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धमतरी के बसंत साहू को राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित: दिव्यांगजन सशक्तिकरण के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार
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छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध चित्रकार बसंत साहू को दिव्यांगजन सशक्तिकरण में उनके योगदान के लिए भारत की राष्ट्रपति द्वारा राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान किया गया। धमतरी निवासी साहू को यह सम्मान नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित राष्ट्रीय समारोह में दिया गया।
साल 1995 में हुए एक हादसे में 95% दिव्यांगता के बावजूद बसंत साहू ने चित्रकला से जुड़ाव नहीं छोड़ा। वे अपने दाएं हाथ में एक विशेष पट्टा बांधकर अनोखी शैली में चित्र बनाते रहे। कठिन परिस्थितियों में उनकी यह निरंतरता उनके साहस, धैर्य और गहरी कला-निष्ठा का परिचायक है।
बसंत साहू की कलाकृतियों ने छत्तीसगढ़ की लोककला, प्रकृति, जनजीवन और सामाजिक सरोकारों को नई पहचान दिलाई है। उनकी सैकड़ों पेंटिंग्स राष्ट्रपति भवन, दिल्ली संग्रहालय और कई अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में संरक्षित हैं, जो राज्य की सांस्कृतिक धरोहर को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करती हैं।
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा दिया गया यह पुरस्कार साहू के दिव्यांगजनों के अधिकार, सम्मान और अवसरों के प्रति किए गए सतत प्रयासों की सराहना है। यह सम्मान छत्तीसगढ़ के लिए भी गर्व का क्षण है, जहां से एक कलाकार ने चुनौतियों के बीच अपनी प्रतिभा से विशेष पहचान बनाई।
नवंबर 2024 में मिले हेलेन केलर अवॉर्ड के बाद मिला यह राष्ट्रीय सम्मान उनकी प्रेरणादायी यात्रा का एक और महत्वपूर्ण पड़ाव बन गया है।
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साल 1995 में हुए एक हादसे में 95% दिव्यांगता के बावजूद बसंत साहू ने चित्रकला से जुड़ाव नहीं छोड़ा। वे अपने दाएं हाथ में एक विशेष पट्टा बांधकर अनोखी शैली में चित्र बनाते रहे। कठिन परिस्थितियों में उनकी यह निरंतरता उनके साहस, धैर्य और गहरी कला-निष्ठा का परिचायक है।
बसंत साहू की कलाकृतियों ने छत्तीसगढ़ की लोककला, प्रकृति, जनजीवन और सामाजिक सरोकारों को नई पहचान दिलाई है। उनकी सैकड़ों पेंटिंग्स राष्ट्रपति भवन, दिल्ली संग्रहालय और कई अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में संरक्षित हैं, जो राज्य की सांस्कृतिक धरोहर को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करती हैं।
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा दिया गया यह पुरस्कार साहू के दिव्यांगजनों के अधिकार, सम्मान और अवसरों के प्रति किए गए सतत प्रयासों की सराहना है। यह सम्मान छत्तीसगढ़ के लिए भी गर्व का क्षण है, जहां से एक कलाकार ने चुनौतियों के बीच अपनी प्रतिभा से विशेष पहचान बनाई।
नवंबर 2024 में मिले हेलेन केलर अवॉर्ड के बाद मिला यह राष्ट्रीय सम्मान उनकी प्रेरणादायी यात्रा का एक और महत्वपूर्ण पड़ाव बन गया है।
