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MP में 18 महीने बंद रहेगा यह पुल, लोगों को लगाना पड़ेगा 5 किमी लंबा चक्कर
धार (म.प्र.)
चंबल नदी पुल बंद होने से 18 माह तक यातायात प्रभावित रहेगा। डायवर्सन से 5 किमी अतिरिक्त दूरी तय करनी होगी।
मध्य प्रदेश के धार जिले में चंबल नदी पर बना पुराना पुल अगले करीब डेढ़ साल तक बंद रहेगा। मप्र सड़क विकास निगम द्वारा इस पुल को तोड़कर नए फोरलेन ब्रिज का निर्माण कराया जाएगा, जिसकी प्रक्रिया जल्द शुरू होने वाली है। जैसे ही निर्माण कार्य शुरू होगा, घाटाबिल्लौद मार्ग से गुजरने वाले वाहनों की आवाजाही पूरी तरह बंद कर दी जाएगी। इसका सीधा असर इंदौर से रतलाम, नीमच और मंदसौर जाने वाले प्रमुख यातायात मार्ग पर पड़ेगा। प्रशासन ने इसके लिए वैकल्पिक डायवर्सन प्लान तैयार किया है, जिसके तहत वाहनों को करीब 5 किलोमीटर लंबा अतिरिक्त चक्कर लगाना होगा। यह बदलाव आने वाले दिनों में क्षेत्रीय ट्रैफिक पैटर्न को प्रभावित करेगा और यात्रियों को अपनी यात्रा योजना में बदलाव करना पड़ेगा।
सड़क विकास निगम के मुताबिक, वर्तमान पुल संकरा और पुराना है, जिसकी चौड़ाई लगभग 20 फीट है। बढ़ते यातायात और भारी वाहनों के दबाव को देखते हुए इसे अब अनुपयुक्त माना जा रहा है। नए पुल का निर्माण करीब 24 मीटर चौड़ाई के साथ फोरलेन स्वरूप में किया जाएगा। इस परियोजना पर लगभग 40 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है और निर्माण अवधि 18 महीने तय की गई है।
डायवर्सन प्लान के तहत वाहन चालकों को नेशनल हाईवे इंदौर-अहमदाबाद मार्ग का उपयोग करते हुए पानखेड़ी और लेबड़ होकर गुजरना होगा। प्रशासन से इस योजना को अंतिम मंजूरी मिलना बाकी है, लेकिन मार्ग परिवर्तन से संबंधित संकेतक बोर्ड पहले ही लगा दिए गए हैं।
यह पुल उस समय बनाया गया था जब क्षेत्र में यातायात का दबाव काफी कम था। पिछले कुछ वर्षों में औद्योगिक गतिविधियों और भारी वाहनों की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई है। स्थिति यह रही कि बड़े वाहनों को निकालने के लिए पहले अस्थायी मार्ग का निर्माण करना पड़ा था। इसी कारण लंबे समय से नए और चौड़े पुल की मांग उठ रही थी।
आधिकारिक बयान
सड़क विकास निगम, धार के एसडीओ प्रदीप चौहान के अनुसार, “फोरलेन ब्रिज निर्माण के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। डायवर्सन प्लान को प्रशासन के पास स्वीकृति के लिए भेजा गया है। अनुमति मिलते ही निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा और इसे 18 महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।”
यातायात पर असर
पुल बंद होने से इंदौर-रतलाम रूट पर दैनिक यात्रा करने वाले लोगों को सबसे ज्यादा परेशानी होगी। वैकल्पिक मार्ग से गुजरने पर समय और ईंधन दोनों की खपत बढ़ेगी। इसके अलावा, पानखेड़ी और लेबड़ मार्ग पर ट्रैफिक दबाव बढ़ने की आशंका है, जिससे स्थानीय यातायात भी प्रभावित हो सकता है।
बारिश बनेगी चुनौती
अधिकारियों के अनुसार, वर्तमान समय निर्माण कार्य शुरू करने के लिए अनुकूल है क्योंकि नदी सूखी हुई है। यदि जल्द काम शुरू होता है तो नींव का बड़ा हिस्सा बारिश से पहले पूरा किया जा सकता है। हालांकि मानसून के दौरान 2 से 3 महीने काम प्रभावित होने की संभावना जताई गई है, क्योंकि चंबल नदी में जलस्तर तेजी से बढ़ता है।
डायवर्सन प्लान को मंजूरी मिलते ही पुल को बंद कर निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा। लक्ष्य है कि सिंहस्थ 2028 से पहले यह परियोजना पूरी हो जाए, जिससे क्षेत्र में यातायात सुगम हो सके। नए पुल के तैयार होने के बाद भारी और व्यावसायिक वाहनों को भी राहत मिलेगी, जिससे यह मार्ग क्षेत्रीय कनेक्टिविटी के लिहाज से और मजबूत बनेगा।
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MP में 18 महीने बंद रहेगा यह पुल, लोगों को लगाना पड़ेगा 5 किमी लंबा चक्कर
धार (म.प्र.)
मध्य प्रदेश के धार जिले में चंबल नदी पर बना पुराना पुल अगले करीब डेढ़ साल तक बंद रहेगा। मप्र सड़क विकास निगम द्वारा इस पुल को तोड़कर नए फोरलेन ब्रिज का निर्माण कराया जाएगा, जिसकी प्रक्रिया जल्द शुरू होने वाली है। जैसे ही निर्माण कार्य शुरू होगा, घाटाबिल्लौद मार्ग से गुजरने वाले वाहनों की आवाजाही पूरी तरह बंद कर दी जाएगी। इसका सीधा असर इंदौर से रतलाम, नीमच और मंदसौर जाने वाले प्रमुख यातायात मार्ग पर पड़ेगा। प्रशासन ने इसके लिए वैकल्पिक डायवर्सन प्लान तैयार किया है, जिसके तहत वाहनों को करीब 5 किलोमीटर लंबा अतिरिक्त चक्कर लगाना होगा। यह बदलाव आने वाले दिनों में क्षेत्रीय ट्रैफिक पैटर्न को प्रभावित करेगा और यात्रियों को अपनी यात्रा योजना में बदलाव करना पड़ेगा।
सड़क विकास निगम के मुताबिक, वर्तमान पुल संकरा और पुराना है, जिसकी चौड़ाई लगभग 20 फीट है। बढ़ते यातायात और भारी वाहनों के दबाव को देखते हुए इसे अब अनुपयुक्त माना जा रहा है। नए पुल का निर्माण करीब 24 मीटर चौड़ाई के साथ फोरलेन स्वरूप में किया जाएगा। इस परियोजना पर लगभग 40 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है और निर्माण अवधि 18 महीने तय की गई है।
डायवर्सन प्लान के तहत वाहन चालकों को नेशनल हाईवे इंदौर-अहमदाबाद मार्ग का उपयोग करते हुए पानखेड़ी और लेबड़ होकर गुजरना होगा। प्रशासन से इस योजना को अंतिम मंजूरी मिलना बाकी है, लेकिन मार्ग परिवर्तन से संबंधित संकेतक बोर्ड पहले ही लगा दिए गए हैं।
यह पुल उस समय बनाया गया था जब क्षेत्र में यातायात का दबाव काफी कम था। पिछले कुछ वर्षों में औद्योगिक गतिविधियों और भारी वाहनों की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई है। स्थिति यह रही कि बड़े वाहनों को निकालने के लिए पहले अस्थायी मार्ग का निर्माण करना पड़ा था। इसी कारण लंबे समय से नए और चौड़े पुल की मांग उठ रही थी।
आधिकारिक बयान
सड़क विकास निगम, धार के एसडीओ प्रदीप चौहान के अनुसार, “फोरलेन ब्रिज निर्माण के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। डायवर्सन प्लान को प्रशासन के पास स्वीकृति के लिए भेजा गया है। अनुमति मिलते ही निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा और इसे 18 महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।”
यातायात पर असर
पुल बंद होने से इंदौर-रतलाम रूट पर दैनिक यात्रा करने वाले लोगों को सबसे ज्यादा परेशानी होगी। वैकल्पिक मार्ग से गुजरने पर समय और ईंधन दोनों की खपत बढ़ेगी। इसके अलावा, पानखेड़ी और लेबड़ मार्ग पर ट्रैफिक दबाव बढ़ने की आशंका है, जिससे स्थानीय यातायात भी प्रभावित हो सकता है।
बारिश बनेगी चुनौती
अधिकारियों के अनुसार, वर्तमान समय निर्माण कार्य शुरू करने के लिए अनुकूल है क्योंकि नदी सूखी हुई है। यदि जल्द काम शुरू होता है तो नींव का बड़ा हिस्सा बारिश से पहले पूरा किया जा सकता है। हालांकि मानसून के दौरान 2 से 3 महीने काम प्रभावित होने की संभावना जताई गई है, क्योंकि चंबल नदी में जलस्तर तेजी से बढ़ता है।
डायवर्सन प्लान को मंजूरी मिलते ही पुल को बंद कर निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा। लक्ष्य है कि सिंहस्थ 2028 से पहले यह परियोजना पूरी हो जाए, जिससे क्षेत्र में यातायात सुगम हो सके। नए पुल के तैयार होने के बाद भारी और व्यावसायिक वाहनों को भी राहत मिलेगी, जिससे यह मार्ग क्षेत्रीय कनेक्टिविटी के लिहाज से और मजबूत बनेगा।
