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शुभेंदु अधिकारी के PA हत्याकांड में मिली बड़ी कामयाबी, CBI ने पकड़ा असली आरोपी
नेशनल डेस्क
चंद्रनाथ रथ हत्याकांड में CBI ने असली मास्टरमाइंड पकड़ा। गलत गिरफ्तारी का खुलासा, अब तक 4 आरोपी गिरफ्तार, जांच जारी।
पश्चिम बंगाल के राजनीतिक हलचलों में उस समय काफी हलचल मच गई जब शुभेंदु अधिकारी के निजी सहायक चंद्रनाथ रथ के हत्या मामले में सीबीआई ने बड़ा खुलासा किया। अब यह मामला एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। शुरुआती जांच में जहां स्थानीय पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठ रहे थे, वहीं अब पता चला है कि इस केस में पहचान में बड़ी गलती हुई थी और एक निर्दोष शख्स को गलत तरीके से गिरफ्तार कर लिया गया था। सीबीआई की जांच में असली साजिशकर्ता तक पहुंचने के बाद पूरा मामला बदल गया।
जानकारी के अनुसार, पहले बंगाल पुलिस के इनपुट पर तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया था। इनमें बिहार के बक्सर से मयंक मिश्रा और विक्की मौर्य थे, जबकि उत्तर प्रदेश के बलिया से राज सिंह नाम का एक व्यक्ति गिरफ्तार किया गया। बताया जा रहा है कि इस गिरफ्तारी के बाद उसे लगभग 13 दिनों तक हिरासत में रखा गया। लेकिन बाद में यह बड़ा तथ्य सामने आया कि जिस व्यक्ति को राज सिंह समझकर गिरफ्तार किया गया था, वह दरअसल गलत पहचान का शिकार था। उसके परिवार ने पहले ही दावा किया था कि वह घटना के समय यूपी के अयोध्या में मौजूद था, लेकिन शुरुआती जांच में इसका ध्यान नहीं दिया गया।
जैसे-जैसे सीबीआई मामले की जांच करती गई, परतें खुलती गईं। जब सीबीआई की टीम ने दोबारा पूरे नेटवर्क की जांच की तो पता चला कि असली साजिशकर्ता कोई और है। इसके बाद एजेंसी ने मुजफ्फरनगर से एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया, जिसकी पहचान राजकुमार के रूप में हुई है। जांच एजेंसी का कहना है कि यही इस पूरे हत्याकांड का मास्टरमाइंड है और वह लंबे समय से इस साजिश को अंजाम देने की तैयारी कर रहा था। इसके साथ ही पहले गिरफ्तार किए गए राज सिंह को कोर्ट ने रिहा कर दिया है, क्योंकि उसकी भूमिका इस मामले में साबित नहीं हो सकी।
इस बीच, जांच में एक और महत्वपूर्ण गिरफ्तारी भी सामने आई है। सीबीआई ने वाराणसी से विनय राय नाम के एक व्यक्ति को भी गिरफ्तार किया है। अब तक इस पूरे मामले में कुल चार लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है और जांच अभी भी जारी है। अधिकारियों के मुताबिक, पूरा नेटवर्क अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं हुआ है और आगे और नाम सामने आ सकते हैं।
यह पूरा मामला अब जांच एजेंसियों की शुरुआती लापरवाहियों और गलत पहचान के सवालों को भी उजागर कर रहा है। वहीं, राजनीतिक स्तर पर भी इस केस को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। फिलहाल, सीबीआई की टीम आगे की जांच में जुटी हुई है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस हत्या की असली साजिश कितनी गहरी थी और इसमें और कौन-कौन शामिल हो सकता है।
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शुभेंदु अधिकारी के PA हत्याकांड में मिली बड़ी कामयाबी, CBI ने पकड़ा असली आरोपी
नेशनल डेस्क
पश्चिम बंगाल के राजनीतिक हलचलों में उस समय काफी हलचल मच गई जब शुभेंदु अधिकारी के निजी सहायक चंद्रनाथ रथ के हत्या मामले में सीबीआई ने बड़ा खुलासा किया। अब यह मामला एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। शुरुआती जांच में जहां स्थानीय पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठ रहे थे, वहीं अब पता चला है कि इस केस में पहचान में बड़ी गलती हुई थी और एक निर्दोष शख्स को गलत तरीके से गिरफ्तार कर लिया गया था। सीबीआई की जांच में असली साजिशकर्ता तक पहुंचने के बाद पूरा मामला बदल गया।
जानकारी के अनुसार, पहले बंगाल पुलिस के इनपुट पर तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया था। इनमें बिहार के बक्सर से मयंक मिश्रा और विक्की मौर्य थे, जबकि उत्तर प्रदेश के बलिया से राज सिंह नाम का एक व्यक्ति गिरफ्तार किया गया। बताया जा रहा है कि इस गिरफ्तारी के बाद उसे लगभग 13 दिनों तक हिरासत में रखा गया। लेकिन बाद में यह बड़ा तथ्य सामने आया कि जिस व्यक्ति को राज सिंह समझकर गिरफ्तार किया गया था, वह दरअसल गलत पहचान का शिकार था। उसके परिवार ने पहले ही दावा किया था कि वह घटना के समय यूपी के अयोध्या में मौजूद था, लेकिन शुरुआती जांच में इसका ध्यान नहीं दिया गया।
जैसे-जैसे सीबीआई मामले की जांच करती गई, परतें खुलती गईं। जब सीबीआई की टीम ने दोबारा पूरे नेटवर्क की जांच की तो पता चला कि असली साजिशकर्ता कोई और है। इसके बाद एजेंसी ने मुजफ्फरनगर से एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया, जिसकी पहचान राजकुमार के रूप में हुई है। जांच एजेंसी का कहना है कि यही इस पूरे हत्याकांड का मास्टरमाइंड है और वह लंबे समय से इस साजिश को अंजाम देने की तैयारी कर रहा था। इसके साथ ही पहले गिरफ्तार किए गए राज सिंह को कोर्ट ने रिहा कर दिया है, क्योंकि उसकी भूमिका इस मामले में साबित नहीं हो सकी।
इस बीच, जांच में एक और महत्वपूर्ण गिरफ्तारी भी सामने आई है। सीबीआई ने वाराणसी से विनय राय नाम के एक व्यक्ति को भी गिरफ्तार किया है। अब तक इस पूरे मामले में कुल चार लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है और जांच अभी भी जारी है। अधिकारियों के मुताबिक, पूरा नेटवर्क अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं हुआ है और आगे और नाम सामने आ सकते हैं।
यह पूरा मामला अब जांच एजेंसियों की शुरुआती लापरवाहियों और गलत पहचान के सवालों को भी उजागर कर रहा है। वहीं, राजनीतिक स्तर पर भी इस केस को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। फिलहाल, सीबीआई की टीम आगे की जांच में जुटी हुई है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस हत्या की असली साजिश कितनी गहरी थी और इसमें और कौन-कौन शामिल हो सकता है।
