रायपुर के छात्रों से रूबरू हुए अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला: मेहनत पर बोले—किस्मत भी उसी से बनती है

रायपुर (छ.ग.)

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नवा रायपुर के सरकारी स्कूल में प्रदेश के पहले अंतरिक्ष केंद्र का उद्घाटन, छात्रों के सवालों ने भविष्य की तस्वीर दिखाई

छत्तीसगढ़ की राजधानी नवा रायपुर के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, राखी में मंगलवार को प्रदेश के पहले अंतरिक्ष केंद्र का उद्घाटन हुआ। कार्यक्रम में अंतरिक्ष यात्री ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने संयुक्त रूप से केंद्र का शुभारंभ किया। इस अवसर पर विद्यालय परिसर छात्रों की जिज्ञासा, उत्साह और सवालों से जीवंत नजर आया।

उद्घाटन के बाद आयोजित संवाद सत्र में शुभांशु शुक्ला ने छात्रों से सीधे बातचीत की और अंतरिक्ष यात्रा, अध्ययन, अनुशासन और जीवन के अनुभव साझा किए। छात्रों ने पढ़ाई, करियर, अंतरिक्ष विज्ञान और भविष्य को लेकर खुलकर सवाल पूछे। संवाद के दौरान जब एक छात्रा ने पूछा कि सफलता में मेहनत और किस्मत का कितना योगदान होता है, तो शुभांशु शुक्ला ने साफ शब्दों में कहा—“मेहनत का कोई विकल्प नहीं होता, किस्मत भी मेहनत से ही बनती है।”

कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए उन्होंने स्थानीय संबोधन “राम-राम छत्तीसगढ़” से छात्रों और शिक्षकों का अभिवादन किया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के बच्चों में सीखने की तीव्र इच्छा है और यही उन्हें आगे ले जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि वे पहले भी ऑनलाइन माध्यम से राज्य के छात्रों से जुड़े थे और उनकी जिज्ञासा ने उन्हें प्रभावित किया था।

संवाद के दौरान 9वीं कक्षा की छात्रा किरण भास्कर ने भारत की पहली नागरिक अंतरिक्ष यात्री बनकर चंद्रमा तक पहुंचने की इच्छा जताई। इस पर शुभांशु शुक्ला ने कहा कि बड़े सपने देखने के साथ निरंतर मेहनत, स्वास्थ्य और अनुशासन जरूरी है। उन्होंने छात्रों को पढ़ाई के साथ मानसिक मजबूती विकसित करने की सलाह दी।

मैकेनिकल इंजीनियर प्रीति मंडल के सवाल पर उन्होंने बताया कि अंतरिक्ष मिशन केवल तकनीकी नहीं, बल्कि मानसिक परीक्षा भी होता है। कठिन परिस्थितियों में संयम और निरंतर अभ्यास ही सफलता दिलाता है। उन्होंने कहा कि एस्ट्रोनॉट बनने की प्रक्रिया में अनुशासन सबसे अहम भूमिका निभाता है।

पर्यावरण से जुड़े सवाल पर शुभांशु शुक्ला ने कहा कि अंतरिक्ष से पृथ्वी बेहद सुंदर दिखाई देती है और उसका संरक्षण हर नागरिक की जिम्मेदारी है। तकनीकी प्रगति के साथ पर्यावरण संतुलन बनाए रखना जरूरी है।

अपने अनुभव साझा करते हुए उन्होंने बताया कि अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन मिशन के दौरान उन्होंने 320 बार पृथ्वी की परिक्रमा की और करीब 1.4 करोड़ किलोमीटर की दूरी तय की। अंतरिक्ष में 20 दिनों के प्रवास के दौरान उन्होंने 60 से अधिक वैज्ञानिक प्रयोग किए।

कार्यक्रम में कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने कहा कि ‘अंतरिक्ष संगवारी’ अब केवल एक शैक्षणिक पहल नहीं, बल्कि बच्चों को बड़े सपने देखने के लिए प्रेरित करने वाला आंदोलन बन चुका है। उन्होंने बताया कि जिले के 300 से अधिक स्कूलों में अंतरिक्ष विज्ञान को लेकर जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा चुके हैं।

यह कार्यक्रम न केवल छात्रों के लिए प्रेरणा बना, बल्कि यह भी स्पष्ट किया कि छोटे शहरों और सरकारी स्कूलों से भी अंतरिक्ष तक का सफर तय किया जा सकता है।

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