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रीवा रजिस्ट्री कार्यालय में बिजली कटौती से कामकाज ठप, आवेदक घंटों रहे परेशान
रीवा,(म.प्र.)
लगातार बिजली आपूर्ति बाधित रहने से रजिस्ट्री की प्रक्रिया प्रभावित, दूर-दराज से पहुंचे लोगों को बिना काम कराए लौटना पड़ा।
रीवा के जिला रजिस्ट्री कार्यालय में मंगलवार को बिजली कटौती के कारण कामकाज बुरी तरह प्रभावित रहा। सुबह से ही रजिस्ट्री कराने पहुंचे लोगों को घंटों तक इंतजार करना पड़ा, लेकिन बिजली आपूर्ति सामान्य नहीं होने के कारण अधिकांश आवेदकों का काम पूरा नहीं हो सका। इससे कार्यालय परिसर में लोगों की भीड़ लग गई और कई आवेदकों ने व्यवस्था को लेकर नाराजगी भी जताई। दूर-दराज के ग्रामीण क्षेत्रों से आए लोग सबसे ज्यादा परेशान नजर आए, क्योंकि उन्हें पूरे दिन इंतजार करने के बाद भी निराश होकर लौटना पड़ा। रजिस्ट्री कार्यालय की अधिकांश प्रक्रिया पूरी तरह कंप्यूटर आधारित है। दस्तावेजों का सत्यापन, ऑनलाइन एंट्री, बायोमेट्रिक प्रक्रिया, दस्तावेजों की स्कैनिंग और अंतिम पंजीयन का काम बिजली और इंटरनेट पर निर्भर रहता है। ऐसे में बिजली आपूर्ति बाधित होने के कारण पूरा सिस्टम ठप हो गया। कर्मचारियों ने कुछ समय तक बिजली आने का इंतजार किया, लेकिन लंबे समय तक आपूर्ति बहाल नहीं होने से काम प्रभावित होता गया। सुबह से ही बड़ी संख्या में लोग जमीन, मकान और अन्य संपत्तियों की रजिस्ट्री कराने कार्यालय पहुंचे थे। कई लोगों ने पहले से स्लॉट बुक कराया था और निर्धारित समय पर दस्तावेजों के साथ कार्यालय पहुंचे थे। लेकिन बिजली नहीं होने से उनकी प्रक्रिया शुरू ही नहीं हो सकी। दोपहर तक इंतजार करने के बाद भी स्थिति में कोई खास सुधार नहीं हुआ, जिससे लोगों की चिंता बढ़ गई।
कार्यालय पहुंचे कई आवेदकों ने बताया कि वे आसपास के गांवों और दूसरे तहसील क्षेत्रों से आए थे। कुछ लोगों ने निजी वाहन किराये पर लेकर यात्रा की, जबकि कई लोग बसों के जरिए सुबह जल्दी रीवा पहुंचे थे। उनका कहना था कि पूरा दिन कार्यालय में बिताने के बावजूद काम नहीं हो सका, जिससे समय और पैसे दोनों का नुकसान हुआ। कई लोगों ने यह भी कहा कि यदि पहले से बिजली कटौती की जानकारी मिल जाती तो वे दूसरे दिन आने की योजना बना सकते थे। रजिस्ट्री कार्यालय में मौजूद लोगों का कहना था कि संपत्ति से जुड़े कई मामलों में समय का विशेष महत्व होता है। बैंक लोन, खरीदी-बिक्री, ऋण दस्तावेज, पारिवारिक बंटवारा और अन्य कानूनी प्रक्रियाएं रजिस्ट्री पर निर्भर रहती हैं। ऐसे में एक दिन का विलंब भी कई बार आर्थिक और कानूनी परेशानी का कारण बन जाता है। यही वजह रही कि बिजली कटौती के कारण काम रुकने से लोगों में नाराजगी देखी गई। बताया जा रहा है कि बिजली आपूर्ति बाधित होने के कारण कार्यालय में लगे कंप्यूटर, सर्वर और बायोमेट्रिक मशीनें भी बंद रहीं। इसके चलते दस्तावेजों का सत्यापन और ऑनलाइन प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। कर्मचारी भी तकनीकी व्यवस्था सामान्य होने का इंतजार करते रहे। हालांकि कुछ आवश्यक दस्तावेजों की प्रारंभिक जांच मैन्युअल रूप से की गई, लेकिन अंतिम प्रक्रिया बिजली के बिना पूरी नहीं हो सकी।
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आवेदकों ने मांग की है कि रजिस्ट्री जैसे महत्वपूर्ण सरकारी कार्यालयों में निर्बाध बिजली व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए। उनका कहना है कि यदि मुख्य बिजली आपूर्ति बाधित होती है तो वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में पर्याप्त क्षमता का जनरेटर या बैकअप सिस्टम उपलब्ध होना चाहिए, ताकि सरकारी सेवाएं प्रभावित न हों। लोगों का कहना है कि डिजिटल व्यवस्था लागू होने के बाद बिजली की उपलब्धता और भी महत्वपूर्ण हो गई है। कार्यालय परिसर में मौजूद कुछ लोगों ने यह भी बताया कि बिजली कटौती के दौरान बार-बार यह जानकारी ली जाती रही कि आपूर्ति कब तक बहाल होगी, लेकिन स्पष्ट जानकारी नहीं मिल सकी। इससे लोगों की परेशानी और बढ़ गई। कई परिवार छोटे बच्चों और बुजुर्गों के साथ कार्यालय पहुंचे थे, जिन्हें लंबे समय तक इंतजार करना पड़ा। प्रशासनिक स्तर पर उम्मीद जताई जा रही है कि बिजली आपूर्ति सामान्य होने के बाद लंबित रजिस्ट्रियों की प्रक्रिया प्राथमिकता के आधार पर पूरी की जाएगी, ताकि आवेदकों को दोबारा अधिक परेशानी का सामना न करना पड़े। हालांकि समाचार लिखे जाने तक बिजली आपूर्ति पूरी तरह सामान्य नहीं हो सकी थी और कई आवेदकों का काम लंबित था।
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रीवा रजिस्ट्री कार्यालय में बिजली कटौती से कामकाज ठप, आवेदक घंटों रहे परेशान
रीवा,(म.प्र.)
रीवा के जिला रजिस्ट्री कार्यालय में मंगलवार को बिजली कटौती के कारण कामकाज बुरी तरह प्रभावित रहा। सुबह से ही रजिस्ट्री कराने पहुंचे लोगों को घंटों तक इंतजार करना पड़ा, लेकिन बिजली आपूर्ति सामान्य नहीं होने के कारण अधिकांश आवेदकों का काम पूरा नहीं हो सका। इससे कार्यालय परिसर में लोगों की भीड़ लग गई और कई आवेदकों ने व्यवस्था को लेकर नाराजगी भी जताई। दूर-दराज के ग्रामीण क्षेत्रों से आए लोग सबसे ज्यादा परेशान नजर आए, क्योंकि उन्हें पूरे दिन इंतजार करने के बाद भी निराश होकर लौटना पड़ा। रजिस्ट्री कार्यालय की अधिकांश प्रक्रिया पूरी तरह कंप्यूटर आधारित है। दस्तावेजों का सत्यापन, ऑनलाइन एंट्री, बायोमेट्रिक प्रक्रिया, दस्तावेजों की स्कैनिंग और अंतिम पंजीयन का काम बिजली और इंटरनेट पर निर्भर रहता है। ऐसे में बिजली आपूर्ति बाधित होने के कारण पूरा सिस्टम ठप हो गया। कर्मचारियों ने कुछ समय तक बिजली आने का इंतजार किया, लेकिन लंबे समय तक आपूर्ति बहाल नहीं होने से काम प्रभावित होता गया। सुबह से ही बड़ी संख्या में लोग जमीन, मकान और अन्य संपत्तियों की रजिस्ट्री कराने कार्यालय पहुंचे थे। कई लोगों ने पहले से स्लॉट बुक कराया था और निर्धारित समय पर दस्तावेजों के साथ कार्यालय पहुंचे थे। लेकिन बिजली नहीं होने से उनकी प्रक्रिया शुरू ही नहीं हो सकी। दोपहर तक इंतजार करने के बाद भी स्थिति में कोई खास सुधार नहीं हुआ, जिससे लोगों की चिंता बढ़ गई।
कार्यालय पहुंचे कई आवेदकों ने बताया कि वे आसपास के गांवों और दूसरे तहसील क्षेत्रों से आए थे। कुछ लोगों ने निजी वाहन किराये पर लेकर यात्रा की, जबकि कई लोग बसों के जरिए सुबह जल्दी रीवा पहुंचे थे। उनका कहना था कि पूरा दिन कार्यालय में बिताने के बावजूद काम नहीं हो सका, जिससे समय और पैसे दोनों का नुकसान हुआ। कई लोगों ने यह भी कहा कि यदि पहले से बिजली कटौती की जानकारी मिल जाती तो वे दूसरे दिन आने की योजना बना सकते थे। रजिस्ट्री कार्यालय में मौजूद लोगों का कहना था कि संपत्ति से जुड़े कई मामलों में समय का विशेष महत्व होता है। बैंक लोन, खरीदी-बिक्री, ऋण दस्तावेज, पारिवारिक बंटवारा और अन्य कानूनी प्रक्रियाएं रजिस्ट्री पर निर्भर रहती हैं। ऐसे में एक दिन का विलंब भी कई बार आर्थिक और कानूनी परेशानी का कारण बन जाता है। यही वजह रही कि बिजली कटौती के कारण काम रुकने से लोगों में नाराजगी देखी गई। बताया जा रहा है कि बिजली आपूर्ति बाधित होने के कारण कार्यालय में लगे कंप्यूटर, सर्वर और बायोमेट्रिक मशीनें भी बंद रहीं। इसके चलते दस्तावेजों का सत्यापन और ऑनलाइन प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। कर्मचारी भी तकनीकी व्यवस्था सामान्य होने का इंतजार करते रहे। हालांकि कुछ आवश्यक दस्तावेजों की प्रारंभिक जांच मैन्युअल रूप से की गई, लेकिन अंतिम प्रक्रिया बिजली के बिना पूरी नहीं हो सकी।
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आवेदकों ने मांग की है कि रजिस्ट्री जैसे महत्वपूर्ण सरकारी कार्यालयों में निर्बाध बिजली व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए। उनका कहना है कि यदि मुख्य बिजली आपूर्ति बाधित होती है तो वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में पर्याप्त क्षमता का जनरेटर या बैकअप सिस्टम उपलब्ध होना चाहिए, ताकि सरकारी सेवाएं प्रभावित न हों। लोगों का कहना है कि डिजिटल व्यवस्था लागू होने के बाद बिजली की उपलब्धता और भी महत्वपूर्ण हो गई है। कार्यालय परिसर में मौजूद कुछ लोगों ने यह भी बताया कि बिजली कटौती के दौरान बार-बार यह जानकारी ली जाती रही कि आपूर्ति कब तक बहाल होगी, लेकिन स्पष्ट जानकारी नहीं मिल सकी। इससे लोगों की परेशानी और बढ़ गई। कई परिवार छोटे बच्चों और बुजुर्गों के साथ कार्यालय पहुंचे थे, जिन्हें लंबे समय तक इंतजार करना पड़ा। प्रशासनिक स्तर पर उम्मीद जताई जा रही है कि बिजली आपूर्ति सामान्य होने के बाद लंबित रजिस्ट्रियों की प्रक्रिया प्राथमिकता के आधार पर पूरी की जाएगी, ताकि आवेदकों को दोबारा अधिक परेशानी का सामना न करना पड़े। हालांकि समाचार लिखे जाने तक बिजली आपूर्ति पूरी तरह सामान्य नहीं हो सकी थी और कई आवेदकों का काम लंबित था।
