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हरेली पर सजा CM हाउस, सीएम साय ने की हल-नांगर की पूजा
रायपुर (छ.ग.)
नवा रायपुर में लोकपर्व का रंग, पारंपरिक पकवानों और छत्तीसगढ़ी संस्कृति के बीच जुटे मेहमान
रायपुर के नवा रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास में बुधवार को छत्तीसगढ़ के प्रमुख लोकपर्व हरेली तिहार का आयोजन पारंपरिक अंदाज में किया गया। सुबह से ही सीएम हाउस में लोक संस्कृति की अलग ही तस्वीर नजर आई। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने हरेली के मौके पर विधि-विधान से हल और नांगर की पूजा की। इस दौरान कृषि मंत्री रामविचार नेताम और विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह समेत कई जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। पूजा के बाद कार्यक्रम में कृषि मंत्री ने संबोधन शुरू किया। मुख्यमंत्री निवास को हरेली के अनुरूप सजाया गया था। परिसर में ग्रामीण जीवन और खेती-किसानी से जुड़ी चीजों को भी खास तौर पर जगह दी गई।
आयोजन में आने वाले लोगों के लिए छत्तीसगढ़ के पारंपरिक व्यंजनों की व्यवस्था की गई। फरा, चिल्ला समेत कई स्थानीय पकवान परोसे गए। कहीं मिट्टी के पारंपरिक बर्तन नजर आए तो कहीं खेती में इस्तेमाल होने वाले पुराने औजारों को सजाकर रखा गया था। आम तौर पर गांवों में हरेली के दिन घरों और खेतों में कृषि उपकरणों की पूजा की जाती है। मुख्यमंत्री निवास का आयोजन भी इसी ग्रामीण परंपरा को सामने रखने की कोशिश के तौर पर देखा गया। परिसर में पहुंचने वाले लोगों के बीच भी त्योहार को लेकर उत्साह दिखाई दिया। महिलाएं और बच्चे पारंपरिक माहौल में नजर आए। लोकगीत और छत्तीसगढ़ी संस्कृति से जुड़े रंगों ने कार्यक्रम को और खास बना दिया।
हरेली को प्रदेश का पहला लोकपर्व भी कहा जाता है और खेती-किसानी से इसका सीधा संबंध है। किसान इस दिन अपने कृषि औजारों की साफ-सफाई कर उनकी पूजा करते हैं। बैल और दूसरे कृषि पशुओं से जुड़े रीति-रिवाज भी कई ग्रामीण इलाकों में निभाए जाते हैं। छत्तीसगढ़ के गांवों में हरेली का माहौल सुबह से ही अलग दिखाई देता है। घरों में नीम की पत्तियां लगाने से लेकर पकवान बनाने तक कई परंपराएं आज भी चली आ रही हैं। मुख्यमंत्री निवास में आयोजित कार्यक्रम में भी इन्हीं परंपराओं को शहरी माहौल के बीच दिखाने का प्रयास किया गया।
हरेली तिहार के आयोजन के दौरान मुख्यमंत्री निवास में छत्तीसगढ़ की स्थानीय संस्कृति को प्रमुखता दी गई। कार्यक्रम स्थल पर पारंपरिक सजावट के साथ खेती से जुड़े उपकरण और ग्रामीण जीवन की झलक दिखाई गई। हल-नांगर की पूजा के दौरान मुख्यमंत्री साय ने कृषि और किसानों से जुड़े इस पर्व की परंपरा को निभाया। कृषि मंत्री रामविचार नेताम की मौजूदगी भी आयोजन में खास रही। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह समेत अन्य लोगों ने भी कार्यक्रम में हिस्सा लिया। सीएम हाउस में तैयार किए गए पारंपरिक व्यंजनों को लेकर भी लोगों में काफी उत्सुकता रही।
फरा और चिल्ला के साथ दूसरे छत्तीसगढ़ी पकवान भी मेहमानों को बांटे गए। खाने की खुशबू और लोकसाज-सज्जा के बीच पूरा परिसर किसी ग्रामीण उत्सव जैसा नजर आया। हरेली सिर्फ खेती के औजारों की पूजा का दिन नहीं है, बल्कि यह छत्तीसगढ़ की ग्रामीण अर्थव्यवस्था और लोक जीवन से गहराई से जुड़ा पर्व है। बारिश के मौसम में मनाए जाने वाले इस त्योहार के जरिए किसान नई कृषि ऋतु की शुरुआत से पहले अपने औजारों के प्रति सम्मान जताते हैं। पुराने समय में किसान हल, नांगर, कुदाल और दूसरे सामानों को साफ कर उनकी पूजा करते थे। कई जगहों पर घरों के बाहर नीम की टहनियां लगाने और विशेष पकवान बनाने की परंपरा भी रही है। बच्चों के लिए भी हरेली का अपना अलग आकर्षण है। गांवों में इस दिन पारंपरिक खेल और झूले लगाए जाने की परंपरा रही है। मुख्यमंत्री निवास में हुए आयोजन में इन्हीं लोक परंपराओं को लोगों के सामने लाया गया।
कार्यक्रम के दौरान कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने भी मंच से संबोधित किया और खेती, किसान तथा प्रदेश की लोक परंपराओं से जुड़े विषयों पर बात रखी। आयोजन स्थल पर आने वाले लोगों के लिए स्थानीय व्यंजनों की व्यवस्था के साथ छत्तीसगढ़ी संस्कृति से जुड़े कई रंग दिखाई दिए। सीएम हाउस की सजावट में भी ग्रामीण जीवन और प्रदेश की पहचान को उभारने की कोशिश की गई। हल-नांगर की पूजा के बाद कार्यक्रम में मौजूद अतिथियों और लोगों के बीच हरेली की परंपराओं को लेकर बातचीत होती रही। लोकपर्व के मौके पर मुख्यमंत्री निवास में तैयार किया गया यह माहौल खास तौर पर छत्तीसगढ़ की खेती-किसानी से जुड़ी पुरानी परंपराओं को सामने रखता दिखा।
हरेली पर सजा CM हाउस, सीएम साय ने की हल-नांगर की पूजा
रायपुर (छ.ग.)
रायपुर के नवा रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास में बुधवार को छत्तीसगढ़ के प्रमुख लोकपर्व हरेली तिहार का आयोजन पारंपरिक अंदाज में किया गया। सुबह से ही सीएम हाउस में लोक संस्कृति की अलग ही तस्वीर नजर आई। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने हरेली के मौके पर विधि-विधान से हल और नांगर की पूजा की। इस दौरान कृषि मंत्री रामविचार नेताम और विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह समेत कई जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। पूजा के बाद कार्यक्रम में कृषि मंत्री ने संबोधन शुरू किया। मुख्यमंत्री निवास को हरेली के अनुरूप सजाया गया था। परिसर में ग्रामीण जीवन और खेती-किसानी से जुड़ी चीजों को भी खास तौर पर जगह दी गई।
आयोजन में आने वाले लोगों के लिए छत्तीसगढ़ के पारंपरिक व्यंजनों की व्यवस्था की गई। फरा, चिल्ला समेत कई स्थानीय पकवान परोसे गए। कहीं मिट्टी के पारंपरिक बर्तन नजर आए तो कहीं खेती में इस्तेमाल होने वाले पुराने औजारों को सजाकर रखा गया था। आम तौर पर गांवों में हरेली के दिन घरों और खेतों में कृषि उपकरणों की पूजा की जाती है। मुख्यमंत्री निवास का आयोजन भी इसी ग्रामीण परंपरा को सामने रखने की कोशिश के तौर पर देखा गया। परिसर में पहुंचने वाले लोगों के बीच भी त्योहार को लेकर उत्साह दिखाई दिया। महिलाएं और बच्चे पारंपरिक माहौल में नजर आए। लोकगीत और छत्तीसगढ़ी संस्कृति से जुड़े रंगों ने कार्यक्रम को और खास बना दिया।
हरेली को प्रदेश का पहला लोकपर्व भी कहा जाता है और खेती-किसानी से इसका सीधा संबंध है। किसान इस दिन अपने कृषि औजारों की साफ-सफाई कर उनकी पूजा करते हैं। बैल और दूसरे कृषि पशुओं से जुड़े रीति-रिवाज भी कई ग्रामीण इलाकों में निभाए जाते हैं। छत्तीसगढ़ के गांवों में हरेली का माहौल सुबह से ही अलग दिखाई देता है। घरों में नीम की पत्तियां लगाने से लेकर पकवान बनाने तक कई परंपराएं आज भी चली आ रही हैं। मुख्यमंत्री निवास में आयोजित कार्यक्रम में भी इन्हीं परंपराओं को शहरी माहौल के बीच दिखाने का प्रयास किया गया।
हरेली तिहार के आयोजन के दौरान मुख्यमंत्री निवास में छत्तीसगढ़ की स्थानीय संस्कृति को प्रमुखता दी गई। कार्यक्रम स्थल पर पारंपरिक सजावट के साथ खेती से जुड़े उपकरण और ग्रामीण जीवन की झलक दिखाई गई। हल-नांगर की पूजा के दौरान मुख्यमंत्री साय ने कृषि और किसानों से जुड़े इस पर्व की परंपरा को निभाया। कृषि मंत्री रामविचार नेताम की मौजूदगी भी आयोजन में खास रही। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह समेत अन्य लोगों ने भी कार्यक्रम में हिस्सा लिया। सीएम हाउस में तैयार किए गए पारंपरिक व्यंजनों को लेकर भी लोगों में काफी उत्सुकता रही।
फरा और चिल्ला के साथ दूसरे छत्तीसगढ़ी पकवान भी मेहमानों को बांटे गए। खाने की खुशबू और लोकसाज-सज्जा के बीच पूरा परिसर किसी ग्रामीण उत्सव जैसा नजर आया। हरेली सिर्फ खेती के औजारों की पूजा का दिन नहीं है, बल्कि यह छत्तीसगढ़ की ग्रामीण अर्थव्यवस्था और लोक जीवन से गहराई से जुड़ा पर्व है। बारिश के मौसम में मनाए जाने वाले इस त्योहार के जरिए किसान नई कृषि ऋतु की शुरुआत से पहले अपने औजारों के प्रति सम्मान जताते हैं। पुराने समय में किसान हल, नांगर, कुदाल और दूसरे सामानों को साफ कर उनकी पूजा करते थे। कई जगहों पर घरों के बाहर नीम की टहनियां लगाने और विशेष पकवान बनाने की परंपरा भी रही है। बच्चों के लिए भी हरेली का अपना अलग आकर्षण है। गांवों में इस दिन पारंपरिक खेल और झूले लगाए जाने की परंपरा रही है। मुख्यमंत्री निवास में हुए आयोजन में इन्हीं लोक परंपराओं को लोगों के सामने लाया गया।
कार्यक्रम के दौरान कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने भी मंच से संबोधित किया और खेती, किसान तथा प्रदेश की लोक परंपराओं से जुड़े विषयों पर बात रखी। आयोजन स्थल पर आने वाले लोगों के लिए स्थानीय व्यंजनों की व्यवस्था के साथ छत्तीसगढ़ी संस्कृति से जुड़े कई रंग दिखाई दिए। सीएम हाउस की सजावट में भी ग्रामीण जीवन और प्रदेश की पहचान को उभारने की कोशिश की गई। हल-नांगर की पूजा के बाद कार्यक्रम में मौजूद अतिथियों और लोगों के बीच हरेली की परंपराओं को लेकर बातचीत होती रही। लोकपर्व के मौके पर मुख्यमंत्री निवास में तैयार किया गया यह माहौल खास तौर पर छत्तीसगढ़ की खेती-किसानी से जुड़ी पुरानी परंपराओं को सामने रखता दिखा।
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