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छत्तीसगढ़ विधानसभा में राम मंदिर चंदा मुद्दे पर तीखी नोकझोंक, विपक्ष के विरोध से कार्यवाही बाधित
छत्तीसगढ़
कांग्रेस ने चंदा अनियमितता का मामला उठाया, सत्ता पक्ष ने अधिकार क्षेत्र का हवाला दिया; हंगामे के बीच सदन कई बार रुका
छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र का पहला दिन राजनीतिक टकराव और तीखी बहस के नाम रहा। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही राम मंदिर निर्माण के लिए जुटाए गए चंदे में कथित अनियमितताओं के मुद्दे को लेकर कांग्रेस ने जोरदार विरोध दर्ज कराया। विपक्षी विधायकों ने पोस्टर लेकर सदन में प्रवेश किया और सरकार से इस विषय पर चर्चा कराने की मांग की। हालांकि विधानसभा अध्यक्ष ने इसे राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र से बाहर का विषय बताते हुए स्थगन प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया, जिसके बाद सदन में लगातार नारेबाजी और हंगामा होता रहा।
कार्यवाही शुरू होते ही नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत के नेतृत्व में कांग्रेस विधायक अपनी सीटों से उठकर वेल तक पहुंच गए। उनके हाथों में ऐसे पोस्टर थे, जिनमें राम मंदिर निर्माण के लिए एकत्रित चंदे की पारदर्शिता पर सवाल उठाए गए थे। विपक्ष का कहना था कि करोड़ों श्रद्धालुओं ने आस्था के साथ आर्थिक सहयोग दिया था, इसलिए यदि किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता के आरोप सामने आते हैं तो इस पर सार्वजनिक जवाबदेही तय होनी चाहिए।
सदन में विपक्ष ने इस विषय पर तत्काल चर्चा की मांग करते हुए स्थगन प्रस्ताव पेश किया। कांग्रेस विधायकों का कहना था कि यह केवल आर्थिक मामला नहीं बल्कि करोड़ों लोगों की धार्मिक भावनाओं और विश्वास से जुड़ा विषय है। उन्होंने सरकार से स्पष्ट रुख अपनाने और सदन में इस पर चर्चा की अनुमति देने की मांग की।
विपक्ष की मांग पर प्रतिक्रिया देते हुए संसदीय कार्य मंत्री अजय चंद्राकर ने कहा कि जिस विषय को लेकर चर्चा की मांग की जा रही है, वह छत्तीसगढ़ सरकार अथवा विधानसभा के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। उन्होंने कहा कि संबंधित मामला राज्य सरकार के प्रशासनिक नियंत्रण से बाहर है, इसलिए इस पर सदन में चर्चा कराना नियमों के अनुरूप नहीं होगा।
इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने नियमों का हवाला देते हुए स्थगन प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया। अध्यक्ष ने कहा कि विधानसभा में वही विषय उठाए जा सकते हैं जिनका संबंध सीधे राज्य शासन अथवा राज्य प्रशासन से हो। उनके इस निर्णय के बाद विपक्ष ने जोरदार विरोध दर्ज कराया और सदन में नारेबाजी शुरू हो गई।
लगातार बढ़ते शोर-शराबे और विरोध के कारण विधानसभा की कार्यवाही कुछ समय के लिए स्थगित करनी पड़ी। कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर भी सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस जारी रही। इस दौरान पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आरोप लगाया कि छत्तीसगढ़ सहित देशभर के लोगों ने राम मंदिर निर्माण के लिए श्रद्धा के साथ आर्थिक सहयोग दिया था और अब सामने आ रहे आरोप गंभीर सवाल खड़े करते हैं। उन्होंने कहा कि जनता की भावनाओं से जुड़े इस विषय पर पारदर्शिता आवश्यक है।
सत्ता पक्ष ने विपक्ष के आरोपों का विरोध करते हुए कहा कि बिना आधिकारिक निष्कर्ष के राजनीतिक आरोप लगाना उचित नहीं है। भाजपा विधायकों ने भी नियमों का हवाला देते हुए कहा कि सदन की कार्यवाही को केवल राजनीतिक मुद्दों के आधार पर बाधित नहीं किया जाना चाहिए।
लगातार हो रहे हंगामे के कारण अध्यक्ष को कार्यवाही बार-बार व्यवस्थित करने की अपील करनी पड़ी। जब दोनों पक्ष अपनी-अपनी बात पर अड़े रहे और नारेबाजी नहीं रुकी, तब सदन की कार्यवाही अगले दिन तक के लिए स्थगित कर दी गई।
राम मंदिर चंदा विवाद से पहले प्रश्नकाल के दौरान शिक्षा से जुड़े विषय भी सदन में प्रमुखता से उठे। भाजपा विधायक लता उसेंडी ने कोंडागांव स्थित शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय में बीएड और डीएड पाठ्यक्रम संचालित नहीं होने का मुद्दा उठाया। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के क्रियान्वयन और शिक्षकीय रिक्त पदों को लेकर सरकार से जानकारी मांगी।
उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा ने उत्तर देते हुए कहा कि राज्य के सभी विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में नई शिक्षा नीति लागू की जा चुकी है। उन्होंने बताया कि बीएड और डीएड पाठ्यक्रमों के विस्तार के लिए विशेषज्ञों की एक टास्क फोर्स गठित की गई है और प्रदेश के 13 महाविद्यालयों में ऐसे पाठ्यक्रम शुरू करने की संभावनाओं का परीक्षण किया जा रहा है।
सत्र की शुरुआत में सदन ने प्रसिद्ध लोक कलाकार और पद्म विभूषण सम्मान से सम्मानित तीजन बाई को श्रद्धांजलि भी दी। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि तीजन बाई ने पंडवानी कला के माध्यम से छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाया। उन्होंने कहा कि उनकी कला आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी।
नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने भी तीजन बाई को श्रद्धांजलि देते हुए उनके साथ बिताए गए अनेक सांस्कृतिक कार्यक्रमों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि तीजन बाई ने अपनी प्रतिभा और संघर्ष के बल पर प्रदेश का नाम पूरे देश और दुनिया में रोशन किया। श्रद्धांजलि के बाद सदन की कार्यवाही कुछ समय के लिए स्थगित की गई।
राजनीतिक दृष्टि से मानसून सत्र का दूसरा दिन भी काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कांग्रेस ने सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की घोषणा की है। हालांकि विधानसभा में भाजपा के पास स्पष्ट बहुमत है, फिर भी विपक्ष इस प्रस्ताव के माध्यम से कानून-व्यवस्था, शिक्षा, प्रशासनिक फैसलों, विस्थापन और अन्य जनहित के मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति बना रहा है।
सियासी जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में विधानसभा के भीतर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर तीखी बहस देखने को मिल सकती है। मानसून सत्र के पहले ही दिन जिस तरह सदन में टकराव का माहौल बना, उससे संकेत मिल रहे हैं कि आगामी बैठकों में भी राजनीतिक तापमान ऊंचा रहने वाला है।
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छत्तीसगढ़ विधानसभा में राम मंदिर चंदा मुद्दे पर तीखी नोकझोंक, विपक्ष के विरोध से कार्यवाही बाधित
छत्तीसगढ़
छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र का पहला दिन राजनीतिक टकराव और तीखी बहस के नाम रहा। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही राम मंदिर निर्माण के लिए जुटाए गए चंदे में कथित अनियमितताओं के मुद्दे को लेकर कांग्रेस ने जोरदार विरोध दर्ज कराया। विपक्षी विधायकों ने पोस्टर लेकर सदन में प्रवेश किया और सरकार से इस विषय पर चर्चा कराने की मांग की। हालांकि विधानसभा अध्यक्ष ने इसे राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र से बाहर का विषय बताते हुए स्थगन प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया, जिसके बाद सदन में लगातार नारेबाजी और हंगामा होता रहा।
कार्यवाही शुरू होते ही नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत के नेतृत्व में कांग्रेस विधायक अपनी सीटों से उठकर वेल तक पहुंच गए। उनके हाथों में ऐसे पोस्टर थे, जिनमें राम मंदिर निर्माण के लिए एकत्रित चंदे की पारदर्शिता पर सवाल उठाए गए थे। विपक्ष का कहना था कि करोड़ों श्रद्धालुओं ने आस्था के साथ आर्थिक सहयोग दिया था, इसलिए यदि किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता के आरोप सामने आते हैं तो इस पर सार्वजनिक जवाबदेही तय होनी चाहिए।
सदन में विपक्ष ने इस विषय पर तत्काल चर्चा की मांग करते हुए स्थगन प्रस्ताव पेश किया। कांग्रेस विधायकों का कहना था कि यह केवल आर्थिक मामला नहीं बल्कि करोड़ों लोगों की धार्मिक भावनाओं और विश्वास से जुड़ा विषय है। उन्होंने सरकार से स्पष्ट रुख अपनाने और सदन में इस पर चर्चा की अनुमति देने की मांग की।
विपक्ष की मांग पर प्रतिक्रिया देते हुए संसदीय कार्य मंत्री अजय चंद्राकर ने कहा कि जिस विषय को लेकर चर्चा की मांग की जा रही है, वह छत्तीसगढ़ सरकार अथवा विधानसभा के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। उन्होंने कहा कि संबंधित मामला राज्य सरकार के प्रशासनिक नियंत्रण से बाहर है, इसलिए इस पर सदन में चर्चा कराना नियमों के अनुरूप नहीं होगा।
इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने नियमों का हवाला देते हुए स्थगन प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया। अध्यक्ष ने कहा कि विधानसभा में वही विषय उठाए जा सकते हैं जिनका संबंध सीधे राज्य शासन अथवा राज्य प्रशासन से हो। उनके इस निर्णय के बाद विपक्ष ने जोरदार विरोध दर्ज कराया और सदन में नारेबाजी शुरू हो गई।
लगातार बढ़ते शोर-शराबे और विरोध के कारण विधानसभा की कार्यवाही कुछ समय के लिए स्थगित करनी पड़ी। कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर भी सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस जारी रही। इस दौरान पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आरोप लगाया कि छत्तीसगढ़ सहित देशभर के लोगों ने राम मंदिर निर्माण के लिए श्रद्धा के साथ आर्थिक सहयोग दिया था और अब सामने आ रहे आरोप गंभीर सवाल खड़े करते हैं। उन्होंने कहा कि जनता की भावनाओं से जुड़े इस विषय पर पारदर्शिता आवश्यक है।
सत्ता पक्ष ने विपक्ष के आरोपों का विरोध करते हुए कहा कि बिना आधिकारिक निष्कर्ष के राजनीतिक आरोप लगाना उचित नहीं है। भाजपा विधायकों ने भी नियमों का हवाला देते हुए कहा कि सदन की कार्यवाही को केवल राजनीतिक मुद्दों के आधार पर बाधित नहीं किया जाना चाहिए।
लगातार हो रहे हंगामे के कारण अध्यक्ष को कार्यवाही बार-बार व्यवस्थित करने की अपील करनी पड़ी। जब दोनों पक्ष अपनी-अपनी बात पर अड़े रहे और नारेबाजी नहीं रुकी, तब सदन की कार्यवाही अगले दिन तक के लिए स्थगित कर दी गई।
राम मंदिर चंदा विवाद से पहले प्रश्नकाल के दौरान शिक्षा से जुड़े विषय भी सदन में प्रमुखता से उठे। भाजपा विधायक लता उसेंडी ने कोंडागांव स्थित शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय में बीएड और डीएड पाठ्यक्रम संचालित नहीं होने का मुद्दा उठाया। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के क्रियान्वयन और शिक्षकीय रिक्त पदों को लेकर सरकार से जानकारी मांगी।
उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा ने उत्तर देते हुए कहा कि राज्य के सभी विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में नई शिक्षा नीति लागू की जा चुकी है। उन्होंने बताया कि बीएड और डीएड पाठ्यक्रमों के विस्तार के लिए विशेषज्ञों की एक टास्क फोर्स गठित की गई है और प्रदेश के 13 महाविद्यालयों में ऐसे पाठ्यक्रम शुरू करने की संभावनाओं का परीक्षण किया जा रहा है।
सत्र की शुरुआत में सदन ने प्रसिद्ध लोक कलाकार और पद्म विभूषण सम्मान से सम्मानित तीजन बाई को श्रद्धांजलि भी दी। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि तीजन बाई ने पंडवानी कला के माध्यम से छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाया। उन्होंने कहा कि उनकी कला आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी।
नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने भी तीजन बाई को श्रद्धांजलि देते हुए उनके साथ बिताए गए अनेक सांस्कृतिक कार्यक्रमों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि तीजन बाई ने अपनी प्रतिभा और संघर्ष के बल पर प्रदेश का नाम पूरे देश और दुनिया में रोशन किया। श्रद्धांजलि के बाद सदन की कार्यवाही कुछ समय के लिए स्थगित की गई।
राजनीतिक दृष्टि से मानसून सत्र का दूसरा दिन भी काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कांग्रेस ने सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की घोषणा की है। हालांकि विधानसभा में भाजपा के पास स्पष्ट बहुमत है, फिर भी विपक्ष इस प्रस्ताव के माध्यम से कानून-व्यवस्था, शिक्षा, प्रशासनिक फैसलों, विस्थापन और अन्य जनहित के मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति बना रहा है।
सियासी जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में विधानसभा के भीतर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर तीखी बहस देखने को मिल सकती है। मानसून सत्र के पहले ही दिन जिस तरह सदन में टकराव का माहौल बना, उससे संकेत मिल रहे हैं कि आगामी बैठकों में भी राजनीतिक तापमान ऊंचा रहने वाला है।
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