श्री सिद्ध चक्र महामंडल विधान में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, 128 अर्घ अर्पित कर मांगी सुख-शांति की कामना

भोपाल,(म.प्र.)

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भोपाल के चौक स्थित धर्मशाला में चल रहे धार्मिक अनुष्ठान में बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालु, मुनि संभव सागर महाराज ने मन की स्थिरता को बताया शांति का आधार

भोपाल के चौक स्थित जैन धर्मशाला में आयोजित श्री सिद्ध चक्र महामंडल विधान इन दिनों श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र बना हुआ है। आचार्य विद्यासमयसागर महाराज के शिष्य मुनि संभव सागर महाराज के ससंघ सानिध्य में चल रहे इस विशेष धार्मिक आयोजन में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हो रहे हैं। सुबह से ही धर्मशाला परिसर में भक्तों की आवाजाही शुरू हो जाती है और पूजा-अर्चना, अभिषेक तथा धार्मिक अनुष्ठानों के बीच पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहता है। आयोजन में शामिल श्रद्धालु न केवल धार्मिक क्रियाओं में भाग ले रहे हैं, बल्कि आध्यात्मिक प्रवचनों का लाभ लेकर आत्मिक शांति का अनुभव भी कर रहे हैं।

विधान के दौरान इंद्रों द्वारा भगवान जिनेंद्र का विधि-विधान से अभिषेक किया गया। इसके पश्चात शांति धारा और विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन हुआ। धार्मिक परंपराओं के अनुरूप श्रद्धालुओं ने विधान मंडल पर 128 अर्घ अर्पित कर अपने परिवार, समाज और देश की सुख-समृद्धि तथा शांति की कामना की। पूरे आयोजन के दौरान भक्ति गीतों और मंत्रोच्चारों से वातावरण गूंजता रहा। उपस्थित श्रद्धालुओं ने बड़ी श्रद्धा और समर्पण के साथ धार्मिक क्रियाओं में भाग लिया। आयोजन स्थल पर अनुशासन और धार्मिक गरिमा का विशेष ध्यान रखा गया, जिससे श्रद्धालुओं को पूजा और साधना के लिए अनुकूल वातावरण प्राप्त हो सका।

धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि संभव सागर महाराज ने जीवन में मन की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि संसार में अधिकांश दुखों का कारण मन की चंचलता और अस्थिरता है। व्यक्ति जब मोह, माया, क्रोध, लोभ और अहंकार जैसे भावों में उलझ जाता है, तब उसके जीवन में अशांति और तनाव बढ़ने लगता है। उन्होंने कहा कि बाहरी परिस्थितियों से अधिक महत्वपूर्ण मन की स्थिति होती है। यदि मन स्थिर और संयमित हो तो कठिन परिस्थितियों में भी व्यक्ति संतुलन बनाए रख सकता है।

मुनि श्री ने कहा कि आज का मनुष्य भौतिक उपलब्धियों के पीछे लगातार दौड़ रहा है, लेकिन वास्तविक सुख और संतोष आत्मिक शांति में निहित है। मन को धर्म, ध्यान और आत्मचिंतन के माध्यम से स्थिर किया जा सकता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि वे अपने दैनिक जीवन में कुछ समय आत्ममंथन और आध्यात्मिक साधना के लिए अवश्य निकालें। यही मार्ग व्यक्ति को आत्मा से जोड़ता है और आगे चलकर परमात्मा की अनुभूति तक पहुंचने में सहायक बनता है।

विधान के प्रवक्ता अंशुल जैन ने जानकारी देते हुए बताया कि इस धार्मिक अनुष्ठान के पुण्यार्जक परिवार के रूप में श्रीमती पांचूबाई, सुहागमल जैन तथा ऋषभ-मंजू जैन द्वारा विधान मंडल पर प्रमुख धार्मिक क्रियाएं संपन्न कराई गईं। उन्होंने बताया कि आयोजन के प्रति समाज के लोगों में विशेष उत्साह देखा जा रहा है और प्रतिदिन श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ रही है। विभिन्न आयु वर्ग के लोग परिवार सहित कार्यक्रम में पहुंच रहे हैं और धार्मिक गतिविधियों में भाग लेकर पुण्य लाभ अर्जित कर रहे हैं।

कार्यक्रम में कई श्रद्धालुओं ने विभिन्न पात्रों की जिम्मेदारी निभाई। प्रमुख पात्रों के रूप में सो धर्म इंद्र, प्रियंका, महेंद्र, कुबेर, आशा और विजेंद्र उपस्थित रहे। वहीं ध्वजारोहण का दायित्व विनोद और विपिन (एमपीटी) द्वारा निभाया गया। शांति धारा की महत्वपूर्ण धार्मिक क्रिया मनोज और प्रीति बांगा द्वारा संपन्न की गई। इसके अलावा महाज्ञानायक की भूमिका प्रतिभा और सचिन ने निभाई, जबकि यज्ञनायक के रूप में पूर्ति और शशांक ने विधान मंडल पर अर्घ अर्पित किए।

धार्मिक आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। कई परिवार सुबह से ही कार्यक्रम में शामिल होने के लिए पहुंच गए थे। महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों की सक्रिय भागीदारी ने आयोजन को और अधिक भव्य बना दिया। धार्मिक अनुष्ठान के साथ-साथ समाज में नैतिक मूल्यों और आध्यात्मिक जागरूकता को बढ़ावा देने का संदेश भी दिया गया। श्रद्धालुओं का मानना है कि ऐसे आयोजन न केवल धार्मिक आस्था को मजबूत करते हैं, बल्कि समाज को एकजुट करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

श्री सिद्ध चक्र महामंडल विधान का यह आयोजन लगातार श्रद्धालुओं को धर्म और अध्यात्म से जोड़ने का कार्य कर रहा है। मुनि संभव सागर महाराज के प्रेरक प्रवचन और धार्मिक अनुष्ठानों की गरिमा ने इस आयोजन को विशेष बना दिया है। आने वाले दिनों में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है। आयोजन के माध्यम से समाज में शांति, सद्भाव और आध्यात्मिक चेतना का संदेश प्रसारित हो रहा है, जो वर्तमान समय की आवश्यकता भी माना जा रहा है।

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02 Jun 2026 By Vaishnavi.J

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भोपाल के चौक स्थित जैन धर्मशाला में आयोजित श्री सिद्ध चक्र महामंडल विधान इन दिनों श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र बना हुआ है। आचार्य विद्यासमयसागर महाराज के शिष्य मुनि संभव सागर महाराज के ससंघ सानिध्य में चल रहे इस विशेष धार्मिक आयोजन में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हो रहे हैं। सुबह से ही धर्मशाला परिसर में भक्तों की आवाजाही शुरू हो जाती है और पूजा-अर्चना, अभिषेक तथा धार्मिक अनुष्ठानों के बीच पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहता है। आयोजन में शामिल श्रद्धालु न केवल धार्मिक क्रियाओं में भाग ले रहे हैं, बल्कि आध्यात्मिक प्रवचनों का लाभ लेकर आत्मिक शांति का अनुभव भी कर रहे हैं।

विधान के दौरान इंद्रों द्वारा भगवान जिनेंद्र का विधि-विधान से अभिषेक किया गया। इसके पश्चात शांति धारा और विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन हुआ। धार्मिक परंपराओं के अनुरूप श्रद्धालुओं ने विधान मंडल पर 128 अर्घ अर्पित कर अपने परिवार, समाज और देश की सुख-समृद्धि तथा शांति की कामना की। पूरे आयोजन के दौरान भक्ति गीतों और मंत्रोच्चारों से वातावरण गूंजता रहा। उपस्थित श्रद्धालुओं ने बड़ी श्रद्धा और समर्पण के साथ धार्मिक क्रियाओं में भाग लिया। आयोजन स्थल पर अनुशासन और धार्मिक गरिमा का विशेष ध्यान रखा गया, जिससे श्रद्धालुओं को पूजा और साधना के लिए अनुकूल वातावरण प्राप्त हो सका।

धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि संभव सागर महाराज ने जीवन में मन की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि संसार में अधिकांश दुखों का कारण मन की चंचलता और अस्थिरता है। व्यक्ति जब मोह, माया, क्रोध, लोभ और अहंकार जैसे भावों में उलझ जाता है, तब उसके जीवन में अशांति और तनाव बढ़ने लगता है। उन्होंने कहा कि बाहरी परिस्थितियों से अधिक महत्वपूर्ण मन की स्थिति होती है। यदि मन स्थिर और संयमित हो तो कठिन परिस्थितियों में भी व्यक्ति संतुलन बनाए रख सकता है।

मुनि श्री ने कहा कि आज का मनुष्य भौतिक उपलब्धियों के पीछे लगातार दौड़ रहा है, लेकिन वास्तविक सुख और संतोष आत्मिक शांति में निहित है। मन को धर्म, ध्यान और आत्मचिंतन के माध्यम से स्थिर किया जा सकता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि वे अपने दैनिक जीवन में कुछ समय आत्ममंथन और आध्यात्मिक साधना के लिए अवश्य निकालें। यही मार्ग व्यक्ति को आत्मा से जोड़ता है और आगे चलकर परमात्मा की अनुभूति तक पहुंचने में सहायक बनता है।

विधान के प्रवक्ता अंशुल जैन ने जानकारी देते हुए बताया कि इस धार्मिक अनुष्ठान के पुण्यार्जक परिवार के रूप में श्रीमती पांचूबाई, सुहागमल जैन तथा ऋषभ-मंजू जैन द्वारा विधान मंडल पर प्रमुख धार्मिक क्रियाएं संपन्न कराई गईं। उन्होंने बताया कि आयोजन के प्रति समाज के लोगों में विशेष उत्साह देखा जा रहा है और प्रतिदिन श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ रही है। विभिन्न आयु वर्ग के लोग परिवार सहित कार्यक्रम में पहुंच रहे हैं और धार्मिक गतिविधियों में भाग लेकर पुण्य लाभ अर्जित कर रहे हैं।

कार्यक्रम में कई श्रद्धालुओं ने विभिन्न पात्रों की जिम्मेदारी निभाई। प्रमुख पात्रों के रूप में सो धर्म इंद्र, प्रियंका, महेंद्र, कुबेर, आशा और विजेंद्र उपस्थित रहे। वहीं ध्वजारोहण का दायित्व विनोद और विपिन (एमपीटी) द्वारा निभाया गया। शांति धारा की महत्वपूर्ण धार्मिक क्रिया मनोज और प्रीति बांगा द्वारा संपन्न की गई। इसके अलावा महाज्ञानायक की भूमिका प्रतिभा और सचिन ने निभाई, जबकि यज्ञनायक के रूप में पूर्ति और शशांक ने विधान मंडल पर अर्घ अर्पित किए।

धार्मिक आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। कई परिवार सुबह से ही कार्यक्रम में शामिल होने के लिए पहुंच गए थे। महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों की सक्रिय भागीदारी ने आयोजन को और अधिक भव्य बना दिया। धार्मिक अनुष्ठान के साथ-साथ समाज में नैतिक मूल्यों और आध्यात्मिक जागरूकता को बढ़ावा देने का संदेश भी दिया गया। श्रद्धालुओं का मानना है कि ऐसे आयोजन न केवल धार्मिक आस्था को मजबूत करते हैं, बल्कि समाज को एकजुट करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

श्री सिद्ध चक्र महामंडल विधान का यह आयोजन लगातार श्रद्धालुओं को धर्म और अध्यात्म से जोड़ने का कार्य कर रहा है। मुनि संभव सागर महाराज के प्रेरक प्रवचन और धार्मिक अनुष्ठानों की गरिमा ने इस आयोजन को विशेष बना दिया है। आने वाले दिनों में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है। आयोजन के माध्यम से समाज में शांति, सद्भाव और आध्यात्मिक चेतना का संदेश प्रसारित हो रहा है, जो वर्तमान समय की आवश्यकता भी माना जा रहा है।

https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/bhopal/6a1e6d6c8b772/article-54705

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