Chhattisgarh: सड़क नहीं तो गांव तक नहीं पहुंची एंबुलेंस, बीमार महिला को ‘झलगी’ में दो किलोमीटर ढोया

छत्तीसगढ़

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बलरामपुर जिले के भईसापाठ गांव में सांस लेने में परेशानी से जूझ रही 50 वर्षीय महिला को ग्रामीणों ने पेड़ की डालियों और साड़ी से बनाई झलगी में बैठाकर मुख्य सड़क तक पहुंचाया। बरसात में एंबुलेंस के लिए गांव का रास्ता बंद हो गया था।

बलरामपुर: छत्तीसगढ़ के दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क और स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविक स्थिति दिखाने वाली एक गंभीर घटना बलरामपुर जिले से सामने आई है। कुसमी जनपद पंचायत के भईसापाठ गांव में सड़क नहीं होने के कारण 108 एंबुलेंस एक बीमार महिला के घर तक नहीं पहुंच सकी। इसके बाद ग्रामीणों ने महिला को अस्थायी ‘झलगी’ में बैठाकर करीब दो किलोमीटर तक कंधों पर उठाया और मुख्य सड़क तक पहुंचाया। भईसापाठ निवासी 50 वर्षीय रदनी बाई की अचानक तबीयत बिगड़ गई थी। उन्हें सांस लेने में परेशानी और अत्यधिक कमजोरी महसूस हो रही थी। परिवार ने तुरंत 108 एंबुलेंस सेवा को सूचना दी, लेकिन गांव तक जाने वाला कच्चा रास्ता बारिश के कारण कीचड़ से भर गया था। एंबुलेंस गांव के भीतर नहीं पहुंच सकी।

पेड़ की डालियों और साड़ी से बनाई झलगी

महिला की हालत देखते हुए ग्रामीणों ने समय गंवाने के बजाय पेड़ की डालियों और साड़ी की सहायता से टोकरीनुमा झलगी तैयार की। दो ग्रामीणों ने बारी-बारी से महिला को कंधे पर उठाया और लगभग दो किलोमीटर दूर पक्की सड़क तक लेकर गए। वहां से एंबुलेंस उन्हें कुसमी अस्पताल ले गई। ग्रामीण क्षेत्रों में झलगी का उपयोग आमतौर पर सामान ढोने के लिए किया जाता है। लेकिन सड़क और आपात स्वास्थ्य परिवहन की सुविधा नहीं होने के कारण यहां इसका इस्तेमाल एक बीमार महिला को अस्पताल पहुंचाने के लिए करना पड़ा।

तीन-चार गांवों के लिए भी पक्की सड़क नहीं

स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार भईसापाठ के साथ आसपास के तीन से चार गांवों को जोड़ने वाली पक्की सड़क नहीं है। गर्मियों में लोग कच्चे रास्ते से किसी तरह आवागमन कर लेते हैं, लेकिन बारिश में कीचड़ और पानी भरने से चारपहिया वाहनों का पहुंचना मुश्किल हो जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि सबसे अधिक परेशानी गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और गंभीर मरीजों को होती है। मरीज को पहले कंधे, चारपाई या अन्य स्थानीय साधनों से मुख्य सड़क तक लाना पड़ता है। इससे इलाज में देरी होने और मरीज की जान पर जोखिम बढ़ने की आशंका बनी रहती है।

विकास के दावों के बीच जवाब मांगती तस्वीर

यह घटना केवल एक मरीज की परेशानी तक सीमित नहीं है। इससे गांवों तक बारहमासी सड़क, एंबुलेंस की पहुंच और वैकल्पिक आपात परिवहन व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े होते हैं। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों से गांव तक शीघ्र पक्की सड़क बनाने की मांग की है। खबर लिखे जाने तक जिला प्रशासन की ओर से सड़क निर्माण की स्थिति या बीमार महिला के वर्तमान स्वास्थ्य को लेकर विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया था। प्रशासन का पक्ष प्राप्त होने पर खबर को अपडेट किया जाना चाहिए।

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प्रशासन से पूछे जाने वाले चार सवाल
  1. भईसापाठ और आसपास के गांवों को जोड़ने वाली सड़क किसी स्वीकृत योजना में शामिल है या नहीं?

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  2. सड़क स्वीकृत है तो निर्माण कब तक पूरा होगा और देरी की वजह क्या है?

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  3. बरसात में एंबुलेंस न पहुंच पाने वाले गांवों के लिए वैकल्पिक आपात परिवहन व्यवस्था क्या है?

  4. रदनी बाई की वर्तमान स्वास्थ्य स्थिति क्या है और उन्हें किस अस्पताल में उपचार मिला?

www.dainikjagranmpcg.com
11 Aug 2026 By Priyanka

Chhattisgarh: सड़क नहीं तो गांव तक नहीं पहुंची एंबुलेंस, बीमार महिला को ‘झलगी’ में दो किलोमीटर ढोया

छत्तीसगढ़

बलरामपुर: छत्तीसगढ़ के दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क और स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविक स्थिति दिखाने वाली एक गंभीर घटना बलरामपुर जिले से सामने आई है। कुसमी जनपद पंचायत के भईसापाठ गांव में सड़क नहीं होने के कारण 108 एंबुलेंस एक बीमार महिला के घर तक नहीं पहुंच सकी। इसके बाद ग्रामीणों ने महिला को अस्थायी ‘झलगी’ में बैठाकर करीब दो किलोमीटर तक कंधों पर उठाया और मुख्य सड़क तक पहुंचाया। भईसापाठ निवासी 50 वर्षीय रदनी बाई की अचानक तबीयत बिगड़ गई थी। उन्हें सांस लेने में परेशानी और अत्यधिक कमजोरी महसूस हो रही थी। परिवार ने तुरंत 108 एंबुलेंस सेवा को सूचना दी, लेकिन गांव तक जाने वाला कच्चा रास्ता बारिश के कारण कीचड़ से भर गया था। एंबुलेंस गांव के भीतर नहीं पहुंच सकी।

पेड़ की डालियों और साड़ी से बनाई झलगी

महिला की हालत देखते हुए ग्रामीणों ने समय गंवाने के बजाय पेड़ की डालियों और साड़ी की सहायता से टोकरीनुमा झलगी तैयार की। दो ग्रामीणों ने बारी-बारी से महिला को कंधे पर उठाया और लगभग दो किलोमीटर दूर पक्की सड़क तक लेकर गए। वहां से एंबुलेंस उन्हें कुसमी अस्पताल ले गई। ग्रामीण क्षेत्रों में झलगी का उपयोग आमतौर पर सामान ढोने के लिए किया जाता है। लेकिन सड़क और आपात स्वास्थ्य परिवहन की सुविधा नहीं होने के कारण यहां इसका इस्तेमाल एक बीमार महिला को अस्पताल पहुंचाने के लिए करना पड़ा।

तीन-चार गांवों के लिए भी पक्की सड़क नहीं

स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार भईसापाठ के साथ आसपास के तीन से चार गांवों को जोड़ने वाली पक्की सड़क नहीं है। गर्मियों में लोग कच्चे रास्ते से किसी तरह आवागमन कर लेते हैं, लेकिन बारिश में कीचड़ और पानी भरने से चारपहिया वाहनों का पहुंचना मुश्किल हो जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि सबसे अधिक परेशानी गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और गंभीर मरीजों को होती है। मरीज को पहले कंधे, चारपाई या अन्य स्थानीय साधनों से मुख्य सड़क तक लाना पड़ता है। इससे इलाज में देरी होने और मरीज की जान पर जोखिम बढ़ने की आशंका बनी रहती है।

विकास के दावों के बीच जवाब मांगती तस्वीर

यह घटना केवल एक मरीज की परेशानी तक सीमित नहीं है। इससे गांवों तक बारहमासी सड़क, एंबुलेंस की पहुंच और वैकल्पिक आपात परिवहन व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े होते हैं। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों से गांव तक शीघ्र पक्की सड़क बनाने की मांग की है। खबर लिखे जाने तक जिला प्रशासन की ओर से सड़क निर्माण की स्थिति या बीमार महिला के वर्तमान स्वास्थ्य को लेकर विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया था। प्रशासन का पक्ष प्राप्त होने पर खबर को अपडेट किया जाना चाहिए।

प्रशासन से पूछे जाने वाले चार सवाल
  1. भईसापाठ और आसपास के गांवों को जोड़ने वाली सड़क किसी स्वीकृत योजना में शामिल है या नहीं?

  2. सड़क स्वीकृत है तो निर्माण कब तक पूरा होगा और देरी की वजह क्या है?

  3. बरसात में एंबुलेंस न पहुंच पाने वाले गांवों के लिए वैकल्पिक आपात परिवहन व्यवस्था क्या है?

  4. रदनी बाई की वर्तमान स्वास्थ्य स्थिति क्या है और उन्हें किस अस्पताल में उपचार मिला?

https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/chhattisgarh-if-there-was-no-road-the-ambulance-did-not/article-61253

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