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इंदौर का ISBT बनेगा हाईटेक ट्रांसपोर्ट हब, बस-मेट्रो-रेल कनेक्टिविटी से बदलेगा सफर
इंदौर,(म.प्र.)
कुमेड़ी स्थित इंटर स्टेट बस टर्मिनल का संचालन बीवीजी इंडिया लिमिटेड को सौंपा गया, रोजाना 50 से 55 हजार यात्रियों को मिलेंगी आधुनिक सुविधाएं, सिंहस्थ-2028 की जरूरतों को ध्यान में रखकर होगी तैयारी
इंदौर शहर का कुमेड़ी स्थित इंटर स्टेट बस टर्मिनल (आईएसबीटी) अब आधुनिक मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट हब के रूप में विकसित होने जा रहा है। प्रदेश के सबसे बड़े सार्वजनिक परिवहन केंद्रों में शामिल होने की दिशा में बढ़ रहे इस प्रोजेक्ट से रोजाना 50 से 55 हजार यात्रियों को बेहतर और सुविधाजनक यात्रा का लाभ मिलेगा। बस, मेट्रो और भविष्य की रेलवे कनेक्टिविटी को एक साथ जोड़ने वाले इस अत्याधुनिक टर्मिनल का संचालन और रखरखाव अब बीवीजी इंडिया लिमिटेड करेगी। नई व्यवस्था के साथ यात्रियों को सुरक्षित, डिजिटल और विश्वस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध कराने की तैयारी शुरू हो गई है।
करीब 5.85 हेक्टेयर यानी 14.46 एकड़ क्षेत्र में फैला यह आईएसबीटी प्रतिदिन 1,500 से अधिक बसों के संचालन की क्षमता रखेगा। यह टर्मिनल केवल इंदौर शहर ही नहीं बल्कि पूरे मध्य प्रदेश को गुजरात, राजस्थान, दिल्ली और अन्य राज्यों से जोड़ने वाले प्रमुख परिवहन केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि आधुनिक सुविधाओं और बेहतर प्रबंधन से यात्रियों का सफर पहले की तुलना में अधिक आरामदायक और व्यवस्थित होगा।
आईएसबीटी के संचालन की जिम्मेदारी बीवीजी इंडिया लिमिटेड को लीज के आधार पर सौंपी गई है। कंपनी टर्मिनल के संपूर्ण संचालन, रखरखाव और प्रबंधन का कार्य संभालेगी। इसके अंतर्गत इंजीनियरिंग सेवाएं, यात्री सुविधाएं, पार्किंग, सुरक्षा व्यवस्था, ट्रैफिक मैनेजमेंट, व्यावसायिक गतिविधियां, यूटिलिटी सेवाएं और डिजिटल ऑपरेशन जैसी सभी व्यवस्थाओं को एकीकृत मॉडल के तहत संचालित किया जाएगा।
इस परियोजना की सबसे बड़ी विशेषता बस, मेट्रो और भविष्य की रेलवे सेवाओं के बीच सहज कनेक्टिविटी होगी। आईएसबीटी परिसर को समर्पित फुटओवर ब्रिज के माध्यम से मेट्रो स्टेशन से सीधे जोड़ा जाएगा, जिससे यात्रियों को बस से उतरकर मेट्रो तक पहुंचने में किसी तरह की परेशानी नहीं होगी। आने वाले समय में रेलवे कनेक्टिविटी जुड़ने के बाद यह परिसर प्रदेश का सबसे आधुनिक सार्वजनिक परिवहन केंद्र बन जाएगा।
यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए पूरे टर्मिनल का संचालन स्मार्ट तकनीक के माध्यम से किया जाएगा। यहां डिजिटल एसेट मैनेजमेंट सिस्टम, ऑटोमेटेड पार्किंग, डिजिटल भुगतान सुविधा, सीसीटीवी आधारित सुरक्षा व्यवस्था, सार्वजनिक सूचना प्रणाली, शिकायत निवारण तंत्र और रियल टाइम ऑपरेशनल डैशबोर्ड जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाएगा। इन व्यवस्थाओं से यात्रियों को तेज, पारदर्शी और सुरक्षित सेवाएं मिल सकेंगी।
टर्मिनल की सफाई और रखरखाव के लिए भी आधुनिक प्रणाली अपनाई जाएगी। मशीनीकृत सफाई के साथ बिजली, जलापूर्ति, एयर कंडीशनिंग, लिफ्ट और सीवेज ट्रीटमेंट जैसी आवश्यक सेवाओं का नियमित रखरखाव किया जाएगा। प्रिवेंटिव मेंटेनेंस सिस्टम लागू होने से तकनीकी खराबियों की संभावना कम होगी और सेवाएं लगातार सुचारू रूप से संचालित होती रहेंगी।
पर्यावरण संरक्षण को भी इस परियोजना का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है। परिसर में सौर ऊर्जा उत्पादन, ऊर्जा दक्ष उपकरणों का उपयोग, सीवेज जल का पुनर्चक्रण, वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन, जैविक अपशिष्ट प्रसंस्करण, वर्षा जल संरक्षण और हरित लैंडस्केपिंग जैसी पर्यावरण अनुकूल व्यवस्थाएं विकसित की जाएंगी। इससे यह परियोजना केवल आधुनिक परिवहन केंद्र ही नहीं बल्कि एक टिकाऊ और पर्यावरण हितैषी मॉडल के रूप में भी स्थापित होगी।
आईएसबीटी परिसर में यात्रियों की सुविधाओं के साथ व्यावसायिक गतिविधियों को भी बढ़ावा दिया जाएगा। लगभग 30 हजार वर्गफुट क्षेत्र में रिटेल स्पेस विकसित किया जाएगा, जहां दुकानें, रेस्टोरेंट, फूड कोर्ट, कार्यालय और अन्य आवश्यक सेवाएं उपलब्ध रहेंगी। इससे यात्रियों को एक ही स्थान पर खानपान, खरीदारी और अन्य जरूरी सुविधाएं मिल सकेंगी। साथ ही स्थानीय स्तर पर रोजगार और व्यापार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
बीवीजी इंडिया लिमिटेड ने स्पष्ट किया है कि सिंहस्थ-2028 को ध्यान में रखते हुए पूरे संचालन तंत्र को विशेष रूप से तैयार किया जाएगा। करोड़ों श्रद्धालुओं और लाखों यात्रियों की संभावित आवाजाही को देखते हुए अतिरिक्त स्टाफ, उन्नत भीड़ प्रबंधन प्रणाली, बेहतर सफाई व्यवस्था और मेट्रो व रेलवे प्रशासन के साथ समन्वित संचालन की योजना बनाई जा रही है। इससे बड़े आयोजनों के दौरान भी यात्रियों को किसी प्रकार की असुविधा नहीं होगी।
कंपनी की मुख्य कार्यकारी अधिकारी रूपल सिन्हा ने कहा कि भारत में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था तेजी से बदल रही है। आधुनिक बस टर्मिनल अब केवल यात्रियों के आने-जाने का स्थान नहीं रह गए हैं, बल्कि वे एकीकृत मोबिलिटी इकोसिस्टम का हिस्सा बन चुके हैं। उनका कहना है कि कंपनी का लक्ष्य कुमेड़ी आईएसबीटी को स्मार्ट, सुरक्षित, टिकाऊ और यात्री-केंद्रित परिवहन मॉडल के रूप में विकसित करना है।
बीवीजी इंडिया का दावा है कि एयरपोर्ट, अस्पताल, औद्योगिक परिसरों और बड़े सार्वजनिक बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के संचालन का उसका अनुभव इस परियोजना को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। कंपनी आधुनिक प्रबंधन प्रणाली, डिजिटल तकनीक और अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाओं के माध्यम से इंदौर के आईएसबीटी को देश के सबसे कुशल मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट हब के रूप में स्थापित करने की दिशा में काम करेगी।
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इंदौर का ISBT बनेगा हाईटेक ट्रांसपोर्ट हब, बस-मेट्रो-रेल कनेक्टिविटी से बदलेगा सफर
इंदौर,(म.प्र.)
इंदौर शहर का कुमेड़ी स्थित इंटर स्टेट बस टर्मिनल (आईएसबीटी) अब आधुनिक मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट हब के रूप में विकसित होने जा रहा है। प्रदेश के सबसे बड़े सार्वजनिक परिवहन केंद्रों में शामिल होने की दिशा में बढ़ रहे इस प्रोजेक्ट से रोजाना 50 से 55 हजार यात्रियों को बेहतर और सुविधाजनक यात्रा का लाभ मिलेगा। बस, मेट्रो और भविष्य की रेलवे कनेक्टिविटी को एक साथ जोड़ने वाले इस अत्याधुनिक टर्मिनल का संचालन और रखरखाव अब बीवीजी इंडिया लिमिटेड करेगी। नई व्यवस्था के साथ यात्रियों को सुरक्षित, डिजिटल और विश्वस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध कराने की तैयारी शुरू हो गई है।
करीब 5.85 हेक्टेयर यानी 14.46 एकड़ क्षेत्र में फैला यह आईएसबीटी प्रतिदिन 1,500 से अधिक बसों के संचालन की क्षमता रखेगा। यह टर्मिनल केवल इंदौर शहर ही नहीं बल्कि पूरे मध्य प्रदेश को गुजरात, राजस्थान, दिल्ली और अन्य राज्यों से जोड़ने वाले प्रमुख परिवहन केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि आधुनिक सुविधाओं और बेहतर प्रबंधन से यात्रियों का सफर पहले की तुलना में अधिक आरामदायक और व्यवस्थित होगा।
आईएसबीटी के संचालन की जिम्मेदारी बीवीजी इंडिया लिमिटेड को लीज के आधार पर सौंपी गई है। कंपनी टर्मिनल के संपूर्ण संचालन, रखरखाव और प्रबंधन का कार्य संभालेगी। इसके अंतर्गत इंजीनियरिंग सेवाएं, यात्री सुविधाएं, पार्किंग, सुरक्षा व्यवस्था, ट्रैफिक मैनेजमेंट, व्यावसायिक गतिविधियां, यूटिलिटी सेवाएं और डिजिटल ऑपरेशन जैसी सभी व्यवस्थाओं को एकीकृत मॉडल के तहत संचालित किया जाएगा।
इस परियोजना की सबसे बड़ी विशेषता बस, मेट्रो और भविष्य की रेलवे सेवाओं के बीच सहज कनेक्टिविटी होगी। आईएसबीटी परिसर को समर्पित फुटओवर ब्रिज के माध्यम से मेट्रो स्टेशन से सीधे जोड़ा जाएगा, जिससे यात्रियों को बस से उतरकर मेट्रो तक पहुंचने में किसी तरह की परेशानी नहीं होगी। आने वाले समय में रेलवे कनेक्टिविटी जुड़ने के बाद यह परिसर प्रदेश का सबसे आधुनिक सार्वजनिक परिवहन केंद्र बन जाएगा।
यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए पूरे टर्मिनल का संचालन स्मार्ट तकनीक के माध्यम से किया जाएगा। यहां डिजिटल एसेट मैनेजमेंट सिस्टम, ऑटोमेटेड पार्किंग, डिजिटल भुगतान सुविधा, सीसीटीवी आधारित सुरक्षा व्यवस्था, सार्वजनिक सूचना प्रणाली, शिकायत निवारण तंत्र और रियल टाइम ऑपरेशनल डैशबोर्ड जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाएगा। इन व्यवस्थाओं से यात्रियों को तेज, पारदर्शी और सुरक्षित सेवाएं मिल सकेंगी।
टर्मिनल की सफाई और रखरखाव के लिए भी आधुनिक प्रणाली अपनाई जाएगी। मशीनीकृत सफाई के साथ बिजली, जलापूर्ति, एयर कंडीशनिंग, लिफ्ट और सीवेज ट्रीटमेंट जैसी आवश्यक सेवाओं का नियमित रखरखाव किया जाएगा। प्रिवेंटिव मेंटेनेंस सिस्टम लागू होने से तकनीकी खराबियों की संभावना कम होगी और सेवाएं लगातार सुचारू रूप से संचालित होती रहेंगी।
पर्यावरण संरक्षण को भी इस परियोजना का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है। परिसर में सौर ऊर्जा उत्पादन, ऊर्जा दक्ष उपकरणों का उपयोग, सीवेज जल का पुनर्चक्रण, वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन, जैविक अपशिष्ट प्रसंस्करण, वर्षा जल संरक्षण और हरित लैंडस्केपिंग जैसी पर्यावरण अनुकूल व्यवस्थाएं विकसित की जाएंगी। इससे यह परियोजना केवल आधुनिक परिवहन केंद्र ही नहीं बल्कि एक टिकाऊ और पर्यावरण हितैषी मॉडल के रूप में भी स्थापित होगी।
आईएसबीटी परिसर में यात्रियों की सुविधाओं के साथ व्यावसायिक गतिविधियों को भी बढ़ावा दिया जाएगा। लगभग 30 हजार वर्गफुट क्षेत्र में रिटेल स्पेस विकसित किया जाएगा, जहां दुकानें, रेस्टोरेंट, फूड कोर्ट, कार्यालय और अन्य आवश्यक सेवाएं उपलब्ध रहेंगी। इससे यात्रियों को एक ही स्थान पर खानपान, खरीदारी और अन्य जरूरी सुविधाएं मिल सकेंगी। साथ ही स्थानीय स्तर पर रोजगार और व्यापार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
बीवीजी इंडिया लिमिटेड ने स्पष्ट किया है कि सिंहस्थ-2028 को ध्यान में रखते हुए पूरे संचालन तंत्र को विशेष रूप से तैयार किया जाएगा। करोड़ों श्रद्धालुओं और लाखों यात्रियों की संभावित आवाजाही को देखते हुए अतिरिक्त स्टाफ, उन्नत भीड़ प्रबंधन प्रणाली, बेहतर सफाई व्यवस्था और मेट्रो व रेलवे प्रशासन के साथ समन्वित संचालन की योजना बनाई जा रही है। इससे बड़े आयोजनों के दौरान भी यात्रियों को किसी प्रकार की असुविधा नहीं होगी।
कंपनी की मुख्य कार्यकारी अधिकारी रूपल सिन्हा ने कहा कि भारत में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था तेजी से बदल रही है। आधुनिक बस टर्मिनल अब केवल यात्रियों के आने-जाने का स्थान नहीं रह गए हैं, बल्कि वे एकीकृत मोबिलिटी इकोसिस्टम का हिस्सा बन चुके हैं। उनका कहना है कि कंपनी का लक्ष्य कुमेड़ी आईएसबीटी को स्मार्ट, सुरक्षित, टिकाऊ और यात्री-केंद्रित परिवहन मॉडल के रूप में विकसित करना है।
बीवीजी इंडिया का दावा है कि एयरपोर्ट, अस्पताल, औद्योगिक परिसरों और बड़े सार्वजनिक बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के संचालन का उसका अनुभव इस परियोजना को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। कंपनी आधुनिक प्रबंधन प्रणाली, डिजिटल तकनीक और अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाओं के माध्यम से इंदौर के आईएसबीटी को देश के सबसे कुशल मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट हब के रूप में स्थापित करने की दिशा में काम करेगी।
