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डिजिटल जनगणना से बदलेगा पता सिस्टम, हर घर को मिलेगी यूनिक लोकेशन आईडी
बिलासपुर (छ.ग.)
बिलासपुर में डिजिटल जनगणना के तहत हर घर को यूनिक लोकेशन आईडी मिलेगी। इससे एंबुलेंस, डिलीवरी और ड्रोन सेवाएं तेज और आसान होंगी।
बिलासपुर में इस बार होने वाली डिजिटल जनगणना सिर्फ आबादी गिनने तक सीमित नहीं रहने वाली। इस प्रक्रिया के साथ शहर के एड्रेस सिस्टम में बड़ा बदलाव शुरू हो रहा है। पहली बार हर घर को यूनिक लोकेशन आईडी दी जाएगी, जिससे हर मकान की अलग डिजिटल पहचान बनेगी। अधिकारियों के मुताबिक जनगणना के दौरान प्रगणक विशेष मोबाइल एप के जरिए घर-घर पहुंचकर मकानों की लोकेशन अक्षांश और देशांतर के आधार पर दर्ज कर रहे हैं। यानी अब सिर्फ मोहल्ला, गली और मकान नंबर के भरोसे पता नहीं चलेगा, बल्कि हर घर का सटीक डिजिटल एड्रेस तैयार होगा। नगर निगम क्षेत्र के हजारों मकान और संपत्तियां इस दायरे में लाई जा रही हैं। बताया जा रहा है कि यह पूरा लोकेशन डेटा ऑनलाइन सिस्टम से जोड़ा जाएगा, ताकि जरूरत पड़ने पर किसी भी पते की सटीक पहचान तुरंत हो सके।
डिजिटल जनगणना का सबसे सीधा असर इमरजेंसी सेवाओं पर दिखेगा। अभी एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड या पुलिस को कई बार सही पता ढूंढने में वक्त लग जाता है, खासकर नई कॉलोनियों, अपार्टमेंट और बिना स्पष्ट पते वाले इलाकों में। नई व्यवस्था लागू होने के बाद कंट्रोल रूम से सीधे सटीक लोकेशन भेजी जा सकेगी और टीम बिना भटके मौके तक पहुंच सकेगी। इससे रिस्पॉन्स टाइम कम होगा, जो इमरजेंसी हालात में सबसे अहम माना जाता है। यही सिस्टम ऑनलाइन डिलीवरी नेटवर्क के लिए भी राहत देगा। अभी डिलीवरी एजेंट को कई बार ग्राहक को फोन कर रास्ता पूछना पड़ता है, लेकिन यूनिक लोकेशन आईडी और अपडेटेड जीपीएस मैपिंग के बाद यह झंझट काफी हद तक खत्म हो सकता है। भविष्य में ड्रोन डिलीवरी जैसी सेवाओं के लिए भी यही डिजिटल एड्रेस बेस काम करेगा। माना जा रहा है कि शहरों में लॉजिस्टिक नेटवर्क को इससे सीधा फायदा मिलेगा।
प्रशासनिक स्तर पर भी इस डिजिटल जनगणना को काफी अहम माना जा रहा है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक इससे सिर्फ जनसंख्या का आंकड़ा नहीं, बल्कि संपत्तियों, किरायेदारों और शहरी ढांचे का व्यवस्थित रिकॉर्ड भी तैयार होगा। किस वार्ड में कितने मकान हैं, कहां किरायेदार ज्यादा हैं, किन इलाकों में सड़क, पानी, सीवरेज या दूसरी बुनियादी सुविधाओं की जरूरत ज्यादा है, इसका डेटा पहले से ज्यादा साफ तरीके से सामने आएगा। अधिकारियों का कहना है कि इससे शहरी प्लानिंग और संसाधनों के वितरण में आसानी होगी। साथ ही संपत्ति रिकॉर्ड व्यवस्थित होने से पारदर्शिता बढ़ेगी और कई छोटे विवाद भी कम हो सकते हैं। बिलासपुर में शुरू हो रही यह व्यवस्था आने वाले समय में दूसरे शहरों के लिए भी मॉडल बन सकती है, क्योंकि डिजिटल जनगणना अब सिर्फ लोगों की गिनती नहीं, शहर की डिजिटल मैपिंग का आधार बनती दिख रही है।
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डिजिटल जनगणना से बदलेगा पता सिस्टम, हर घर को मिलेगी यूनिक लोकेशन आईडी
बिलासपुर (छ.ग.)
बिलासपुर में इस बार होने वाली डिजिटल जनगणना सिर्फ आबादी गिनने तक सीमित नहीं रहने वाली। इस प्रक्रिया के साथ शहर के एड्रेस सिस्टम में बड़ा बदलाव शुरू हो रहा है। पहली बार हर घर को यूनिक लोकेशन आईडी दी जाएगी, जिससे हर मकान की अलग डिजिटल पहचान बनेगी। अधिकारियों के मुताबिक जनगणना के दौरान प्रगणक विशेष मोबाइल एप के जरिए घर-घर पहुंचकर मकानों की लोकेशन अक्षांश और देशांतर के आधार पर दर्ज कर रहे हैं। यानी अब सिर्फ मोहल्ला, गली और मकान नंबर के भरोसे पता नहीं चलेगा, बल्कि हर घर का सटीक डिजिटल एड्रेस तैयार होगा। नगर निगम क्षेत्र के हजारों मकान और संपत्तियां इस दायरे में लाई जा रही हैं। बताया जा रहा है कि यह पूरा लोकेशन डेटा ऑनलाइन सिस्टम से जोड़ा जाएगा, ताकि जरूरत पड़ने पर किसी भी पते की सटीक पहचान तुरंत हो सके।
डिजिटल जनगणना का सबसे सीधा असर इमरजेंसी सेवाओं पर दिखेगा। अभी एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड या पुलिस को कई बार सही पता ढूंढने में वक्त लग जाता है, खासकर नई कॉलोनियों, अपार्टमेंट और बिना स्पष्ट पते वाले इलाकों में। नई व्यवस्था लागू होने के बाद कंट्रोल रूम से सीधे सटीक लोकेशन भेजी जा सकेगी और टीम बिना भटके मौके तक पहुंच सकेगी। इससे रिस्पॉन्स टाइम कम होगा, जो इमरजेंसी हालात में सबसे अहम माना जाता है। यही सिस्टम ऑनलाइन डिलीवरी नेटवर्क के लिए भी राहत देगा। अभी डिलीवरी एजेंट को कई बार ग्राहक को फोन कर रास्ता पूछना पड़ता है, लेकिन यूनिक लोकेशन आईडी और अपडेटेड जीपीएस मैपिंग के बाद यह झंझट काफी हद तक खत्म हो सकता है। भविष्य में ड्रोन डिलीवरी जैसी सेवाओं के लिए भी यही डिजिटल एड्रेस बेस काम करेगा। माना जा रहा है कि शहरों में लॉजिस्टिक नेटवर्क को इससे सीधा फायदा मिलेगा।
प्रशासनिक स्तर पर भी इस डिजिटल जनगणना को काफी अहम माना जा रहा है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक इससे सिर्फ जनसंख्या का आंकड़ा नहीं, बल्कि संपत्तियों, किरायेदारों और शहरी ढांचे का व्यवस्थित रिकॉर्ड भी तैयार होगा। किस वार्ड में कितने मकान हैं, कहां किरायेदार ज्यादा हैं, किन इलाकों में सड़क, पानी, सीवरेज या दूसरी बुनियादी सुविधाओं की जरूरत ज्यादा है, इसका डेटा पहले से ज्यादा साफ तरीके से सामने आएगा। अधिकारियों का कहना है कि इससे शहरी प्लानिंग और संसाधनों के वितरण में आसानी होगी। साथ ही संपत्ति रिकॉर्ड व्यवस्थित होने से पारदर्शिता बढ़ेगी और कई छोटे विवाद भी कम हो सकते हैं। बिलासपुर में शुरू हो रही यह व्यवस्था आने वाले समय में दूसरे शहरों के लिए भी मॉडल बन सकती है, क्योंकि डिजिटल जनगणना अब सिर्फ लोगों की गिनती नहीं, शहर की डिजिटल मैपिंग का आधार बनती दिख रही है।
