतीय क्रिकेट प्रशंसकों के लिए यादगार रहीं।
रहाणे के करियर का सबसे चर्चित अध्याय 2020-21 का ऑस्ट्रेलिया दौरा रहा। एडिलेड में खेले गए पहले टेस्ट की दूसरी पारी में भारतीय टीम सिर्फ 36 रन पर सिमट गई थी। इसके बाद विराट कोहली स्वदेश लौट गए और बाकी सीरीज के लिए कप्तानी रहाणे को सौंप दी गई। टीम पर भारी दबाव था, लेकिन रहाणे ने मेलबर्न के बॉक्सिंग डे टेस्ट में कप्तानी के साथ बल्लेबाजी की जिम्मेदारी भी संभाली। उन्होंने शानदार शतक लगाया और भारत को मुकाबले में वापसी कराई। उनकी इस पारी के दम पर टीम इंडिया ने मेलबर्न टेस्ट जीतकर सीरीज बराबर कर ली। इसके बाद सिडनी में भारतीय टीम ने मुश्किल परिस्थितियों में टेस्ट ड्रॉ कराया और फिर ब्रिस्बेन के गाबा मैदान पर ऐतिहासिक जीत दर्ज की। भारत ने सीरीज 2-1 से अपने नाम की और ऑस्ट्रेलिया के गाबा में लंबे समय से चले आ रहे अजेय रिकॉर्ड को भी समाप्त कर दिया। इस पूरी सीरीज में रहाणे की शांत कप्तानी और खिलाड़ियों पर भरोसा उनकी सबसे बड़ी ताकत के रूप में सामने आया।
कप्तान के तौर पर भी रहाणे का टेस्ट रिकॉर्ड प्रभावशाली रहा। उन्होंने छह टेस्ट मैचों में भारत की कप्तानी की, जिनमें चार मुकाबलों में टीम को जीत मिली और दो मैच ड्रॉ रहे। उनकी कप्तानी में भारत ने कोई टेस्ट मैच नहीं गंवाया। वनडे में भी उन्हें तीन मुकाबलों में टीम की कमान संभालने का अवसर मिला और भारत ने तीनों मैच जीते। वहीं टी-20 इंटरनेशनल में उन्होंने दो मुकाबलों में कप्तानी की, जिसमें एक जीत और एक हार मिली। हालांकि नियमित कप्तान के रूप में उनका कार्यकाल लंबा नहीं रहा, लेकिन ऑस्ट्रेलिया में मिली ऐतिहासिक जीत ने उन्हें भारतीय क्रिकेट के यादगार कप्तानों की सूची में जगह दिलाई।
रहाणे की पहचान सिर्फ कप्तानी तक सीमित नहीं रही। विदेशी मैदानों पर कठिन परिस्थितियों में रन बनाने की उनकी क्षमता को लंबे समय तक भारतीय टेस्ट टीम की बड़ी ताकत माना गया। मेलबर्न के अलावा इंग्लैंड में लॉर्ड्स की उनकी शतकीय पारी भी उनके करियर की प्रमुख उपलब्धियों में शामिल रही। मध्यक्रम में जरूरत के अनुसार बल्लेबाजी करने के साथ वह स्लिप के भरोसेमंद फील्डर भी रहे। टीम से बाहर होने के बाद भी उन्होंने घरेलू क्रिकेट खेलना जारी रखा और प्रदर्शन के दम पर 2023 में भारतीय टेस्ट टीम में वापसी की। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप फाइनल में उन्होंने पहली पारी में 89 रन बनाए और मुश्किल स्थिति में भारतीय बल्लेबाजी को संभाला।
जुलाई 2023 में वेस्टइंडीज के खिलाफ पोर्ट ऑफ स्पेन में खेला गया टेस्ट रहाणे का भारत के लिए आखिरी टेस्ट मुकाबला रहा। वनडे टीम में वह आखिरी बार फरवरी 2018 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ उतरे थे, जबकि टी-20 इंटरनेशनल में उनका अंतिम मुकाबला अगस्त 2016 में वेस्टइंडीज के खिलाफ था। सीमित ओवर क्रिकेट से लंबे समय तक बाहर रहने के बावजूद रहाणे घरेलू क्रिकेट और फ्रेंचाइजी क्रिकेट में सक्रिय रहे।
IPL में भी अजिंक्य रहाणे का सफर काफी लंबा रहा है। उन्होंने मुंबई इंडियंस, राजस्थान रॉयल्स, राइजिंग पुणे सुपरजायंट, दिल्ली कैपिटल्स, चेन्नई सुपर किंग्स और कोलकाता नाइट राइडर्स जैसी टीमों का प्रतिनिधित्व किया। IPL में 200 से ज्यादा मुकाबले खेलते हुए उन्होंने पांच हजार से अधिक रन बनाए हैं। राजस्थान रॉयल्स के साथ वह लंबे समय तक प्रमुख बल्लेबाज की भूमिका में रहे, जबकि अपने करियर के बाद के वर्षों में उन्होंने बल्लेबाजी का अंदाज बदलकर तेजी से रन बनाने की क्षमता भी दिखाई। संन्यास के ऐलान के साथ रहाणे ने संकेत दिया है कि क्रिकेट के मैदान से मिला अनुभव अब वह अगली पीढ़ी तक पहुंचाना चाहते हैं।
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अजिंक्य रहाणे ने इंटरनेशनल क्रिकेट को कहा अलविदा, भावुक VIDEO में बोले- अब आगे बढ़ने का वक्त
स्पोर्ट्स डेस्क
भारतीय क्रिकेट के अनुभवी बल्लेबाज और पूर्व कप्तान अजिंक्य रहाणे ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास की घोषणा कर दी है। गुरुवार को उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर अपने फैसले की जानकारी दी। वीडियो में रहाणे भावुक नजर आए और उन्होंने अपने लंबे क्रिकेट सफर को याद किया। रहाणे ने कहा कि जिंदगी में हर सफर की शुरुआत के साथ उसका अंत भी तय होता है और अब उन्हें लगता है कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से आगे बढ़ने का सही समय आ गया है। उन्होंने अपने फैसले को बल्लेबाजी की टाइमिंग से जोड़ते हुए कहा कि मैदान पर जिस तरह सही समय का महत्व होता है, उसी तरह जीवन के बड़े फैसलों में भी सही वक्त को पहचानना जरूरी है। हालांकि, रहाणे ने यह भी स्पष्ट किया कि भारतीय क्रिकेटर के रूप में उनका अध्याय खत्म हो रहा है, लेकिन क्रिकेट से उनका रिश्ता आगे भी बना रहेगा। वह भविष्य में युवा खिलाड़ियों के साथ अपने अनुभव साझा करना चाहते हैं और नई पीढ़ी के क्रिकेटरों की मदद करने की इच्छा रखते हैं।
अजिंक्य रहाणे का अंतरराष्ट्रीय करियर करीब 15 साल तक चला। उन्होंने भारत के लिए 85 टेस्ट, 90 वनडे और 20 टी-20 इंटरनेशनल मुकाबले खेले। रहाणे ने अगस्त 2011 में इंग्लैंड के खिलाफ टी-20 इंटरनेशनल से भारतीय टीम में कदम रखा था। इसके कुछ दिन बाद सितंबर 2011 में इंग्लैंड के खिलाफ ही उन्होंने अपना पहला वनडे मुकाबला खेला। टेस्ट क्रिकेट में उन्हें मार्च 2013 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ दिल्ली में डेब्यू करने का मौका मिला। इसके बाद वह लंबे समय तक भारतीय टेस्ट टीम के मध्यक्रम की महत्वपूर्ण कड़ी बने रहे। खासकर विदेशी परिस्थितियों में उनकी तकनीक और धैर्य ने उन्हें अलग पहचान दिलाई। ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड और दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों में तेज गेंदबाजों के खिलाफ खेली गई उनकी कई पारियां भारतीय क्रिकेट प्रशंसकों के लिए यादगार रहीं।
रहाणे के करियर का सबसे चर्चित अध्याय 2020-21 का ऑस्ट्रेलिया दौरा रहा। एडिलेड में खेले गए पहले टेस्ट की दूसरी पारी में भारतीय टीम सिर्फ 36 रन पर सिमट गई थी। इसके बाद विराट कोहली स्वदेश लौट गए और बाकी सीरीज के लिए कप्तानी रहाणे को सौंप दी गई। टीम पर भारी दबाव था, लेकिन रहाणे ने मेलबर्न के बॉक्सिंग डे टेस्ट में कप्तानी के साथ बल्लेबाजी की जिम्मेदारी भी संभाली। उन्होंने शानदार शतक लगाया और भारत को मुकाबले में वापसी कराई। उनकी इस पारी के दम पर टीम इंडिया ने मेलबर्न टेस्ट जीतकर सीरीज बराबर कर ली। इसके बाद सिडनी में भारतीय टीम ने मुश्किल परिस्थितियों में टेस्ट ड्रॉ कराया और फिर ब्रिस्बेन के गाबा मैदान पर ऐतिहासिक जीत दर्ज की। भारत ने सीरीज 2-1 से अपने नाम की और ऑस्ट्रेलिया के गाबा में लंबे समय से चले आ रहे अजेय रिकॉर्ड को भी समाप्त कर दिया। इस पूरी सीरीज में रहाणे की शांत कप्तानी और खिलाड़ियों पर भरोसा उनकी सबसे बड़ी ताकत के रूप में सामने आया।
कप्तान के तौर पर भी रहाणे का टेस्ट रिकॉर्ड प्रभावशाली रहा। उन्होंने छह टेस्ट मैचों में भारत की कप्तानी की, जिनमें चार मुकाबलों में टीम को जीत मिली और दो मैच ड्रॉ रहे। उनकी कप्तानी में भारत ने कोई टेस्ट मैच नहीं गंवाया। वनडे में भी उन्हें तीन मुकाबलों में टीम की कमान संभालने का अवसर मिला और भारत ने तीनों मैच जीते। वहीं टी-20 इंटरनेशनल में उन्होंने दो मुकाबलों में कप्तानी की, जिसमें एक जीत और एक हार मिली। हालांकि नियमित कप्तान के रूप में उनका कार्यकाल लंबा नहीं रहा, लेकिन ऑस्ट्रेलिया में मिली ऐतिहासिक जीत ने उन्हें भारतीय क्रिकेट के यादगार कप्तानों की सूची में जगह दिलाई।
रहाणे की पहचान सिर्फ कप्तानी तक सीमित नहीं रही। विदेशी मैदानों पर कठिन परिस्थितियों में रन बनाने की उनकी क्षमता को लंबे समय तक भारतीय टेस्ट टीम की बड़ी ताकत माना गया। मेलबर्न के अलावा इंग्लैंड में लॉर्ड्स की उनकी शतकीय पारी भी उनके करियर की प्रमुख उपलब्धियों में शामिल रही। मध्यक्रम में जरूरत के अनुसार बल्लेबाजी करने के साथ वह स्लिप के भरोसेमंद फील्डर भी रहे। टीम से बाहर होने के बाद भी उन्होंने घरेलू क्रिकेट खेलना जारी रखा और प्रदर्शन के दम पर 2023 में भारतीय टेस्ट टीम में वापसी की। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप फाइनल में उन्होंने पहली पारी में 89 रन बनाए और मुश्किल स्थिति में भारतीय बल्लेबाजी को संभाला।
जुलाई 2023 में वेस्टइंडीज के खिलाफ पोर्ट ऑफ स्पेन में खेला गया टेस्ट रहाणे का भारत के लिए आखिरी टेस्ट मुकाबला रहा। वनडे टीम में वह आखिरी बार फरवरी 2018 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ उतरे थे, जबकि टी-20 इंटरनेशनल में उनका अंतिम मुकाबला अगस्त 2016 में वेस्टइंडीज के खिलाफ था। सीमित ओवर क्रिकेट से लंबे समय तक बाहर रहने के बावजूद रहाणे घरेलू क्रिकेट और फ्रेंचाइजी क्रिकेट में सक्रिय रहे।
IPL में भी अजिंक्य रहाणे का सफर काफी लंबा रहा है। उन्होंने मुंबई इंडियंस, राजस्थान रॉयल्स, राइजिंग पुणे सुपरजायंट, दिल्ली कैपिटल्स, चेन्नई सुपर किंग्स और कोलकाता नाइट राइडर्स जैसी टीमों का प्रतिनिधित्व किया। IPL में 200 से ज्यादा मुकाबले खेलते हुए उन्होंने पांच हजार से अधिक रन बनाए हैं। राजस्थान रॉयल्स के साथ वह लंबे समय तक प्रमुख बल्लेबाज की भूमिका में रहे, जबकि अपने करियर के बाद के वर्षों में उन्होंने बल्लेबाजी का अंदाज बदलकर तेजी से रन बनाने की क्षमता भी दिखाई। संन्यास के ऐलान के साथ रहाणे ने संकेत दिया है कि क्रिकेट के मैदान से मिला अनुभव अब वह अगली पीढ़ी तक पहुंचाना चाहते हैं।
