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पुत्र-हंता होलिका: इंदौर में आज जलेगी सूचना सेठ और 10 आरोपी माताओं के चेहरों वाली होली, बढ़ा विवाद
Digital Desk
इंदौर की संस्था पौरुष आज शाम 4 बजे 'पुत्र-हंता होलिका' का दहन करेगी, जिसमें सूचना सेठ समेत 11 महिलाओं के चेहरे होंगे। जानिए क्या है पूरा मामला और क्यों हो रहा है विरोध।
इंदौर में 'पुत्र-हंता होलिका' आज: सूचना सेठ समेत 11 आरोपी माताओं के चेहरे वाले पुतले का दहन, हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद आयोजन जारी
मध्य प्रदेश के इंदौर में आज यानी 2 मार्च को होलिका दहन के मौके पर एक विवादित आयोजन होने जा रहा है, जिसने पूरे देश का ध्यान खींचा है। यहां पुरुष अधिकारों के लिए काम करने वाली संस्था 'पौरुष' द्वारा 'पुत्र-हंता होलिका' का दहन किया जाएगा, जिसमें बेंगलुरु की AI सीईओ सूचना सेठ समेत देश भर की 11 उन महिलाओं के चेहरे लगे हैं, जिन पर अपने ही मासूम बच्चों की हत्या के जघन्य आरोप हैं ।
यह आयोजन महालक्ष्मी नगर मेला ग्राउंड के सामने शाम 4 बजे किया जाएगा। संस्था का दावा है कि यह 'मॉडर्न हत्यारी होलिका दहन' समाज को एक कड़ा संदेश देने और बच्चों के खिलाफ बढ़ते अपराधों के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए किया जा रहा है । हालांकि, यह घटना अपनी संवेदनशील थीम और कानूनी प्रक्रिया पर उठ रहे सवालों के चलते चर्चा में है।
क्या है 'पुत्र-हंता होलिका' का कॉन्सेप्ट?
संस्था के अध्यक्ष एडवोकेट अशोक दशोरा ने बताया कि यह थीम पौराणिक कथा पर आधारित है, लेकिन इसमें बदलाव किया गया है। पौराणिक कथा में राक्षस राजा हिरण्यकश्यप ने अपने भक्त पुत्र प्रह्लाद को मारने के लिए अपनी बहन होलिका को आग में बैठाया था, जो जलकर खाक हो गई। इस परंपरागत प्रतीक को आधुनिक संदर्भ देते हुए, 'पुत्र-हंता होलिका' में होलिका के चेहरे की जगह उन महिला आरोपियों के चेहरे होंगे जिन पर अपने बच्चों की हत्या का आरोप है ।
किन महिलाओं के चेहरे होंगे शामिल?
संस्था के अनुसार, इस होलिका में देश भर से चुनी गईं 11 महिला आरोपियों के चेहरे होंगे। इसमें सबसे केंद्र में बेंगलुरु की सूचना सेठ का चेहरा होगा, जिसके आसपास अन्य दस महिलाओं के चेहरे होंगे ।
- सूचना सेठ (बेंगलुरु/गोवा): बेंगलुरु की AI स्टार्टअप सीईओ सूचना सेठ पर अपने 4 वर्षीय बेटे की हत्या का आरोप है। आरोप है कि उसने जनवरी 2024 में गोवा का एक होटल में अपने बेटे की हत्या कर दी और शव के टुकड़े कर एक सूटकेस में भर दिए थे ।
- अन्य आरोपी महिलाएं: इनके अलावा उत्तर प्रदेश की सीमा, मुस्कान, प्रियंका और दुर्गावती, तमिलनाडु की भारती व शरण्य, राजस्थान की संजू, ग्वालियर की ज्योति राठौर, हरियाणा की पूनम और गुजरात की सुनीता शर्मा के नाम शामिल हैं ।
संस्था 'पौरुष' का तर्क: सामाजिक जागृति या सनसनीखेज?
15 वर्षों से इंदौर में सक्रिय संस्था पौरुष का दावा है कि वह झूठे दहेज केस, घरेलू हिंसा, भरण-पोषण और बाल हिरासत जैसे मामलों में फंसे परिवारों की मदद करती है । संस्था के सदस्य मिलिंद अग्रवाल के अनुसार, "समाज में फैली गंदी सोच को उजागर करने और परिवारों को तबाही से बचाने के लिए यह आयोजन किया जा रहा है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि कानून में बच्चों को पिता से मिलने के लिए महीने में सिर्फ तीन घंटे की सुविधा देना अन्याय है ।"
कानूनी बहस और हाईकोर्ट का पूर्व आदेश
यह पहली बार नहीं है जब संस्था इस तरह का विवादित आयोजन कर रही है। इससे पहले दशहरा पर संस्था ने सोनम रघुवंशी नाम की एक महिला का पुतला दहन करने की योजना बनाई थी, जिस पर उसकी मां संगीता रघुवंशी ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में याचिका दायर कर रोक लगाने की मांग की थी। हाईकोर्ट ने उस आयोजन पर रोक लगाते हुए कहा था कि "ऐसा कृत्य लोकतांत्रिक रूप से पूरी तरह से अस्वीकार्य है" और जब तक अदालत में किसी का दोष सिद्ध नहीं हो जाता, तब तक ऐसी कार्रवाई नहीं की जा सकती ।
इस बार के आयोजन को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि 'पुत्र-हंता होलिका' में शामिल अधिकांश महिलाओं पर मुकदमे अभी लंबित हैं और अदालत ने उन्हें दोषी नहीं ठहराया है। हालांकि, संस्था के पदाधिकारियों का कहना है कि दो महिलाओं को निचली अदालत से फांसी की सजा हो चुकी है ।
जहां एक ओर इंदौर में होलिका दहन की तैयारियां जोरों पर हैं, वहीं 'पुत्र-हंता होलिका' का यह आयोजन बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीकात्मक पर्व को एक नया और विवादित मोड़ दे रहा है। संस्था का कहना है कि यह आयोजन बच्चों के खिलाफ अपराध और महिला कानूनों के दुरुपयोग पर बहस छेड़ने के लिए है, लेकिन यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या यह कदम न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान करते हुए सामाजिक संदेश देने में सफल होता है या फिर यह एक नई कानूनी उलझन को जन्म देता है। फिलहाल, 2 मार्च की शाम इंदौर के महालक्ष्मी नगर मेला ग्राउंड पर सबकी निगाहें टिकी होंगी।

