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बस किराया नहीं बढ़ा तो थम सकते हैं पहिए, हड़ताल की चेतावनी
भोपाल,(म.प्र.)
बढ़ती डीजल कीमतों और महंगाई से परेशान बस मालिक आज परिवहन मंत्री से करेंगे चर्चा
मध्य प्रदेश में बस किराए को लेकर एक बार फिर विवाद गहराता नजर आ रहा है। लगातार बढ़ती महंगाई, डीजल की कीमतों में इजाफा और बसों के रखरखाव पर बढ़ते खर्च के बीच निजी बस संचालकों ने सरकार पर किराया बढ़ाने का दबाव तेज कर दिया है। बस मालिकों का कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में पुराने किराए पर बसों का संचालन करना बेहद मुश्किल हो गया है। ऐसे में यदि सरकार जल्द कोई निर्णय नहीं लेती है तो प्रदेशभर में बसों के पहिए थम सकते हैं। इस मुद्दे को लेकर आज भोपाल में बस मालिकों के प्रतिनिधि परिवहन मंत्री राव उदय प्रताप सिंह से मुलाकात करेंगे। इस बैठक को परिवहन क्षेत्र के लिए काफी अहम माना जा रहा है क्योंकि इसी के बाद बस संचालकों की अगली रणनीति तय होगी।
बस संचालकों का कहना है कि पिछले कई वर्षों से वे किराया बढ़ाने की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस फैसला नहीं लिया गया है। उनके अनुसार आखिरी बार अप्रैल 2021 में किराए का निर्धारण किया गया था, लेकिन उस समय भी अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं मिल सकी थी। इसके बाद से डीजल, टायर, इंजन ऑयल, स्पेयर पार्ट्स और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में लगातार वृद्धि हुई है। वहीं दूसरी ओर यात्रियों से लिया जाने वाला किराया लगभग उसी स्तर पर बना हुआ है। बस मालिकों का दावा है कि संचालन लागत और आय के बीच का अंतर लगातार बढ़ता जा रहा है, जिससे व्यवसाय घाटे में पहुंच गया है।
परिवहन व्यवसाय से जुड़े लोगों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का असर सीधे डीजल की कीमतों पर पड़ा है। हाल के दिनों में डीजल के दामों में कई बार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। केवल मई महीने में ही डीजल की कीमतों में कई बार बदलाव देखने को मिला, जिससे बस संचालन का खर्च और बढ़ गया। इसके अलावा नई तकनीक वाली यूरो-6 बसों की कीमतें भी पहले की तुलना में काफी अधिक हो गई हैं। इन बसों के रखरखाव और मरम्मत पर भी अतिरिक्त खर्च करना पड़ता है। ऐसे में छोटे और मध्यम स्तर के बस संचालकों पर आर्थिक दबाव लगातार बढ़ रहा है।
बस मालिकों का कहना है कि कोविड-19 महामारी के दौरान परिवहन उद्योग को भारी नुकसान झेलना पड़ा था। लंबे समय तक बसों का संचालन बंद रहा और कई संचालकों को कर्ज लेकर व्यवसाय चलाना पड़ा। महामारी के बाद यात्री संख्या में सुधार तो हुआ, लेकिन संचालन लागत में हुई वृद्धि ने राहत नहीं मिलने दी। कई बस मालिक अभी भी पुराने घाटे की भरपाई करने की कोशिश कर रहे हैं। उनका तर्क है कि यदि समय-समय पर किराए में संशोधन नहीं किया जाएगा तो व्यवसाय को टिकाए रखना मुश्किल हो जाएगा।
बस संचालकों ने सरकार के सामने न्यूनतम किराया 2.50 रुपये प्रति किलोमीटर तय करने की मांग रखी है। उनका कहना है कि वर्तमान आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए यह बढ़ोतरी जरूरी है। इसके साथ ही अन्य श्रेणियों के किराए में भी उसी अनुपात में संशोधन करने की मांग की गई है। बस मालिकों का कहना है कि किराया बढ़ने से यात्रियों को बेहतर सुविधाएं और सुरक्षित यात्रा उपलब्ध कराई जा सकेगी। उनका दावा है कि वे यात्री सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करना चाहते, लेकिन लगातार घाटे के बीच वाहनों का रखरखाव करना भी चुनौती बनता जा रहा है।
मध्य प्रदेश बस ओनर एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि यदि सरकार उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लेती है तो हड़ताल का रास्ता अपनाया जा सकता है। एसोसिएशन के महामंत्री जयकुमार जैन ने कहा है कि डीजल और ऑटो पार्ट्स की कीमतों में कई बार वृद्धि हो चुकी है, लेकिन बस किराया वर्षों से स्थिर है। ऐसे में बस संचालकों के सामने आर्थिक संकट गहराता जा रहा है। उन्होंने कहा कि अब घाटा सहने की स्थिति नहीं बची है और किराया बढ़ाना समय की जरूरत बन गया है।
हड़ताल की स्थिति बनने पर इसका सीधा असर लाखों यात्रियों पर पड़ सकता है। प्रदेश के विभिन्न शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों के बीच यात्रा करने वाले लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। रोजाना नौकरी, शिक्षा, व्यापार और अन्य कार्यों के लिए बस सेवा पर निर्भर रहने वाले यात्रियों के सामने आवागमन का संकट खड़ा हो सकता है। यही कारण है कि आज होने वाली बैठक को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
परिवहन मंत्री और बस संचालकों के बीच होने वाली चर्चा पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। यदि बैठक में कोई सहमति बनती है तो संभावित हड़ताल टल सकती है। वहीं, मांगों को लेकर समाधान नहीं निकलने की स्थिति में बस संचालक आंदोलन या हड़ताल की घोषणा कर सकते हैं।
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बस किराया नहीं बढ़ा तो थम सकते हैं पहिए, हड़ताल की चेतावनी
भोपाल,(म.प्र.)
मध्य प्रदेश में बस किराए को लेकर एक बार फिर विवाद गहराता नजर आ रहा है। लगातार बढ़ती महंगाई, डीजल की कीमतों में इजाफा और बसों के रखरखाव पर बढ़ते खर्च के बीच निजी बस संचालकों ने सरकार पर किराया बढ़ाने का दबाव तेज कर दिया है। बस मालिकों का कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में पुराने किराए पर बसों का संचालन करना बेहद मुश्किल हो गया है। ऐसे में यदि सरकार जल्द कोई निर्णय नहीं लेती है तो प्रदेशभर में बसों के पहिए थम सकते हैं। इस मुद्दे को लेकर आज भोपाल में बस मालिकों के प्रतिनिधि परिवहन मंत्री राव उदय प्रताप सिंह से मुलाकात करेंगे। इस बैठक को परिवहन क्षेत्र के लिए काफी अहम माना जा रहा है क्योंकि इसी के बाद बस संचालकों की अगली रणनीति तय होगी।
बस संचालकों का कहना है कि पिछले कई वर्षों से वे किराया बढ़ाने की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस फैसला नहीं लिया गया है। उनके अनुसार आखिरी बार अप्रैल 2021 में किराए का निर्धारण किया गया था, लेकिन उस समय भी अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं मिल सकी थी। इसके बाद से डीजल, टायर, इंजन ऑयल, स्पेयर पार्ट्स और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में लगातार वृद्धि हुई है। वहीं दूसरी ओर यात्रियों से लिया जाने वाला किराया लगभग उसी स्तर पर बना हुआ है। बस मालिकों का दावा है कि संचालन लागत और आय के बीच का अंतर लगातार बढ़ता जा रहा है, जिससे व्यवसाय घाटे में पहुंच गया है।
परिवहन व्यवसाय से जुड़े लोगों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का असर सीधे डीजल की कीमतों पर पड़ा है। हाल के दिनों में डीजल के दामों में कई बार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। केवल मई महीने में ही डीजल की कीमतों में कई बार बदलाव देखने को मिला, जिससे बस संचालन का खर्च और बढ़ गया। इसके अलावा नई तकनीक वाली यूरो-6 बसों की कीमतें भी पहले की तुलना में काफी अधिक हो गई हैं। इन बसों के रखरखाव और मरम्मत पर भी अतिरिक्त खर्च करना पड़ता है। ऐसे में छोटे और मध्यम स्तर के बस संचालकों पर आर्थिक दबाव लगातार बढ़ रहा है।
बस मालिकों का कहना है कि कोविड-19 महामारी के दौरान परिवहन उद्योग को भारी नुकसान झेलना पड़ा था। लंबे समय तक बसों का संचालन बंद रहा और कई संचालकों को कर्ज लेकर व्यवसाय चलाना पड़ा। महामारी के बाद यात्री संख्या में सुधार तो हुआ, लेकिन संचालन लागत में हुई वृद्धि ने राहत नहीं मिलने दी। कई बस मालिक अभी भी पुराने घाटे की भरपाई करने की कोशिश कर रहे हैं। उनका तर्क है कि यदि समय-समय पर किराए में संशोधन नहीं किया जाएगा तो व्यवसाय को टिकाए रखना मुश्किल हो जाएगा।
बस संचालकों ने सरकार के सामने न्यूनतम किराया 2.50 रुपये प्रति किलोमीटर तय करने की मांग रखी है। उनका कहना है कि वर्तमान आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए यह बढ़ोतरी जरूरी है। इसके साथ ही अन्य श्रेणियों के किराए में भी उसी अनुपात में संशोधन करने की मांग की गई है। बस मालिकों का कहना है कि किराया बढ़ने से यात्रियों को बेहतर सुविधाएं और सुरक्षित यात्रा उपलब्ध कराई जा सकेगी। उनका दावा है कि वे यात्री सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करना चाहते, लेकिन लगातार घाटे के बीच वाहनों का रखरखाव करना भी चुनौती बनता जा रहा है।
मध्य प्रदेश बस ओनर एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि यदि सरकार उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लेती है तो हड़ताल का रास्ता अपनाया जा सकता है। एसोसिएशन के महामंत्री जयकुमार जैन ने कहा है कि डीजल और ऑटो पार्ट्स की कीमतों में कई बार वृद्धि हो चुकी है, लेकिन बस किराया वर्षों से स्थिर है। ऐसे में बस संचालकों के सामने आर्थिक संकट गहराता जा रहा है। उन्होंने कहा कि अब घाटा सहने की स्थिति नहीं बची है और किराया बढ़ाना समय की जरूरत बन गया है।
हड़ताल की स्थिति बनने पर इसका सीधा असर लाखों यात्रियों पर पड़ सकता है। प्रदेश के विभिन्न शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों के बीच यात्रा करने वाले लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। रोजाना नौकरी, शिक्षा, व्यापार और अन्य कार्यों के लिए बस सेवा पर निर्भर रहने वाले यात्रियों के सामने आवागमन का संकट खड़ा हो सकता है। यही कारण है कि आज होने वाली बैठक को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
परिवहन मंत्री और बस संचालकों के बीच होने वाली चर्चा पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। यदि बैठक में कोई सहमति बनती है तो संभावित हड़ताल टल सकती है। वहीं, मांगों को लेकर समाधान नहीं निकलने की स्थिति में बस संचालक आंदोलन या हड़ताल की घोषणा कर सकते हैं।
