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दुर्ग विश्वविद्यालय में स्थापित होगी अंबेडकर चेयर, केंद्र से मिली मंजूरी
दुर्ग,(छ.ग.)
छत्तीसगढ़ का पहला विश्वविद्यालय बना, हर साल 75 लाख रुपए का मिलेगा अनुदान
छत्तीसगढ़ के उच्च शिक्षा क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि सामने आई है। दुर्ग स्थित हेमचंद यादव विश्वविद्यालय को केंद्र सरकार की ओर से डॉ. अंबेडकर चेयर (शोध पीठ) स्थापित करने की सैद्धांतिक मंजूरी मिल गई है। इस मंजूरी के साथ ही विश्वविद्यालय प्रदेश का पहला ऐसा विश्वविद्यालय बन गया है जहां डॉ. भीमराव अंबेडकर के विचारों, सामाजिक न्याय और समावेशी विकास से जुड़े विषयों पर विशेष अध्ययन और शोध के लिए यह शोध पीठ स्थापित की जाएगी। विश्वविद्यालय प्रशासन ने इसे न केवल संस्थान बल्कि पूरे राज्य के लिए बड़ी उपलब्धि बताया है। यह मंजूरी भारत सरकार के सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत डॉ. अंबेडकर फाउंडेशन, नई दिल्ली द्वारा प्रदान की गई है। विश्वविद्यालय को इसकी आधिकारिक सूचना फाउंडेशन के निदेशक मनोज तिवारी की ओर से जारी पत्र के माध्यम से प्राप्त हुई। लंबे समय से इस प्रस्ताव पर काम चल रहा था और अब इसे सैद्धांतिक स्वीकृति मिलने के बाद विश्वविद्यालय में उत्साह का माहौल है।
डॉ. अंबेडकर चेयर योजना देश के चुनिंदा शिक्षण संस्थानों में संचालित की जाती है। अब तक देश के केवल 24 प्रमुख विश्वविद्यालयों और संस्थानों को ही इस योजना से जोड़ा गया है। इनमें जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, पटना विश्वविद्यालय, आईआईएम विशाखापट्टनम जैसे प्रतिष्ठित संस्थान शामिल हैं। ऐसे संस्थानों की सूची में हेमचंद यादव विश्वविद्यालय का नाम जुड़ना राज्य के लिए गौरव की बात मानी जा रही है। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर डॉ. संजय तिवारी ने बताया कि इस मंजूरी के पीछे विश्वविद्यालय की लंबी तैयारी और गंभीर प्रयास रहे हैं। उन्होंने नई दिल्ली में डॉ. अंबेडकर फाउंडेशन के अधिकारियों के समक्ष विश्वविद्यालय का विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया था। इस दौरान छत्तीसगढ़ की सामाजिक संरचना, आदिवासी बहुल क्षेत्रों की विशेष परिस्थितियों, उच्च शिक्षा की चुनौतियों और वंचित वर्गों के लिए शोध आधारित अध्ययन की आवश्यकता को विस्तार से रखा गया। प्रस्तुतीकरण के दौरान यह भी बताया गया कि प्रदेश में सामाजिक न्याय और समावेशी विकास से जुड़े विषयों पर विशेष शोध केंद्र की कितनी आवश्यकता है।
इस योजना के तहत विश्वविद्यालय को हर वर्ष केंद्र सरकार की ओर से 75 लाख रुपए की वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। इसके अलावा 10 लाख रुपए का एकमुश्त स्थापना अनुदान भी मिलेगा, जिससे शोध पीठ की प्रारंभिक व्यवस्थाएं विकसित की जा सकेंगी। विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार यह राशि शोध गतिविधियों, शैक्षणिक कार्यक्रमों, मानव संसाधन और संस्थागत विकास में उपयोग की जाएगी। योजना के वित्तीय ढांचे के अनुसार 20 लाख रुपए शैक्षणिक गतिविधियों, संगोष्ठियों, शोध कार्यक्रमों और अकादमिक आयोजनों के लिए निर्धारित किए गए हैं। वहीं 55 लाख रुपए वेतन और प्रशासनिक खर्चों के लिए उपलब्ध कराए जाएंगे। विशेष बात यह है कि यदि विश्वविद्यालय बेहतर प्रदर्शन करता है और प्रतिस्पर्धात्मक मूल्यांकन में अच्छा स्थान प्राप्त करता है तो उसे एक करोड़ रुपए तक का अतिरिक्त अनुसंधान अनुदान भी मिल सकता है। इससे शोध कार्यों को और अधिक मजबूती मिलने की उम्मीद है।
अंबेडकर चेयर के संचालन के लिए अगले पांच वर्षों तक एक चेयर प्रोफेसर और एक सहायक प्राध्यापक की नियुक्ति की जाएगी। इसके अलावा शोध को बढ़ावा देने के लिए दो शोधार्थियों को डॉक्टोरल फैलोशिप भी प्रदान की जाएगी। इन शोधार्थियों को हर महीने 35 हजार रुपए की फेलोशिप और निर्धारित नियमों के अनुसार एचआरए की सुविधा मिलेगी। विश्वविद्यालय का मानना है कि इससे शोध के क्षेत्र में प्रतिभाशाली युवाओं को नए अवसर प्राप्त होंगे। इस शोध पीठ का मुख्य उद्देश्य डॉ. भीमराव अंबेडकर के विचारों को अकादमिक और सामाजिक स्तर पर आगे बढ़ाना है। इसके अंतर्गत सामाजिक न्याय, समान अवसर, संवैधानिक मूल्यों, लोकतांत्रिक अधिकारों, शिक्षा, वंचित वर्गों के सशक्तिकरण और समावेशी विकास जैसे विषयों पर अध्ययन किया जाएगा। साथ ही राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के शोध, सेमिनार, कार्यशालाएं और जनजागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि यह केवल एक शोध केंद्र नहीं होगा, बल्कि समाज और शिक्षा के बीच संवाद स्थापित करने का एक महत्वपूर्ण मंच भी बनेगा। इससे छात्रों, शोधार्थियों और शिक्षकों को नई दृष्टि और बेहतर शोध अवसर मिलेंगे। विशेष रूप से अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य वंचित समुदायों से जुड़े मुद्दों पर गंभीर अध्ययन को बढ़ावा मिलेगा।
कुलपति डॉ. संजय तिवारी ने बताया कि योजना की शर्तों के अनुसार हर वर्ष कम से कम दो शोध पत्र यूजीसी केयर सूची में शामिल जर्नलों में प्रकाशित करना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही एक संपादित पुस्तक का प्रकाशन भी करना होगा। इन मानकों का पालन करते हुए विश्वविद्यालय राष्ट्रीय स्तर पर अपनी शोध पहचान को और मजबूत करने का प्रयास करेगा। अब विश्वविद्यालय जल्द ही अपना विस्तृत प्रस्ताव फाउंडेशन को भेजेगा। इसके बाद डॉ. अंबेडकर फाउंडेशन और हेमचंद यादव विश्वविद्यालय के बीच औपचारिक एमओयू पर हस्ताक्षर किए जाएंगे।
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दुर्ग विश्वविद्यालय में स्थापित होगी अंबेडकर चेयर, केंद्र से मिली मंजूरी
दुर्ग,(छ.ग.)
छत्तीसगढ़ के उच्च शिक्षा क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि सामने आई है। दुर्ग स्थित हेमचंद यादव विश्वविद्यालय को केंद्र सरकार की ओर से डॉ. अंबेडकर चेयर (शोध पीठ) स्थापित करने की सैद्धांतिक मंजूरी मिल गई है। इस मंजूरी के साथ ही विश्वविद्यालय प्रदेश का पहला ऐसा विश्वविद्यालय बन गया है जहां डॉ. भीमराव अंबेडकर के विचारों, सामाजिक न्याय और समावेशी विकास से जुड़े विषयों पर विशेष अध्ययन और शोध के लिए यह शोध पीठ स्थापित की जाएगी। विश्वविद्यालय प्रशासन ने इसे न केवल संस्थान बल्कि पूरे राज्य के लिए बड़ी उपलब्धि बताया है। यह मंजूरी भारत सरकार के सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत डॉ. अंबेडकर फाउंडेशन, नई दिल्ली द्वारा प्रदान की गई है। विश्वविद्यालय को इसकी आधिकारिक सूचना फाउंडेशन के निदेशक मनोज तिवारी की ओर से जारी पत्र के माध्यम से प्राप्त हुई। लंबे समय से इस प्रस्ताव पर काम चल रहा था और अब इसे सैद्धांतिक स्वीकृति मिलने के बाद विश्वविद्यालय में उत्साह का माहौल है।
डॉ. अंबेडकर चेयर योजना देश के चुनिंदा शिक्षण संस्थानों में संचालित की जाती है। अब तक देश के केवल 24 प्रमुख विश्वविद्यालयों और संस्थानों को ही इस योजना से जोड़ा गया है। इनमें जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, पटना विश्वविद्यालय, आईआईएम विशाखापट्टनम जैसे प्रतिष्ठित संस्थान शामिल हैं। ऐसे संस्थानों की सूची में हेमचंद यादव विश्वविद्यालय का नाम जुड़ना राज्य के लिए गौरव की बात मानी जा रही है। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर डॉ. संजय तिवारी ने बताया कि इस मंजूरी के पीछे विश्वविद्यालय की लंबी तैयारी और गंभीर प्रयास रहे हैं। उन्होंने नई दिल्ली में डॉ. अंबेडकर फाउंडेशन के अधिकारियों के समक्ष विश्वविद्यालय का विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया था। इस दौरान छत्तीसगढ़ की सामाजिक संरचना, आदिवासी बहुल क्षेत्रों की विशेष परिस्थितियों, उच्च शिक्षा की चुनौतियों और वंचित वर्गों के लिए शोध आधारित अध्ययन की आवश्यकता को विस्तार से रखा गया। प्रस्तुतीकरण के दौरान यह भी बताया गया कि प्रदेश में सामाजिक न्याय और समावेशी विकास से जुड़े विषयों पर विशेष शोध केंद्र की कितनी आवश्यकता है।
इस योजना के तहत विश्वविद्यालय को हर वर्ष केंद्र सरकार की ओर से 75 लाख रुपए की वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। इसके अलावा 10 लाख रुपए का एकमुश्त स्थापना अनुदान भी मिलेगा, जिससे शोध पीठ की प्रारंभिक व्यवस्थाएं विकसित की जा सकेंगी। विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार यह राशि शोध गतिविधियों, शैक्षणिक कार्यक्रमों, मानव संसाधन और संस्थागत विकास में उपयोग की जाएगी। योजना के वित्तीय ढांचे के अनुसार 20 लाख रुपए शैक्षणिक गतिविधियों, संगोष्ठियों, शोध कार्यक्रमों और अकादमिक आयोजनों के लिए निर्धारित किए गए हैं। वहीं 55 लाख रुपए वेतन और प्रशासनिक खर्चों के लिए उपलब्ध कराए जाएंगे। विशेष बात यह है कि यदि विश्वविद्यालय बेहतर प्रदर्शन करता है और प्रतिस्पर्धात्मक मूल्यांकन में अच्छा स्थान प्राप्त करता है तो उसे एक करोड़ रुपए तक का अतिरिक्त अनुसंधान अनुदान भी मिल सकता है। इससे शोध कार्यों को और अधिक मजबूती मिलने की उम्मीद है।
अंबेडकर चेयर के संचालन के लिए अगले पांच वर्षों तक एक चेयर प्रोफेसर और एक सहायक प्राध्यापक की नियुक्ति की जाएगी। इसके अलावा शोध को बढ़ावा देने के लिए दो शोधार्थियों को डॉक्टोरल फैलोशिप भी प्रदान की जाएगी। इन शोधार्थियों को हर महीने 35 हजार रुपए की फेलोशिप और निर्धारित नियमों के अनुसार एचआरए की सुविधा मिलेगी। विश्वविद्यालय का मानना है कि इससे शोध के क्षेत्र में प्रतिभाशाली युवाओं को नए अवसर प्राप्त होंगे। इस शोध पीठ का मुख्य उद्देश्य डॉ. भीमराव अंबेडकर के विचारों को अकादमिक और सामाजिक स्तर पर आगे बढ़ाना है। इसके अंतर्गत सामाजिक न्याय, समान अवसर, संवैधानिक मूल्यों, लोकतांत्रिक अधिकारों, शिक्षा, वंचित वर्गों के सशक्तिकरण और समावेशी विकास जैसे विषयों पर अध्ययन किया जाएगा। साथ ही राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के शोध, सेमिनार, कार्यशालाएं और जनजागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि यह केवल एक शोध केंद्र नहीं होगा, बल्कि समाज और शिक्षा के बीच संवाद स्थापित करने का एक महत्वपूर्ण मंच भी बनेगा। इससे छात्रों, शोधार्थियों और शिक्षकों को नई दृष्टि और बेहतर शोध अवसर मिलेंगे। विशेष रूप से अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य वंचित समुदायों से जुड़े मुद्दों पर गंभीर अध्ययन को बढ़ावा मिलेगा।
कुलपति डॉ. संजय तिवारी ने बताया कि योजना की शर्तों के अनुसार हर वर्ष कम से कम दो शोध पत्र यूजीसी केयर सूची में शामिल जर्नलों में प्रकाशित करना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही एक संपादित पुस्तक का प्रकाशन भी करना होगा। इन मानकों का पालन करते हुए विश्वविद्यालय राष्ट्रीय स्तर पर अपनी शोध पहचान को और मजबूत करने का प्रयास करेगा। अब विश्वविद्यालय जल्द ही अपना विस्तृत प्रस्ताव फाउंडेशन को भेजेगा। इसके बाद डॉ. अंबेडकर फाउंडेशन और हेमचंद यादव विश्वविद्यालय के बीच औपचारिक एमओयू पर हस्ताक्षर किए जाएंगे।
