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निर्जला एकादशी पर नर्मदा तटों पर उमड़ी आस्था, 20 हजार श्रद्धालुओं ने किया पवित्र स्नान
Digital Desk
अनूपपुर और अमरकंटक क्षेत्र के घाटों पर सुबह से रही भक्तों की भीड़, पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठानों के साथ की सुख-समृद्धि की कामना
ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की निर्जला एकादशी पर गुरुवार को अनूपपुर जिले सहित अमरकंटक क्षेत्र के नर्मदा घाटों पर आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिला। सुबह सूर्योदय से पहले ही श्रद्धालुओं का घाटों की ओर पहुंचना शुरू हो गया था। दिन चढ़ने के साथ श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ती गई और नर्मदा तटों पर धार्मिक वातावरण पूरी तरह से भक्तिमय हो गया। अनुमान है कि दिनभर में 20 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने नर्मदा नदी में स्नान कर पुण्य लाभ अर्जित किया। श्रद्धालुओं ने पवित्र स्नान के बाद मंदिरों में दर्शन किए, पूजा-अर्चना की और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना की। निर्जला एकादशी को हिंदू धर्म में विशेष महत्व प्राप्त है। मान्यता है कि इस दिन व्रत और दान करने से वर्षभर की सभी एकादशियों का पुण्य प्राप्त होता है। यही वजह रही कि अनूपपुर, अमरकंटक और आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु नर्मदा तटों पर पहुंचे। कई परिवार सुबह-सुबह ही घाटों पर पहुंच गए थे, जबकि दूरदराज से आने वाले श्रद्धालु देर रात और भोर के समय ही अमरकंटक पहुंचने लगे थे। घाटों पर महिलाओं, बुजुर्गों और युवाओं की अच्छी खासी मौजूदगी देखने को मिली।
अमरकंटक स्थित रामघाट, कोटितीर्थ कुंड, पुष्कर बांध, आरंडी संगम और अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों पर पूरे दिन श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहा। घाटों पर स्नान के बाद लोगों ने नर्मदा माता की पूजा की और धार्मिक परंपराओं का पालन किया। कई श्रद्धालु अपने परिवार के साथ पहुंचे थे और उन्होंने सामूहिक रूप से पूजा-अर्चना की। घाटों पर जगह-जगह भजन, कीर्तन और धार्मिक मंत्रोच्चार सुनाई देते रहे, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा। स्थानीय लोगों के अनुसार श्रद्धालु केवल अनूपपुर जिले से ही नहीं बल्कि आसपास के कई जिलों और राज्यों से भी पहुंचे थे। शहडोल, कोतमा, पुष्पराजगढ़, धनपुरी, बुढार और अनूपपुर के अलावा छत्तीसगढ़ के गौरेला, पेंड्रा, मरवाही, कोरबा, बिलासपुर, मुंगेली और लोरमी क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। कुछ श्रद्धालु राजस्थान और उत्तर प्रदेश से भी धार्मिक यात्रा पर आए थे। दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं ने नर्मदा उद्गम क्षेत्र के दर्शन कर स्वयं को सौभाग्यशाली बताया।
निर्जला एकादशी के अवसर पर कई श्रद्धालुओं ने व्रत रखकर धार्मिक अनुष्ठान भी किए। नर्मदा स्नान के बाद लोगों ने जप, तप और ध्यान किया। मंदिरों में विशेष पूजन कार्यक्रम आयोजित किए गए थे, जिनमें बड़ी संख्या में भक्त शामिल हुए। कई लोगों ने जरूरतमंदों को दान भी दिया और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पुण्य अर्जित करने का प्रयास किया। धार्मिक आयोजनों के चलते मंदिर परिसरों में दिनभर श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रही। घाटों पर श्रद्धालुओं की सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन की ओर से विशेष इंतजाम किए गए थे। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस बल की तैनाती की गई थी। प्रमुख घाटों और मंदिर परिसरों में सुरक्षा कर्मी लगातार निगरानी करते रहे। प्रशासनिक अधिकारियों ने भी विभिन्न स्थानों का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। घाटों पर लोगों को सुरक्षित स्नान कराने और किसी प्रकार की अव्यवस्था न हो, इसके लिए विशेष प्रबंध किए गए थे।
धार्मिक आयोजनों के दौरान स्थानीय व्यापारियों और दुकानदारों को भी अच्छी आमदनी होने की उम्मीद रही। घाटों और मंदिरों के आसपास प्रसाद, पूजन सामग्री, फल और अन्य धार्मिक वस्तुओं की दुकानों पर भी लोगों की भीड़ देखी गई। कई श्रद्धालुओं ने स्थानीय बाजारों से धार्मिक सामग्री खरीदी और पूजा-अर्चना में उसका उपयोग किया। इससे क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन की गतिविधियों को भी बढ़ावा मिला। हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों की तुलना में इस बार श्रद्धालुओं की संख्या कुछ कम रही। ग्रामीण क्षेत्रों से आए लोगों का मानना है कि वर्तमान समय में खेती-किसानी के काम शुरू होने के कारण कई किसान धार्मिक आयोजनों में शामिल नहीं हो सके। इसके बावजूद नर्मदा तटों पर दिनभर श्रद्धालुओं की अच्छी मौजूदगी बनी रही और धार्मिक उत्साह में कोई कमी नहीं दिखी।
निर्जला एकादशी का महत्व केवल व्रत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आत्मसंयम, श्रद्धा और सेवा का भी पर्व माना जाता है। इस दिन किए गए स्नान, दान और पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। यही कारण है कि हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु नर्मदा तटों और मंदिरों में पहुंचकर धार्मिक अनुष्ठान संपन्न करते हैं। दिनभर चले धार्मिक कार्यक्रमों और पूजा-अर्चना के बाद शाम के समय कई मंदिरों में विशेष आरती का आयोजन किया गया। श्रद्धालुओं ने आरती में शामिल होकर परिवार, समाज और देश की सुख-समृद्धि की कामना की। नर्मदा तटों पर गूंजते भजन और आरती के स्वर देर शाम तक धार्मिक वातावरण को जीवंत बनाए रहे। निर्जला एकादशी के इस पर्व ने एक बार फिर अनूपपुर और अमरकंटक क्षेत्र को आस्था और श्रद्धा के रंग में रंग दिया।
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निर्जला एकादशी पर नर्मदा तटों पर उमड़ी आस्था, 20 हजार श्रद्धालुओं ने किया पवित्र स्नान
Digital Desk
ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की निर्जला एकादशी पर गुरुवार को अनूपपुर जिले सहित अमरकंटक क्षेत्र के नर्मदा घाटों पर आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिला। सुबह सूर्योदय से पहले ही श्रद्धालुओं का घाटों की ओर पहुंचना शुरू हो गया था। दिन चढ़ने के साथ श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ती गई और नर्मदा तटों पर धार्मिक वातावरण पूरी तरह से भक्तिमय हो गया। अनुमान है कि दिनभर में 20 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने नर्मदा नदी में स्नान कर पुण्य लाभ अर्जित किया। श्रद्धालुओं ने पवित्र स्नान के बाद मंदिरों में दर्शन किए, पूजा-अर्चना की और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना की। निर्जला एकादशी को हिंदू धर्म में विशेष महत्व प्राप्त है। मान्यता है कि इस दिन व्रत और दान करने से वर्षभर की सभी एकादशियों का पुण्य प्राप्त होता है। यही वजह रही कि अनूपपुर, अमरकंटक और आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु नर्मदा तटों पर पहुंचे। कई परिवार सुबह-सुबह ही घाटों पर पहुंच गए थे, जबकि दूरदराज से आने वाले श्रद्धालु देर रात और भोर के समय ही अमरकंटक पहुंचने लगे थे। घाटों पर महिलाओं, बुजुर्गों और युवाओं की अच्छी खासी मौजूदगी देखने को मिली।
अमरकंटक स्थित रामघाट, कोटितीर्थ कुंड, पुष्कर बांध, आरंडी संगम और अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों पर पूरे दिन श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहा। घाटों पर स्नान के बाद लोगों ने नर्मदा माता की पूजा की और धार्मिक परंपराओं का पालन किया। कई श्रद्धालु अपने परिवार के साथ पहुंचे थे और उन्होंने सामूहिक रूप से पूजा-अर्चना की। घाटों पर जगह-जगह भजन, कीर्तन और धार्मिक मंत्रोच्चार सुनाई देते रहे, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा। स्थानीय लोगों के अनुसार श्रद्धालु केवल अनूपपुर जिले से ही नहीं बल्कि आसपास के कई जिलों और राज्यों से भी पहुंचे थे। शहडोल, कोतमा, पुष्पराजगढ़, धनपुरी, बुढार और अनूपपुर के अलावा छत्तीसगढ़ के गौरेला, पेंड्रा, मरवाही, कोरबा, बिलासपुर, मुंगेली और लोरमी क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। कुछ श्रद्धालु राजस्थान और उत्तर प्रदेश से भी धार्मिक यात्रा पर आए थे। दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं ने नर्मदा उद्गम क्षेत्र के दर्शन कर स्वयं को सौभाग्यशाली बताया।
निर्जला एकादशी के अवसर पर कई श्रद्धालुओं ने व्रत रखकर धार्मिक अनुष्ठान भी किए। नर्मदा स्नान के बाद लोगों ने जप, तप और ध्यान किया। मंदिरों में विशेष पूजन कार्यक्रम आयोजित किए गए थे, जिनमें बड़ी संख्या में भक्त शामिल हुए। कई लोगों ने जरूरतमंदों को दान भी दिया और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पुण्य अर्जित करने का प्रयास किया। धार्मिक आयोजनों के चलते मंदिर परिसरों में दिनभर श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रही। घाटों पर श्रद्धालुओं की सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन की ओर से विशेष इंतजाम किए गए थे। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस बल की तैनाती की गई थी। प्रमुख घाटों और मंदिर परिसरों में सुरक्षा कर्मी लगातार निगरानी करते रहे। प्रशासनिक अधिकारियों ने भी विभिन्न स्थानों का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। घाटों पर लोगों को सुरक्षित स्नान कराने और किसी प्रकार की अव्यवस्था न हो, इसके लिए विशेष प्रबंध किए गए थे।
धार्मिक आयोजनों के दौरान स्थानीय व्यापारियों और दुकानदारों को भी अच्छी आमदनी होने की उम्मीद रही। घाटों और मंदिरों के आसपास प्रसाद, पूजन सामग्री, फल और अन्य धार्मिक वस्तुओं की दुकानों पर भी लोगों की भीड़ देखी गई। कई श्रद्धालुओं ने स्थानीय बाजारों से धार्मिक सामग्री खरीदी और पूजा-अर्चना में उसका उपयोग किया। इससे क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन की गतिविधियों को भी बढ़ावा मिला। हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों की तुलना में इस बार श्रद्धालुओं की संख्या कुछ कम रही। ग्रामीण क्षेत्रों से आए लोगों का मानना है कि वर्तमान समय में खेती-किसानी के काम शुरू होने के कारण कई किसान धार्मिक आयोजनों में शामिल नहीं हो सके। इसके बावजूद नर्मदा तटों पर दिनभर श्रद्धालुओं की अच्छी मौजूदगी बनी रही और धार्मिक उत्साह में कोई कमी नहीं दिखी।
निर्जला एकादशी का महत्व केवल व्रत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आत्मसंयम, श्रद्धा और सेवा का भी पर्व माना जाता है। इस दिन किए गए स्नान, दान और पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। यही कारण है कि हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु नर्मदा तटों और मंदिरों में पहुंचकर धार्मिक अनुष्ठान संपन्न करते हैं। दिनभर चले धार्मिक कार्यक्रमों और पूजा-अर्चना के बाद शाम के समय कई मंदिरों में विशेष आरती का आयोजन किया गया। श्रद्धालुओं ने आरती में शामिल होकर परिवार, समाज और देश की सुख-समृद्धि की कामना की। नर्मदा तटों पर गूंजते भजन और आरती के स्वर देर शाम तक धार्मिक वातावरण को जीवंत बनाए रहे। निर्जला एकादशी के इस पर्व ने एक बार फिर अनूपपुर और अमरकंटक क्षेत्र को आस्था और श्रद्धा के रंग में रंग दिया।
