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MP गेहूं उपार्जन 2026: मंडियों में किसानों को हर सुविधा देने के सख्त निर्देश
भोपाल (म.प्र.)
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने समीक्षा बैठक में दिए निर्देश; उपार्जन केंद्रों पर पानी, छाया, तौल और भुगतान व्यवस्था सुनिश्चित करने पर जोर
मध्य प्रदेश में गेहूं उपार्जन प्रक्रिया को सुचारु और किसान अनुकूल बनाने के लिए राज्य सरकार ने सख्त निर्देश जारी किए हैं। मुख्यमंत्री Mohan Yadav ने स्पष्ट किया है कि मंडियों में उपज बेचने आने वाले किसानों को किसी प्रकार की असुविधा नहीं होनी चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी उपार्जन केंद्रों पर मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं और खरीदी प्रक्रिया पारदर्शी ढंग से संचालित हो।
क्या है सरकार का निर्देश
मुख्यमंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए आयोजित समीक्षा बैठक में जिला कलेक्टरों से कहा कि उपार्जन केंद्रों पर तौल कांटे, हम्माल, छाया और पीने के पानी जैसी आवश्यक व्यवस्थाएं अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराई जाएं। साथ ही गेहूं खरीदी, परिवहन, भंडारण और किसानों के भुगतान की प्रतिदिन निगरानी की जाए।
यह बैठक मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन से आयोजित की गई, जिसमें प्रदेशभर के कलेक्टर और वरिष्ठ अधिकारी जुड़े। बैठक में गेहूं, चना और मसूर की खरीदी व्यवस्था की विस्तृत समीक्षा की गई।
कैसे बढ़ेगी खरीदी क्षमता
सरकार ने उपार्जन केंद्रों की क्षमता 1000 क्विंटल प्रतिदिन से बढ़ाकर 2250 क्विंटल कर दी है। साथ ही, स्लॉट बुकिंग की अंतिम तारीख 30 अप्रैल से बढ़ाकर 9 मई कर दी गई है। अब छोटे, सीमांत, मध्यम और बड़े सभी वर्गों के किसान स्लॉट बुक कर अपनी उपज बेच सकेंगे।
किसानों को क्या मिलेगा लाभ
प्रदेश में वर्तमान में 3516 उपार्जन केंद्र संचालित हैं। अब तक 8.55 लाख किसानों ने स्लॉट बुकिंग कराई है, जिनमें से करीब 3.96 लाख किसानों से 16.60 लाख मीट्रिक टन गेहूं की खरीदी की जा चुकी है। इसके एवज में 2527 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है। किसानों को यह सुविधा भी दी गई है कि वे अपने जिले के किसी भी उपार्जन केंद्र पर उपज बेच सकते हैं।
अन्य फैसले और व्यवस्थाएं
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि प्रत्येक केंद्र पर कम से कम 6 इलेक्ट्रॉनिक तौल कांटे उपलब्ध हों और सात दिन की खरीदी के लिए पर्याप्त बारदान (बोरी) उपलब्ध रखा जाए। चना और मसूर की खरीदी मंडी के शेड के अंदर करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि असमय बारिश से नुकसान न हो।
इसके अलावा, केंद्र सरकार द्वारा गेहूं की गुणवत्ता मानकों में कुछ राहत दी गई है। चमक विहीन गेहूं की सीमा में 50% तक छूट और अल्प विकसित दानों की सीमा 6% से बढ़ाकर 10% कर दी गई है।
क्यों अहम है यह पहल
इन कदमों से किसानों को अपनी उपज बेचने में सुविधा होगी और भुगतान में पारदर्शिता आएगी। इससे मंडियों में भीड़ प्रबंधन बेहतर होगा और किसानों का समय बचेगा।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि खरीदी प्रक्रिया के दौरान किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कलेक्टरों को नियमित समीक्षा और फील्ड विजिट के निर्देश दिए गए हैं, ताकि किसानों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।
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भोपाल (म.प्र.)
मध्य प्रदेश में गेहूं उपार्जन प्रक्रिया को सुचारु और किसान अनुकूल बनाने के लिए राज्य सरकार ने सख्त निर्देश जारी किए हैं। मुख्यमंत्री Mohan Yadav ने स्पष्ट किया है कि मंडियों में उपज बेचने आने वाले किसानों को किसी प्रकार की असुविधा नहीं होनी चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी उपार्जन केंद्रों पर मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं और खरीदी प्रक्रिया पारदर्शी ढंग से संचालित हो।
क्या है सरकार का निर्देश
मुख्यमंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए आयोजित समीक्षा बैठक में जिला कलेक्टरों से कहा कि उपार्जन केंद्रों पर तौल कांटे, हम्माल, छाया और पीने के पानी जैसी आवश्यक व्यवस्थाएं अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराई जाएं। साथ ही गेहूं खरीदी, परिवहन, भंडारण और किसानों के भुगतान की प्रतिदिन निगरानी की जाए।
यह बैठक मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन से आयोजित की गई, जिसमें प्रदेशभर के कलेक्टर और वरिष्ठ अधिकारी जुड़े। बैठक में गेहूं, चना और मसूर की खरीदी व्यवस्था की विस्तृत समीक्षा की गई।
कैसे बढ़ेगी खरीदी क्षमता
सरकार ने उपार्जन केंद्रों की क्षमता 1000 क्विंटल प्रतिदिन से बढ़ाकर 2250 क्विंटल कर दी है। साथ ही, स्लॉट बुकिंग की अंतिम तारीख 30 अप्रैल से बढ़ाकर 9 मई कर दी गई है। अब छोटे, सीमांत, मध्यम और बड़े सभी वर्गों के किसान स्लॉट बुक कर अपनी उपज बेच सकेंगे।
किसानों को क्या मिलेगा लाभ
प्रदेश में वर्तमान में 3516 उपार्जन केंद्र संचालित हैं। अब तक 8.55 लाख किसानों ने स्लॉट बुकिंग कराई है, जिनमें से करीब 3.96 लाख किसानों से 16.60 लाख मीट्रिक टन गेहूं की खरीदी की जा चुकी है। इसके एवज में 2527 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है। किसानों को यह सुविधा भी दी गई है कि वे अपने जिले के किसी भी उपार्जन केंद्र पर उपज बेच सकते हैं।
अन्य फैसले और व्यवस्थाएं
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि प्रत्येक केंद्र पर कम से कम 6 इलेक्ट्रॉनिक तौल कांटे उपलब्ध हों और सात दिन की खरीदी के लिए पर्याप्त बारदान (बोरी) उपलब्ध रखा जाए। चना और मसूर की खरीदी मंडी के शेड के अंदर करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि असमय बारिश से नुकसान न हो।
इसके अलावा, केंद्र सरकार द्वारा गेहूं की गुणवत्ता मानकों में कुछ राहत दी गई है। चमक विहीन गेहूं की सीमा में 50% तक छूट और अल्प विकसित दानों की सीमा 6% से बढ़ाकर 10% कर दी गई है।
क्यों अहम है यह पहल
इन कदमों से किसानों को अपनी उपज बेचने में सुविधा होगी और भुगतान में पारदर्शिता आएगी। इससे मंडियों में भीड़ प्रबंधन बेहतर होगा और किसानों का समय बचेगा।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि खरीदी प्रक्रिया के दौरान किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कलेक्टरों को नियमित समीक्षा और फील्ड विजिट के निर्देश दिए गए हैं, ताकि किसानों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।
