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रीवा में सरकारी शिक्षक ने काटी नस, सुसाइड नोट में लगाया टीआई-पत्रकार पर परेशान करने का आरोप
रीवा (म.प्र.)
रीवा में सरकारी शिक्षक ने कलाई की नस काटी। सुसाइड नोट में टीआई और पत्रकार पर प्रताड़ना के आरोप, अस्पताल में हालत गंभीर।
रीवा में गुरुवार सुबह एक सरकारी शिक्षक ने अपने घर के भीतर कलाई की नस काट ली, जिससे सनसनी फैल गई। यह घटना सुबह करीब 7 बजे हुई। शिक्षक को गंभीर हालत में संजय गांधी अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराया गया, और उनकी स्थिति अभी भी नाजुक बताई जा रही है। बताया जा रहा है कि उन्होंने पांच पन्नों का एक सुसाइड नोट लिखा है, जिसमें उन्होंने पुलिस और एक स्थानीय पत्रकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
जब शिक्षक ने अपनी तस्वीर एक शिक्षकों के व्हाट्सऐप ग्रुप में भेजी, तो इसने ग्रुप में हड़कंप मचाया। तस्वीर देखकर सहकर्मियों ने तुरंत उनके परिजनों को सूचित किया। उस समय शिक्षक गांव में अकेले थे, जबकि उनके परिवार के सदस्य रीवा शहर में थे। परिवार के सदस्य और पड़ोसी जब मौके पर पहुंचे, तो उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों के अनुसार उनकी हालत गंभीर है और उन्हें आईसीयू में लगातार निगरानी में रखा गया है।
यह मामला रीवा के सीएम राइज स्कूल लालगांव में कार्यरत शिक्षक अनिल कुमार तिवारी से जुड़ा है। उनके सुसाइड नोट में विश्वविद्यालय थाना प्रभारी और पत्रकार निशांत मिश्रा उर्फ अंकित पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। नोट में कहा गया है कि उन्हें फर्जी मुकदमों में फंसाया गया, लगातार अपमानित किया गया, और मानसिक प्रताड़ना दी गई, जिससे उनकी स्थिति असहनीय हो गई। परिवार का कहना है कि शिक्षक हाल के समय में बहुत तनाव में थे और उन पर काफी दबाव था।
पीड़ित शिक्षक के बेटे ने भी इस विवाद पर अपने विचार व्यक्त किए हैं। उनके अनुसार, विवाद की शुरुआत एक पेड़ को काटने से हुई थी। एक पक्ष द्वारा उनकी जमीन पर लगे हरे-भरे पेड़ को बिना अनुमति काट दिया गया था। जब इसका विरोध किया गया, तो मामला बढ़ गया, और कथित तौर पर धमकियों और कानूनी विवाद में उलझ गया। परिवार का कहना है कि इसके बाद से पिता को लगातार परेशान किया जा रहा था, और इसी मानसिक दबाव ने उन्हें यह कदम उठाने पर मजबूर कर दिया।
फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और सुसाइड नोट का भी परीक्षण किया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। वहीं, अस्पताल प्रशासन ने बताया कि शिक्षक की स्थिति अभी भी चिंताजनक है, और उन्हें बचाने के प्रयास जारी हैं।
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रीवा में सरकारी शिक्षक ने काटी नस, सुसाइड नोट में लगाया टीआई-पत्रकार पर परेशान करने का आरोप
रीवा (म.प्र.)
रीवा में गुरुवार सुबह एक सरकारी शिक्षक ने अपने घर के भीतर कलाई की नस काट ली, जिससे सनसनी फैल गई। यह घटना सुबह करीब 7 बजे हुई। शिक्षक को गंभीर हालत में संजय गांधी अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराया गया, और उनकी स्थिति अभी भी नाजुक बताई जा रही है। बताया जा रहा है कि उन्होंने पांच पन्नों का एक सुसाइड नोट लिखा है, जिसमें उन्होंने पुलिस और एक स्थानीय पत्रकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
जब शिक्षक ने अपनी तस्वीर एक शिक्षकों के व्हाट्सऐप ग्रुप में भेजी, तो इसने ग्रुप में हड़कंप मचाया। तस्वीर देखकर सहकर्मियों ने तुरंत उनके परिजनों को सूचित किया। उस समय शिक्षक गांव में अकेले थे, जबकि उनके परिवार के सदस्य रीवा शहर में थे। परिवार के सदस्य और पड़ोसी जब मौके पर पहुंचे, तो उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों के अनुसार उनकी हालत गंभीर है और उन्हें आईसीयू में लगातार निगरानी में रखा गया है।
यह मामला रीवा के सीएम राइज स्कूल लालगांव में कार्यरत शिक्षक अनिल कुमार तिवारी से जुड़ा है। उनके सुसाइड नोट में विश्वविद्यालय थाना प्रभारी और पत्रकार निशांत मिश्रा उर्फ अंकित पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। नोट में कहा गया है कि उन्हें फर्जी मुकदमों में फंसाया गया, लगातार अपमानित किया गया, और मानसिक प्रताड़ना दी गई, जिससे उनकी स्थिति असहनीय हो गई। परिवार का कहना है कि शिक्षक हाल के समय में बहुत तनाव में थे और उन पर काफी दबाव था।
पीड़ित शिक्षक के बेटे ने भी इस विवाद पर अपने विचार व्यक्त किए हैं। उनके अनुसार, विवाद की शुरुआत एक पेड़ को काटने से हुई थी। एक पक्ष द्वारा उनकी जमीन पर लगे हरे-भरे पेड़ को बिना अनुमति काट दिया गया था। जब इसका विरोध किया गया, तो मामला बढ़ गया, और कथित तौर पर धमकियों और कानूनी विवाद में उलझ गया। परिवार का कहना है कि इसके बाद से पिता को लगातार परेशान किया जा रहा था, और इसी मानसिक दबाव ने उन्हें यह कदम उठाने पर मजबूर कर दिया।
फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और सुसाइड नोट का भी परीक्षण किया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। वहीं, अस्पताल प्रशासन ने बताया कि शिक्षक की स्थिति अभी भी चिंताजनक है, और उन्हें बचाने के प्रयास जारी हैं।
