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8 नवंबर महाकाल भस्म आरती: बाबा महाकाल का चंदन त्रिपुंड और रजत मुकुट से दिव्य श्रृंगार
Ujjain, MP
विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में शनिवार तड़के मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि पर भोर के साथ ही भस्म आरती का पवित्र आयोजन हुआ। सुबह 4 बजे मंदिर के कपाट खुलते ही गर्भगृह में भक्ति और भव्यता का अद्भुत संगम दिखाई दिया। इस अवसर पर भगवान महाकाल का श्रृंगार चंदन के त्रिपुंड, रजत मुकुट और सुगंधित पुष्पों की मालाओं से अलंकृत कर किया गया।
आरती से पहले पुजारियों ने गर्भगृह में स्थापित सभी देवी-देवताओं का पूजन-अर्चन किया और भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया। इसके पश्चात दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से बने पंचामृत से अभिषेक संपन्न हुआ। प्रथम घंटाल बजाकर हरिओम जल अर्पित किया गया और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान का ध्यान किया गया। कपूर आरती के उपरांत ज्योतिर्लिंग को कपड़े से ढांककर भस्म अर्पित की गई।
इसके बाद भगवान को रजत शेषनाग मुकुट, रजत मुण्डमाल, रुद्राक्ष की माला और पुष्पहार पहनाए गए। पूरे मंदिर परिसर में सुगंध और श्रद्धा का वातावरण व्याप्त था। भगवान के दिव्य स्वरूप के दर्शन से श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।
पूरे मंदिर में “जय श्री महाकाल” के जयकारों से गूंजते स्वर भक्तिभाव में डूबे रहे। बाबा महाकाल के इस दिव्य श्रृंगार और भस्म आरती के दर्शन करने वालों के लिए यह क्षण आत्मिक शांति और अनन्य भक्ति का अनुभव बन गया।

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8 नवंबर महाकाल भस्म आरती: बाबा महाकाल का चंदन त्रिपुंड और रजत मुकुट से दिव्य श्रृंगार
Ujjain, MP
विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में शनिवार तड़के मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि पर भोर के साथ ही भस्म आरती का पवित्र आयोजन हुआ। सुबह 4 बजे मंदिर के कपाट खुलते ही गर्भगृह में भक्ति और भव्यता का अद्भुत संगम दिखाई दिया। इस अवसर पर भगवान महाकाल का श्रृंगार चंदन के त्रिपुंड, रजत मुकुट और सुगंधित पुष्पों की मालाओं से अलंकृत कर किया गया।
आरती से पहले पुजारियों ने गर्भगृह में स्थापित सभी देवी-देवताओं का पूजन-अर्चन किया और भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया। इसके पश्चात दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से बने पंचामृत से अभिषेक संपन्न हुआ। प्रथम घंटाल बजाकर हरिओम जल अर्पित किया गया और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान का ध्यान किया गया। कपूर आरती के उपरांत ज्योतिर्लिंग को कपड़े से ढांककर भस्म अर्पित की गई।
इसके बाद भगवान को रजत शेषनाग मुकुट, रजत मुण्डमाल, रुद्राक्ष की माला और पुष्पहार पहनाए गए। पूरे मंदिर परिसर में सुगंध और श्रद्धा का वातावरण व्याप्त था। भगवान के दिव्य स्वरूप के दर्शन से श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।
पूरे मंदिर में “जय श्री महाकाल” के जयकारों से गूंजते स्वर भक्तिभाव में डूबे रहे। बाबा महाकाल के इस दिव्य श्रृंगार और भस्म आरती के दर्शन करने वालों के लिए यह क्षण आत्मिक शांति और अनन्य भक्ति का अनुभव बन गया।

