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कांग्रेस में महिला आरक्षण पर पुराना विवाद फिर उजागर, विजयलक्ष्मी साधौ के बयान से सियासी घमासान तेज
भोपाल (म.प्र.)
भोपाल में कांग्रेस सम्मेलन के दौरान पूर्व मंत्री का बयान वायरल, भाजपा ने लगाया महिला विरोधी सोच का आरोप
भोपाल में कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्षों के सम्मेलन के दौरान उस समय राजनीतिक माहौल गरमा गया जब मध्यप्रदेश की पूर्व मंत्री डॉ. विजयलक्ष्मी साधौ ने अपनी ही पार्टी के पुराने फैसलों और संगठनात्मक सोच पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। उनके बयान के बाद महिला आरक्षण और टिकट वितरण को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।
साधौ ने कहा कि दिग्विजय सिंह सरकार के समय जब महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने की चर्चा हुई थी, तब कैबिनेट के भीतर इसका खुलकर विरोध हुआ था। उन्होंने दावा किया कि उस समय कई वरिष्ठ नेताओं का मानना था कि महिलाएं घर-परिवार की जिम्मेदारियों से आगे बढ़कर राजनीति में प्रभावी भूमिका नहीं निभा सकतीं।
पूर्व मंत्री ने मंच से यह भी कहा कि कांग्रेस में लंबे समय से महिलाओं को चुनावी राजनीति में बराबरी का अवसर नहीं मिला। उनके अनुसार, महिलाओं को अक्सर उन विधानसभा क्षेत्रों में उतारा गया, जहां पार्टी लगातार चुनाव हारती रही, जिससे उनकी जीत की संभावना पहले से ही कमजोर हो जाती थी।
उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि 1985 के दौर में महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को बढ़ावा मिला था और उस समय बड़ी संख्या में महिला प्रतिनिधि चुनी गई थीं। लेकिन बाद के वर्षों में यह रुझान कमजोर पड़ता गया और महिलाओं की वास्तविक भागीदारी सीमित होती चली गई।
साधौ के इस बयान ने राजनीतिक हलकों में प्रतिक्रिया तेज कर दी है। भारतीय जनता पार्टी ने इसे लेकर कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि यह स्वीकारोक्ति पार्टी के भीतर महिलाओं के प्रति कथित भेदभावपूर्ण रवैये को उजागर करती है। भाजपा नेताओं का कहना है कि कांग्रेस ने हमेशा महिलाओं को केवल औपचारिक प्रतिनिधित्व तक सीमित रखा है।इस बयान के बाद मध्यप्रदेश की राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है।
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कांग्रेस में महिला आरक्षण पर पुराना विवाद फिर उजागर, विजयलक्ष्मी साधौ के बयान से सियासी घमासान तेज
भोपाल (म.प्र.)
भोपाल में कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्षों के सम्मेलन के दौरान उस समय राजनीतिक माहौल गरमा गया जब मध्यप्रदेश की पूर्व मंत्री डॉ. विजयलक्ष्मी साधौ ने अपनी ही पार्टी के पुराने फैसलों और संगठनात्मक सोच पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। उनके बयान के बाद महिला आरक्षण और टिकट वितरण को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।
साधौ ने कहा कि दिग्विजय सिंह सरकार के समय जब महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने की चर्चा हुई थी, तब कैबिनेट के भीतर इसका खुलकर विरोध हुआ था। उन्होंने दावा किया कि उस समय कई वरिष्ठ नेताओं का मानना था कि महिलाएं घर-परिवार की जिम्मेदारियों से आगे बढ़कर राजनीति में प्रभावी भूमिका नहीं निभा सकतीं।
पूर्व मंत्री ने मंच से यह भी कहा कि कांग्रेस में लंबे समय से महिलाओं को चुनावी राजनीति में बराबरी का अवसर नहीं मिला। उनके अनुसार, महिलाओं को अक्सर उन विधानसभा क्षेत्रों में उतारा गया, जहां पार्टी लगातार चुनाव हारती रही, जिससे उनकी जीत की संभावना पहले से ही कमजोर हो जाती थी।
उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि 1985 के दौर में महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को बढ़ावा मिला था और उस समय बड़ी संख्या में महिला प्रतिनिधि चुनी गई थीं। लेकिन बाद के वर्षों में यह रुझान कमजोर पड़ता गया और महिलाओं की वास्तविक भागीदारी सीमित होती चली गई।
साधौ के इस बयान ने राजनीतिक हलकों में प्रतिक्रिया तेज कर दी है। भारतीय जनता पार्टी ने इसे लेकर कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि यह स्वीकारोक्ति पार्टी के भीतर महिलाओं के प्रति कथित भेदभावपूर्ण रवैये को उजागर करती है। भाजपा नेताओं का कहना है कि कांग्रेस ने हमेशा महिलाओं को केवल औपचारिक प्रतिनिधित्व तक सीमित रखा है।इस बयान के बाद मध्यप्रदेश की राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है।
