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कांकेर में 56 सरपंचों ने दिया सामूहिक इस्तीफा, चक्काजाम करने की चेतावनी दी
कांकेर (छ.ग.)
कांकेर के अंतागढ़ ब्लॉक में 56 सरपंचों ने फंड और विकास कार्यों की मांग को लेकर इस्तीफा दिया, धरना जारी, चक्काजाम की चेतावनी।
छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में पंचायत व्यवस्था को लेकर एक बड़ा विरोध देखने को मिला है। अंतागढ़ ब्लॉक की 56 ग्राम पंचायतों के सरपंचों ने सामूहिक इस्तीफा देकर प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोला है। फंड की कमी, महीनों से मानदेय न मिलना और विकास कार्यों का ठप होना सरपंचों की नाराज़गी की वजह बनी है, जिसके चलते वे पिछले कुछ दिनों से धरने पर बैठे हुए हैं। गुरुवार को स्थिति और बिगड़ गई जब सरपंच संघ ने चक्काजाम की चेतावनी दे दी। इस पूरे घटनाक्रम के चलते इलाके में हलचल मच गई है और प्रशासनिक स्तर पर भी बेचैनी देखी जा रही है।
सूत्रों के मुताबिक, अंतागढ़ ब्लॉक के गोल्डन चौक पर सरपंच 18 मई से अनिश्चितकालीन धरने पर हैं। धरने में शामिल जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि पिछले साल से पंचायतों में किसी भी नए विकास कार्य को मंजूरी नहीं मिली है। कई योजनाएं अधूरी पड़ी हैं और गांवों में सड़क, नाली, पेयजल और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी काम पूरी तरह ठप हो गए हैं। सरपंचों का कहना है कि वे प्रशासन को लगातार ज्ञापन और पत्र भेजते रहे हैं, लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई। हालात यह हैं कि ग्रामीण अब पंचायत प्रतिनिधियों से सवाल पूछ रहे हैं और उनके पास जवाब नहीं है। कुछ सरपंचों ने यहां तक कहा है कि बिना बजट और स्वीकृति के गांवों का काम चलाना मुश्किल हो गया है।
धरने के दौरान सरपंचों ने प्रशासन पर पंचायतों की अनदेखी करने का आरोप लगाया और चेतावनी दी कि अगर जल्द फंड जारी नहीं किया गया तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। सामूहिक इस्तीफे के बाद स्थानीय प्रशासन सक्रिय हो गया है। सूत्रों के अनुसार, अधिकारियों ने सरपंच संघ से बातचीत की कोशिशें शुरू कर दी हैं, लेकिन अभी तक कोई ठोस समाधान निकलता नहीं दिख रहा है। दूसरी ओर, ग्रामीणों में भी इस मुद्दे पर नाराज़गी बढ़ती जा रही है। कई गांवों में विकास कार्य अधूरे पड़े हैं, जिससे लोगों को कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सरपंच संघ का कहना है कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो वे बड़े पैमाने पर आंदोलन की योजना बना सकते हैं और सड़क पर उतरकर चक्काजाम भी कर सकते हैं। इस समय, कांकेर का अंतागढ़ इलाका राजनीतिक और प्रशासनिक चर्चा का मुख्य केंद्र बना हुआ है।
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कांकेर में 56 सरपंचों ने दिया सामूहिक इस्तीफा, चक्काजाम करने की चेतावनी दी
कांकेर (छ.ग.)
छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में पंचायत व्यवस्था को लेकर एक बड़ा विरोध देखने को मिला है। अंतागढ़ ब्लॉक की 56 ग्राम पंचायतों के सरपंचों ने सामूहिक इस्तीफा देकर प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोला है। फंड की कमी, महीनों से मानदेय न मिलना और विकास कार्यों का ठप होना सरपंचों की नाराज़गी की वजह बनी है, जिसके चलते वे पिछले कुछ दिनों से धरने पर बैठे हुए हैं। गुरुवार को स्थिति और बिगड़ गई जब सरपंच संघ ने चक्काजाम की चेतावनी दे दी। इस पूरे घटनाक्रम के चलते इलाके में हलचल मच गई है और प्रशासनिक स्तर पर भी बेचैनी देखी जा रही है।
सूत्रों के मुताबिक, अंतागढ़ ब्लॉक के गोल्डन चौक पर सरपंच 18 मई से अनिश्चितकालीन धरने पर हैं। धरने में शामिल जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि पिछले साल से पंचायतों में किसी भी नए विकास कार्य को मंजूरी नहीं मिली है। कई योजनाएं अधूरी पड़ी हैं और गांवों में सड़क, नाली, पेयजल और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी काम पूरी तरह ठप हो गए हैं। सरपंचों का कहना है कि वे प्रशासन को लगातार ज्ञापन और पत्र भेजते रहे हैं, लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई। हालात यह हैं कि ग्रामीण अब पंचायत प्रतिनिधियों से सवाल पूछ रहे हैं और उनके पास जवाब नहीं है। कुछ सरपंचों ने यहां तक कहा है कि बिना बजट और स्वीकृति के गांवों का काम चलाना मुश्किल हो गया है।
धरने के दौरान सरपंचों ने प्रशासन पर पंचायतों की अनदेखी करने का आरोप लगाया और चेतावनी दी कि अगर जल्द फंड जारी नहीं किया गया तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। सामूहिक इस्तीफे के बाद स्थानीय प्रशासन सक्रिय हो गया है। सूत्रों के अनुसार, अधिकारियों ने सरपंच संघ से बातचीत की कोशिशें शुरू कर दी हैं, लेकिन अभी तक कोई ठोस समाधान निकलता नहीं दिख रहा है। दूसरी ओर, ग्रामीणों में भी इस मुद्दे पर नाराज़गी बढ़ती जा रही है। कई गांवों में विकास कार्य अधूरे पड़े हैं, जिससे लोगों को कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सरपंच संघ का कहना है कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो वे बड़े पैमाने पर आंदोलन की योजना बना सकते हैं और सड़क पर उतरकर चक्काजाम भी कर सकते हैं। इस समय, कांकेर का अंतागढ़ इलाका राजनीतिक और प्रशासनिक चर्चा का मुख्य केंद्र बना हुआ है।
