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बिलासपुर नगर निगम में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, सभी 8 जोनों के कमिश्नर बदले गए
बिलासपुर,(छ.ग.)
कामकाज में सुधार और प्रशासनिक कसावट के लिए निगम कमिश्नर ने जारी किए नए आदेश, कई अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां
बिलासपुर नगर निगम में लंबे समय से एक ही जोन में कार्यरत अधिकारियों के प्रभार में आखिरकार बड़ा बदलाव किया गया है। नगर निगम कमिश्नर प्रकाश कुमार सर्वे ने जोन कमिश्नरों, डिप्टी कमिश्नरों और कार्यपालन अभियंताओं की नई पदस्थापना के आदेश जारी कर दिए हैं। इस प्रशासनिक फेरबदल के तहत निगम के सभी आठ जोनों में अधिकारियों की जिम्मेदारियां बदली गई हैं। निगम प्रशासन का कहना है कि यह कदम कामकाज में तेजी लाने, जवाबदेही बढ़ाने और वार्ड स्तर पर नागरिक सुविधाओं को बेहतर बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है। नए आदेश जारी होने के बाद अधिकारियों ने अपने नए दायित्व संभालने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।
नगर निगम के अधिकांश जोन कमिश्नर पिछले ढाई से चार वर्षों से एक ही जोन में पदस्थ थे। लंबे समय तक एक ही क्षेत्र में पदस्थापना को लेकर निर्वाचित परिषद के सदस्यों और पार्षदों की ओर से लगातार बदलाव की मांग उठाई जा रही थी। उनका कहना था कि नियमित अंतराल में प्रभार बदलने से प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता बढ़ती है और विकास कार्यों की निगरानी अधिक प्रभावी होती है। इसी पृष्ठभूमि में निगम प्रशासन ने व्यापक स्तर पर फेरबदल का निर्णय लिया। सबसे ज्यादा चर्चा जोन क्रमांक-1 में लंबे समय से पदस्थ रंजना अग्रवाल के स्थानांतरण को लेकर हो रही है। रंजना अग्रवाल चार वर्षों से अधिक समय से इसी जोन की जिम्मेदारी संभाल रही थीं। अब उन्हें जोन क्रमांक-8 की जिम्मेदारी सौंपी गई है। उनकी जगह जोन क्रमांक-6 की जोन कमिश्नर मधुलिका सिंह को जोन क्रमांक-1 का नया प्रभार दिया गया है। सूत्रों के मुताबिक रंजना अग्रवाल के खिलाफ कई पार्षदों की शिकायतें भी लंबित थीं। हालांकि आधिकारिक तौर पर फेरबदल को नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा बताया जा रहा है।
नगर निगम के सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में शामिल जोन क्रमांक-3 को वीआईपी जोन माना जाता है। इस क्षेत्र में कई वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के कार्यालय, सरकारी आवास, जनप्रतिनिधियों के निवास और महत्वपूर्ण सरकारी संस्थान स्थित हैं। ऐसे में इस जोन की जिम्मेदारी हमेशा अनुभवी अधिकारियों को सौंपी जाती है। इस बार प्रवेश कश्यप को इस महत्वपूर्ण जोन का जोन कमिश्नर बनाया गया है। निगम प्रशासन को उम्मीद है कि उनके अनुभव का लाभ इस क्षेत्र में चल रहे विकास और जनसुविधा संबंधी कार्यों को मिलेगा। प्रवेश कश्यप को केवल जोन क्रमांक-3 की जिम्मेदारी ही नहीं मिली है, बल्कि उनके पास पहले से मौजूद कई महत्वपूर्ण विभागों का प्रभार भी बरकरार रखा गया है। वे उपायुक्त, स्थापना शाखा, स्वास्थ्य अधिकारी, स्वच्छता सर्वेक्षण और सिटी 2.0 से जुड़े कार्यों की जिम्मेदारी भी संभालते रहेंगे। इससे स्पष्ट है कि निगम प्रशासन ने उन्हें कई अहम परियोजनाओं और व्यवस्थाओं के संचालन की जिम्मेदारी सौंपकर विशेष भरोसा जताया है।
इसी क्रम में प्रवीण शुक्ला को जोन कमिश्नर के पद से मुक्त कर उनके मूल पद कार्यपालन अभियंता के रूप में कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं। अब वे जोन क्रमांक-3 और जोन क्रमांक-7 में कार्यपालन अभियंता की जिम्मेदारी संभालेंगे। निगम प्रशासन का मानना है कि तकनीकी कार्यों के बेहतर निष्पादन के लिए अनुभवी अभियंताओं को उनकी मूल जिम्मेदारियों में अधिक सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। नए आदेशों के तहत जोन क्रमांक-7 के जोन कमिश्नर प्रवीण शर्मा को जोन क्रमांक-2 भेजा गया है। वहीं भूपेंद्र उपाध्याय को जोन क्रमांक-2 से स्थानांतरित कर जोन क्रमांक-7 का प्रभार दिया गया है। सागर राज को जोन क्रमांक-4 से जोन क्रमांक-6 भेजा गया है, जबकि विभा सिंह को जोन क्रमांक-8 से जोन क्रमांक-4 की जिम्मेदारी दी गई है। इसके अलावा सवीना अनंत को जोन क्रमांक-5 का जोन कमिश्नर नियुक्त किया गया है। उनके पास उद्यान और स्विमिंग पूल से जुड़े कार्यों की जिम्मेदारी भी रहेगी।
डिप्टी कमिश्नर दीपिका भगत के प्रभार में भी कुछ बदलाव किए गए हैं। उन्हें स्टोर शाखा, भविष्य निधि, पेंशन और खाद्य शाखा से संबंधित जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। उनके कई पूर्व दायित्व भी यथावत रखे गए हैं ताकि प्रशासनिक कार्यों की निरंतरता बनी रहे। निगम प्रशासन का कहना है कि अधिकारियों के अनुभव और कार्यक्षमता को ध्यान में रखते हुए नई जिम्मेदारियों का निर्धारण किया गया है। नगर निगम के भीतर इस फेरबदल को प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि लंबे समय तक एक ही क्षेत्र में पदस्थ रहने से कार्यप्रणाली में एकरूपता आ जाती है और कई बार निगरानी व्यवस्था भी प्रभावित होती है। ऐसे में समय-समय पर दायित्व बदलने से नई कार्यशैली और बेहतर परिणाम सामने आने की संभावना रहती है। वहीं पार्षदों और जनप्रतिनिधियों का भी मानना है कि इससे नागरिक समस्याओं के समाधान में तेजी आएगी और विकास कार्यों की समीक्षा अधिक प्रभावी ढंग से हो सकेगी।
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बिलासपुर नगर निगम में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, सभी 8 जोनों के कमिश्नर बदले गए
बिलासपुर,(छ.ग.)
बिलासपुर नगर निगम में लंबे समय से एक ही जोन में कार्यरत अधिकारियों के प्रभार में आखिरकार बड़ा बदलाव किया गया है। नगर निगम कमिश्नर प्रकाश कुमार सर्वे ने जोन कमिश्नरों, डिप्टी कमिश्नरों और कार्यपालन अभियंताओं की नई पदस्थापना के आदेश जारी कर दिए हैं। इस प्रशासनिक फेरबदल के तहत निगम के सभी आठ जोनों में अधिकारियों की जिम्मेदारियां बदली गई हैं। निगम प्रशासन का कहना है कि यह कदम कामकाज में तेजी लाने, जवाबदेही बढ़ाने और वार्ड स्तर पर नागरिक सुविधाओं को बेहतर बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है। नए आदेश जारी होने के बाद अधिकारियों ने अपने नए दायित्व संभालने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।
नगर निगम के अधिकांश जोन कमिश्नर पिछले ढाई से चार वर्षों से एक ही जोन में पदस्थ थे। लंबे समय तक एक ही क्षेत्र में पदस्थापना को लेकर निर्वाचित परिषद के सदस्यों और पार्षदों की ओर से लगातार बदलाव की मांग उठाई जा रही थी। उनका कहना था कि नियमित अंतराल में प्रभार बदलने से प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता बढ़ती है और विकास कार्यों की निगरानी अधिक प्रभावी होती है। इसी पृष्ठभूमि में निगम प्रशासन ने व्यापक स्तर पर फेरबदल का निर्णय लिया। सबसे ज्यादा चर्चा जोन क्रमांक-1 में लंबे समय से पदस्थ रंजना अग्रवाल के स्थानांतरण को लेकर हो रही है। रंजना अग्रवाल चार वर्षों से अधिक समय से इसी जोन की जिम्मेदारी संभाल रही थीं। अब उन्हें जोन क्रमांक-8 की जिम्मेदारी सौंपी गई है। उनकी जगह जोन क्रमांक-6 की जोन कमिश्नर मधुलिका सिंह को जोन क्रमांक-1 का नया प्रभार दिया गया है। सूत्रों के मुताबिक रंजना अग्रवाल के खिलाफ कई पार्षदों की शिकायतें भी लंबित थीं। हालांकि आधिकारिक तौर पर फेरबदल को नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा बताया जा रहा है।
नगर निगम के सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में शामिल जोन क्रमांक-3 को वीआईपी जोन माना जाता है। इस क्षेत्र में कई वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के कार्यालय, सरकारी आवास, जनप्रतिनिधियों के निवास और महत्वपूर्ण सरकारी संस्थान स्थित हैं। ऐसे में इस जोन की जिम्मेदारी हमेशा अनुभवी अधिकारियों को सौंपी जाती है। इस बार प्रवेश कश्यप को इस महत्वपूर्ण जोन का जोन कमिश्नर बनाया गया है। निगम प्रशासन को उम्मीद है कि उनके अनुभव का लाभ इस क्षेत्र में चल रहे विकास और जनसुविधा संबंधी कार्यों को मिलेगा। प्रवेश कश्यप को केवल जोन क्रमांक-3 की जिम्मेदारी ही नहीं मिली है, बल्कि उनके पास पहले से मौजूद कई महत्वपूर्ण विभागों का प्रभार भी बरकरार रखा गया है। वे उपायुक्त, स्थापना शाखा, स्वास्थ्य अधिकारी, स्वच्छता सर्वेक्षण और सिटी 2.0 से जुड़े कार्यों की जिम्मेदारी भी संभालते रहेंगे। इससे स्पष्ट है कि निगम प्रशासन ने उन्हें कई अहम परियोजनाओं और व्यवस्थाओं के संचालन की जिम्मेदारी सौंपकर विशेष भरोसा जताया है।
इसी क्रम में प्रवीण शुक्ला को जोन कमिश्नर के पद से मुक्त कर उनके मूल पद कार्यपालन अभियंता के रूप में कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं। अब वे जोन क्रमांक-3 और जोन क्रमांक-7 में कार्यपालन अभियंता की जिम्मेदारी संभालेंगे। निगम प्रशासन का मानना है कि तकनीकी कार्यों के बेहतर निष्पादन के लिए अनुभवी अभियंताओं को उनकी मूल जिम्मेदारियों में अधिक सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। नए आदेशों के तहत जोन क्रमांक-7 के जोन कमिश्नर प्रवीण शर्मा को जोन क्रमांक-2 भेजा गया है। वहीं भूपेंद्र उपाध्याय को जोन क्रमांक-2 से स्थानांतरित कर जोन क्रमांक-7 का प्रभार दिया गया है। सागर राज को जोन क्रमांक-4 से जोन क्रमांक-6 भेजा गया है, जबकि विभा सिंह को जोन क्रमांक-8 से जोन क्रमांक-4 की जिम्मेदारी दी गई है। इसके अलावा सवीना अनंत को जोन क्रमांक-5 का जोन कमिश्नर नियुक्त किया गया है। उनके पास उद्यान और स्विमिंग पूल से जुड़े कार्यों की जिम्मेदारी भी रहेगी।
डिप्टी कमिश्नर दीपिका भगत के प्रभार में भी कुछ बदलाव किए गए हैं। उन्हें स्टोर शाखा, भविष्य निधि, पेंशन और खाद्य शाखा से संबंधित जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। उनके कई पूर्व दायित्व भी यथावत रखे गए हैं ताकि प्रशासनिक कार्यों की निरंतरता बनी रहे। निगम प्रशासन का कहना है कि अधिकारियों के अनुभव और कार्यक्षमता को ध्यान में रखते हुए नई जिम्मेदारियों का निर्धारण किया गया है। नगर निगम के भीतर इस फेरबदल को प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि लंबे समय तक एक ही क्षेत्र में पदस्थ रहने से कार्यप्रणाली में एकरूपता आ जाती है और कई बार निगरानी व्यवस्था भी प्रभावित होती है। ऐसे में समय-समय पर दायित्व बदलने से नई कार्यशैली और बेहतर परिणाम सामने आने की संभावना रहती है। वहीं पार्षदों और जनप्रतिनिधियों का भी मानना है कि इससे नागरिक समस्याओं के समाधान में तेजी आएगी और विकास कार्यों की समीक्षा अधिक प्रभावी ढंग से हो सकेगी।
