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प्रेडिक्शन मार्केट में बढ़ा दांव, जानकारी की शुचिता पर सवाल
Priyanka Mathur
राजनीति, युद्ध और अर्थव्यवस्था पर लग रहे दांव से मिल रहा रियल टाइम संकेत, लेकिन इनसाइडर जानकारी और बाजार में हेरफेर को लेकर नियामकों की चिंता भी बढ़ी
किसी चुनाव में कौन जीतेगा, ब्याज दर कब बदलेगी, युद्ध का अगला मोड़ क्या होगा या कोई बड़ी आर्थिक घटना कब तक होगी—अब ऐसे सवाल सिर्फ विशेषज्ञों और सर्वे एजेंसियों तक सीमित नहीं हैं। प्रेडिक्शन मार्केट में लोग इन घटनाओं के संभावित नतीजों पर पैसे लगाकर अपनी राय को बाजार की कीमत में बदल रहे हैं। इन प्लेटफॉर्म पर किसी घटना के ‘हां’ या ‘नहीं’ वाले कॉन्ट्रैक्ट की कीमत उस समय बाजार की अनुमानित संभावना को दिखाती है। अमेरिकी कमोडिटी फ्यूचर्स ट्रेडिंग कमीशन यानी CFTC भी मानता है कि ऐसे इवेंट कॉन्ट्रैक्ट भविष्य की घटनाओं का अनुमान लगाने, जोखिम से बचाव करने और बाजार की सामूहिक धारणा समझने में इस्तेमाल हो सकते हैं।
मिसाल के तौर पर अगर किसी घटना के ‘हां’ कॉन्ट्रैक्ट की कीमत 70 सेंट चल रही है, तो बाजार मोटे तौर पर उस घटना की 70 प्रतिशत संभावना मान रहा होता है। जैसे-जैसे नई जानकारी सामने आती है, खरीद-बिक्री बदलती है और कीमत भी ऊपर-नीचे होती रहती है। यही इसकी सबसे बड़ी खासियत है। पारंपरिक सर्वे में नतीजे आने तक कुछ समय लग सकता है, जबकि प्रेडिक्शन मार्केट में नई सूचना मिलते ही कीमत बदल सकती है। रिसर्च में भी ऐसे बाजारों को अलग-अलग लोगों की राय और जानकारी को एक जगह इकट्ठा करने के माध्यम के तौर पर देखा गया है। एक अध्ययन में वैज्ञानिक शोध के दोहराए जाने की संभावना पर प्रेडिक्शन मार्केट ने 103 मामलों में 73 प्रतिशत सटीकता दिखाई थी।
लेकिन यही व्यवस्था विवाद की वजह भी बन रही है। अगर किसी व्यक्ति के पास ऐसी जानकारी है जो आम लोगों को नहीं पता और वह उसी आधार पर किसी संवेदनशील घटना के नतीजे पर पैसा लगाता है, तो बाजार की निष्पक्षता पर सवाल उठना तय है। राजनीतिक उम्मीदवार, सरकारी अधिकारी, किसी कंपनी के अंदर काम करने वाले लोग या ऐसी घटनाओं से सीधे जुड़े व्यक्ति दूसरों से पहले जानकारी हासिल कर सकते हैं। तब बाजार का भाव सामूहिक जानकारी का संकेत देने के बजाय किसी खास व्यक्ति की निजी जानकारी को दर्शा सकता है। CFTC ने फरवरी 2026 में ऐसे मामलों को लेकर अपनी Enforcement Division की एडवाइजरी जारी की थी। आयोग ने कहा था कि कुछ मामलों में गैर-सार्वजनिक जानकारी के गलत इस्तेमाल और धोखाधड़ी से जुड़े प्रवर्तन मामले सामने आए हैं।
एक मामले में एक राजनीतिक उम्मीदवार के अपने ही चुनाव से जुड़े कॉन्ट्रैक्ट में ट्रेड करने की बात सामने आई थी। जांच के बाद उस व्यक्ति ने माना कि ट्रेडिंग नियमों का उल्लंघन हुआ था। उस पर आर्थिक दंड लगाया गया और पांच साल के लिए सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से एक्सचेंज तक पहुंच निलंबित की गई। CFTC के मुताबिक, जिस व्यक्ति के पास किसी घटना के नतीजे को प्रभावित करने की सीधी या अप्रत्यक्ष क्षमता हो, उसके लिए उस घटना से जुड़े कॉन्ट्रैक्ट में ट्रेड करना खास तौर पर गंभीर मामला बन सकता है।
इसी वजह से अब प्रेडिक्शन मार्केट सिर्फ ‘लोग क्या सोच रहे हैं’ बताने वाला प्लेटफॉर्म नहीं रह गया है। यह सवाल भी महत्वपूर्ण हो गया है कि लोग यह जानकारी कहां से ला रहे हैं और बाजार में पैसा लगाने वाले सभी प्रतिभागियों के पास लगभग बराबर अवसर हैं या नहीं। बाजार में बड़ी रकम होने पर कोई व्यक्ति कीमत को प्रभावित करने की कोशिश करे, तब भी समस्या पैदा हो सकती है। कम ट्रेडिंग वाले कॉन्ट्रैक्ट में यह खतरा और ज्यादा हो सकता है, क्योंकि अपेक्षाकृत कम खरीद-बिक्री से कीमत में बड़ा बदलाव आ सकता है।
अमेरिका में इस क्षेत्र को लेकर नियमन की बहस भी तेज है। CFTC के तहत संचालित बाजारों को मार्केट मैनिपुलेशन और इनसाइडर ट्रेडिंग जैसे दुरुपयोग पर नजर रखने की जिम्मेदारी होती है। नियामक के मुताबिक रजिस्टर्ड एक्सचेंजों को ट्रेडिंग गतिविधियों की निगरानी करनी होती है और संदिग्ध गतिविधियों पर कार्रवाई की व्यवस्था रखनी होती है।
इसी दिशा में प्रेडिक्शन मार्केट प्लेटफॉर्म Kalshi ने हाल में Nasdaq के साथ ट्रेड सर्विलांस को मजबूत करने के लिए साझेदारी की है। रिपोर्ट के मुताबिक, इसका उद्देश्य संदिग्ध ट्रेड और संभावित बाजार दुरुपयोग की पहचान बेहतर तरीके से करना है। यह कदम ऐसे समय आया है जब प्रेडिक्शन मार्केट में इनसाइडर ट्रेडिंग को लेकर नियामकीय निगरानी बढ़ रही है।
दूसरी तरफ विवाद सिर्फ इनसाइडर ट्रेडिंग तक सीमित नहीं है। यह भी बहस चल रही है कि किन घटनाओं पर पैसे लगाने की अनुमति होनी चाहिए। CFTC ने जून 2026 में ऐसे इवेंट कॉन्ट्रैक्ट्स को लेकर प्रस्तावित नियमों पर सार्वजनिक राय मांगी थी जिनका संबंध युद्ध, आतंकवाद, हत्या, गेमिंग या गैरकानूनी गतिविधियों से हो सकता है। आयोग ने कहा कि ऐसे कॉन्ट्रैक्ट्स को सार्वजनिक हित के नजरिए से अलग प्रक्रिया के तहत देखा जाना चाहिए।
इसका एक बड़ा उदाहरण राजनीतिक घटनाएं हैं। चुनाव जैसे विषयों पर प्रेडिक्शन मार्केट के समर्थकों का तर्क है कि हजारों लोगों की राय एक जगह मिलने से पारंपरिक सर्वे से अलग और कई बार ज्यादा तेज संकेत मिल सकता है। बाजार में पैसा लगाने वाला व्यक्ति सिर्फ अपनी राय नहीं रखता, बल्कि गलत अनुमान होने पर आर्थिक नुकसान भी उठाता है। समर्थकों के अनुसार यही आर्थिक प्रोत्साहन लोगों को उपलब्ध जानकारी का गंभीरता से आकलन करने के लिए प्रेरित कर सकता है।
आलोचकों की चिंता दूसरी है। उनका कहना है कि जब चुनाव, युद्ध, आपदा या किसी सार्वजनिक संकट को आर्थिक दांव में बदल दिया जाता है, तो लोगों के लिए घटना का सामाजिक महत्व पीछे छूट सकता है और मुनाफा प्राथमिकता बन सकता है। किसी संवेदनशील घटना के बारे में गलत सूचना फैलाकर बाजार की कीमत प्रभावित करने की कोशिश भी चिंता का विषय है। सोशल मीडिया के दौर में यह खतरा और जटिल हो जाता है, क्योंकि अफवाह कुछ ही मिनटों में हजारों लोगों तक पहुंच सकती है और उसी दौरान बाजार में तेज हलचल हो सकती है।
प्रेडिक्शन मार्केट और पारंपरिक सट्टेबाजी के बीच अंतर को लेकर भी अमेरिका में कानूनी विवाद चल रहा है। हाल में एक संघीय जज ने Utah को Kalshi जैसे प्रेडिक्शन मार्केट पर अपने जुआ विरोधी कानून लागू करने की अनुमति दी। Kalshi का तर्क है कि उसके कॉन्ट्रैक्ट वित्तीय बाजार के दायरे में आते हैं, जबकि राज्य स्तर पर इन्हें जुए की गतिविधि के रूप में देखा जा रहा है।
इस बीच बाजार का दायरा तेजी से बढ़ रहा है। वित्तीय और स्पोर्ट्स बेटिंग कंपनियां भी प्रेडिक्शन मार्केट की ओर बढ़ रही हैं। हालिया रिपोर्टों के मुताबिक Kalshi और Polymarket जैसे प्लेटफॉर्म की लोकप्रियता बढ़ी है और बड़े ट्रेडिंग कारोबार ने पारंपरिक स्पोर्ट्स-बेटिंग कंपनियों को भी इस क्षेत्र में उतरने के लिए प्रेरित किया है।
ऐसे में मूल सवाल सिर्फ यह नहीं रह गया है कि प्रेडिक्शन मार्केट भविष्य का अनुमान कितनी सटीकता से लगा सकता है। असली बहस इस बात पर है कि बाजार में आने वाली जानकारी कितनी साफ, बराबर और भरोसेमंद है। अगर कीमतें वास्तविक जानकारी को तेजी से प्रतिबिंबित करती हैं तो यह नीति-निर्माताओं, कारोबार और आम लोगों के लिए उपयोगी संकेत बन सकती हैं। लेकिन अगर निजी जानकारी, अफवाह या जानबूझकर की गई ट्रेडिंग से कीमतें प्रभावित होती हैं, तो वही व्यवस्था सूचना की विश्वसनीयता को कमजोर भी कर सकती है।
प्रेडिक्शन मार्केट में बढ़ा दांव, जानकारी की शुचिता पर सवाल
Priyanka Mathur
किसी चुनाव में कौन जीतेगा, ब्याज दर कब बदलेगी, युद्ध का अगला मोड़ क्या होगा या कोई बड़ी आर्थिक घटना कब तक होगी—अब ऐसे सवाल सिर्फ विशेषज्ञों और सर्वे एजेंसियों तक सीमित नहीं हैं। प्रेडिक्शन मार्केट में लोग इन घटनाओं के संभावित नतीजों पर पैसे लगाकर अपनी राय को बाजार की कीमत में बदल रहे हैं। इन प्लेटफॉर्म पर किसी घटना के ‘हां’ या ‘नहीं’ वाले कॉन्ट्रैक्ट की कीमत उस समय बाजार की अनुमानित संभावना को दिखाती है। अमेरिकी कमोडिटी फ्यूचर्स ट्रेडिंग कमीशन यानी CFTC भी मानता है कि ऐसे इवेंट कॉन्ट्रैक्ट भविष्य की घटनाओं का अनुमान लगाने, जोखिम से बचाव करने और बाजार की सामूहिक धारणा समझने में इस्तेमाल हो सकते हैं।
मिसाल के तौर पर अगर किसी घटना के ‘हां’ कॉन्ट्रैक्ट की कीमत 70 सेंट चल रही है, तो बाजार मोटे तौर पर उस घटना की 70 प्रतिशत संभावना मान रहा होता है। जैसे-जैसे नई जानकारी सामने आती है, खरीद-बिक्री बदलती है और कीमत भी ऊपर-नीचे होती रहती है। यही इसकी सबसे बड़ी खासियत है। पारंपरिक सर्वे में नतीजे आने तक कुछ समय लग सकता है, जबकि प्रेडिक्शन मार्केट में नई सूचना मिलते ही कीमत बदल सकती है। रिसर्च में भी ऐसे बाजारों को अलग-अलग लोगों की राय और जानकारी को एक जगह इकट्ठा करने के माध्यम के तौर पर देखा गया है। एक अध्ययन में वैज्ञानिक शोध के दोहराए जाने की संभावना पर प्रेडिक्शन मार्केट ने 103 मामलों में 73 प्रतिशत सटीकता दिखाई थी।
लेकिन यही व्यवस्था विवाद की वजह भी बन रही है। अगर किसी व्यक्ति के पास ऐसी जानकारी है जो आम लोगों को नहीं पता और वह उसी आधार पर किसी संवेदनशील घटना के नतीजे पर पैसा लगाता है, तो बाजार की निष्पक्षता पर सवाल उठना तय है। राजनीतिक उम्मीदवार, सरकारी अधिकारी, किसी कंपनी के अंदर काम करने वाले लोग या ऐसी घटनाओं से सीधे जुड़े व्यक्ति दूसरों से पहले जानकारी हासिल कर सकते हैं। तब बाजार का भाव सामूहिक जानकारी का संकेत देने के बजाय किसी खास व्यक्ति की निजी जानकारी को दर्शा सकता है। CFTC ने फरवरी 2026 में ऐसे मामलों को लेकर अपनी Enforcement Division की एडवाइजरी जारी की थी। आयोग ने कहा था कि कुछ मामलों में गैर-सार्वजनिक जानकारी के गलत इस्तेमाल और धोखाधड़ी से जुड़े प्रवर्तन मामले सामने आए हैं।
एक मामले में एक राजनीतिक उम्मीदवार के अपने ही चुनाव से जुड़े कॉन्ट्रैक्ट में ट्रेड करने की बात सामने आई थी। जांच के बाद उस व्यक्ति ने माना कि ट्रेडिंग नियमों का उल्लंघन हुआ था। उस पर आर्थिक दंड लगाया गया और पांच साल के लिए सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से एक्सचेंज तक पहुंच निलंबित की गई। CFTC के मुताबिक, जिस व्यक्ति के पास किसी घटना के नतीजे को प्रभावित करने की सीधी या अप्रत्यक्ष क्षमता हो, उसके लिए उस घटना से जुड़े कॉन्ट्रैक्ट में ट्रेड करना खास तौर पर गंभीर मामला बन सकता है।
इसी वजह से अब प्रेडिक्शन मार्केट सिर्फ ‘लोग क्या सोच रहे हैं’ बताने वाला प्लेटफॉर्म नहीं रह गया है। यह सवाल भी महत्वपूर्ण हो गया है कि लोग यह जानकारी कहां से ला रहे हैं और बाजार में पैसा लगाने वाले सभी प्रतिभागियों के पास लगभग बराबर अवसर हैं या नहीं। बाजार में बड़ी रकम होने पर कोई व्यक्ति कीमत को प्रभावित करने की कोशिश करे, तब भी समस्या पैदा हो सकती है। कम ट्रेडिंग वाले कॉन्ट्रैक्ट में यह खतरा और ज्यादा हो सकता है, क्योंकि अपेक्षाकृत कम खरीद-बिक्री से कीमत में बड़ा बदलाव आ सकता है।
अमेरिका में इस क्षेत्र को लेकर नियमन की बहस भी तेज है। CFTC के तहत संचालित बाजारों को मार्केट मैनिपुलेशन और इनसाइडर ट्रेडिंग जैसे दुरुपयोग पर नजर रखने की जिम्मेदारी होती है। नियामक के मुताबिक रजिस्टर्ड एक्सचेंजों को ट्रेडिंग गतिविधियों की निगरानी करनी होती है और संदिग्ध गतिविधियों पर कार्रवाई की व्यवस्था रखनी होती है।
इसी दिशा में प्रेडिक्शन मार्केट प्लेटफॉर्म Kalshi ने हाल में Nasdaq के साथ ट्रेड सर्विलांस को मजबूत करने के लिए साझेदारी की है। रिपोर्ट के मुताबिक, इसका उद्देश्य संदिग्ध ट्रेड और संभावित बाजार दुरुपयोग की पहचान बेहतर तरीके से करना है। यह कदम ऐसे समय आया है जब प्रेडिक्शन मार्केट में इनसाइडर ट्रेडिंग को लेकर नियामकीय निगरानी बढ़ रही है।
दूसरी तरफ विवाद सिर्फ इनसाइडर ट्रेडिंग तक सीमित नहीं है। यह भी बहस चल रही है कि किन घटनाओं पर पैसे लगाने की अनुमति होनी चाहिए। CFTC ने जून 2026 में ऐसे इवेंट कॉन्ट्रैक्ट्स को लेकर प्रस्तावित नियमों पर सार्वजनिक राय मांगी थी जिनका संबंध युद्ध, आतंकवाद, हत्या, गेमिंग या गैरकानूनी गतिविधियों से हो सकता है। आयोग ने कहा कि ऐसे कॉन्ट्रैक्ट्स को सार्वजनिक हित के नजरिए से अलग प्रक्रिया के तहत देखा जाना चाहिए।
इसका एक बड़ा उदाहरण राजनीतिक घटनाएं हैं। चुनाव जैसे विषयों पर प्रेडिक्शन मार्केट के समर्थकों का तर्क है कि हजारों लोगों की राय एक जगह मिलने से पारंपरिक सर्वे से अलग और कई बार ज्यादा तेज संकेत मिल सकता है। बाजार में पैसा लगाने वाला व्यक्ति सिर्फ अपनी राय नहीं रखता, बल्कि गलत अनुमान होने पर आर्थिक नुकसान भी उठाता है। समर्थकों के अनुसार यही आर्थिक प्रोत्साहन लोगों को उपलब्ध जानकारी का गंभीरता से आकलन करने के लिए प्रेरित कर सकता है।
आलोचकों की चिंता दूसरी है। उनका कहना है कि जब चुनाव, युद्ध, आपदा या किसी सार्वजनिक संकट को आर्थिक दांव में बदल दिया जाता है, तो लोगों के लिए घटना का सामाजिक महत्व पीछे छूट सकता है और मुनाफा प्राथमिकता बन सकता है। किसी संवेदनशील घटना के बारे में गलत सूचना फैलाकर बाजार की कीमत प्रभावित करने की कोशिश भी चिंता का विषय है। सोशल मीडिया के दौर में यह खतरा और जटिल हो जाता है, क्योंकि अफवाह कुछ ही मिनटों में हजारों लोगों तक पहुंच सकती है और उसी दौरान बाजार में तेज हलचल हो सकती है।
प्रेडिक्शन मार्केट और पारंपरिक सट्टेबाजी के बीच अंतर को लेकर भी अमेरिका में कानूनी विवाद चल रहा है। हाल में एक संघीय जज ने Utah को Kalshi जैसे प्रेडिक्शन मार्केट पर अपने जुआ विरोधी कानून लागू करने की अनुमति दी। Kalshi का तर्क है कि उसके कॉन्ट्रैक्ट वित्तीय बाजार के दायरे में आते हैं, जबकि राज्य स्तर पर इन्हें जुए की गतिविधि के रूप में देखा जा रहा है।
इस बीच बाजार का दायरा तेजी से बढ़ रहा है। वित्तीय और स्पोर्ट्स बेटिंग कंपनियां भी प्रेडिक्शन मार्केट की ओर बढ़ रही हैं। हालिया रिपोर्टों के मुताबिक Kalshi और Polymarket जैसे प्लेटफॉर्म की लोकप्रियता बढ़ी है और बड़े ट्रेडिंग कारोबार ने पारंपरिक स्पोर्ट्स-बेटिंग कंपनियों को भी इस क्षेत्र में उतरने के लिए प्रेरित किया है।
ऐसे में मूल सवाल सिर्फ यह नहीं रह गया है कि प्रेडिक्शन मार्केट भविष्य का अनुमान कितनी सटीकता से लगा सकता है। असली बहस इस बात पर है कि बाजार में आने वाली जानकारी कितनी साफ, बराबर और भरोसेमंद है। अगर कीमतें वास्तविक जानकारी को तेजी से प्रतिबिंबित करती हैं तो यह नीति-निर्माताओं, कारोबार और आम लोगों के लिए उपयोगी संकेत बन सकती हैं। लेकिन अगर निजी जानकारी, अफवाह या जानबूझकर की गई ट्रेडिंग से कीमतें प्रभावित होती हैं, तो वही व्यवस्था सूचना की विश्वसनीयता को कमजोर भी कर सकती है।
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