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प्रदेश में 4,000 मेगावॉट नई बिजली उत्पादन क्षमता को मंजूरी, 60 हजार करोड़ के निवेश से ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम
अनूपपुर (म.प्र.)
अनूपपुर में स्थापित होंगे नए पावर हाउस, वर्ष 2030 से आपूर्ति की संभावना; सरकार ने शत-प्रतिशत बिजली मांग पूरी करने का लक्ष्य रखा
प्रदेश में बढ़ती औद्योगिक, कृषि और घरेलू बिजली जरूरतों को देखते हुए राज्य सरकार ने ऊर्जा क्षेत्र में अब तक का बड़ा फैसला लिया है। 4,000 मेगावॉट बिजली उत्पादन क्षमता के लिए 60 हजार करोड़ रुपये के निवेश से जुड़े समझौतों पर मंगलवार को राजधानी में हस्ताक्षर किए गए। सरकार का दावा है कि इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद प्रदेश में बिजली की मांग की शत-प्रतिशत आपूर्ति सुनिश्चित की जा सकेगी।
समझौते राज्य की पावर मैनेजमेंट एजेंसी और निजी ऊर्जा कंपनियों के बीच हुए हैं। नए बिजली संयंत्र अनूपपुर जिले में स्थापित किए जाएंगे। इन परियोजनाओं के जरिए न केवल बिजली उत्पादन क्षमता में बड़ा इजाफा होगा, बल्कि प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगभग 8,000 लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है।
सरकारी अधिकारियों के अनुसार, ये पावर प्रोजेक्ट डिजाइन, बिल्ड, फाइनेंस, ओन एंड ऑपरेट (DBFOO) मॉडल पर विकसित किए जाएंगे। इसके तहत निजी कंपनियां संयंत्रों का निर्माण और संचालन करेंगी, जबकि राज्य तय अवधि तक बिजली खरीदेगा। यह मॉडल राज्य के वित्तीय दबाव को कम करते हुए दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद करेगा।
ऊर्जा विभाग के मुताबिक, कुल 3,200 मेगावॉट बिजली के लिए प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया के माध्यम से प्रस्ताव आमंत्रित किए गए थे, जिसमें 800 मेगावॉट अतिरिक्त क्षमता का ‘ग्रीन शू’ विकल्प भी शामिल था। इसी प्रक्रिया के तहत विभिन्न कंपनियों को अलग-अलग क्षमता आवंटित की गई। निवेश राशि का बड़ा हिस्सा आधुनिक थर्मल तकनीक, पर्यावरणीय मानकों और आधारभूत ढांचे के विकास पर खर्च किया जाएगा।
सरकार का मानना है कि स्थिर और पर्याप्त बिजली आपूर्ति किसी भी राज्य की आर्थिक प्रगति की बुनियाद होती है। उद्योग, कृषि, स्वास्थ्य और शहरी सेवाएं सीधे तौर पर ऊर्जा उपलब्धता से जुड़ी हैं। बीते कुछ वर्षों में प्रदेश में औद्योगिक गतिविधियों और निवेश प्रस्तावों में तेजी आई है, जिसके चलते बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में नई उत्पादन क्षमता को समय रहते जोड़ना जरूरी माना गया।
ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि अनूपपुर क्षेत्र में कोयला, जल और रेल कनेक्टिविटी की उपलब्धता इन परियोजनाओं के लिए अनुकूल है। साथ ही, राज्य पहले से ही नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में मजबूत स्थिति में है। थर्मल और रिन्यूएबल स्रोतों का संतुलन प्रदेश को ऊर्जा के लिहाज से अधिक स्थिर बनाएगा।
सरकारी आकलन के अनुसार, इन परियोजनाओं के तहत बनी बिजली वर्ष 2030 से ग्रिड में शामिल हो सकती है। इसके साथ ही भविष्य में औद्योगिक विस्तार, कृषि पंपों के लिए निर्बाध आपूर्ति और शहरीकरण से जुड़ी जरूरतों को पूरा करना आसान होगा।
ऊर्जा विभाग का कहना है कि आने वाले समय में ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क को भी समानांतर रूप से मजबूत किया जाएगा, ताकि उत्पादित बिजली का लाभ अंतिम उपभोक्ता तक बिना रुकावट पहुंचे।
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