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जनगणना 2026 में ठगी का खतरा, अधिकारियों की चेतावनी- क्यूआर कोड स्कैन करने से करें परहेज
रायपुर (छ.ग.)
जनगणना 2026 में फर्जीवाड़े से बचने अलर्ट जारी। क्यूआर कोड स्कैन न करें, 1 मई से घर-घर सर्वे शुरू होगा।
छत्तीसगढ़ में चल रही जनगणना प्रक्रिया के बीच प्रशासन ने संभावित फर्जीवाड़े को लेकर बड़ा अलर्ट जारी किया है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि किसी भी अनधिकृत क्यूआर कोड को स्कैन करने से बचें और जानकारी साझा करने से पहले गणनाकर्मी की पहचान अवश्य जांचें। राज्य में 30 अप्रैल तक ऑनलाइन स्व-जनगणना का विकल्प खुला है, जबकि 1 मई से 30 मई के बीच गणनाकर्मी घर-घर जाकर परिवार और संपत्ति से जुड़ी जानकारी एकत्र करेंगे। इस दौरान साइबर ठगी या फर्जी पहचान के जरिए डेटा जुटाने की आशंका को देखते हुए यह चेतावनी जारी की गई है।
अधिकारियों के अनुसार, इस बार सभी गणनाकर्मियों को विशेष पहचान पत्र (आईडी) दिए गए हैं, जिन्हें दिखाना अनिवार्य होगा। नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे किसी भी व्यक्ति को जानकारी देने से पहले उसकी आधिकारिक पहचान की पुष्टि करें। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि जनगणना प्रक्रिया के दौरान किसी भी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाएगा।
स्व-जनगणना प्रक्रिया
स्व-जनगणना को इस बार एक वैकल्पिक सुविधा के रूप में पेश किया गया है। नागरिक चाहें तो स्वयं पोर्टल पर जाकर अपनी जानकारी दर्ज कर सकते हैं। यह प्रक्रिया पूरी तरह वैकल्पिक है और इसमें भाग लेना अनिवार्य नहीं है।
यदि कोई व्यक्ति स्व-जनगणना नहीं करता है, तो भी उसे किसी तरह की परेशानी या दंड का सामना नहीं करना पड़ेगा। ऐसे मामलों में गणनाकर्मी घर जाकर आवश्यक जानकारी एकत्र करेंगे।
डेटा सुरक्षा भरोसा
डेटा सुरक्षा को लेकर भी प्रशासन ने भरोसा दिलाया है। अधिकारियों का कहना है कि जनगणना अधिनियम 1948 के तहत सभी जानकारी पूरी तरह गोपनीय रखी जाती है। यह डेटा एन्क्रिप्टेड सर्वर पर सुरक्षित रहता है और इसका उपयोग केवल सांख्यिकीय और विकास कार्यों के लिए किया जाता है।
मुख्य सचिव और वरिष्ठ अधिकारियों ने नागरिकों से अपील की है कि वे स्व-जनगणना सुविधा का अधिक से अधिक उपयोग करें, ताकि प्रक्रिया पारदर्शी और तेज़ हो सके। रिपोर्ट्स के अनुसार, कई वरिष्ठ अधिकारियों ने स्वयं भी इस सुविधा के माध्यम से अपनी जानकारी दर्ज की है।
जनगणना निदेशक कार्तिकेय गोयल ने कहा कि किसी भी प्रकार की अफवाह या फर्जी संदेश से सावधान रहना जरूरी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनगणना के नाम पर किसी प्रकार का क्यूआर कोड स्कैन करने या भुगतान करने की जरूरत नहीं है।
इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य सटीक आंकड़े जुटाना है, जिससे सरकारी योजनाओं को बेहतर तरीके से लागू किया जा सके। विशेषज्ञ मानते हैं कि सही डेटा के आधार पर ही शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी नीतियों को मजबूत किया जा सकता है।
आने वाले दिनों में जब घर-घर सर्वे शुरू होगा, तब प्रशासन की सबसे बड़ी चुनौती प्रक्रिया को सुरक्षित और विश्वसनीय बनाए रखना होगी। नागरिकों की सतर्कता और सहयोग से ही यह लक्ष्य हासिल किया जा सकेगा।
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जनगणना 2026 में ठगी का खतरा, अधिकारियों की चेतावनी- क्यूआर कोड स्कैन करने से करें परहेज
रायपुर (छ.ग.)
छत्तीसगढ़ में चल रही जनगणना प्रक्रिया के बीच प्रशासन ने संभावित फर्जीवाड़े को लेकर बड़ा अलर्ट जारी किया है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि किसी भी अनधिकृत क्यूआर कोड को स्कैन करने से बचें और जानकारी साझा करने से पहले गणनाकर्मी की पहचान अवश्य जांचें। राज्य में 30 अप्रैल तक ऑनलाइन स्व-जनगणना का विकल्प खुला है, जबकि 1 मई से 30 मई के बीच गणनाकर्मी घर-घर जाकर परिवार और संपत्ति से जुड़ी जानकारी एकत्र करेंगे। इस दौरान साइबर ठगी या फर्जी पहचान के जरिए डेटा जुटाने की आशंका को देखते हुए यह चेतावनी जारी की गई है।
अधिकारियों के अनुसार, इस बार सभी गणनाकर्मियों को विशेष पहचान पत्र (आईडी) दिए गए हैं, जिन्हें दिखाना अनिवार्य होगा। नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे किसी भी व्यक्ति को जानकारी देने से पहले उसकी आधिकारिक पहचान की पुष्टि करें। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि जनगणना प्रक्रिया के दौरान किसी भी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाएगा।
स्व-जनगणना प्रक्रिया
स्व-जनगणना को इस बार एक वैकल्पिक सुविधा के रूप में पेश किया गया है। नागरिक चाहें तो स्वयं पोर्टल पर जाकर अपनी जानकारी दर्ज कर सकते हैं। यह प्रक्रिया पूरी तरह वैकल्पिक है और इसमें भाग लेना अनिवार्य नहीं है।
यदि कोई व्यक्ति स्व-जनगणना नहीं करता है, तो भी उसे किसी तरह की परेशानी या दंड का सामना नहीं करना पड़ेगा। ऐसे मामलों में गणनाकर्मी घर जाकर आवश्यक जानकारी एकत्र करेंगे।
डेटा सुरक्षा भरोसा
डेटा सुरक्षा को लेकर भी प्रशासन ने भरोसा दिलाया है। अधिकारियों का कहना है कि जनगणना अधिनियम 1948 के तहत सभी जानकारी पूरी तरह गोपनीय रखी जाती है। यह डेटा एन्क्रिप्टेड सर्वर पर सुरक्षित रहता है और इसका उपयोग केवल सांख्यिकीय और विकास कार्यों के लिए किया जाता है।
मुख्य सचिव और वरिष्ठ अधिकारियों ने नागरिकों से अपील की है कि वे स्व-जनगणना सुविधा का अधिक से अधिक उपयोग करें, ताकि प्रक्रिया पारदर्शी और तेज़ हो सके। रिपोर्ट्स के अनुसार, कई वरिष्ठ अधिकारियों ने स्वयं भी इस सुविधा के माध्यम से अपनी जानकारी दर्ज की है।
जनगणना निदेशक कार्तिकेय गोयल ने कहा कि किसी भी प्रकार की अफवाह या फर्जी संदेश से सावधान रहना जरूरी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनगणना के नाम पर किसी प्रकार का क्यूआर कोड स्कैन करने या भुगतान करने की जरूरत नहीं है।
इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य सटीक आंकड़े जुटाना है, जिससे सरकारी योजनाओं को बेहतर तरीके से लागू किया जा सके। विशेषज्ञ मानते हैं कि सही डेटा के आधार पर ही शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी नीतियों को मजबूत किया जा सकता है।
आने वाले दिनों में जब घर-घर सर्वे शुरू होगा, तब प्रशासन की सबसे बड़ी चुनौती प्रक्रिया को सुरक्षित और विश्वसनीय बनाए रखना होगी। नागरिकों की सतर्कता और सहयोग से ही यह लक्ष्य हासिल किया जा सकेगा।
