नकटी विवाद पर AAP का बड़ा प्रदर्शन, विधायक अनुज शर्मा के आवास का किया घेराव

रायपुर (छ.ग.)

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विस्थापित परिवारों के पुनर्वास की मांग तेज, विधायक कॉलोनी की योजना पर पुनर्विचार की उठी आवाज

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के नकटी गांव में हुई बुलडोजर कार्रवाई और विस्थापन के मुद्दे को लेकर राजनीतिक माहौल लगातार गर्माता जा रहा है। सोमवार को आम आदमी पार्टी (AAP) ने इस मामले को लेकर धरसींवा विधायक अनुज शर्मा के सरकारी आवास के बाहर प्रदर्शन किया। पार्टी कार्यकर्ताओं ने प्रभावित परिवारों के पुनर्वास, चरागाह भूमि के संरक्षण और प्रस्तावित विधायक कॉलोनी योजना पर पुनर्विचार की मांग करते हुए राज्य सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता और पदाधिकारी मौजूद रहे। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि जिन परिवारों ने वर्षों से गांव में रहकर अपना जीवन-यापन किया, उन्हें पर्याप्त वैकल्पिक व्यवस्था किए बिना हटाया जा रहा है। पार्टी नेताओं का कहना था कि विकास योजनाओं के नाम पर गरीब और कमजोर वर्गों के अधिकारों की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए।

इस विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व रायपुर जिला अध्यक्ष नवनीत नंदे और यूथ विंग के जिला अध्यक्ष विकास दास मानिकपुरी ने किया। दोनों नेताओं ने कहा कि नकटी गांव के लोगों की समस्याओं को लेकर सरकार संवेदनशील रवैया अपनाने के बजाय प्रशासनिक कार्रवाई को प्राथमिकता दे रही है। उनका कहना था कि किसी भी विकास परियोजना का उद्देश्य लोगों के जीवन को बेहतर बनाना होना चाहिए, न कि उन्हें बेघर करना।

प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने हाथों में तख्तियां लेकर सरकार से विस्थापित परिवारों को न्याय दिलाने की मांग की। कई कार्यकर्ताओं ने कहा कि यदि प्रभावित लोगों को उचित पुनर्वास, मुआवजा और वैकल्पिक आवास उपलब्ध नहीं कराया गया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।

आम आदमी पार्टी ने इस दौरान सरकार के सामने तीन प्रमुख मांगें भी रखीं। पहली मांग यह रही कि नकटी गांव से प्रभावित सभी परिवारों का सम्मानजनक और स्थायी पुनर्वास सुनिश्चित किया जाए। दूसरी मांग के तहत चरागाह भूमि पर प्रस्तावित विधायक कॉलोनी परियोजना की समीक्षा कर वैकल्पिक स्थान तलाशने की बात कही गई। तीसरी मांग में गरीब, मजदूर, महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा किसी भी कार्रवाई से पहले सामाजिक और मानवीय पहलुओं पर विचार करने की अपील की गई।

पार्टी नेताओं ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनप्रतिनिधियों का दायित्व जनता के हितों की रक्षा करना है। उनका कहना था कि यदि विकास योजनाओं के कारण किसी परिवार को विस्थापित करना आवश्यक हो, तो पहले उसके पुनर्वास की संपूर्ण व्यवस्था की जानी चाहिए। बिना वैकल्पिक व्यवस्था के लोगों को हटाना सामाजिक न्याय की भावना के अनुरूप नहीं माना जा सकता।

प्रदर्शन में लोकसभा अध्यक्ष अज़ीम खान, प्रदेश युवा विंग अध्यक्ष इमरान खान, प्रदेश कार्यालय प्रभारी शिव शर्मा, महिला विंग जिला अध्यक्ष अनुराधा शुक्ला सहित पार्टी के कई प्रदेश और जिला स्तरीय पदाधिकारी शामिल हुए। सभी नेताओं ने एक स्वर में कहा कि प्रभावित परिवारों की समस्याओं को लेकर पार्टी लगातार आवाज उठाती रहेगी।

आम आदमी पार्टी ने यह भी स्पष्ट किया कि नकटी गांव के लोगों को न्याय मिलने तक उसका आंदोलन जारी रहेगा। पार्टी नेताओं ने कहा कि वे लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीकों से अपनी बात सरकार तक पहुंचाएंगे तथा प्रभावित लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए हर संभव प्रयास करेंगे।

नकटी गांव का मामला पिछले कुछ दिनों से प्रदेश की राजनीति का प्रमुख विषय बना हुआ है। 29 जून को हुई बुलडोजर कार्रवाई के बाद इस मुद्दे ने राजनीतिक तूल पकड़ लिया। विपक्षी दल लगातार सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठा रहे हैं और प्रभावित परिवारों के पक्ष में आवाज बुलंद कर रहे हैं।

इससे पहले कांग्रेस भी इस मुद्दे को लेकर प्रदर्शन कर चुकी है। कांग्रेस नेताओं ने राज्यपाल से मुलाकात कर पूरे मामले में हस्तक्षेप की मांग की थी। साथ ही विधानसभा के मानसून सत्र में भी इस विषय को प्रमुखता से उठाने की घोषणा की गई है। अब आम आदमी पार्टी के प्रदर्शन के बाद यह मामला और अधिक राजनीतिक चर्चा का केंद्र बन गया है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नकटी गांव का विवाद आने वाले दिनों में विधानसभा के भीतर और बाहर दोनों जगह प्रमुख मुद्दा बना रह सकता है। विपक्ष सरकार से बुलडोजर कार्रवाई, पुनर्वास नीति और भूमि आवंटन से जुड़े सवाल पूछने की तैयारी कर रहा है, जबकि सरकार अपनी कार्रवाई को नियमानुसार बता रही है।

प्रशासनिक स्तर पर भी इस पूरे मामले पर नजर रखी जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि भूमि से जुड़े सभी निर्णय कानूनी प्रक्रिया के तहत लिए जाते हैं और प्रभावित लोगों से संबंधित पहलुओं की भी समीक्षा की जा रही है। वहीं राजनीतिक दल इस मुद्दे को सामाजिक न्याय, पुनर्वास और जनहित से जोड़कर सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

मानसून सत्र शुरू होने के साथ ही नकटी गांव का मामला राज्य की राजनीति में प्रमुख विषय बन चुका है। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच इस मुद्दे पर तीखी बहस होने की संभावना जताई जा रही है, जबकि प्रभावित परिवारों की स्थिति और पुनर्वास से जुड़े सवाल अभी भी चर्चा के केंद्र में बने हुए हैं।

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13 Jul 2026 By Priyanka

नकटी विवाद पर AAP का बड़ा प्रदर्शन, विधायक अनुज शर्मा के आवास का किया घेराव

रायपुर (छ.ग.)

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के नकटी गांव में हुई बुलडोजर कार्रवाई और विस्थापन के मुद्दे को लेकर राजनीतिक माहौल लगातार गर्माता जा रहा है। सोमवार को आम आदमी पार्टी (AAP) ने इस मामले को लेकर धरसींवा विधायक अनुज शर्मा के सरकारी आवास के बाहर प्रदर्शन किया। पार्टी कार्यकर्ताओं ने प्रभावित परिवारों के पुनर्वास, चरागाह भूमि के संरक्षण और प्रस्तावित विधायक कॉलोनी योजना पर पुनर्विचार की मांग करते हुए राज्य सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता और पदाधिकारी मौजूद रहे। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि जिन परिवारों ने वर्षों से गांव में रहकर अपना जीवन-यापन किया, उन्हें पर्याप्त वैकल्पिक व्यवस्था किए बिना हटाया जा रहा है। पार्टी नेताओं का कहना था कि विकास योजनाओं के नाम पर गरीब और कमजोर वर्गों के अधिकारों की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए।

इस विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व रायपुर जिला अध्यक्ष नवनीत नंदे और यूथ विंग के जिला अध्यक्ष विकास दास मानिकपुरी ने किया। दोनों नेताओं ने कहा कि नकटी गांव के लोगों की समस्याओं को लेकर सरकार संवेदनशील रवैया अपनाने के बजाय प्रशासनिक कार्रवाई को प्राथमिकता दे रही है। उनका कहना था कि किसी भी विकास परियोजना का उद्देश्य लोगों के जीवन को बेहतर बनाना होना चाहिए, न कि उन्हें बेघर करना।

प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने हाथों में तख्तियां लेकर सरकार से विस्थापित परिवारों को न्याय दिलाने की मांग की। कई कार्यकर्ताओं ने कहा कि यदि प्रभावित लोगों को उचित पुनर्वास, मुआवजा और वैकल्पिक आवास उपलब्ध नहीं कराया गया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।

आम आदमी पार्टी ने इस दौरान सरकार के सामने तीन प्रमुख मांगें भी रखीं। पहली मांग यह रही कि नकटी गांव से प्रभावित सभी परिवारों का सम्मानजनक और स्थायी पुनर्वास सुनिश्चित किया जाए। दूसरी मांग के तहत चरागाह भूमि पर प्रस्तावित विधायक कॉलोनी परियोजना की समीक्षा कर वैकल्पिक स्थान तलाशने की बात कही गई। तीसरी मांग में गरीब, मजदूर, महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा किसी भी कार्रवाई से पहले सामाजिक और मानवीय पहलुओं पर विचार करने की अपील की गई।

पार्टी नेताओं ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनप्रतिनिधियों का दायित्व जनता के हितों की रक्षा करना है। उनका कहना था कि यदि विकास योजनाओं के कारण किसी परिवार को विस्थापित करना आवश्यक हो, तो पहले उसके पुनर्वास की संपूर्ण व्यवस्था की जानी चाहिए। बिना वैकल्पिक व्यवस्था के लोगों को हटाना सामाजिक न्याय की भावना के अनुरूप नहीं माना जा सकता।

प्रदर्शन में लोकसभा अध्यक्ष अज़ीम खान, प्रदेश युवा विंग अध्यक्ष इमरान खान, प्रदेश कार्यालय प्रभारी शिव शर्मा, महिला विंग जिला अध्यक्ष अनुराधा शुक्ला सहित पार्टी के कई प्रदेश और जिला स्तरीय पदाधिकारी शामिल हुए। सभी नेताओं ने एक स्वर में कहा कि प्रभावित परिवारों की समस्याओं को लेकर पार्टी लगातार आवाज उठाती रहेगी।

आम आदमी पार्टी ने यह भी स्पष्ट किया कि नकटी गांव के लोगों को न्याय मिलने तक उसका आंदोलन जारी रहेगा। पार्टी नेताओं ने कहा कि वे लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीकों से अपनी बात सरकार तक पहुंचाएंगे तथा प्रभावित लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए हर संभव प्रयास करेंगे।

नकटी गांव का मामला पिछले कुछ दिनों से प्रदेश की राजनीति का प्रमुख विषय बना हुआ है। 29 जून को हुई बुलडोजर कार्रवाई के बाद इस मुद्दे ने राजनीतिक तूल पकड़ लिया। विपक्षी दल लगातार सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठा रहे हैं और प्रभावित परिवारों के पक्ष में आवाज बुलंद कर रहे हैं।

इससे पहले कांग्रेस भी इस मुद्दे को लेकर प्रदर्शन कर चुकी है। कांग्रेस नेताओं ने राज्यपाल से मुलाकात कर पूरे मामले में हस्तक्षेप की मांग की थी। साथ ही विधानसभा के मानसून सत्र में भी इस विषय को प्रमुखता से उठाने की घोषणा की गई है। अब आम आदमी पार्टी के प्रदर्शन के बाद यह मामला और अधिक राजनीतिक चर्चा का केंद्र बन गया है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नकटी गांव का विवाद आने वाले दिनों में विधानसभा के भीतर और बाहर दोनों जगह प्रमुख मुद्दा बना रह सकता है। विपक्ष सरकार से बुलडोजर कार्रवाई, पुनर्वास नीति और भूमि आवंटन से जुड़े सवाल पूछने की तैयारी कर रहा है, जबकि सरकार अपनी कार्रवाई को नियमानुसार बता रही है।

प्रशासनिक स्तर पर भी इस पूरे मामले पर नजर रखी जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि भूमि से जुड़े सभी निर्णय कानूनी प्रक्रिया के तहत लिए जाते हैं और प्रभावित लोगों से संबंधित पहलुओं की भी समीक्षा की जा रही है। वहीं राजनीतिक दल इस मुद्दे को सामाजिक न्याय, पुनर्वास और जनहित से जोड़कर सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

मानसून सत्र शुरू होने के साथ ही नकटी गांव का मामला राज्य की राजनीति में प्रमुख विषय बन चुका है। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच इस मुद्दे पर तीखी बहस होने की संभावना जताई जा रही है, जबकि प्रभावित परिवारों की स्थिति और पुनर्वास से जुड़े सवाल अभी भी चर्चा के केंद्र में बने हुए हैं।

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https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/aaps-big-demonstration-on-nakati-controversy-surrounded-the-residence-of/article-58629

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