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रायपुर में म्यूल अकाउंट नेटवर्क का भंडाफोड़: 174.5 करोड़ का ट्रांजेक्शन, साइबर ठगी से जुड़े 25 एजेंट गिरफ्तार
Raipur, CG
फर्जी सिम और किराए के बैंक खातों से 1,236 साइबर फ्रॉड, ऑपरेशन साइबर शील्ड के तहत रायपुर से एमपी तक छापेमारी
रायपुर में साइबर ठगी के खिलाफ चलाए जा रहे ऑपरेशन साइबर शील्ड के तहत पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। रायपुर पुलिस ने फर्जी सिम कार्ड और म्यूल बैंक अकाउंट के जरिए ठगी की रकम को खपाने वाले एक संगठित सिंडिकेट का पर्दाफाश करते हुए 25 एजेंट्स को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया है कि इन खातों के जरिए करीब 174.5 करोड़ रुपए का लेनदेन हुआ, जबकि 77.35 लाख रुपए की ठगी की पुष्टि अलग-अलग मामलों में की जा चुकी है।
यह कार्रवाई रायपुर, दुर्ग, बलौदाबाजार सहित छत्तीसगढ़ के कई जिलों और मध्य प्रदेश के कुछ ठिकानों पर एक साथ की गई। आईजी अमरेश मिश्रा ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों में म्यूल बैंक अकाउंट संचालक, फर्जी सिम कार्ड विक्रेता, ब्रोकर और साइबर ठगों को तकनीकी सहायता देने वाले एजेंट शामिल हैं। पुलिस ने बैंकिंग रिकॉर्ड, तकनीकी साक्ष्य, एक व्यक्ति के नाम पर कई खाते और फर्जी सिम कार्ड के आधार पर पूरे नेटवर्क को चिन्हित किया।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों के खिलाफ देश के विभिन्न राज्यों में 1,236 साइबर फ्रॉड के मामले दर्ज हैं। ये आरोपी अपने बैंक खातों को किराए पर देते थे और ठगी की रकम पर 10 से 20 प्रतिशत तक कमीशन लेते थे। इन खातों का इस्तेमाल फर्जी शेयर ट्रेडिंग ऐप, क्रिप्टो निवेश योजनाएं, टेलीग्राम टास्क, ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म और गूगल रिव्यू जैसे माध्यमों से लोगों को ठगने में किया जाता था।
रायपुर के एसएसपी लाल उमेद सिंह ने बताया कि इस कार्रवाई में रायपुर रेंज साइबर थाना समेत आठ विशेष टीमों को लगाया गया था। तकनीकी निगरानी, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, बैंक ट्रांजेक्शन और डिजिटल ट्रेल के आधार पर आरोपियों तक पहुंच बनाई गई। पूछताछ में यह भी पता चला है कि फर्जी सिम और बैंक खाते खुलेआम बेचे जा रहे थे, जिनका इस्तेमाल साइबर अपराधी तुरंत ठगी के लिए करते थे।
पुलिस ने अब तक करीब 2 करोड़ रुपए की ठगी की राशि होल्ड कर ली है, जिसे प्रक्रिया पूरी होने के बाद पीड़ितों को लौटाया जाएगा। पिछले 11 महीनों में फर्स्ट-लेयर खातों में 7 करोड़ रुपए फ्रीज कराए गए, जिनमें से 4 करोड़ रुपए पहले ही पीड़ितों को वापस किए जा चुके हैं।
आईजी अमरेश मिश्रा ने कहा कि यह मामला केवल शुरुआत है। आरोपियों से सिम और बैंक खाते लेने वाले, उन्हें उपलब्ध कराने वाले और पूरे नेटवर्क को संरक्षण देने वालों की तलाश जारी है। पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी लालच में आकर अपने बैंक खाते या सिम कार्ड किसी को न दें, क्योंकि ऐसा करना गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। यह कार्रवाई साइबर अपराध के खिलाफ पुलिस की सख्ती और आम लोगों के हित में उठाया गया बड़ा कदम मानी जा रही है।
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रायपुर में साइबर ठगी के खिलाफ चलाए जा रहे ऑपरेशन साइबर शील्ड के तहत पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। रायपुर पुलिस ने फर्जी सिम कार्ड और म्यूल बैंक अकाउंट के जरिए ठगी की रकम को खपाने वाले एक संगठित सिंडिकेट का पर्दाफाश करते हुए 25 एजेंट्स को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया है कि इन खातों के जरिए करीब 174.5 करोड़ रुपए का लेनदेन हुआ, जबकि 77.35 लाख रुपए की ठगी की पुष्टि अलग-अलग मामलों में की जा चुकी है।
यह कार्रवाई रायपुर, दुर्ग, बलौदाबाजार सहित छत्तीसगढ़ के कई जिलों और मध्य प्रदेश के कुछ ठिकानों पर एक साथ की गई। आईजी अमरेश मिश्रा ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों में म्यूल बैंक अकाउंट संचालक, फर्जी सिम कार्ड विक्रेता, ब्रोकर और साइबर ठगों को तकनीकी सहायता देने वाले एजेंट शामिल हैं। पुलिस ने बैंकिंग रिकॉर्ड, तकनीकी साक्ष्य, एक व्यक्ति के नाम पर कई खाते और फर्जी सिम कार्ड के आधार पर पूरे नेटवर्क को चिन्हित किया।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों के खिलाफ देश के विभिन्न राज्यों में 1,236 साइबर फ्रॉड के मामले दर्ज हैं। ये आरोपी अपने बैंक खातों को किराए पर देते थे और ठगी की रकम पर 10 से 20 प्रतिशत तक कमीशन लेते थे। इन खातों का इस्तेमाल फर्जी शेयर ट्रेडिंग ऐप, क्रिप्टो निवेश योजनाएं, टेलीग्राम टास्क, ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म और गूगल रिव्यू जैसे माध्यमों से लोगों को ठगने में किया जाता था।
रायपुर के एसएसपी लाल उमेद सिंह ने बताया कि इस कार्रवाई में रायपुर रेंज साइबर थाना समेत आठ विशेष टीमों को लगाया गया था। तकनीकी निगरानी, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, बैंक ट्रांजेक्शन और डिजिटल ट्रेल के आधार पर आरोपियों तक पहुंच बनाई गई। पूछताछ में यह भी पता चला है कि फर्जी सिम और बैंक खाते खुलेआम बेचे जा रहे थे, जिनका इस्तेमाल साइबर अपराधी तुरंत ठगी के लिए करते थे।
पुलिस ने अब तक करीब 2 करोड़ रुपए की ठगी की राशि होल्ड कर ली है, जिसे प्रक्रिया पूरी होने के बाद पीड़ितों को लौटाया जाएगा। पिछले 11 महीनों में फर्स्ट-लेयर खातों में 7 करोड़ रुपए फ्रीज कराए गए, जिनमें से 4 करोड़ रुपए पहले ही पीड़ितों को वापस किए जा चुके हैं।
आईजी अमरेश मिश्रा ने कहा कि यह मामला केवल शुरुआत है। आरोपियों से सिम और बैंक खाते लेने वाले, उन्हें उपलब्ध कराने वाले और पूरे नेटवर्क को संरक्षण देने वालों की तलाश जारी है। पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी लालच में आकर अपने बैंक खाते या सिम कार्ड किसी को न दें, क्योंकि ऐसा करना गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। यह कार्रवाई साइबर अपराध के खिलाफ पुलिस की सख्ती और आम लोगों के हित में उठाया गया बड़ा कदम मानी जा रही है।
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