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रामकृष्ण मिशन डिजिटल अरेस्ट केस: 2.53 करोड़ की ठगी पर कोर्ट में जांच रिपोर्ट पेश, पुलिस कार्रवाई पर सवाल
ग्वालियर (म.प्र.)
साइबर फ्रॉड नेटवर्क की परतें खुलीं, 22 आरोपी गिरफ्तार, सैकड़ों खातों में घुमाई गई रकम
ग्वालियर में रामकृष्ण मिशन आश्रम के तत्कालीन सचिव स्वामी सुप्रदिप्तानंद के साथ हुए बहुचर्चित डिजिटल अरेस्ट साइबर फ्रॉड मामले में पुलिस ने विशेष न्यायालय में अब तक की जांच की स्टेटस रिपोर्ट पेश कर दी है। इस रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि आरोपियों ने संस्था के तीन बैंक खातों से कुल 2.53 करोड़ रुपए की ठगी की थी, जिसे कई चरणों में देशभर के सैकड़ों खातों में ट्रांसफर किया गया।
कब और कैसे हुई ठगी
पुलिस के अनुसार 17 मार्च से 11 अप्रैल के बीच इस साइबर फ्रॉड को अंजाम दिया गया। आरोपियों ने खुद को कानून प्रवर्तन एजेंसियों का अधिकारी बताकर स्वामी सुप्रदिप्तानंद को “डिजिटल अरेस्ट” में होने का भय दिखाया। मनी लॉन्ड्रिंग केस में नाम फंसने का डर दिखाकर उनसे संस्था के बैंक खातों की जानकारी हासिल की गई।
कैसे फैलाई गई ठगी की रकम
क्राइम ब्रांच की जांच में सामने आया है कि रामकृष्ण मिशन के तीन खातों से निकली रकम पहले 10 बैंक अकाउंट्स में भेजी गई। इसके बाद इन खातों से पैसा 532 अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर किया गया। पुलिस के मुताबिक, इन खातों के जरिए एजेंटों ने एटीएम, चेक और कैश विंडो का इस्तेमाल कर राशि निकाली। हालांकि त्वरित कार्रवाई करते हुए पुलिस ने 178 खातों में भेजे गए करीब 9.7 लाख रुपए समय रहते फ्रीज करा लिए।
अब तक की पुलिस कार्रवाई
इस मामले में पुलिस अब तक 22 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। इनमें बैंकिंग सिस्टम से जुड़े कर्मचारी भी शामिल बताए गए हैं, जिनमें असिस्टेंट मैनेजर और कैशियर स्तर तक के लोग हैं। हाल ही में हरदा जिले से अखिलेश बिशनाई नामक युवक को पकड़ा गया, जिसने अपनी मां के नाम पर खाता खुलवाकर उसमें ठगी की रकम डलवाई थी। पुलिस अभी एक बड़े खाते के धारक मोहम्मद नदीम की तलाश में जुटी है।
कोर्ट की सख्ती और नाराजगी
विशेष न्यायालय ने ठगी की बड़ी राशि अब तक जब्त न होने पर नाराजगी जताई है। कोर्ट ने स्टेटस रिपोर्ट के साथ क्राइम ब्रांच के डीएसपी को तलब किया था। पुलिस ने चालान पेश कर धारा 27 के तहत जांच लंबित रखने की जानकारी दी, लेकिन जांच में हुई नई प्रगति पर कोर्ट ने स्पष्टीकरण मांगा है।
पूरा मामला संक्षेप में
आरोपियों ने फर्जी कॉल और दस्तावेजों के जरिए सुप्रदिप्तानंद को यह विश्वास दिलाया कि उनके आधार कार्ड से जुड़े एक खाते में करोड़ों का संदिग्ध लेन-देन हुआ है। जांच के नाम पर आश्रम के फंड को “सुरक्षित” करने की बात कहकर 2.53 करोड़ रुपए अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करवा लिए गए। ठगी का अहसास होने पर मामला क्राइम ब्रांच तक पहुंचा।
पुलिस का कहना है कि शेष आरोपियों और रकम की रिकवरी के लिए जांच जारी है। यह मामला साइबर अपराधों के बढ़ते खतरे और डिजिटल अरेस्ट जैसे नए तरीकों को लेकर गंभीर चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है।
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रामकृष्ण मिशन डिजिटल अरेस्ट केस: 2.53 करोड़ की ठगी पर कोर्ट में जांच रिपोर्ट पेश, पुलिस कार्रवाई पर सवाल
ग्वालियर (म.प्र.)
ग्वालियर में रामकृष्ण मिशन आश्रम के तत्कालीन सचिव स्वामी सुप्रदिप्तानंद के साथ हुए बहुचर्चित डिजिटल अरेस्ट साइबर फ्रॉड मामले में पुलिस ने विशेष न्यायालय में अब तक की जांच की स्टेटस रिपोर्ट पेश कर दी है। इस रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि आरोपियों ने संस्था के तीन बैंक खातों से कुल 2.53 करोड़ रुपए की ठगी की थी, जिसे कई चरणों में देशभर के सैकड़ों खातों में ट्रांसफर किया गया।
कब और कैसे हुई ठगी
पुलिस के अनुसार 17 मार्च से 11 अप्रैल के बीच इस साइबर फ्रॉड को अंजाम दिया गया। आरोपियों ने खुद को कानून प्रवर्तन एजेंसियों का अधिकारी बताकर स्वामी सुप्रदिप्तानंद को “डिजिटल अरेस्ट” में होने का भय दिखाया। मनी लॉन्ड्रिंग केस में नाम फंसने का डर दिखाकर उनसे संस्था के बैंक खातों की जानकारी हासिल की गई।
कैसे फैलाई गई ठगी की रकम
क्राइम ब्रांच की जांच में सामने आया है कि रामकृष्ण मिशन के तीन खातों से निकली रकम पहले 10 बैंक अकाउंट्स में भेजी गई। इसके बाद इन खातों से पैसा 532 अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर किया गया। पुलिस के मुताबिक, इन खातों के जरिए एजेंटों ने एटीएम, चेक और कैश विंडो का इस्तेमाल कर राशि निकाली। हालांकि त्वरित कार्रवाई करते हुए पुलिस ने 178 खातों में भेजे गए करीब 9.7 लाख रुपए समय रहते फ्रीज करा लिए।
अब तक की पुलिस कार्रवाई
इस मामले में पुलिस अब तक 22 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। इनमें बैंकिंग सिस्टम से जुड़े कर्मचारी भी शामिल बताए गए हैं, जिनमें असिस्टेंट मैनेजर और कैशियर स्तर तक के लोग हैं। हाल ही में हरदा जिले से अखिलेश बिशनाई नामक युवक को पकड़ा गया, जिसने अपनी मां के नाम पर खाता खुलवाकर उसमें ठगी की रकम डलवाई थी। पुलिस अभी एक बड़े खाते के धारक मोहम्मद नदीम की तलाश में जुटी है।
कोर्ट की सख्ती और नाराजगी
विशेष न्यायालय ने ठगी की बड़ी राशि अब तक जब्त न होने पर नाराजगी जताई है। कोर्ट ने स्टेटस रिपोर्ट के साथ क्राइम ब्रांच के डीएसपी को तलब किया था। पुलिस ने चालान पेश कर धारा 27 के तहत जांच लंबित रखने की जानकारी दी, लेकिन जांच में हुई नई प्रगति पर कोर्ट ने स्पष्टीकरण मांगा है।
पूरा मामला संक्षेप में
आरोपियों ने फर्जी कॉल और दस्तावेजों के जरिए सुप्रदिप्तानंद को यह विश्वास दिलाया कि उनके आधार कार्ड से जुड़े एक खाते में करोड़ों का संदिग्ध लेन-देन हुआ है। जांच के नाम पर आश्रम के फंड को “सुरक्षित” करने की बात कहकर 2.53 करोड़ रुपए अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करवा लिए गए। ठगी का अहसास होने पर मामला क्राइम ब्रांच तक पहुंचा।
पुलिस का कहना है कि शेष आरोपियों और रकम की रिकवरी के लिए जांच जारी है। यह मामला साइबर अपराधों के बढ़ते खतरे और डिजिटल अरेस्ट जैसे नए तरीकों को लेकर गंभीर चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है।
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