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रतनपुर थाना बनेगा मॉडल, DGP ने डिजिटल पुलिसिंग और बीट व्यवस्था परखी
छत्तीसगढ़
थाना गोद लेने के बाद पहली बार पहुंचे अरुण देव गौतम, ई-एफआईआर से लेकर गांवों की रिपोर्टिंग तक देखी; पुलिसकर्मियों को तकनीक और जवाबदेही पर जोर
बिलासपुर जिले के रतनपुर थाने को मॉडल पुलिस स्टेशन के तौर पर विकसित करने की तैयारी तेज हो गई है। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को थाने गोद लेने की जिम्मेदारी दिए जाने के बाद पहली बार DGP अरुण देव गौतम रतनपुर पहुंचे और करीब एक घंटे से ज्यादा समय तक पुलिसिंग व्यवस्था को बारीकी से देखा। उन्होंने थाने के रिकॉर्ड से लेकर डिजिटल सिस्टम, बीट व्यवस्था और गांवों की जानकारी तक की पड़ताल की। शाम करीब 4.15 बजे DGP ने मां महामाया मंदिर पहुंचकर दर्शन किए। इसके बाद करीब 5.20 बजे वे आईजी और एसएसपी के साथ रतनपुर थाना पहुंचे। थाना परिसर में पहुंचते ही उन्होंने पौधरोपण किया और फिर अलग-अलग शाखाओं का निरीक्षण शुरू किया।
रोजमर्रा के रिकॉर्ड, मालखाना, रोज नामचा और दूसरे रजिस्टरों को देखा गया। अधिकारियों से थाने में दर्ज मामलों और उनकी जांच की स्थिति के बारे में जानकारी ली गई। थाना प्रभारी निलेश पांडेय के साथ हुई चर्चा में DGP ने लंबित प्रकरणों, गंभीर अपराधों और जांच की प्रक्रिया को लेकर सवाल किए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि मामलों की विवेचना सिर्फ औपचारिकता के तौर पर नहीं होनी चाहिए, बल्कि हर पहलू की गंभीरता से जांच की जाए। नए आपराधिक कानून लागू होने के बाद पुलिसिंग में ऑनलाइन व्यवस्था का इस्तेमाल बढ़ाने पर भी उन्होंने जोर दिया। ई-साक्ष्य, ई-समन और ई-वारंट जैसी सुविधाओं का इस्तेमाल ज्यादा करने के निर्देश दिए गए। गंभीर अपराधों की जांच में फोरेंसिक टीम की मदद लेने के साथ घटनास्थल से फोटो और वीडियो रिकॉर्डिंग को भी व्यवस्थित तरीके से जांच का हिस्सा बनाने की बात कही गई। DGP का जोर इस बात पर रहा कि तकनीक का इस्तेमाल केवल रिकॉर्ड रखने तक सीमित नहीं हो, बल्कि इससे जांच और पुलिस सेवा दोनों तेज होनी चाहिए।
थाने के निरीक्षण के दौरान सबसे ज्यादा ध्यान बीट व्यवस्था पर रहा। DGP ने अलग-अलग बीट के पुलिसकर्मियों को बुलाकर उनके इलाके से संबंधित सवाल किए। उन्होंने गांवों के नाम, सरपंच, स्थानीय परिस्थितियों और क्षेत्र में चल रही गतिविधियों की जानकारी ली। कई आरक्षकों ने अपने बीट क्षेत्र से जुड़े सवालों के जवाब दिए। कुछ जगह जानकारी में कमी दिखाई दी तो DGP ने मौके पर ही सही जानकारी बताई और कहा कि बीट में तैनात पुलिसकर्मी को अपने इलाके की पूरी जानकारी होनी चाहिए। गांव में कौन रहता है, स्थानीय स्तर पर क्या विवाद चल रहा है, संवेदनशील स्थान कौन से हैं और किन लोगों से नियमित संपर्क रखना जरूरी है, यह सब बीट पुलिसकर्मी की जानकारी में होना चाहिए। रतनपुर इलाके के गांवों को लेकर पुलिसकर्मियों की तैयारी देखकर DGP ने संतोष जताया। खास तौर पर गांववार रिपोर्ट तैयार करने और क्षेत्र की जानकारी जुटाने के तरीके ने उनका ध्यान खींचा।
रतनपुर दौरे के दौरान DGP ने पुलिसिंग को लेकर कई दूसरे मुद्दों पर भी बात की। उन्होंने कहा कि बीट सिस्टम पुलिस व्यवस्था की बुनियादी कड़ी है। पुलिसकर्मी अगर लगातार अपने क्षेत्र के लोगों के संपर्क में रहता है तो अपराध से जुड़ी सूचनाएं समय पर मिल सकती हैं और छोटे विवाद बड़े रूप लेने से पहले भी उन पर ध्यान दिया जा सकता है। इसी व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया गया। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों द्वारा थाने गोद लेने की पहल को भी उन्होंने महत्वपूर्ण बताया। उनका कहना था कि इससे बड़े अधिकारी केवल कार्यालय स्तर पर काम देखने के बजाय सीधे थाने की वास्तविक स्थिति से जुड़ेंगे। थाना क्षेत्र की दिक्कतें, कर्मचारियों की जरूरत, संसाधनों की स्थिति और आम लोगों की शिकायतों को नजदीक से समझने का मौका मिलेगा।
इससे जवाबदेही भी बढ़ सकती है। रतनपुर थाना निरीक्षण के दौरान उन्होंने डिजिटल पुलिसिंग के साथ संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल की बात कही। इसी दौरे में DGP ने शहीदों को श्रद्धांजलि भी दी। बाद में बिलासपुर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने नक्सलवाद, पुलिसिंग और कमिश्नरेट सिस्टम समेत कई विषयों पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि राज्य का नक्सलमुक्त होना सुरक्षा बलों, पुलिस जवानों, उनके परिवारों और बस्तर के लोगों के लिए बड़ी उपलब्धि है। नक्सल प्रभावित इलाकों में लंबे समय तक कठिन परिस्थितियों में ड्यूटी करने वाले जवानों के साथ उनके परिवारों और स्थानीय लोगों ने भी चुनौतियां झेली हैं।
कमिश्नरेट सिस्टम को लेकर पूछे गए सवाल पर DGP ने इसे सरकार का नीतिगत फैसला बताया और इस पर कोई टिप्पणी करने से इनकार किया। बिलासपुर में कमिश्नरेट व्यवस्था लागू होने की चर्चाओं के बीच उनका यह बयान खास माना जा रहा है। DGP के दौरे की शुरुआत पुलिस लाइन स्थित चेतना भवन में आयोजित स्वास्थ्य शिविर से भी हुई। उन्होंने खुद ब्लड प्रेशर और ब्लड की जांच कराई। शिविर में पुलिसकर्मियों और उनके परिवारों से बातचीत की तथा स्वास्थ्य को लेकर नियमित जांच कराने की सलाह दी। पुलिसकर्मियों के प्रतिभावान बच्चों को भी सम्मानित किया गया। इस दौरान उन्होंने पुलिस की नौकरी की जिम्मेदारी और व्यक्तिगत स्वास्थ्य के बीच संतुलन रखने की बात कही।
उन्होंने पुलिसकर्मियों से कहा कि जिस तरह वे लगातार लोगों की सुरक्षा के लिए तैयार रहते हैं, उसी तरह अपने स्वास्थ्य और परिवार की तरफ भी ध्यान देना जरूरी है। पुलिस की वर्दी लोगों के बीच भरोसे का प्रतीक है और इसे पहनने वाले हर कर्मचारी के व्यवहार का असर आम जनता की धारणा पर पड़ता है। उन्होंने पुलिस सेवा को जिम्मेदारी के साथ निभाने और लोगों के बीच विश्वास मजबूत करने पर जोर दिया। कार्यक्रम में संभागायुक्त सुनील जैन, आईजी रामगोपाल गर्ग, कलेक्टर संजय अग्रवाल, एसएसपी रजनेश सिंह समेत पुलिस और प्रशासन के अधिकारी मौजूद रहे।
रतनपुर थाना बनेगा मॉडल, DGP ने डिजिटल पुलिसिंग और बीट व्यवस्था परखी
छत्तीसगढ़
बिलासपुर जिले के रतनपुर थाने को मॉडल पुलिस स्टेशन के तौर पर विकसित करने की तैयारी तेज हो गई है। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को थाने गोद लेने की जिम्मेदारी दिए जाने के बाद पहली बार DGP अरुण देव गौतम रतनपुर पहुंचे और करीब एक घंटे से ज्यादा समय तक पुलिसिंग व्यवस्था को बारीकी से देखा। उन्होंने थाने के रिकॉर्ड से लेकर डिजिटल सिस्टम, बीट व्यवस्था और गांवों की जानकारी तक की पड़ताल की। शाम करीब 4.15 बजे DGP ने मां महामाया मंदिर पहुंचकर दर्शन किए। इसके बाद करीब 5.20 बजे वे आईजी और एसएसपी के साथ रतनपुर थाना पहुंचे। थाना परिसर में पहुंचते ही उन्होंने पौधरोपण किया और फिर अलग-अलग शाखाओं का निरीक्षण शुरू किया।
रोजमर्रा के रिकॉर्ड, मालखाना, रोज नामचा और दूसरे रजिस्टरों को देखा गया। अधिकारियों से थाने में दर्ज मामलों और उनकी जांच की स्थिति के बारे में जानकारी ली गई। थाना प्रभारी निलेश पांडेय के साथ हुई चर्चा में DGP ने लंबित प्रकरणों, गंभीर अपराधों और जांच की प्रक्रिया को लेकर सवाल किए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि मामलों की विवेचना सिर्फ औपचारिकता के तौर पर नहीं होनी चाहिए, बल्कि हर पहलू की गंभीरता से जांच की जाए। नए आपराधिक कानून लागू होने के बाद पुलिसिंग में ऑनलाइन व्यवस्था का इस्तेमाल बढ़ाने पर भी उन्होंने जोर दिया। ई-साक्ष्य, ई-समन और ई-वारंट जैसी सुविधाओं का इस्तेमाल ज्यादा करने के निर्देश दिए गए। गंभीर अपराधों की जांच में फोरेंसिक टीम की मदद लेने के साथ घटनास्थल से फोटो और वीडियो रिकॉर्डिंग को भी व्यवस्थित तरीके से जांच का हिस्सा बनाने की बात कही गई। DGP का जोर इस बात पर रहा कि तकनीक का इस्तेमाल केवल रिकॉर्ड रखने तक सीमित नहीं हो, बल्कि इससे जांच और पुलिस सेवा दोनों तेज होनी चाहिए।
थाने के निरीक्षण के दौरान सबसे ज्यादा ध्यान बीट व्यवस्था पर रहा। DGP ने अलग-अलग बीट के पुलिसकर्मियों को बुलाकर उनके इलाके से संबंधित सवाल किए। उन्होंने गांवों के नाम, सरपंच, स्थानीय परिस्थितियों और क्षेत्र में चल रही गतिविधियों की जानकारी ली। कई आरक्षकों ने अपने बीट क्षेत्र से जुड़े सवालों के जवाब दिए। कुछ जगह जानकारी में कमी दिखाई दी तो DGP ने मौके पर ही सही जानकारी बताई और कहा कि बीट में तैनात पुलिसकर्मी को अपने इलाके की पूरी जानकारी होनी चाहिए। गांव में कौन रहता है, स्थानीय स्तर पर क्या विवाद चल रहा है, संवेदनशील स्थान कौन से हैं और किन लोगों से नियमित संपर्क रखना जरूरी है, यह सब बीट पुलिसकर्मी की जानकारी में होना चाहिए। रतनपुर इलाके के गांवों को लेकर पुलिसकर्मियों की तैयारी देखकर DGP ने संतोष जताया। खास तौर पर गांववार रिपोर्ट तैयार करने और क्षेत्र की जानकारी जुटाने के तरीके ने उनका ध्यान खींचा।
रतनपुर दौरे के दौरान DGP ने पुलिसिंग को लेकर कई दूसरे मुद्दों पर भी बात की। उन्होंने कहा कि बीट सिस्टम पुलिस व्यवस्था की बुनियादी कड़ी है। पुलिसकर्मी अगर लगातार अपने क्षेत्र के लोगों के संपर्क में रहता है तो अपराध से जुड़ी सूचनाएं समय पर मिल सकती हैं और छोटे विवाद बड़े रूप लेने से पहले भी उन पर ध्यान दिया जा सकता है। इसी व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया गया। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों द्वारा थाने गोद लेने की पहल को भी उन्होंने महत्वपूर्ण बताया। उनका कहना था कि इससे बड़े अधिकारी केवल कार्यालय स्तर पर काम देखने के बजाय सीधे थाने की वास्तविक स्थिति से जुड़ेंगे। थाना क्षेत्र की दिक्कतें, कर्मचारियों की जरूरत, संसाधनों की स्थिति और आम लोगों की शिकायतों को नजदीक से समझने का मौका मिलेगा।
इससे जवाबदेही भी बढ़ सकती है। रतनपुर थाना निरीक्षण के दौरान उन्होंने डिजिटल पुलिसिंग के साथ संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल की बात कही। इसी दौरे में DGP ने शहीदों को श्रद्धांजलि भी दी। बाद में बिलासपुर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने नक्सलवाद, पुलिसिंग और कमिश्नरेट सिस्टम समेत कई विषयों पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि राज्य का नक्सलमुक्त होना सुरक्षा बलों, पुलिस जवानों, उनके परिवारों और बस्तर के लोगों के लिए बड़ी उपलब्धि है। नक्सल प्रभावित इलाकों में लंबे समय तक कठिन परिस्थितियों में ड्यूटी करने वाले जवानों के साथ उनके परिवारों और स्थानीय लोगों ने भी चुनौतियां झेली हैं।
कमिश्नरेट सिस्टम को लेकर पूछे गए सवाल पर DGP ने इसे सरकार का नीतिगत फैसला बताया और इस पर कोई टिप्पणी करने से इनकार किया। बिलासपुर में कमिश्नरेट व्यवस्था लागू होने की चर्चाओं के बीच उनका यह बयान खास माना जा रहा है। DGP के दौरे की शुरुआत पुलिस लाइन स्थित चेतना भवन में आयोजित स्वास्थ्य शिविर से भी हुई। उन्होंने खुद ब्लड प्रेशर और ब्लड की जांच कराई। शिविर में पुलिसकर्मियों और उनके परिवारों से बातचीत की तथा स्वास्थ्य को लेकर नियमित जांच कराने की सलाह दी। पुलिसकर्मियों के प्रतिभावान बच्चों को भी सम्मानित किया गया। इस दौरान उन्होंने पुलिस की नौकरी की जिम्मेदारी और व्यक्तिगत स्वास्थ्य के बीच संतुलन रखने की बात कही।
उन्होंने पुलिसकर्मियों से कहा कि जिस तरह वे लगातार लोगों की सुरक्षा के लिए तैयार रहते हैं, उसी तरह अपने स्वास्थ्य और परिवार की तरफ भी ध्यान देना जरूरी है। पुलिस की वर्दी लोगों के बीच भरोसे का प्रतीक है और इसे पहनने वाले हर कर्मचारी के व्यवहार का असर आम जनता की धारणा पर पड़ता है। उन्होंने पुलिस सेवा को जिम्मेदारी के साथ निभाने और लोगों के बीच विश्वास मजबूत करने पर जोर दिया। कार्यक्रम में संभागायुक्त सुनील जैन, आईजी रामगोपाल गर्ग, कलेक्टर संजय अग्रवाल, एसएसपी रजनेश सिंह समेत पुलिस और प्रशासन के अधिकारी मौजूद रहे।
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