MP में दवाएं होंगी महंगी! मिडिल ईस्ट संकट का बड़ा असर

भोपाल (म.प्र.)

By Rohit.P
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दवाएं महंगी: मिडिल ईस्ट संकट और कच्चे माल की बढ़ती कीमतों से भारत में दवाओं के दाम बढ़ने की आशंका, मरीजों पर आर्थिक दबाव बढ़ेगा।

किसी भी प्रकार की दवाओं की कीमतों पर वैश्विक घटनाओं का सीधा असर देखने को मिल रहा है। मध्य पूर्व में जारी तनाव और युद्ध जैसी स्थिति ने अब भारत के फार्मा सेक्टर को भी प्रभावित करना शुरू कर दिया है। इसका असर आम लोगों की जेब पर पड़ सकता है क्योंकि आने वाले समय में दवाओं की कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही है।

मध्य पूर्व संकट से वैश्विक सप्लाई चेन पर असर

ईरान-इजरायल संघर्ष के चलते दुनिया भर की सप्लाई चेन बाधित हुई है। दवाओं के निर्माण में इस्तेमाल होने वाला कच्चा माल महंगा हो गया है और इसकी कीमतों में करीब 150 से 166 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इससे फार्मा उद्योग की लागत तेजी से बढ़ रही है।

कच्चे माल की कीमतों में भारी उछाल

विशेषज्ञों के अनुसार कई जरूरी केमिकल्स और API (Active Pharmaceutical Ingredients) की कीमतें कई गुना बढ़ चुकी हैं। यदि स्थिति लंबी खिंचती है तो दवाओं के दामों में 25 से 30 प्रतिशत तक की वृद्धि संभव है। इसका सबसे ज्यादा असर रोजाना इस्तेमाल होने वाली दवाओं पर पड़ेगा।

चीन पर निर्भरता और सप्लाई में देरी

मध्य प्रदेश सहित भारत की सैकड़ों फार्मा कंपनियां कच्चे माल के लिए चीन पर निर्भर हैं। मौजूदा हालात में शिपिंग समय 30–40 दिनों से बढ़कर 80–90 दिन तक पहुंच गया है। साथ ही माल भाड़ा भी कई गुना बढ़ गया है, जिससे उत्पादन लागत और बढ़ रही है।

केमिस्ट दुकानों पर खत्म हो रही छूट

दवा बाजार में पहले जो जेनेरिक दवाएं 10 से 20 प्रतिशत छूट पर मिलती थीं, अब वे कई जगह एमआरपी पर बिक रही हैं। आने वाले दिनों में ब्रांडेड और सर्जिकल दवाओं की कीमतों में भी बढ़ोतरी की संभावना है।

आम मरीजों पर बढ़ेगा आर्थिक बोझ

बीपी, शुगर और अस्थमा जैसी बीमारियों से जूझ रहे मरीजों पर इसका सीधा असर पड़ेगा। जिन परिवारों में बुजुर्गों की दवा पर हर महीने करीब 3000 रुपये खर्च होते हैं, वह खर्च बढ़कर 3800 रुपये तक पहुंच सकता है। इससे घरेलू बजट पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा।

आवश्यक दवाओं की कीमतों में बढ़ोतरी

पैरासिटामोल, एंटीबायोटिक और कफ सिरप जैसी आम दवाओं के कच्चे माल की कीमतों में भारी उछाल आया है। पैरासिटामोल का कच्चा माल लगभग ढाई गुना महंगा हो गया है। इसी तरह आईबुप्रोफेन, एजिथ्रोमाइसिन और सेफिक्सिम जैसी दवाओं की लागत भी बढ़ी है।

उद्योग और बाजार की तैयारी

फार्मा डीलर्स और एसोसिएशनों का कहना है कि आने वाले 15 से 20 दिनों में बाजार में इसका स्पष्ट असर दिखेगा। कई छोटी कंपनियां सप्लाई से पीछे हट सकती हैं, जिससे सरकारी अस्पतालों की दवा आपूर्ति पर भी असर पड़ने की आशंका है।

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09 Apr 2026 By Rohit.P

MP में दवाएं होंगी महंगी! मिडिल ईस्ट संकट का बड़ा असर

भोपाल (म.प्र.)

किसी भी प्रकार की दवाओं की कीमतों पर वैश्विक घटनाओं का सीधा असर देखने को मिल रहा है। मध्य पूर्व में जारी तनाव और युद्ध जैसी स्थिति ने अब भारत के फार्मा सेक्टर को भी प्रभावित करना शुरू कर दिया है। इसका असर आम लोगों की जेब पर पड़ सकता है क्योंकि आने वाले समय में दवाओं की कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही है।

मध्य पूर्व संकट से वैश्विक सप्लाई चेन पर असर

ईरान-इजरायल संघर्ष के चलते दुनिया भर की सप्लाई चेन बाधित हुई है। दवाओं के निर्माण में इस्तेमाल होने वाला कच्चा माल महंगा हो गया है और इसकी कीमतों में करीब 150 से 166 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इससे फार्मा उद्योग की लागत तेजी से बढ़ रही है।

कच्चे माल की कीमतों में भारी उछाल

विशेषज्ञों के अनुसार कई जरूरी केमिकल्स और API (Active Pharmaceutical Ingredients) की कीमतें कई गुना बढ़ चुकी हैं। यदि स्थिति लंबी खिंचती है तो दवाओं के दामों में 25 से 30 प्रतिशत तक की वृद्धि संभव है। इसका सबसे ज्यादा असर रोजाना इस्तेमाल होने वाली दवाओं पर पड़ेगा।

चीन पर निर्भरता और सप्लाई में देरी

मध्य प्रदेश सहित भारत की सैकड़ों फार्मा कंपनियां कच्चे माल के लिए चीन पर निर्भर हैं। मौजूदा हालात में शिपिंग समय 30–40 दिनों से बढ़कर 80–90 दिन तक पहुंच गया है। साथ ही माल भाड़ा भी कई गुना बढ़ गया है, जिससे उत्पादन लागत और बढ़ रही है।

केमिस्ट दुकानों पर खत्म हो रही छूट

दवा बाजार में पहले जो जेनेरिक दवाएं 10 से 20 प्रतिशत छूट पर मिलती थीं, अब वे कई जगह एमआरपी पर बिक रही हैं। आने वाले दिनों में ब्रांडेड और सर्जिकल दवाओं की कीमतों में भी बढ़ोतरी की संभावना है।

आम मरीजों पर बढ़ेगा आर्थिक बोझ

बीपी, शुगर और अस्थमा जैसी बीमारियों से जूझ रहे मरीजों पर इसका सीधा असर पड़ेगा। जिन परिवारों में बुजुर्गों की दवा पर हर महीने करीब 3000 रुपये खर्च होते हैं, वह खर्च बढ़कर 3800 रुपये तक पहुंच सकता है। इससे घरेलू बजट पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा।

आवश्यक दवाओं की कीमतों में बढ़ोतरी

पैरासिटामोल, एंटीबायोटिक और कफ सिरप जैसी आम दवाओं के कच्चे माल की कीमतों में भारी उछाल आया है। पैरासिटामोल का कच्चा माल लगभग ढाई गुना महंगा हो गया है। इसी तरह आईबुप्रोफेन, एजिथ्रोमाइसिन और सेफिक्सिम जैसी दवाओं की लागत भी बढ़ी है।

उद्योग और बाजार की तैयारी

फार्मा डीलर्स और एसोसिएशनों का कहना है कि आने वाले 15 से 20 दिनों में बाजार में इसका स्पष्ट असर दिखेगा। कई छोटी कंपनियां सप्लाई से पीछे हट सकती हैं, जिससे सरकारी अस्पतालों की दवा आपूर्ति पर भी असर पड़ने की आशंका है।

https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/69d76536a78ad/article-50702

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