छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण संशोधन विधेयक बजट सत्र में संभव, बदलाव से पहले 60 दिन की अनिवार्य सूचना

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ड्राफ्ट 9 राज्यों के अध्ययन और 50 से अधिक बैठकों के बाद तैयार; अवैध या दबाव में धर्म परिवर्तन पर कड़ी सजा का प्रस्ताव

राज्य में धर्म परिवर्तन की प्रक्रिया को नियमन में लाने के उद्देश्य से प्रस्तावित धर्मांतरण संशोधन विधेयक आगामी बजट सत्र में पेश किया जा सकता है। सरकार द्वारा तैयार मसौदे के अनुसार, किसी भी व्यक्ति को धर्म परिवर्तन से कम से कम 60 दिन पहले प्रशासन को सूचना देना अनिवार्य होगा। प्रस्तावित प्रावधानों में दबाव, प्रलोभन या छल से धर्म परिवर्तन कराने पर कठोर दंड का प्रावधान शामिल है।

यह विधेयक 23 फरवरी से शुरू हो रहे बजट सत्र में चर्चा के लिए लाया जा सकता है। सत्र 20 मार्च तक चलेगा और इसमें एक हजार से अधिक प्रश्न तथा दर्जन भर से ज्यादा विधेयकों पर विचार होने की संभावना है। राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण इस सत्र से पहले सत्तारूढ़ और विपक्षी दलों ने अलग-अलग बैठकें बुलाई हैं।

सरकारी सूत्रों के अनुसार मसौदा तैयार करने के लिए अन्य राज्यों में लागू संबंधित कानूनों का अध्ययन किया गया। गृह विभाग के नेतृत्व में हुई कई चरणों की बैठकों के बाद प्रस्तावित ढांचा तैयार हुआ है। सरकार का तर्क है कि राज्य में धर्म परिवर्तन से जुड़े विवादों को रोकने और कानूनी स्पष्टता लाने के लिए यह कदम आवश्यक है।

प्रस्तावित प्रावधानों के मुताबिक, निर्धारित प्रक्रिया से बाहर किए गए धर्म परिवर्तन को वैध मान्यता नहीं मिलेगी। यदि जांच में यह पाया जाता है कि धर्म परिवर्तन दबाव, धोखाधड़ी या प्रलोभन के आधार पर कराया गया है, तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई होगी। प्रशासनिक निगरानी और दस्तावेजी प्रक्रिया को अनिवार्य बनाकर व्यवस्था को पारदर्शी बनाने का दावा किया गया है।

सरकार का कहना है कि राज्य के कुछ आदिवासी बहुल क्षेत्रों में धर्म परिवर्तन को लेकर सामाजिक तनाव और कानून-व्यवस्था की स्थितियां उत्पन्न हुईं। प्रस्तावित कानून को इसी पृष्ठभूमि में निवारक उपाय के रूप में देखा जा रहा है। साथ ही धार्मिक स्वतंत्रता के संवैधानिक अधिकार को संरक्षित रखते हुए स्पष्ट प्रक्रिया तय करने पर जोर दिया गया है।

प्रशासनिक स्तर पर भी तैयारी तेज कर दी गई है। अंतिम रूप देने से पहले मसौदे पर कानूनी राय ली जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रस्तावित विधेयक लागू होने पर धर्म परिवर्तन से जुड़े मामलों में औपचारिक रिकॉर्ड और निगरानी तंत्र मजबूत होगा, हालांकि इसके सामाजिक प्रभावों पर राजनीतिक और वैचारिक बहस जारी रहने की संभावना है।

राज्य सरकार इसे शासन और सार्वजनिक व्यवस्था से जुड़ा सुधार बता रही है, जबकि विपक्ष संभावित प्रावधानों पर विस्तृत चर्चा की मांग कर रहा है। आने वाले सत्र में विधेयक की प्रस्तुति और उस पर होने वाली बहस राज्य की राजनीति और नीतिगत दिशा के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है

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21 Feb 2026 By Nitin Trivedi

छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण संशोधन विधेयक बजट सत्र में संभव, बदलाव से पहले 60 दिन की अनिवार्य सूचना

छत्तीसगढ़

राज्य में धर्म परिवर्तन की प्रक्रिया को नियमन में लाने के उद्देश्य से प्रस्तावित धर्मांतरण संशोधन विधेयक आगामी बजट सत्र में पेश किया जा सकता है। सरकार द्वारा तैयार मसौदे के अनुसार, किसी भी व्यक्ति को धर्म परिवर्तन से कम से कम 60 दिन पहले प्रशासन को सूचना देना अनिवार्य होगा। प्रस्तावित प्रावधानों में दबाव, प्रलोभन या छल से धर्म परिवर्तन कराने पर कठोर दंड का प्रावधान शामिल है।

यह विधेयक 23 फरवरी से शुरू हो रहे बजट सत्र में चर्चा के लिए लाया जा सकता है। सत्र 20 मार्च तक चलेगा और इसमें एक हजार से अधिक प्रश्न तथा दर्जन भर से ज्यादा विधेयकों पर विचार होने की संभावना है। राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण इस सत्र से पहले सत्तारूढ़ और विपक्षी दलों ने अलग-अलग बैठकें बुलाई हैं।

सरकारी सूत्रों के अनुसार मसौदा तैयार करने के लिए अन्य राज्यों में लागू संबंधित कानूनों का अध्ययन किया गया। गृह विभाग के नेतृत्व में हुई कई चरणों की बैठकों के बाद प्रस्तावित ढांचा तैयार हुआ है। सरकार का तर्क है कि राज्य में धर्म परिवर्तन से जुड़े विवादों को रोकने और कानूनी स्पष्टता लाने के लिए यह कदम आवश्यक है।

प्रस्तावित प्रावधानों के मुताबिक, निर्धारित प्रक्रिया से बाहर किए गए धर्म परिवर्तन को वैध मान्यता नहीं मिलेगी। यदि जांच में यह पाया जाता है कि धर्म परिवर्तन दबाव, धोखाधड़ी या प्रलोभन के आधार पर कराया गया है, तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई होगी। प्रशासनिक निगरानी और दस्तावेजी प्रक्रिया को अनिवार्य बनाकर व्यवस्था को पारदर्शी बनाने का दावा किया गया है।

सरकार का कहना है कि राज्य के कुछ आदिवासी बहुल क्षेत्रों में धर्म परिवर्तन को लेकर सामाजिक तनाव और कानून-व्यवस्था की स्थितियां उत्पन्न हुईं। प्रस्तावित कानून को इसी पृष्ठभूमि में निवारक उपाय के रूप में देखा जा रहा है। साथ ही धार्मिक स्वतंत्रता के संवैधानिक अधिकार को संरक्षित रखते हुए स्पष्ट प्रक्रिया तय करने पर जोर दिया गया है।

प्रशासनिक स्तर पर भी तैयारी तेज कर दी गई है। अंतिम रूप देने से पहले मसौदे पर कानूनी राय ली जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रस्तावित विधेयक लागू होने पर धर्म परिवर्तन से जुड़े मामलों में औपचारिक रिकॉर्ड और निगरानी तंत्र मजबूत होगा, हालांकि इसके सामाजिक प्रभावों पर राजनीतिक और वैचारिक बहस जारी रहने की संभावना है।

राज्य सरकार इसे शासन और सार्वजनिक व्यवस्था से जुड़ा सुधार बता रही है, जबकि विपक्ष संभावित प्रावधानों पर विस्तृत चर्चा की मांग कर रहा है। आने वाले सत्र में विधेयक की प्रस्तुति और उस पर होने वाली बहस राज्य की राजनीति और नीतिगत दिशा के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है

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