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इंदौर में ‘संकल्प से समाधान’ जनता चौपाल शुरू, महापौर हर सप्ताह सुनेंगे समस्याएं
इंदौर (म.प्र.)
दो वार्डों में साप्ताहिक आयोजन, तीन घंटे में मौके पर समाधान का लक्ष्य; निगम के 12 विभागों के अधिकारी रहेंगे मौजूद
शहर में नागरिक समस्याओं के त्वरित निवारण के लिए महापौर पुष्यमित्र भार्गव ‘संकल्प से समाधान जनता चौपाल’ की शुरुआत कर रहे हैं। यह पहल सप्ताह में दो दिन अलग-अलग वार्डों में आयोजित होगी, जहां महापौर स्वयं अधिकारियों के साथ उपस्थित रहकर शिकायतें सुनेंगे और स्थानीय स्तर पर समाधान सुनिश्चित करेंगे। कार्यक्रम की शुरुआत दीनदयाल उपाध्याय की पुण्यतिथि से की जा रही है।
नगर निगम के अनुसार चौपाल का आयोजन सुबह 8 बजे से होगा और लगभग तीन घंटे तक चलेगा। महापौर के साथ स्थानीय पार्षद, जोन अध्यक्ष, एमआईसी सदस्य और नगर निगम के 12 विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहेंगे। कार्यक्रम की शुरुआत क्षेत्र के प्रमुख स्थलों के निरीक्षण से होगी, इसके बाद जनसंवाद और औपचारिक जनसुनवाई के माध्यम से शिकायतों का पंजीकरण किया जाएगा। संबंधित विभाग मौके पर ही निर्देश जारी करेंगे या तत्काल समाधान का प्रयास करेंगे।
यह पहल प्रदेश सरकार द्वारा संचालित ‘संकल्प से समाधान’ शिविरों की अवधारणा को शहरी स्तर पर आगे बढ़ाने के रूप में देखी जा रही है। प्रशासन का तर्क है कि नागरिकों को अब बुनियादी सुविधाओं, स्वच्छता, जल आपूर्ति, सड़क मरम्मत और अन्य नगर सेवाओं से जुड़ी शिकायतों के लिए कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे, क्योंकि अधिकारी सीधे वार्डों में पहुंचेंगे।
महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा कि समस्याओं को समझने का सबसे प्रभावी तरीका नागरिकों के बीच जाकर संवाद करना है। उन्होंने दीनदयाल उपाध्याय के “अंतिम व्यक्ति के उदय” के सिद्धांत का उल्लेख करते हुए कहा कि लक्ष्य हर वार्ड में समयबद्ध और स्थल पर समाधान सुनिश्चित करना है। बुधवार को महापौर वार्ड 74, जोन 13 में कार्यक्रम की शुरुआत करेंगे। वे मां अहिल्या उद्यान, विष्णुपुरी और पिपल्यापाला क्षेत्र का दौरा कर नागरिकों से संवाद करेंगे।
शहरी प्रशासन विशेषज्ञों के अनुसार, वार्ड स्तर पर जवाबदेही बढ़ाने और विभागीय समन्वय मजबूत करने में इस प्रकार की पहल उपयोगी हो सकती है। हालांकि, स्थायी प्रभाव के लिए प्राप्त शिकायतों की निगरानी और समयबद्ध अनुपालन आवश्यक होगा। यदि निर्देशों का क्रियान्वयन तय समय में होता है, तो यह मॉडल अन्य नगर निकायों के लिए भी उदाहरण बन सकता है।
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