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रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (भीमराव आंबेडकर) ने तमिलनाडु में सामाजिक न्याय और समानता के लिए ऐतिहासिक त्रिपक्षीय गठबंधन किया
Digital Desk
तमिलनाडु की राजनीति में एक बड़ा और निर्णायक मोड़ सामने आया है। बाबासाहेब डॉ. बी.आर. आंबेडकर के विचारों से प्रेरित रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (भीमराव आंबेडकर) ने वी.के. शशिकला के नेतृत्व वाली ऑल इंडिया पुरच्चि थलैवर मक्कल मुनेत्र कषगम और वरिष्ठ नेता डॉ. एस. रामदास के नेतृत्व वाले पट्टाली मक्कल कच्ची (अय्या पीएमके) गुट के साथ हाथ मिलाकर एक ऐतिहासिक त्रिपक्षीय गठबंधन बनाया है।
23 अप्रैल 2026 को होने वाले तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से ठीक पहले बना यह गठबंधन सिर्फ एक चुनावी रणनीति नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव का दावा करने वाला एक नया राजनीतिक प्रयोग माना जा रहा है। यह गठबंधन खुद को राज्य की जनता के लिए एक मजबूत, समावेशी और वैकल्पिक शक्ति के रूप में पेश कर रहा है।
बाबासाहेब डॉ. बी.आर. आंबेडकर के मूल सिद्धांत—स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व—इस गठबंधन की आत्मा हैं। गठबंधन का लक्ष्य स्पष्ट है: जाति-आधारित भेदभाव को खत्म करना, वंचित वर्गों को सशक्त बनाना और ऐसा समाज बनाना जहां हर व्यक्ति को सम्मान और अवसर मिले। “शिक्षित बनो, संगठित हो, संघर्ष करो” का आंबेडकर का संदेश इस साझेदारी की दिशा तय करता दिख रहा है।
यह गठबंधन दलितों, पिछड़े वर्गों, वन्नियारों और तमिल समाज के अन्य वंचित तबकों को एक साझा मंच देने की कोशिश कर रहा है। इसे सिर्फ वोट बैंक की राजनीति नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय के एक बड़े एजेंडे के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है—एक ऐसा प्रयास जो आंबेडकर के “जातिविहीन समाज” के सपने को जमीन पर उतारने का दावा करता है।
इस गठबंधन के प्रमुख सूत्रधार और बाबासाहेब के पोते भीमराव यशवंतराव आंबेडकर ने इसे एक “ऐतिहासिक अवसर” बताया। उन्होंने कहा,
“हम तमिलनाडु में बाबासाहेब की विरासत लेकर आए हैं। वी.के. शशिकला और डॉ. रामदास के साथ हमें मजबूत साझा आधार मिला है। यह गठबंधन न्याय, समानता और सशक्तिकरण के मूल्यों को आगे बढ़ाएगा और राज्य की राजनीति में एक बड़ा बदलाव लाएगा।”
चुनावी मोर्चे पर, रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (भीमराव आंबेडकर) ने दो प्रमुख चेहरों को मैदान में उतारा है। पार्टी के महासचिव के. राजा तिरुमयम (विधानसभा क्षेत्र 181) से चुनाव लड़ेंगे, जबकि तमिलनाडु अध्यक्ष के. थंगराज के.वी. कुप्पम (विधानसभा क्षेत्र 45) से उम्मीदवार होंगे। दोनों नेताओं को जमीनी स्तर पर काम करने और वंचितों की आवाज उठाने के लिए जाना जाता है।
वी.के. शशिकला ने इस गठबंधन को “जनता के लिए नई दिशा” बताते हुए कहा,
“हम एक ऐसा तमिलनाडु बनाना चाहते हैं जहां हर हाथ को काम मिले और किसी को मजबूरी में गांव छोड़कर शहर न जाना पड़े। सामाजिक न्याय और विकास को साथ लेकर चलना ही हमारा लक्ष्य है।”
वहीं, डॉ. एस. रामदास ने इसे अपने दशकों के सामाजिक संघर्ष का विस्तार बताया। उन्होंने कहा,
“यह गठबंधन आरक्षण, समानता और शराब-मुक्त तमिलनाडु के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा उद्देश्य केवल सत्ता हासिल करना नहीं, बल्कि हर वर्ग को वास्तविक रूप से आगे बढ़ाना है।”
गठबंधन के नेताओं का मानना है कि चुनाव सिर्फ घोषणाओं से नहीं, बल्कि जनता की भागीदारी से जीते जाते हैं। इसी के तहत राज्यभर में समर्थकों से एकजुट होकर इस मोर्चे को मजबूत करने की अपील की गई है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह गठबंधन तमिलनाडु की राजनीति में नई हलचल पैदा कर सकता है, खासकर दलित, पिछड़े और वन्नियार समुदायों के बीच। यदि यह गठजोड़ जमीनी स्तर पर प्रभावी साबित होता है, तो यह पारंपरिक राजनीतिक समीकरणों को चुनौती दे सकता है।
अंततः, यह त्रिपक्षीय गठबंधन खुद को सिर्फ एक चुनावी मोर्चा नहीं, बल्कि एक सामाजिक आंदोलन के रूप में पेश कर रहा है—एक ऐसा आंदोलन जो रोजगार, कौशल विकास, समान अवसर और जाति उन्मूलन जैसे मुद्दों को केंद्र में रखता है।
बाबासाहेब आंबेडकर के विचारों को आधार बनाकर, यह गठबंधन एक ऐसे तमिलनाडु का वादा कर रहा है जहां स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व केवल नारे नहीं, बल्कि हर नागरिक की रोजमर्रा की सच्चाई बनें।
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रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (भीमराव आंबेडकर) ने तमिलनाडु में सामाजिक न्याय और समानता के लिए ऐतिहासिक त्रिपक्षीय गठबंधन किया
Digital Desk
23 अप्रैल 2026 को होने वाले तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से ठीक पहले बना यह गठबंधन सिर्फ एक चुनावी रणनीति नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव का दावा करने वाला एक नया राजनीतिक प्रयोग माना जा रहा है। यह गठबंधन खुद को राज्य की जनता के लिए एक मजबूत, समावेशी और वैकल्पिक शक्ति के रूप में पेश कर रहा है।
बाबासाहेब डॉ. बी.आर. आंबेडकर के मूल सिद्धांत—स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व—इस गठबंधन की आत्मा हैं। गठबंधन का लक्ष्य स्पष्ट है: जाति-आधारित भेदभाव को खत्म करना, वंचित वर्गों को सशक्त बनाना और ऐसा समाज बनाना जहां हर व्यक्ति को सम्मान और अवसर मिले। “शिक्षित बनो, संगठित हो, संघर्ष करो” का आंबेडकर का संदेश इस साझेदारी की दिशा तय करता दिख रहा है।
यह गठबंधन दलितों, पिछड़े वर्गों, वन्नियारों और तमिल समाज के अन्य वंचित तबकों को एक साझा मंच देने की कोशिश कर रहा है। इसे सिर्फ वोट बैंक की राजनीति नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय के एक बड़े एजेंडे के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है—एक ऐसा प्रयास जो आंबेडकर के “जातिविहीन समाज” के सपने को जमीन पर उतारने का दावा करता है।
इस गठबंधन के प्रमुख सूत्रधार और बाबासाहेब के पोते भीमराव यशवंतराव आंबेडकर ने इसे एक “ऐतिहासिक अवसर” बताया। उन्होंने कहा,
“हम तमिलनाडु में बाबासाहेब की विरासत लेकर आए हैं। वी.के. शशिकला और डॉ. रामदास के साथ हमें मजबूत साझा आधार मिला है। यह गठबंधन न्याय, समानता और सशक्तिकरण के मूल्यों को आगे बढ़ाएगा और राज्य की राजनीति में एक बड़ा बदलाव लाएगा।”
चुनावी मोर्चे पर, रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (भीमराव आंबेडकर) ने दो प्रमुख चेहरों को मैदान में उतारा है। पार्टी के महासचिव के. राजा तिरुमयम (विधानसभा क्षेत्र 181) से चुनाव लड़ेंगे, जबकि तमिलनाडु अध्यक्ष के. थंगराज के.वी. कुप्पम (विधानसभा क्षेत्र 45) से उम्मीदवार होंगे। दोनों नेताओं को जमीनी स्तर पर काम करने और वंचितों की आवाज उठाने के लिए जाना जाता है।
वी.के. शशिकला ने इस गठबंधन को “जनता के लिए नई दिशा” बताते हुए कहा,
“हम एक ऐसा तमिलनाडु बनाना चाहते हैं जहां हर हाथ को काम मिले और किसी को मजबूरी में गांव छोड़कर शहर न जाना पड़े। सामाजिक न्याय और विकास को साथ लेकर चलना ही हमारा लक्ष्य है।”
वहीं, डॉ. एस. रामदास ने इसे अपने दशकों के सामाजिक संघर्ष का विस्तार बताया। उन्होंने कहा,
“यह गठबंधन आरक्षण, समानता और शराब-मुक्त तमिलनाडु के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा उद्देश्य केवल सत्ता हासिल करना नहीं, बल्कि हर वर्ग को वास्तविक रूप से आगे बढ़ाना है।”
गठबंधन के नेताओं का मानना है कि चुनाव सिर्फ घोषणाओं से नहीं, बल्कि जनता की भागीदारी से जीते जाते हैं। इसी के तहत राज्यभर में समर्थकों से एकजुट होकर इस मोर्चे को मजबूत करने की अपील की गई है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह गठबंधन तमिलनाडु की राजनीति में नई हलचल पैदा कर सकता है, खासकर दलित, पिछड़े और वन्नियार समुदायों के बीच। यदि यह गठजोड़ जमीनी स्तर पर प्रभावी साबित होता है, तो यह पारंपरिक राजनीतिक समीकरणों को चुनौती दे सकता है।
अंततः, यह त्रिपक्षीय गठबंधन खुद को सिर्फ एक चुनावी मोर्चा नहीं, बल्कि एक सामाजिक आंदोलन के रूप में पेश कर रहा है—एक ऐसा आंदोलन जो रोजगार, कौशल विकास, समान अवसर और जाति उन्मूलन जैसे मुद्दों को केंद्र में रखता है।
बाबासाहेब आंबेडकर के विचारों को आधार बनाकर, यह गठबंधन एक ऐसे तमिलनाडु का वादा कर रहा है जहां स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व केवल नारे नहीं, बल्कि हर नागरिक की रोजमर्रा की सच्चाई बनें।
