1.69 लाख का इनामी अंतरराज्यीय तस्कर गिरफ्तार, चरवाहा बनकर 15 दिन रेकी के बाद ‘ऑपरेशन नीलमणि’ में मिली सफलता

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राजस्थान और मध्य प्रदेश पुलिस के लिए लंबे समय से चुनौती बने 1.69 लाख रुपये के इनामी अंतरराज्यीय तस्कर सुनील रावत मीणा को आखिरकार गिरफ्तार कर लिया गया है। राजस्थान पुलिस की एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) ने मध्य प्रदेश पुलिस के सहयोग से चलाए गए विशेष अभियान ‘ऑपरेशन नीलमणि’ के तहत यह बड़ी सफलता हासिल की। करीब आठ महीने तक लगातार निगरानी, तकनीकी सर्विलांस और गुप्त सूचनाओं के आधार पर की गई कार्रवाई के बाद आरोपी को मध्य प्रदेश के नीमच जिले के जीरन थाना क्षेत्र से दबोच लिया गया। गिरफ्तारी के बाद उसे कड़ी सुरक्षा के बीच राजस्थान लाया गया। पुलिस अधिकारियों के अनुसार 27 वर्षीय सुनील रावत मीणा राजस्थान के नारकोटिक्स मामलों के टॉप-25 अपराधियों में शामिल था। उस पर मादक पदार्थों की तस्करी, अवैध हथियार रखने, हत्या के प्रयास, धोखाधड़ी और अन्य गंभीर अपराधों सहित 19 से अधिक मामले दर्ज हैं। लंबे समय से फरार रहने के कारण वह दोनों राज्यों की पुलिस के लिए सिरदर्द बना हुआ था।

जांच में सामने आया कि गिरफ्तारी से बचने के लिए सुनील जंगलों में लगातार अपने ठिकाने बदलता रहता था। वह किसी एक स्थान पर अधिक समय तक नहीं रुकता था, जिससे पुलिस के लिए उसकी सटीक लोकेशन का पता लगाना बेहद मुश्किल हो जाता था। उसकी पत्नी तय स्थान पर खाना छोड़ जाती थी और उसके सहयोगी वह भोजन जंगल में छिपे सुनील तक पहुंचाते थे। इसी नेटवर्क के कारण वह कई महीनों तक पुलिस की पकड़ से बाहर रहा।

इस पूरे नेटवर्क को तोड़ने के लिए एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स ने बेहद गोपनीय रणनीति तैयार की। टीम के एक कॉन्स्टेबल को चरवाहे के वेश में करीब 15 दिनों तक गांव और आसपास के इलाके में तैनात किया गया। वह स्थानीय लोगों के बीच रहकर सुनील की गतिविधियों, उसके संपर्कों और आने-जाने के संभावित रास्तों की जानकारी जुटाता रहा। इस दौरान पुलिस मुख्यालय से तकनीकी निगरानी भी लगातार जारी रही।

जांच में यह भी सामने आया कि सुनील गांव की एक युवती के संपर्क में था। पुलिस के अनुसार वह एक छोटे बच्चे के जरिए संदेशों का आदान-प्रदान करता था ताकि किसी को उस पर शक न हो। पुलिस ने उसके इस संचार तंत्र पर भी नजर रखी और कई महत्वपूर्ण इनपुट जुटाए। इन्हीं सूचनाओं के आधार पर टीम ने गिरफ्तारी की योजना को अंतिम रूप दिया।

7 जुलाई की रात पुलिस को सूचना मिली कि सुनील अपने घर पहुंचा हुआ है और वहां दावत चल रही है। इसी दौरान इलाके में तेज बारिश शुरू हो गई। पुलिस ने आकलन किया कि मौसम खराब होने के कारण आरोपी उस रात वापस जंगल नहीं जा सकेगा। इसी मौके का फायदा उठाते हुए आधी रात को एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स और मध्य प्रदेश पुलिस की संयुक्त टीम ने नीमच जिले के गमेरपुरा गांव स्थित उसके घर की चारों ओर से घेराबंदी कर दी।

पुलिस टीम ने दरवाजा खटखटाया तो सबसे पहले आरोपी की पत्नी बाहर आई। उसने पुलिस को गुमराह करने की कोशिश करते हुए कहा कि घर में कोई नहीं है। हालांकि टीम पहले से मिली जानकारी के आधार पर पूरी तरह आश्वस्त थी कि आरोपी अंदर मौजूद है। इसके बाद घर की बारीकी से तलाशी शुरू की गई। तलाशी के दौरान एक कमरे में ड्रम के पीछे रजाई ओढ़कर छिपा सुनील अर्द्धनग्न अवस्था में मिला। पुलिस ने तुरंत उसे हिरासत में ले लिया।

गिरफ्तारी के समय आरोपी ने अपनी पहचान छिपाने के लिए खुद को ‘दिनेश’ बताया, लेकिन पूछताछ और दस्तावेजों के मिलान के बाद उसकी असली पहचान सामने आ गई। पुलिस को आशंका थी कि उसके साथी मौके पर पहुंच सकते हैं, इसलिए बिना समय गंवाए टीम आरोपी को लेकर तुरंत राजस्थान के लिए रवाना हो गई।

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक सुनील पर कई गंभीर आरोप हैं। उस पर राजस्थान के पाली जिले के सांडेराव और देसूरी क्षेत्रों के अलावा प्रतापगढ़ जिले की छोटी सादड़ी में पुलिस टीमों पर फायरिंग करने के मामले दर्ज हैं। इन हमलों में पुलिसकर्मी रणवीर और चंद्रपाल घायल हुए थे। इसके अलावा उसने मध्य प्रदेश के जीरन थाना क्षेत्र में भी पुलिस पर हमला किया था। लगातार पुलिस पर हमले और मादक पदार्थों की तस्करी में सक्रिय भूमिका के कारण उसे बेहद खतरनाक अपराधी माना जाता था।

‘ऑपरेशन नीलमणि’ राजस्थान पुलिस की एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स और मध्य प्रदेश पुलिस का संयुक्त अभियान था। इस अभियान का उद्देश्य राजस्थान और मध्य प्रदेश में सक्रिय बड़े ड्रग नेटवर्क को तोड़ना और लंबे समय से फरार चल रहे अपराधियों को गिरफ्तार करना था। आठ महीने तक चली इस कार्रवाई में तकनीकी निगरानी, खुफिया सूचनाओं और जमीनी स्तर पर की गई रेकी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

पुलिस का कहना है कि सुनील की गिरफ्तारी से मादक पदार्थों की तस्करी से जुड़े एक बड़े नेटवर्क का खुलासा होने की उम्मीद है। अब उससे पूछताछ कर उसके सहयोगियों, सप्लाई चेन, वित्तीय लेनदेन और अन्य राज्यों में फैले संपर्कों की जानकारी जुटाई जा रही है। जांच एजेंसियों का मानना है कि इस कार्रवाई से राजस्थान और मध्य प्रदेश में सक्रिय ड्रग तस्करी के नेटवर्क पर प्रभावी चोट पहुंचेगी और आने वाले दिनों में कई अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी भी हो सकती है।

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09 Jul 2026 By Vaishnavi.J

1.69 लाख का इनामी अंतरराज्यीय तस्कर गिरफ्तार, चरवाहा बनकर 15 दिन रेकी के बाद ‘ऑपरेशन नीलमणि’ में मिली सफलता

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राजस्थान और मध्य प्रदेश पुलिस के लिए लंबे समय से चुनौती बने 1.69 लाख रुपये के इनामी अंतरराज्यीय तस्कर सुनील रावत मीणा को आखिरकार गिरफ्तार कर लिया गया है। राजस्थान पुलिस की एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) ने मध्य प्रदेश पुलिस के सहयोग से चलाए गए विशेष अभियान ‘ऑपरेशन नीलमणि’ के तहत यह बड़ी सफलता हासिल की। करीब आठ महीने तक लगातार निगरानी, तकनीकी सर्विलांस और गुप्त सूचनाओं के आधार पर की गई कार्रवाई के बाद आरोपी को मध्य प्रदेश के नीमच जिले के जीरन थाना क्षेत्र से दबोच लिया गया। गिरफ्तारी के बाद उसे कड़ी सुरक्षा के बीच राजस्थान लाया गया। पुलिस अधिकारियों के अनुसार 27 वर्षीय सुनील रावत मीणा राजस्थान के नारकोटिक्स मामलों के टॉप-25 अपराधियों में शामिल था। उस पर मादक पदार्थों की तस्करी, अवैध हथियार रखने, हत्या के प्रयास, धोखाधड़ी और अन्य गंभीर अपराधों सहित 19 से अधिक मामले दर्ज हैं। लंबे समय से फरार रहने के कारण वह दोनों राज्यों की पुलिस के लिए सिरदर्द बना हुआ था।

जांच में सामने आया कि गिरफ्तारी से बचने के लिए सुनील जंगलों में लगातार अपने ठिकाने बदलता रहता था। वह किसी एक स्थान पर अधिक समय तक नहीं रुकता था, जिससे पुलिस के लिए उसकी सटीक लोकेशन का पता लगाना बेहद मुश्किल हो जाता था। उसकी पत्नी तय स्थान पर खाना छोड़ जाती थी और उसके सहयोगी वह भोजन जंगल में छिपे सुनील तक पहुंचाते थे। इसी नेटवर्क के कारण वह कई महीनों तक पुलिस की पकड़ से बाहर रहा।

इस पूरे नेटवर्क को तोड़ने के लिए एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स ने बेहद गोपनीय रणनीति तैयार की। टीम के एक कॉन्स्टेबल को चरवाहे के वेश में करीब 15 दिनों तक गांव और आसपास के इलाके में तैनात किया गया। वह स्थानीय लोगों के बीच रहकर सुनील की गतिविधियों, उसके संपर्कों और आने-जाने के संभावित रास्तों की जानकारी जुटाता रहा। इस दौरान पुलिस मुख्यालय से तकनीकी निगरानी भी लगातार जारी रही।

जांच में यह भी सामने आया कि सुनील गांव की एक युवती के संपर्क में था। पुलिस के अनुसार वह एक छोटे बच्चे के जरिए संदेशों का आदान-प्रदान करता था ताकि किसी को उस पर शक न हो। पुलिस ने उसके इस संचार तंत्र पर भी नजर रखी और कई महत्वपूर्ण इनपुट जुटाए। इन्हीं सूचनाओं के आधार पर टीम ने गिरफ्तारी की योजना को अंतिम रूप दिया।

7 जुलाई की रात पुलिस को सूचना मिली कि सुनील अपने घर पहुंचा हुआ है और वहां दावत चल रही है। इसी दौरान इलाके में तेज बारिश शुरू हो गई। पुलिस ने आकलन किया कि मौसम खराब होने के कारण आरोपी उस रात वापस जंगल नहीं जा सकेगा। इसी मौके का फायदा उठाते हुए आधी रात को एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स और मध्य प्रदेश पुलिस की संयुक्त टीम ने नीमच जिले के गमेरपुरा गांव स्थित उसके घर की चारों ओर से घेराबंदी कर दी।

पुलिस टीम ने दरवाजा खटखटाया तो सबसे पहले आरोपी की पत्नी बाहर आई। उसने पुलिस को गुमराह करने की कोशिश करते हुए कहा कि घर में कोई नहीं है। हालांकि टीम पहले से मिली जानकारी के आधार पर पूरी तरह आश्वस्त थी कि आरोपी अंदर मौजूद है। इसके बाद घर की बारीकी से तलाशी शुरू की गई। तलाशी के दौरान एक कमरे में ड्रम के पीछे रजाई ओढ़कर छिपा सुनील अर्द्धनग्न अवस्था में मिला। पुलिस ने तुरंत उसे हिरासत में ले लिया।

गिरफ्तारी के समय आरोपी ने अपनी पहचान छिपाने के लिए खुद को ‘दिनेश’ बताया, लेकिन पूछताछ और दस्तावेजों के मिलान के बाद उसकी असली पहचान सामने आ गई। पुलिस को आशंका थी कि उसके साथी मौके पर पहुंच सकते हैं, इसलिए बिना समय गंवाए टीम आरोपी को लेकर तुरंत राजस्थान के लिए रवाना हो गई।

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक सुनील पर कई गंभीर आरोप हैं। उस पर राजस्थान के पाली जिले के सांडेराव और देसूरी क्षेत्रों के अलावा प्रतापगढ़ जिले की छोटी सादड़ी में पुलिस टीमों पर फायरिंग करने के मामले दर्ज हैं। इन हमलों में पुलिसकर्मी रणवीर और चंद्रपाल घायल हुए थे। इसके अलावा उसने मध्य प्रदेश के जीरन थाना क्षेत्र में भी पुलिस पर हमला किया था। लगातार पुलिस पर हमले और मादक पदार्थों की तस्करी में सक्रिय भूमिका के कारण उसे बेहद खतरनाक अपराधी माना जाता था।

‘ऑपरेशन नीलमणि’ राजस्थान पुलिस की एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स और मध्य प्रदेश पुलिस का संयुक्त अभियान था। इस अभियान का उद्देश्य राजस्थान और मध्य प्रदेश में सक्रिय बड़े ड्रग नेटवर्क को तोड़ना और लंबे समय से फरार चल रहे अपराधियों को गिरफ्तार करना था। आठ महीने तक चली इस कार्रवाई में तकनीकी निगरानी, खुफिया सूचनाओं और जमीनी स्तर पर की गई रेकी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

पुलिस का कहना है कि सुनील की गिरफ्तारी से मादक पदार्थों की तस्करी से जुड़े एक बड़े नेटवर्क का खुलासा होने की उम्मीद है। अब उससे पूछताछ कर उसके सहयोगियों, सप्लाई चेन, वित्तीय लेनदेन और अन्य राज्यों में फैले संपर्कों की जानकारी जुटाई जा रही है। जांच एजेंसियों का मानना है कि इस कार्रवाई से राजस्थान और मध्य प्रदेश में सक्रिय ड्रग तस्करी के नेटवर्क पर प्रभावी चोट पहुंचेगी और आने वाले दिनों में कई अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी भी हो सकती है।

https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/interstate-smuggler-with-a-reward-of-rs-169-lakh-arrested/article-58274

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