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8 अगस्त महाकाल भस्म आरती: चंद्र मुकुट और आभूषणों से सजे बाबा, जयकारों से गूंजा मंदिर परिसर
धर्म डेस्क
सावन कृष्ण पक्ष की दशमी पर तड़के खुले महाकाल मंदिर के पट, पंचामृत अभिषेक के बाद भस्म से हुआ विशेष श्रृंगार
उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में शनिवार, 8 अगस्त की सुबह सावन कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि पर भस्म आरती की दिव्य परंपरा निभाई गई। तड़के करीब 2:30 बजे मंदिर के कपाट खोले गए। पट खुलते ही गर्भगृह में विधि-विधान के साथ भगवान महाकाल का पूजन शुरू हुआ। भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल का विशेष श्रृंगार किया गया। भगवान के मस्तक पर चंद्र अर्पित किया गया, वहीं रजत मुकुट, मुंडमाला, रुद्राक्ष और पुष्पमालाओं से उनका अलंकरण किया गया। मंदिर के कपाट खुलने के बाद सबसे पहले गर्भगृह में विराजमान देवी-देवताओं का पूजन किया गया। इसके बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक हुआ। पुजारियों ने दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से तैयार पंचामृत से ज्योतिर्लिंग का अभिषेक किया। धार्मिक विधियों के बीच मंत्रोच्चार चलता रहा और गर्भगृह में भक्ति का माहौल बना रहा। अभिषेक के बाद बाबा महाकाल को भांग और चंदन अर्पित किया गया। इसके साथ ही आभूषणों से विशेष श्रृंगार किया गया। भस्म आरती की प्रक्रिया शुरू होने से पहले प्रथम घंटाल बजाया गया और हरिओम का जल अर्पित किया गया। इसके बाद मंत्रों के उच्चारण के बीच भगवान महाकाल का ध्यान किया गया। कपूर आरती के बाद ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से ढांका गया और परंपरा के अनुसार पवित्र भस्म अर्पित की गई। भस्म अर्पण के बाद बाबा महाकाल का स्वरूप और भी मनोहारी दिखाई दिया। भगवान को शेषनाग का रजत मुकुट, रजत की मुंडमाला, रुद्राक्ष की माला और विभिन्न प्रकार के सुगंधित पुष्प अर्पित किए गए। फूलों और आभूषणों से किए गए इस विशेष श्रृंगार ने बाबा महाकाल के दिव्य स्वरूप को और आकर्षक बना दिया।

महाकाल मंदिर में होने वाली भस्म आरती का धार्मिक महत्व बेहद खास माना जाता है। मान्यता है कि भस्म अर्पण के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। इसी आस्था के चलते देशभर से श्रद्धालु भस्म आरती में शामिल होने के लिए उज्जैन पहुंचते हैं। सावन के महीने में श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ जाती है। शनिवार की सुबह भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु भस्म आरती के साक्षी बने। आरती और पूजन के दौरान श्रद्धालु बाबा महाकाल के जयकारे लगाते रहे। मंदिर परिसर में हर-हर महादेव और बाबा महाकाल की जय के उद्घोष सुनाई देते रहे। भक्ति और आस्था से सराबोर वातावरण में श्रद्धालुओं ने बाबा के दर्शन किए और सुख-समृद्धि की कामना की। भस्म आरती के दौरान श्रद्धालुओं ने भगवान महाकाल के साथ नंदी महाराज के भी दर्शन किए। परंपरा के अनुसार कई भक्त नंदी महाराज के कान के समीप जाकर अपनी मनोकामना कहते नजर आए। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि नंदी के माध्यम से कही गई प्रार्थना बाबा महाकाल तक पहुंचती है। यही वजह है कि दर्शन के दौरान भक्त नंदी महाराज के सामने कुछ देर रुककर प्रार्थना करते हैं। सावन के चलते महाकाल मंदिर में इन दिनों विशेष धार्मिक उत्साह देखने को मिल रहा है। सुबह से ही मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी हुई है। बाबा महाकाल के दर्शन के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों से लोग उज्जैन पहुंच रहे हैं। मंदिर में होने वाले नियमित पूजन और आरती के साथ सावन की धार्मिक गतिविधियों का भी विशेष महत्व है।
शनिवार को भस्म आरती में बाबा महाकाल का जो श्रृंगार किया गया, उसमें रजत आभूषणों के साथ फूलों और रुद्राक्ष की माला का विशेष आकर्षण रहा। मस्तक पर चंद्र अर्पित किए जाने के बाद भगवान का स्वरूप भक्तों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना। श्रद्धालुओं ने इस दिव्य स्वरूप के दर्शन कर खुद को सौभाग्यशाली माना। महाकाल की नगरी उज्जैन में सावन का यह दौर पूरी तरह शिवमय नजर आ रहा है। मंदिर परिसर में सुबह से ही धार्मिक मंत्रोच्चार और जयकारों की गूंज सुनाई दी। भस्म आरती के बाद भी श्रद्धालुओं की आस्था और उत्साह में कमी नहीं दिखी। भक्तों ने बाबा महाकाल से परिवार की सुख-शांति, समृद्धि और मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए प्रार्थना की।
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8 अगस्त महाकाल भस्म आरती: चंद्र मुकुट और आभूषणों से सजे बाबा, जयकारों से गूंजा मंदिर परिसर
धर्म डेस्क
उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में शनिवार, 8 अगस्त की सुबह सावन कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि पर भस्म आरती की दिव्य परंपरा निभाई गई। तड़के करीब 2:30 बजे मंदिर के कपाट खोले गए। पट खुलते ही गर्भगृह में विधि-विधान के साथ भगवान महाकाल का पूजन शुरू हुआ। भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल का विशेष श्रृंगार किया गया। भगवान के मस्तक पर चंद्र अर्पित किया गया, वहीं रजत मुकुट, मुंडमाला, रुद्राक्ष और पुष्पमालाओं से उनका अलंकरण किया गया। मंदिर के कपाट खुलने के बाद सबसे पहले गर्भगृह में विराजमान देवी-देवताओं का पूजन किया गया। इसके बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक हुआ। पुजारियों ने दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से तैयार पंचामृत से ज्योतिर्लिंग का अभिषेक किया। धार्मिक विधियों के बीच मंत्रोच्चार चलता रहा और गर्भगृह में भक्ति का माहौल बना रहा। अभिषेक के बाद बाबा महाकाल को भांग और चंदन अर्पित किया गया। इसके साथ ही आभूषणों से विशेष श्रृंगार किया गया। भस्म आरती की प्रक्रिया शुरू होने से पहले प्रथम घंटाल बजाया गया और हरिओम का जल अर्पित किया गया। इसके बाद मंत्रों के उच्चारण के बीच भगवान महाकाल का ध्यान किया गया। कपूर आरती के बाद ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से ढांका गया और परंपरा के अनुसार पवित्र भस्म अर्पित की गई। भस्म अर्पण के बाद बाबा महाकाल का स्वरूप और भी मनोहारी दिखाई दिया। भगवान को शेषनाग का रजत मुकुट, रजत की मुंडमाला, रुद्राक्ष की माला और विभिन्न प्रकार के सुगंधित पुष्प अर्पित किए गए। फूलों और आभूषणों से किए गए इस विशेष श्रृंगार ने बाबा महाकाल के दिव्य स्वरूप को और आकर्षक बना दिया।

महाकाल मंदिर में होने वाली भस्म आरती का धार्मिक महत्व बेहद खास माना जाता है। मान्यता है कि भस्म अर्पण के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। इसी आस्था के चलते देशभर से श्रद्धालु भस्म आरती में शामिल होने के लिए उज्जैन पहुंचते हैं। सावन के महीने में श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ जाती है। शनिवार की सुबह भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु भस्म आरती के साक्षी बने। आरती और पूजन के दौरान श्रद्धालु बाबा महाकाल के जयकारे लगाते रहे। मंदिर परिसर में हर-हर महादेव और बाबा महाकाल की जय के उद्घोष सुनाई देते रहे। भक्ति और आस्था से सराबोर वातावरण में श्रद्धालुओं ने बाबा के दर्शन किए और सुख-समृद्धि की कामना की। भस्म आरती के दौरान श्रद्धालुओं ने भगवान महाकाल के साथ नंदी महाराज के भी दर्शन किए। परंपरा के अनुसार कई भक्त नंदी महाराज के कान के समीप जाकर अपनी मनोकामना कहते नजर आए। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि नंदी के माध्यम से कही गई प्रार्थना बाबा महाकाल तक पहुंचती है। यही वजह है कि दर्शन के दौरान भक्त नंदी महाराज के सामने कुछ देर रुककर प्रार्थना करते हैं। सावन के चलते महाकाल मंदिर में इन दिनों विशेष धार्मिक उत्साह देखने को मिल रहा है। सुबह से ही मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी हुई है। बाबा महाकाल के दर्शन के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों से लोग उज्जैन पहुंच रहे हैं। मंदिर में होने वाले नियमित पूजन और आरती के साथ सावन की धार्मिक गतिविधियों का भी विशेष महत्व है।
शनिवार को भस्म आरती में बाबा महाकाल का जो श्रृंगार किया गया, उसमें रजत आभूषणों के साथ फूलों और रुद्राक्ष की माला का विशेष आकर्षण रहा। मस्तक पर चंद्र अर्पित किए जाने के बाद भगवान का स्वरूप भक्तों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना। श्रद्धालुओं ने इस दिव्य स्वरूप के दर्शन कर खुद को सौभाग्यशाली माना। महाकाल की नगरी उज्जैन में सावन का यह दौर पूरी तरह शिवमय नजर आ रहा है। मंदिर परिसर में सुबह से ही धार्मिक मंत्रोच्चार और जयकारों की गूंज सुनाई दी। भस्म आरती के बाद भी श्रद्धालुओं की आस्था और उत्साह में कमी नहीं दिखी। भक्तों ने बाबा महाकाल से परिवार की सुख-शांति, समृद्धि और मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए प्रार्थना की।
