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जशपुर अस्पताल में रिश्वतखोरी का खुलासा, बिल पास करने के बदले ड्रेसर ने मांगे 5000 रुपये
जशपुर (म.प्र.)
जशपुर अस्पताल रिश्वत वीडियो में ड्रेसर 5000 लेते दिखा, मेडिकल रिम्बर्समेंट पास कराने के नाम पर वसूली, सस्पेंड
छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले के जिला अस्पताल में भ्रष्टाचार का एक मामला सामने आया है, जिसने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अस्पताल में पदस्थ एक ड्रेसर का रिश्वत लेते हुए वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, जिसके बाद प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए उसे सस्पेंड कर दिया।
मामला मेडिकल रिम्बर्समेंट से जुड़ा बताया जा रहा है, जहां एक कर्मचारी से इलाज का खर्च पास कराने के बदले पैसे की मांग की गई। वीडियो सामने आने के बाद विभाग ने इसे गंभीर अनियमितता मानते हुए जांच शुरू कर दी है।
कैसे सामने आया रिश्वत का मामला
बताया जा रहा है कि 9 अप्रैल को एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें जिला अस्पताल का ड्रेसर किशोर कुमार चौहान एक व्यक्ति से 5000 रुपए लेते हुए नजर आ रहा है। वीडियो में वह पैसों की गिनती करता दिखता है और अतिरिक्त 2000 रुपए की मांग भी करता सुनाई देता है।
यह वीडियो सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने मामले को संज्ञान में लिया और प्राथमिक जांच के बाद आरोपी कर्मचारी पर कार्रवाई की गई।
मेडिकल रिम्बर्समेंट के नाम पर वसूली
जानकारी के अनुसार, एक शासकीय कर्मचारी ने इलाज के बाद अपने खर्च की राशि वापस पाने के लिए मेडिकल रिम्बर्समेंट का आवेदन किया था। आरोप है कि इस आवेदन को पास करने के लिए ड्रेसर ने रिश्वत की मांग की।
वीडियो में बातचीत के दौरान इलाज पर करीब 45 हजार रुपए खर्च होने और IVF उपचार का भी जिक्र किया गया है। ड्रेसर यह कहते हुए सुनाई देता है कि यदि फाइल रायपुर भेज दी जाती तो बिल पास नहीं होता, इसलिए स्थानीय स्तर पर काम कराने के लिए पैसे देने होंगे।
नियमों का उल्लंघन और कार्रवाई
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने इस मामले को गंभीर कदाचार माना है। अधिकारियों के अनुसार, यह कृत्य छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 का उल्लंघन है। इसके तहत सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम 1966 के नियम-9 के अंतर्गत आरोपी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया।
सस्पेंशन अवधि के दौरान कर्मचारी का मुख्यालय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पत्थलगांव निर्धारित किया गया है और उसे नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता दिया जाएगा।
विभागीय जांच होगी, सख्त कार्रवाई के संकेत
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. जी.एस. जात्रा ने स्पष्ट किया कि वायरल वीडियो के आधार पर प्रथम दृष्टया मामला गंभीर पाया गया है। उन्होंने कहा कि इस तरह की अवैध वसूली न केवल सेवा नियमों के खिलाफ है, बल्कि विभाग की छवि को भी नुकसान पहुंचाती है।
उन्होंने यह भी बताया कि मामले में विस्तृत विभागीय जांच कराई जाएगी और यदि आरोप सिद्ध होते हैं, तो संबंधित कर्मचारी पर कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
स्वास्थ्य विभाग में मचा हड़कंप
इस घटना के बाद जिला चिकित्सालय सहित पूरे स्वास्थ्य विभाग में चर्चा का माहौल है। कर्मचारियों के बीच भी इस कार्रवाई को लेकर सतर्कता बढ़ गई है और विभाग अब पारदर्शिता बनाए रखने पर जोर दे रहा है।
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जशपुर अस्पताल में रिश्वतखोरी का खुलासा, बिल पास करने के बदले ड्रेसर ने मांगे 5000 रुपये
जशपुर (म.प्र.)
छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले के जिला अस्पताल में भ्रष्टाचार का एक मामला सामने आया है, जिसने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अस्पताल में पदस्थ एक ड्रेसर का रिश्वत लेते हुए वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, जिसके बाद प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए उसे सस्पेंड कर दिया।
मामला मेडिकल रिम्बर्समेंट से जुड़ा बताया जा रहा है, जहां एक कर्मचारी से इलाज का खर्च पास कराने के बदले पैसे की मांग की गई। वीडियो सामने आने के बाद विभाग ने इसे गंभीर अनियमितता मानते हुए जांच शुरू कर दी है।
कैसे सामने आया रिश्वत का मामला
बताया जा रहा है कि 9 अप्रैल को एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें जिला अस्पताल का ड्रेसर किशोर कुमार चौहान एक व्यक्ति से 5000 रुपए लेते हुए नजर आ रहा है। वीडियो में वह पैसों की गिनती करता दिखता है और अतिरिक्त 2000 रुपए की मांग भी करता सुनाई देता है।
यह वीडियो सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने मामले को संज्ञान में लिया और प्राथमिक जांच के बाद आरोपी कर्मचारी पर कार्रवाई की गई।
मेडिकल रिम्बर्समेंट के नाम पर वसूली
जानकारी के अनुसार, एक शासकीय कर्मचारी ने इलाज के बाद अपने खर्च की राशि वापस पाने के लिए मेडिकल रिम्बर्समेंट का आवेदन किया था। आरोप है कि इस आवेदन को पास करने के लिए ड्रेसर ने रिश्वत की मांग की।
वीडियो में बातचीत के दौरान इलाज पर करीब 45 हजार रुपए खर्च होने और IVF उपचार का भी जिक्र किया गया है। ड्रेसर यह कहते हुए सुनाई देता है कि यदि फाइल रायपुर भेज दी जाती तो बिल पास नहीं होता, इसलिए स्थानीय स्तर पर काम कराने के लिए पैसे देने होंगे।
नियमों का उल्लंघन और कार्रवाई
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने इस मामले को गंभीर कदाचार माना है। अधिकारियों के अनुसार, यह कृत्य छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 का उल्लंघन है। इसके तहत सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम 1966 के नियम-9 के अंतर्गत आरोपी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया।
सस्पेंशन अवधि के दौरान कर्मचारी का मुख्यालय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पत्थलगांव निर्धारित किया गया है और उसे नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता दिया जाएगा।
विभागीय जांच होगी, सख्त कार्रवाई के संकेत
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. जी.एस. जात्रा ने स्पष्ट किया कि वायरल वीडियो के आधार पर प्रथम दृष्टया मामला गंभीर पाया गया है। उन्होंने कहा कि इस तरह की अवैध वसूली न केवल सेवा नियमों के खिलाफ है, बल्कि विभाग की छवि को भी नुकसान पहुंचाती है।
उन्होंने यह भी बताया कि मामले में विस्तृत विभागीय जांच कराई जाएगी और यदि आरोप सिद्ध होते हैं, तो संबंधित कर्मचारी पर कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
स्वास्थ्य विभाग में मचा हड़कंप
इस घटना के बाद जिला चिकित्सालय सहित पूरे स्वास्थ्य विभाग में चर्चा का माहौल है। कर्मचारियों के बीच भी इस कार्रवाई को लेकर सतर्कता बढ़ गई है और विभाग अब पारदर्शिता बनाए रखने पर जोर दे रहा है।
