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MPeSeva ऐप से बदलेगा मध्यप्रदेश का डिजिटल प्रशासन, अब एक पोर्टल पर सभी सरकारी सेवाएं
Bhopal,MP
मध्यप्रदेश सरकार ने यूनिफाइड पोर्टल ऐप ‘MPeSeva’ के जरिए नागरिकों को सभी सरकारी सेवाएं एक जगह देने की पहल की है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कलेक्टर्स-कमिशनर्स कॉन्फ्रेंस में राजस्व विभाग को जनोन्मुखी और तकनीकी रूप से सशक्त बनाने के निर्देश दिए
मध्यप्रदेश सरकार ने प्रशासनिक सेवाओं को जनता के और अधिक करीब लाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। अब राज्य के नागरिकों को सरकारी सेवाएं अलग-अलग विभागों के चक्कर लगाने की बजाय एक ही प्लेटफॉर्म पर मिलेंगी — वह भी डिजिटल रूप से, केवल कुछ क्लिक में। इसके लिए सरकार ने "MPeSeva यूनिफाइड पोर्टल ऐप" लॉन्च किया है, जो सभी सरकारी सेवाओं का एकीकृत प्लेटफॉर्म है।
क्या है MPeSeva ऐप?
MPeSeva एक यूनिफाइड पोर्टल और मोबाइल ऐप है, जिसके ज़रिए नागरिकों को विभिन्न विभागों की सेवाएं डिजिटल रूप में उपलब्ध कराई जा रही हैं। इससे सरकारी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और गति दोनों बढ़ेगी।
अब तक इस ऐप में 45 विभागों और 84 विभागाध्यक्ष कार्यालयों को जोड़ा जा चुका है। 6.5 लाख से अधिक सरकारी कर्मचारियों के लिए एक वर्कफ्लो आधारित सिस्टम तैयार किया गया है, जिससे वे एक ही लॉगिन से विभिन्न विभागीय पोर्टल्स पर काम कर सकते हैं।
मुख्यमंत्री ने दिए निर्देश: राजस्व विभाग को बनाएं और जनोन्मुखी
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भोपाल में चल रही कलेक्टर्स-कमिशनर्स कॉन्फ्रेंस के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों से कहा कि,
"राजस्व विभाग को और अधिक जनोन्मुखी बनाया जाए ताकि शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों के नागरिकों को समय पर, सरल और पारदर्शी सेवाएं मिल सकें।"
उन्होंने सभी राजस्व प्रकरणों के समयबद्ध समाधान, भू-अर्जन योजनाओं की शीघ्र पूर्ति और भू-अभिलेखों के डिजिटलीकरण पर विशेष जोर दिया।
प्रमुख घोषणाएं और उपलब्धियां
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राज्य में अब तक 1 करोड़ से अधिक राजस्व प्रकरणों का निराकरण किया जा चुका है।
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डिजिटल क्रॉप सर्वे में मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य बना है जहां जीरो इंटरफेरेंस के साथ काम हो रहा है।
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लैंड एक्विजिशन मैनेजमेंट सिस्टम (LAMS) लागू किया गया है, जिससे भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया तेज और पारदर्शी हुई है।
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"स्वामित्व योजना" के अंतर्गत अब तक 39.63 लाख हितग्राहियों को निजी अधिकार अभिलेख मिल चुके हैं।
ई-केवाईसी और समग्र ID की स्थिति
अब तक राज्य में 2 करोड़ 16 लाख समग्र परिवार ID और 6 करोड़ 47 लाख ई-केवाईसी पूरी की जा चुकी हैं। इससे यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि सरकार की योजनाओं का सीधा लाभ पात्र नागरिकों तक पहुंचे।
"अविरल नर्मदा" और जनसहभागिता पर जोर
सत्र में अविरल नर्मदा अभियान, सीएम हेल्पलाइन, शाला विकास समिति, रोगी कल्याण समिति और CSR भागीदारी जैसे जनकल्याण कार्यक्रमों पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने इन योजनाओं को जनसहयोग और जवाबदेही के साथ क्रियान्वित करने के निर्देश दिए।
मिशन कर्मयोगी और प्रशिक्षण कार्यक्रम
"मिशन कर्मयोगी" के अंतर्गत शासन द्वारा कर्मचारियों को प्रशिक्षण देने के लिए विशेष सप्ताह आयोजित किया गया है। इसका उद्देश्य कर्मचारियों की दक्षता और नागरिक सेवा अनुभव को बेहतर बनाना है।
MPeSeva ऐप और डिजिटल प्रशासनिक सुधारों के ज़रिए मध्यप्रदेश सरकार एक नए डिजिटल युग की ओर कदम बढ़ा रही है। इससे न केवल सरकारी सेवाओं में पारदर्शिता आएगी, बल्कि नागरिकों को भी सुविधाएं तेज़ी से मिलेंगी। मुख्यमंत्री की इस पहल को "डिजिटल, पारदर्शी और जवाबदेह शासन" की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
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MPeSeva ऐप से बदलेगा मध्यप्रदेश का डिजिटल प्रशासन, अब एक पोर्टल पर सभी सरकारी सेवाएं
Bhopal,MP
मध्यप्रदेश सरकार ने प्रशासनिक सेवाओं को जनता के और अधिक करीब लाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। अब राज्य के नागरिकों को सरकारी सेवाएं अलग-अलग विभागों के चक्कर लगाने की बजाय एक ही प्लेटफॉर्म पर मिलेंगी — वह भी डिजिटल रूप से, केवल कुछ क्लिक में। इसके लिए सरकार ने "MPeSeva यूनिफाइड पोर्टल ऐप" लॉन्च किया है, जो सभी सरकारी सेवाओं का एकीकृत प्लेटफॉर्म है।
क्या है MPeSeva ऐप?
MPeSeva एक यूनिफाइड पोर्टल और मोबाइल ऐप है, जिसके ज़रिए नागरिकों को विभिन्न विभागों की सेवाएं डिजिटल रूप में उपलब्ध कराई जा रही हैं। इससे सरकारी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और गति दोनों बढ़ेगी।
अब तक इस ऐप में 45 विभागों और 84 विभागाध्यक्ष कार्यालयों को जोड़ा जा चुका है। 6.5 लाख से अधिक सरकारी कर्मचारियों के लिए एक वर्कफ्लो आधारित सिस्टम तैयार किया गया है, जिससे वे एक ही लॉगिन से विभिन्न विभागीय पोर्टल्स पर काम कर सकते हैं।
मुख्यमंत्री ने दिए निर्देश: राजस्व विभाग को बनाएं और जनोन्मुखी
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भोपाल में चल रही कलेक्टर्स-कमिशनर्स कॉन्फ्रेंस के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों से कहा कि,
"राजस्व विभाग को और अधिक जनोन्मुखी बनाया जाए ताकि शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों के नागरिकों को समय पर, सरल और पारदर्शी सेवाएं मिल सकें।"
उन्होंने सभी राजस्व प्रकरणों के समयबद्ध समाधान, भू-अर्जन योजनाओं की शीघ्र पूर्ति और भू-अभिलेखों के डिजिटलीकरण पर विशेष जोर दिया।
प्रमुख घोषणाएं और उपलब्धियां
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राज्य में अब तक 1 करोड़ से अधिक राजस्व प्रकरणों का निराकरण किया जा चुका है।
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डिजिटल क्रॉप सर्वे में मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य बना है जहां जीरो इंटरफेरेंस के साथ काम हो रहा है।
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लैंड एक्विजिशन मैनेजमेंट सिस्टम (LAMS) लागू किया गया है, जिससे भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया तेज और पारदर्शी हुई है।
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"स्वामित्व योजना" के अंतर्गत अब तक 39.63 लाख हितग्राहियों को निजी अधिकार अभिलेख मिल चुके हैं।
ई-केवाईसी और समग्र ID की स्थिति
अब तक राज्य में 2 करोड़ 16 लाख समग्र परिवार ID और 6 करोड़ 47 लाख ई-केवाईसी पूरी की जा चुकी हैं। इससे यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि सरकार की योजनाओं का सीधा लाभ पात्र नागरिकों तक पहुंचे।
"अविरल नर्मदा" और जनसहभागिता पर जोर
सत्र में अविरल नर्मदा अभियान, सीएम हेल्पलाइन, शाला विकास समिति, रोगी कल्याण समिति और CSR भागीदारी जैसे जनकल्याण कार्यक्रमों पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने इन योजनाओं को जनसहयोग और जवाबदेही के साथ क्रियान्वित करने के निर्देश दिए।
मिशन कर्मयोगी और प्रशिक्षण कार्यक्रम
"मिशन कर्मयोगी" के अंतर्गत शासन द्वारा कर्मचारियों को प्रशिक्षण देने के लिए विशेष सप्ताह आयोजित किया गया है। इसका उद्देश्य कर्मचारियों की दक्षता और नागरिक सेवा अनुभव को बेहतर बनाना है।
MPeSeva ऐप और डिजिटल प्रशासनिक सुधारों के ज़रिए मध्यप्रदेश सरकार एक नए डिजिटल युग की ओर कदम बढ़ा रही है। इससे न केवल सरकारी सेवाओं में पारदर्शिता आएगी, बल्कि नागरिकों को भी सुविधाएं तेज़ी से मिलेंगी। मुख्यमंत्री की इस पहल को "डिजिटल, पारदर्शी और जवाबदेह शासन" की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
